{
  "type": "article",
  "title": "बाहर से फिट दिखने वाले भी क्यों हो रहे जिम में दिल के दौरे के शिकार, हृदय रोग विशेषज्ञ ने समझाए बड़े कारण",
  "summary": "शारीरिक रूप से तंदुरुस्त दिखने का मतलब यह नहीं कि दिल भी स्वस्थ है, अनजानी बीमारियों और अत्यधिक कसरत के खतरों को लेकर विशेषज्ञ ने दी सतर्क रहने की सलाह।",
  "content": "वर्कआउट के दौरान अचानक अस्वस्थ होने और दिल का दौरा पड़ने की बढ़ती घटनाओं ने कई लोगों को अचंभे में डाल दिया है। अक्सर यह सवाल सामने आता है कि बाहर से पूरी तरह तंदुरुस्त और सक्रिय दिखने वाले व्यक्ति को अचानक गंभीर हृदय रोग कैसे घेर सकता है। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. गौतम सिंघल के अनुसार, केवल बाहरी शारीरिक बनावट से यह तय नहीं होता कि भीतर से दिल भी उतना ही मजबूत और निरोगी है।\n\nछिपी हुई बीमारियां और क्षमता से अधिक मेहनत का जोखिम\nहृदय से जुड़ी कई ऐसी समस्याएं होती हैं जो व्यक्ति के शरीर के भीतर बिना किसी स्पष्ट संकेत के मौजूद रहती हैं। सामान्य दिनचर्या में इनके कोई विशेष लक्षण महसूस नहीं होते। जब कोई व्यक्ति अचानक जिम जाकर भारी वर्कआउट शुरू करता है, तो दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ये छिपी हुई बीमारियां उभरकर सामने आ जाती हैं। इसके अलावा, कई लोग दूसरों की नकल करते हुए या जल्द परिणाम पाने के चक्कर में अपनी शारीरिक सीमा से अधिक भारी वजन उठा लेते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।\n\nआयु वर्ग के अनुसार अलग होनी चाहिए वर्कआउट की रूपरेखा\nडॉ. गौतम सिंघल स्पष्ट करते हैं कि व्यायाम अपने आप में हानिकारक नहीं है, बल्कि यह हर आयु वर्ग के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि किस उम्र में किस प्रकार का वर्कआउट उपयुक्त रहेगा। सत्तर वर्ष के बुजुर्ग, पचास वर्ष के प्रौढ़ व्यक्ति और बीस से चालीस वर्ष के युवाओं के लिए शारीरिक अभ्यास का स्वरूप, तीव्रता और तरीका एक जैसा नहीं हो सकता। हर व्यक्ति को अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुसार ही कसरत चुननी चाहिए।\n\nजिम में अचेत होना सामान्य नहीं, तुरंत जरूरी है ध्यान\nव्यायाम के दौरान अचानक बेहोश होने के पीछे शरीर में पानी की कमी अथवा ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव जैसे कारण हो सकते हैं। लेकिन यह स्थिति वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया और वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन जैसी हृदय की गंभीर और प्राणघातक धड़कन संबंधी विसंगतियों का संकेत भी हो सकती है। इन गंभीर खतरों से निपटने के लिए हर फिटनेस सेंटर में ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर यानी AED की उपलब्धता अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। साथ ही, वहां मौजूद प्रशिक्षकों और लोगों को सीपीआर देने की बुनियादी प्रक्रिया की जानकारी होना आवश्यक है।\n\nगंभीर चेतावनी संकेतों को सामान्य थकान समझने की भूल न करें\nकसरत करते समय हल्का पसीना आना, दिल की गति थोड़ी तेज होना या सामान्य रूप से सांस भरना एक स्वाभाविक शारीरिक प्रतिक्रिया है। इसके विपरीत, यदि अचानक बहुत अधिक पसीना छूटने लगे, सांस अत्यधिक फूलने लगे, चक्कर आने लगें या छाती में दबाव का अहसास हो, तो इसे केवल सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई देते ही तुरंत कसरत रोक देनी चाहिए और बिना देर किए चिकित्सीय जांच करानी चाहिए।\n\nतीस से चालीस की उम्र वालों के लिए पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी\nभारतीयों में कम उम्र में ही हृदय संबंधी विकार सामने आने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। इसलिए तीस से चालीस वर्ष की आयु में नियमित व्यायाम शुरू करने से पहले बुनियादी स्वास्थ्य जांच करवा लेना बेहद जरूरी है। इसमें ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और आवश्यकता पड़ने पर ईसीजी एवं इको टेस्ट शामिल हैं। जिन परिवारों में कम उम्र में अचानक मृत्यु का इतिहास रहा हो, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। नियमित जांच, संतुलित व्यायाम और शरीर से मिलने वाले संकेतों की पहचान से हृदय से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nव्यायाम शुरू करने से पहले बुनियादी मेडिकल जांच और शरीर की सीमाओं को समझना जानलेवा जोखिमों से बचा सकता है।