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  "type": "article",
  "title": "अंबाला में मौसम का मिज़ाज बदलते ही वायरल बुखार की चपेट में आए बच्चे, नागरिक अस्पताल में लंबी कतारें",
  "summary": "अंबाला में दिन की तेज धूप और सुबह-शाम की ठंडक के कारण वायरल संक्रमण के मामलों में भारी उछाल आया है। बाल रोग ओपीडी में रोजाना सैकड़ों बच्चे पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग ने विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।",
  "content": "अंबाला में मौसम के मिज़ाज ने अचानक करवट ले ली है, जिसके साथ ही शहर में वायरल संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिन के समय चुभती हुई गर्मी और सुबह तथा शाम के वक्त महसूस होने वाली ठंडक के इस दौर ने बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाला है। तापमान में हो रहे इस उतार-चढ़ाव की वजह से बच्चे खांसी, जुकाम, गले में तेज दर्द और गंभीर बुखार की चपेट में आ रहे हैं। इस बदलते मौसम का सीधा असर स्थानीय नागरिक अस्पताल से लेकर तमाम निजी क्लीनिकों की ओपीडी पर साफतौर पर देखा जा सकता है, जहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।\n\nनागरिक अस्पताल में उमड़ी भीड़ और मुख्य लक्षण\nअंबाला शहर के नागरिक अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में हर रोज 100 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से लगभग 60 बच्चे सीधे तौर पर तेज वायरल बुखार से जूझ रहे हैं, जबकि अन्य बच्चों में लगातार खांसी, जुकाम, गले का संक्रमण और दस्त जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। अस्पताल में तैनात होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता के अनुसार, बच्चों में अचानक तेज बुखार होना, शरीर में लगातार दर्द बना रहना, बार-बार छींक आना, नाक बहना, गले में खराश और खाना निगलने में तकलीफ होना वायरल संक्रमण के प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा बच्चों का सुस्त पड़ जाना, जरूरत से ज्यादा चिड़चिड़ा होना, दूध या भोजन से दूरी बनाना, बार-बार उल्टी होना और पेट खराब होने जैसी परेशानियां भी सामने आ रही हैं। यदि कोई बच्चा अत्यधिक सुस्त दिखे, उसे सांस लेने में कठिनाई हो या शरीर में पानी की कमी के लक्षण नजर आएं, तो बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि बदलते मौसम की वजह से बुजुर्गों में भी खांसी, जुकाम और बुखार के साथ-साथ जोड़ों के दर्द की शिकायतें काफी बढ़ गई हैं।\n\nविशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय\nबदलते मौसम के इस दौर में बच्चों और बुजुर्गों की सेहत का खास ख्याल रखने की आवश्यकता है। चिकित्सकों का सुझाव है कि सर्दियों के कपड़े और गद्दों को दोबारा इस्तेमाल में लाने से पहले उन्हें धूप में अच्छी तरह सूखा लेना चाहिए। इसके अलावा बच्चों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में ले जाने से बचना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाते रहना ताकि शरीर में नमी बनी रहे। खानपान के मामले में पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है, जिसमें बाहर मिलने वाले खुले और अनहेल्दी भोजन से तौबा करना और केवल घर का बना ताजा खाना ही खाना शामिल है। अपने दैनिक आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों, ताजे फलों और सलाद को जरूर शामिल करें। सुबह और शाम के समय बच्चों को तापमान के अनुकूल पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं ताकि वे ठंडी हवा की चपेट में न आएं। पंखे या एसी की ठंडी हवा से निकलकर एकदम से गर्म माहौल में जाने से बचना बेहद जरूरी है।\n\nदवाइयों और खानपान से जुड़ी सावधानियां\nबच्चों को हमेशा साफ और स्वच्छ पानी ही पिलाएं और शरीर में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। जरूरत पड़ने पर बच्चों को पौष्टिक सूप और अन्य तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं, लेकिन किसी भी प्रकार के बासी, खुले में रखे या अस्वच्छ खाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। सबसे अहम बात यह है कि बच्चे को बुखार होने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी खुद से एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयां नहीं देनी चाहिए। