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  "title": "अंबाला के सिरसगढ़ गांव में लेफ्टिनेंट बनकर लौटीं सिमरनजीत कौर, ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ जोरदार स्वागत",
  "summary": "एनडीए से प्रशिक्षण पूरा कर लेफ्टिनेंट बनीं सिरसगढ़ गांव की सिमरनजीत कौर चहल जब पहली बार गांव पहुंचीं तो ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया, परिवार में दादा से लेकर भाई तक चार सदस्य सेना से जुड़े हैं।",
  "content": "अंबाला जिले के सिरसगढ़ गांव में इन दिनों उत्सव जैसा नजारा है। वजह है गांव की बेटी सिमरनजीत कौर चहल का एनडीए से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लेफ्टिनेंट बनकर पहली बार घर लौटना। जिस रास्ते से उन्हें गांव में लाया जाना था, वहां ग्रामीण करीब एक किलोमीटर पहले से ही वाहन लेकर पहुंच गए और ढोल-नगाड़ों की थाप पर उनका स्वागत किया। जब यह जुलूस घर तक पहुंचा तो परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे और घर में एक भव्य आयोजन रखा गया था।\n\nदादा से भाई तक, अब बेटी ने संभाली विरासत\nसिमरनजीत के लिए वर्दी पहनना किसी नई शुरुआत जैसा नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाने जैसा है। उनके दादा गनर गुरदयाल सिंह ने 13 फील्ड रेजिमेंट में देश की सेवा की थी। इसके बाद पिता कैप्टन अरविंदर सिंह ने 193 मेड रेजिमेंट में सेवाएं दीं और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। परिवार की सैन्य परंपरा यहीं नहीं थमी, सिमरनजीत के भाई अंशदीप सिंह फिलहाल 18 सिख रेजिमेंट में तैनात हैं। अब सिमरनजीत के लेफ्टिनेंट बनने के साथ एक ही परिवार से चार सदस्यों, दादा, पिता, भाई और बेटी, का सेना से जुड़ना एक दुर्लभ मिसाल बन गया है। मां सुखविंदर कौर पहले शिक्षिका रह चुकी हैं और उन्होंने ही परिवार को हमेशा संभाले रखा।\n\nतकनीकी डिग्रियों के बाद चुना वर्दी का रास्ता\nसिमरनजीत की शुरुआती पढ़ाई बराड़ा के एंजल पब्लिक स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने अंबाला छावनी स्थित एसडी कॉलेज से बीसीए की डिग्री ली और फिर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमसीए पूरा किया। यानी सेना में जाने से पहले उन्होंने पूरी तरह तकनीकी शिक्षा हासिल की। इतनी पढ़ाई के बाद भी उनका मन एनडीए की तरफ ही झुका रहा और आखिरकार प्रशिक्षण पूरा होने के साथ बरसों पुराना सपना हकीकत बन गया।\n\nभाई को वर्दी में देख बढ़ा हौसला\nलोकल 18 से बातचीत में लेफ्टिनेंट सिमरनजीत कौर ने बताया कि बचपन से ही दादा और पिता को सेना की वर्दी में देखकर उनके मन में भारतीय सेना में जाने की चाहत पैदा हुई थी। कॉलेज के दिनों में वह एनसीसी से भी सक्रिय रूप से जुड़ी रहीं। उन्होंने बताया कि उनसे करीब तीन साल छोटा उनका भाई उनसे पहले ही सेना में भर्ती हो गया था, और भाई को वर्दी में देखकर उनका हौसला और मजबूत हुआ। उन्हें लगा कि जब भाई यह कर सकता है तो वह भी देश की सेवा के इस रास्ते पर आगे बढ़ सकती हैं।\n\nपिता बोले, बेटी की उपलब्धि की खुशी शादी से भी बड़ी\nपिता कैप्टन अरविंदर सिंह ने बताया कि जिस दिन बेटी लेफ्टिनेंट बनी, उसी दिन से घर में खुशियों का माहौल है और आज पूरे गांव के जुटने से यह खुशी और बढ़ गई। उन्होंने कहा, \"घर का माहौल आज ऐसा है जैसे यहां शादी हो रही हो, बल्कि इससे भी बड़ी खुशी है।\" उन्होंने यह भी कहा कि परिवार में शुरू से ही देशभक्ति की भावना गहरी रही है, वे खुद सेना में सेवा दे चुके हैं, बेटा फिलहाल सेवा दे रहा है और अब बेटी ने भी वही राह चुनी है।