\n\n• स्वास्थ्य जांच: 30 से 40 वर्ष के लोग जिम शुरू करने से पूर्व ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और आवश्यक होने पर ईसीजी या इको अवश्य कराएं। इससे शरीर में छिपी किसी भी हृदय संबंधी समस्या का समय रहते पता चल जाता है।\n• कसरत का स्तर: दूसरों को देखकर भारी वजन उठाने के बजाय अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुसार ही कसरत तय करें। अत्यधिक दबाव अचानक दिल पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।\n• लक्षणों पर सतर्कता: कसरत के दौरान चक्कर, असामान्य पसीना, सांस फूलना या सीने में दबाव महसूस होते ही व्यायाम तुरंत रोक दें। इन संकेतों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करना गंभीर संकट बन सकता है।\n• आपातकालीन सुरक्षा: जिम चुनते समय सुनिश्चित करें कि वहां ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) की सुविधा और सीपीआर प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध हो। आपात स्थिति में यह जानकारी और उपकरण किसी की जान बचा सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजिम में होने वाली अप्रत्याशित हृदय संबंधी घटनाओं के पीछे छिपी हुई अंदरूनी बीमारियां और अचानक अत्यधिक शारीरिक तनाव मुख्य कारण हैं।\n\n• अंदरूनी हृदय विकार: कई व्यक्तियों में दिल से जुड़ी बीमारियां पहले से मौजूद होती हैं जो रोजमर्रा के सामान्य कार्यों में सामने नहीं आतीं। जब व्यक्ति अचानक तीव्र व्यायाम करता है, तो दिल पर अप्रत्याशित भार पड़ने से यह समस्या घातक रूप ले लेती है।\n• अत्यधिक और अनियंत्रित कसरत: क्षमता से अधिक वजन उठाना या दूसरों से मुकाबला करते हुए भारी व्यायाम करना दिल की गति और धड़कन को असंतुलित कर सकता है। इससे वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया या वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।\n• जांच और उम्र की अनदेखी: 30 से 40 की उम्र में बिना पूर्व चिकित्सीय जांच और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी के भारी वर्कआउट शुरू करना जोखिम को बढ़ाता है। उम्र के अनुकूल सही व्यायाम पद्धति का चयन न करना भी इस समस्या को गहरा करता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या बाहर से पूरी तरह फिट दिखने वाले व्यक्ति को भी दिल की बीमारी हो सकती है?\nहां, शरीर से फिट दिखने का मतलब यह नहीं कि दिल भी स्वस्थ है। कई बार अंदरूनी हृदय संबंधी समस्याएं बिना किसी बाहरी लक्षण के शरीर में मौजूद रह सकती हैं।\n\n2. जिम में अचानक बेहोश होने के क्या कारण हो सकते हैं?\nबेहोश होने का कारण पानी की कमी या ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसके अलावा वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया और वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन जैसी गंभीर हृदय समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।\n\n3. कसरत के दौरान किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?\nयदि सांस अत्यधिक फूलने लगे, सीने में दबाव महसूस हो, चक्कर आएं या बहुत ज्यादा पसीना आने लगे, तो कसरत तुरंत रोककर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।\n\n4. जिम शुरू करने से पहले 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों को कौन सी जांच करानी चाहिए?\nइस उम्र के लोगों को ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और आवश्यकता पड़ने पर ईसीजी एवं इको टेस्ट जरूर कराना चाहिए।\n\n5. जिम परिसरों में आपातकालीन स्थिति के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए?\nहर जिम में ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) उपलब्ध होना चाहिए और वहां मौजूद लोगों को सीपीआर देने की जानकारी होनी चाहिए।",
  "url": "https://trendkia.com/haryana/bahara-se-phita-dikhane-vale-bhi-kyon-ho-rahe-jima-men-dila-ke-daure-ke-shikara-hridaya-roga-visheshajna-ne-samajhae-bare-karana-45547",
  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-10-09",
  "tags": [
    "हार्ट अटैक",
    "जिम वर्कआउट",
    "हृदय स्वास्थ्य",
    "डॉ गौतम सिंघल",
    "अमृता हॉस्पिटल",
    "कार्डियोलॉजी"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}