अंबाला से शामली का सफर होगा आसान, 4900 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा छह लेन एक्सप्रेसवे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए 4,900 करोड़ रुपये की लागत से अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिससे यात्रा का समय घटकर डेढ़ घंटा रह जाएगा। हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दोनों राज्यों को जोड़ने वाले अंबाला से शामली के बीच बनाए जा रहे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम बहुत तेजी से चल रहा है और इसका लगभग सत्तर प्रतिशत हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है। उत्तर भारत के परिवहन ढांचे के लिए इस नए मार्ग को एक बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इसके पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाने के बाद अंबाला और शामली के बीच का सफर जो अभी करीब तीन घंटे का होता है, वह सिमटकर केवल डेढ़ घंटे यानी नब्बे मिनट का ही रह जाएगा। 4900 करोड़ रुपये की लागत और 121.78 किलोमीटर का सफर इस पूरे बुनियादी ढांचे के विकास पर कुल 4,900 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर कुल 121.78 किलोमीटर लंबा है और इसे तीन अलग-अलग निर्माण कंपनियाँ मिलकर पूरा कर रही हैं। इस एक्सप्रेसवे का लगभग 75 किलोमीटर का क्षेत्र हरियाणा राज्य के अंतर्गत आता है, जबकि बचा हुआ 45 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश की सीमा के भीतर स्थित है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2023 में की गई थी और निर्धारित समय-सीमा के अनुसार इसे मार्च 2027 तक आम जनता और वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। किन-किन जिलों से होकर गुजरेगा नया मार्ग फिलहाल अंबाला से शामली की तरफ जाने के लिए कोई भी सीधा चार लेन का मार्ग या एक्सप्रेसवे उपलब्ध नहीं है। लोगों को आवाजाही के लिए करनाल के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जहाँ भारी ट्रैफिक और सड़क जाम के कारण तीन घंटे से भी ज्यादा समय बर्बाद हो जाता है। यह नया एक्सप्रेसवे अंबाला-चंडीगढ़ रोड से अपनी शुरुआत करेगा और शामली के थाना भवन तक जाएगा। यह मार्ग हरियाणा के चार महत्वपूर्ण जिलों अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होकर गुजरेगा। इसके पश्चात यह उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करके सहारनपुर और शामली जिलों से सीधा संपर्क स्थापित करेगा। तीन बड़े एक्सप्रेसवे से जुड़ा होगा यह नेटवर्क इस आधुनिक एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहु-कनेक्टिविटी नेटवर्क होना है। यह मार्ग तीन बेहद अहम और बड़े परिवहन मार्गों को आपस में जोड़ेगा। शामली के गोगवान जलालपुर इलाके में यह दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इसके अलावा सादलपुर के पास यह अंबाला-चंडीगढ़ और अंबाला-मोहाली मार्ग से जुड़ जाएगा। अंबाला से गुजरते हुए यह लुधियाना-अमृतसर मार्ग को भी निर्बाध यातायात प्रवाह प्रदान करेगा। इसस बेहतरीन आपसी जुड़ाव का सीधा फायदा केवल हरियाणा और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को ही नहीं, बल्कि पंजाब और राजस्थान से आने-जाने वाले यात्रियों को भी मिलेगा। रास्ते में मिलेंगी विश्व स्तरीय आधुनिक सुविधाएँ दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की तर्ज पर ही अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे पर भी यात्रियों की सुख-सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है और आधुनिक विश्राम स्थल बनाए जा रहे हैं। यहाँ सफर करने वालों के लिए पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन, साफ-सुथरे शौचालय, फूड कोर्ट, रेस्तरां और वाहनों के चार्जिंग व पार्किंग के लिए उन्नत प्रबंध किए जा रहे हैं, ताकि लंबा सफर तय करने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। व्यापारियों और किसानों के लिए साबित होगा वरदान यह नया गलियारा केवल आम मुसाफिरों का कीमती समय ही नहीं बचाएगा, बल्कि दोनों राज्यों की आर्थिकी को भी एक नई दिशा और गति प्रदान करेगा। अंबाला की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग बेल्ट, यमुनानगर का पूरे देश में प्रसिद्ध प्लाईवुड कारोबार और शामली तथा मुजफ्फरनगर क्षेत्र की चीनी मिलों को एक सीधा और सुगम मार्ग मिल जाएगा। माल ढोने वाले भारी ट्रकों को संकरे रास्तों और जाम से छुटकारा मिलेगा, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी और ढुलाई की लागत में भी काफी कमी आएगी। इसका आप पर असर अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे के शुरू होने से हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच सफर करने वाले आम लोगों का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। • भारत में: देश के उत्तरी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत में कमी आएगी, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। • अंबाला और शामली में: स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को भीषण ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी और दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र डेढ़ घंटा रह जाएगा। ऐसा क्यों हुआ यातायात के बढ़ते दबाव और मौजूदा मार्गों पर भारी जाम की समस्या से निपटने के लिए इस नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। • सीधा मार्ग का अभाव: अंबाला और शामली के बीच कोई सीधा चार लेन या हाई-स्पीड कॉरिडोर न होने के कारण यात्रियों को करनाल के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। • क्षेत्रीय आर्थिक विकास: यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग, अंबाला की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों और उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों को बेहतर परिवहन संपर्क देने के लिए इस परियोजना को आवश्यक माना गया है। सवाल-जवाब 1. अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है? यह एक्सप्रेसवे कुल 121.78 किलोमीटर लंबा है। 2. इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर कितनी लागत आ रही है? इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 4,900 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। 3. यह एक्सप्रेसवे कब तक बनकर तैयार हो जाएगा? तय लक्ष्य के अनुसार इसे मार्च 2027 तक वाहनों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। 4. सफर का समय घटकर कितना रह जाएगा? अंबाला से शामली के बीच लगने वाला 3 घंटे का समय घटकर सिर्फ 1.5 घंटे रह जाएगा। 5. यह एक्सप्रेसवे हरियाणा के किन जिलों को कवर करेगा? यह अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर जिलों से होकर गुजरेगा। https://trendkia.com/haryana/anbala-se-shamali-ka-saphara-hoga-asana-4900-crore-rupaye-ki-lagata-se-taiyara-ho-raha-chhaha-lena-expressway-31014 TrendKia — Har trend, sabse pehle.