\n\nयुवाओं के लिए बड़े सपने देखने का संदेश\nअपनी उपलब्धि के बाद युवाओं को संदेश देते हुए सिमरनजीत कौर ने कहा कि हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए और खुद पर भरोसा रखना चाहिए। उनका मानना है कि अगर किसी व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और मेहनत करने का जज्बा है तो वह अपनी मंजिल जरूर हासिल कर सकता है। सिमरनजीत का लेफ्टिनेंट बनना अब उनके परिवार की सैन्य परंपरा की अगली और नई कड़ी बन चुका है, जिसे गांव वाले भी उतने ही गर्व से देख रहे हैं जितना खुद उनका परिवार।\n\nइसका आप पर असर\nयह कहानी खासतौर पर उन युवाओं और परिवारों के लिए मायने रखती है जो सेना में करियर बनाने का सपना देखते हैं।\n\n• भारत में: यह उदाहरण दिखाता है कि तकनीकी शिक्षा (बीसीए, एमसीए) लेने के बाद भी एनडीए के जरिए सेना में अधिकारी बनने का रास्ता खुला है। इच्छुक युवा, खासकर बेटियां, परिवार की प्रेरणा और एनसीसी जैसी गतिविधियों से इस दिशा में तैयारी शुरू कर सकते हैं।\n• अंबाला में: सिरसगढ़ गांव और आसपास के इलाकों में इस स्वागत के बाद स्थानीय युवाओं में सेना जॉइन करने को लेकर उत्साह बढ़ सकता है। गांव में सैन्य परिवारों को मिलने वाला सम्मान और सामाजिक समर्थन आने वाले समय में और मजबूत होता दिख सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सिमरनजीत कौर चहल कौन हैं?\nवे अंबाला के सिरसगढ़ गांव की रहने वाली हैं, जिन्होंने एनडीए से प्रशिक्षण पूरा कर लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है।\n\n2. उनके दादा और पिता किस रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं?\nदादा गनर गुरदयाल सिंह 13 फील्ड रेजिमेंट में और पिता कैप्टन अरविंदर सिंह 193 मेड रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं।\n\n3. उनके भाई फिलहाल कहां तैनात हैं?\nउनके भाई अंशदीप सिंह वर्तमान में 18 सिख रेजिमेंट में सेवाएं दे रहे हैं।\n\n4. सिमरनजीत ने अपनी पढ़ाई कहां से पूरी की?\nउन्होंने बराड़ा के एंजल पब्लिक स्कूल से प्राथमिक शिक्षा, अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से बीसीए और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमसीए किया।\n\n5. गांव वालों ने उनका स्वागत कैसे किया?\nग्रामीण करीब एक किलोमीटर पहले से वाहन लेकर पहुंचे और ढोल-नगाड़ों के साथ उन्हें गांव लेकर आए, घर पर भी भव्य कार्यक्रम रखा गया।\n\n6. सिमरनजीत को सेना में जाने की प्रेरणा कहां से मिली?\nबचपन से दादा और पिता को वर्दी में देखने और भाई के उनसे पहले सेना में भर्ती होने से उन्हें प्रेरणा मिली।\n\n7. उन्होंने युवाओं को क्या संदेश दिया?\nउन्होंने कहा कि बड़े सपने देखने चाहिए और आत्मविश्वास व मेहनत से कोई भी अपनी मंजिल हासिल कर सकता है।\n\nप्रेरणा और सबक\nसिमरनजीत कौर चहल की कहानी से कई सीख मिलती हैं जो हर पढ़ने वाले पर लागू हो सकती हैं।\n\n• परिवार की मिसाल अपनाएं: दादा और पिता को वर्दी में देखकर उनके मन में जो सपना जगा, उसे उन्होंने ठोस लक्ष्य में बदला।\n• भाई-बहन एक-दूसरे को आगे बढ़ा सकते हैं: छोटे भाई की सेना में भर्ती ने उन्हें और प्रेरित किया, यह दिखाता है कि परिवार में एक की सफलता दूसरे के हौसले का जरिया बन सकती है।\n• तकनीकी पढ़ाई और वर्दी साथ चल सकती हैं: बीसीए और एमसीए जैसी डिग्रियों के बावजूद उन्होंने सेना का रास्ता नहीं छोड़ा, जो दिखाता है कि सपने और पढ़ाई में टकराव जरूरी नहीं।\n• आत्मविश्वास और मेहनत जरूरी है: युवाओं को दिए संदेश में उन्होंने खुद पर भरोसा और मेहनत को सफलता की कुंजी बताया।",
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  "publishedAt": "2026-09-07",
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