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए तुलसी, अदरक और काली मिर्च से तैयार चाय का सेवन किया जा सकता है, लेकिन बहुत छोटे बच्चों को किसी भी तरह का हर्बल उत्पाद या घरेलू नुस्खा आजमाने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना अनिवार्य है। तापमान के इस बदलाव के बीच यदि बच्चों में लगातार बदन दर्द या तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nबदलते मौसम के बीच स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने का सीधा असर आम परिवारों के दैनिक जीवन और जेब पर पड़ रहा है।\n\n• अंबाला में: अंबाला के नागरिक अस्पताल और निजी क्लीनिकों में बच्चों की बढ़ती भीड़ के कारण अभिभावकों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर डॉक्टर से परामर्श न लेने पर बच्चों की तबीयत बिगड़ने का वित्तीय और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।\n• भारत में: देश के अन्य हिस्सों में भी मौसम के इस उतार-चढ़ाव के दौरान वायरल संक्रमण और मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे चिकित्सा खर्चों में इजाफा होता है। कामकाजी अभिभावकों को बच्चों की बीमारी के चलते अपनी दैनिकचर्या और दफ्तर के काम में बदलाव करना पड़ता है।\n• दवाइयों का खर्च: बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने या बच्चों को एंटीबायोटिक देने से साइड इफेक्ट्स का खतरा और इलाज का खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। हमेशा योग्य चिकित्सक की देखरेख में ही दवा लेना सुरक्षित रहता है।\n• खानपान की सावधानी: बाहर के खुले खानपान से परहेज करने और घर का ताजा पौष्टिक भोजन अपनाने से मौसमी बीमारियों पर होने वाले भारी-भरकम खर्च से बचा जा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमौसम में अचानक होने वाले बदलाव तापमान में भारी उतार-चढ़ाव पैदा करते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करते हैं।\n\n• तापमान का उतार-चढ़ाव: दिन में तेज गर्मी और सुबह-शाम ठंडक होने से शरीर का तापमान तालमेल नहीं बिठा पाता, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से हमला करते हैं।\n• संक्रमण का प्रसार: बदलते मौसम के दौरान वातावरण में रोगाणुओं की सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे स्कूल और भीड़भाड़ वाली जगहों पर बच्चे तेजी से संक्रमित होते हैं।\n• कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता: बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कम संवेदनशील होती है, जिसके कारण वे मौसम बदलने पर सबसे पहले प्रभावित होते हैं।\n• खानपान की अनदेखी: इस दौरान ठंडी चीजों का सेवन या बासी भोजन करने से पाचन तंत्र कमजोर होता है, जो वायरल संक्रमण के प्रभाव को और अधिक गंभीर बना देता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अंबाला में बच्चों में कौन सी बीमारियां बढ़ रही हैं?\nअंबाला में मौसम बदलने से बच्चों में वायरल बुखार, खांसी, जुकाम, गले में संक्रमण और दस्त की समस्याएं बढ़ रही हैं।\n\n2. नागरिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना कितने बच्चे पहुंच रहे हैं?\nअंबाला शहर नागरिक अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं।\n\n3. वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या कितनी है?\nओपीडी में आने वाले बच्चों में से करीब 60 बच्चे तेज वायरल बुखार से पीड़ित पाए जा रहे हैं।\n\n4. बच्चों में वायरल संक्रमण के मुख्य लक्षण क्या हैं?\nअचानक तेज बुखार, लगातार बदन दर्द, छींक आना, नाक बहना, गले में दर्द और सुस्ती इसके मुख्य लक्षण हैं।\n\n5. बुजुर्गों में इस मौसम में क्या परेशानी देखी जा रही है?\nबुजुर्गों में खांसी, जुकाम और बुखार के साथ-साथ जोड़ों के दर्द की समस्या भी बढ़ रही है।\n\n6. डॉक्टर रजिता ने क्या सावधानी बरतने की सलाह दी है?\nउन्होंने सर्दियों के कपड़ों को धूप में सुखाने, भीड़भाड़ से बचने और ताजा घर का खाना खाने की सलाह दी है।\n\n7. क्या बुखार होने पर खुद से दवा देनी चाहिए?\nनहीं, बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं देनी चाहिए।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-10-20",
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