भुवनेश्वर के टूल रूम में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का हुनर सीख रहे युवा, अंतरिक्ष मिशन के पुर्जों के निर्माण में निभा रहे भूमिका भुवनेश्वर स्थित केंद्रीय टूल रूम एवं प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं को उन्नत विनिर्माण, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष क्षेत्र के सटीक कलपुर्जों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित केंद्रीय टूल रूम एवं प्रशिक्षण केंद्र में देश की युवा पीढ़ी को भविष्य की विनिर्माण तकनीकों में पारंगत किया जा रहा है। इस परिसर में शिक्षार्थी केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उन जटिल प्रणालियों पर प्रत्यक्ष काम कर रहे हैं जिनका उपयोग एयरोस्पेस और उन्नत इंजीनियरिंग में होता है। यहां विकसित की जा रही दक्षताओं का दायरा अंतरिक्ष अभियानों में प्रयुक्त होने वाले सूक्ष्म उपकरणों से लेकर भारी औद्योगिक रोबोटिक्स तक फैला हुआ है। उन्नत प्रयोगशालाएं और आधुनिक विनिर्माण तकनीक संस्थान परिसर में स्थापित विभिन्न प्रयोगशालाओं में छात्रों को थ्री-डी मेटल और प्लास्टिक प्रिंटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर यानी पीएलसी और इंडस्ट्री फोर-पॉइंट-ओ के व्यावहारिक गुर सिखाए जाते हैं। इसके साथ ही औद्योगिक स्वचालन और हाई-प्रिसीजन सीएनसी मिलिंग व टर्निंग मशीनों के संचालन की गहन जानकारी दी जाती है। यहां का शैक्षणिक ढांचा पूरी तरह उद्योग जगत की वास्तविक मांगों पर केंद्रित है, जिससे युवा कार्यस्थल की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। अंतरिक्ष परियोजनाओं और एयरोस्पेस विनिर्माण में योगदान संस्थान की गतिविधियों में एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए अत्यंत सटीक कलपुर्जों का उत्पादन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। केंद्र के वार्षिक ब्योरे के अनुसार, यहां भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो की विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े एयरोस्पेस कंपोनेंट्स का निर्माण भी किया जाता है। इस प्रकार के उच्च स्तरीय विनिर्माण कार्यों में शामिल होने से विद्यार्थियों को वास्तविक एयरोस्पेस मानकों, सख्त गुणवत्ता नियंत्रण और सूक्ष्म मापन प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अमूल्य अवसर प्राप्त होता है। उद्योग-उन्मुख डिप्लोमा और कौशल विकास पाठ्यक्रम सीटीटीसी की स्थापना के मूल उद्देश्यों में कुशल तकनीकी कार्यबल तैयार करना, टूल डिजाइनिंग, उपकरण निर्माण और उत्पादन सहायता शामिल रही है। वर्तमान में यह केंद्र कंप्यूटर एडेड डिजाइन और कंप्यूटर एडेड मैन्युफैक्चरिंग यानी सीएडी/सीएएम, सीएनसी प्रोग्रामिंग, टूल एंड डाई मेकिंग तथा मशीन रखरखाव के उन्नत प्रशिक्षण मॉड्यूल संचालित करता है। इसके अलावा छात्रों के लिए मेकाट्रॉनिक्स, टूल एंड डाई मेकिंग और स्वचालन से जुड़े विशिष्ट डिप्लोमा पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। तीन वर्ष की अवधि वाला ऑटोमेशन एंड रोबोटिक्स डिप्लोमा भी युवाओं को आधुनिक फैक्ट्रियों की स्वचालित प्रणालियों का विशेषज्ञ बना रहा है। कौशल विकास पर संस्थान नेतृत्व का दृष्टिकोण संस्थान के प्रभारी महाप्रबंधक डॉ. केएम राजन ने चल रही तकनीकी व व्यावहारिक गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए उन्नत प्रशिक्षण की बारीकियों पर प्रकाश डाला। वहीं प्रशासन, लेखा एवं मानव संसाधन प्रमुख सुशांत कुमार राउत ने सटीक इंजीनियरिंग और अत्याधुनिक तकनीकी कौशल की जानकारियां युवाओं तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। केंद्र की कार्यप्रणाली के अवलोकन के दौरान चंडीगढ़ से आए प्रतिनिधिमंडल में निदेशक प्रीतम सिंह, सहायक निदेशक पार्थ सारथी मलिक और धर्म सिंह भी शामिल रहे। इसका आप पर असर तकनीकी शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण से छात्रों को एयरोस्पेस और हाई-टेक उद्योगों में रोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं। • भारत में: विनिर्माण क्षेत्र में कुशल तकनीशियनों की उपलब्धता बढ़ने से घरेलू स्तर पर उच्च-सटीकता वाले उपकरणों का उत्पादन तेज होगा। इससे अंतरिक्ष और औद्योगिक स्वचालन जैसे क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता कम होगी और स्थानीय रोजगार को गति मिलेगी। • भुवनेश्वर में: ओडिशा और आसपास के राज्यों के युवाओं को स्थानीय स्तर पर विश्वस्तरीय औद्योगिक मशीनरी पर काम करने का सीधा अवसर मिल रहा है। इससे छात्रों को कोर्स पूरा करते ही आधुनिक विनिर्माण संयंत्रों में सीधे रोजगार हासिल करने में मदद मिलती है। • छात्रों के लिए: तीन-वर्षीय ऑटोमेशन व मेकाट्रॉनिक्स डिप्लोमा करने वाले शिक्षार्थियों को व्यावहारिक कार्य अनुभव का लाभ मिलेगा। वे अत्याधुनिक सीएनसी मशीनों और रोबोटिक्स सिस्टम को नियंत्रित करने में सीधे सक्षम बनेंगे। • उद्योग जगत के लिए: कंपनियों को रेडी-टू-डिप्लॉय पेशेवर उपलब्ध होंगे जिन्हें नए सिरे से बुनियादी ट्रेनिंग देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे उत्पादन समय में बचत होगी और जटिल परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। ऐसा क्यों हुआ आधुनिक विनिर्माण और एयरोस्पेस उद्योगों में उच्च सटीकता वाले उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ने के कारण उन्नत प्रशिक्षण केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण हुई है। • कौशल की मांग: पारंपरिक इंजीनियरिंग शिक्षा में अक्सर थ्योरी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि आधुनिक फैक्ट्रियों को सीएनसी और रोबोटिक्स पर काम करने वाले हुनरमंद पेशेवरों की जरूरत होती है। इस अंतर को पाटने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण अनिवार्य हो चुका है। • अंतरिक्ष मिशनों में घरेलू कलपुर्जे: अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों के विस्तार के साथ अत्यधिक सूक्ष्म और विश्वसनीय कंपोनेंट्स की आवश्यकता बढ़ी है। सीटीटीसी जैसे केंद्रों की स्थापना उद्योग-उन्मुख उत्पादन और प्रशिक्षण दोनों को एक साथ साधने के उद्देश्य से की गई थी। • आधुनिक तकनीक का एकीकरण: इंडस्ट्री फोर-पॉइंट-ओ, थ्री-डी प्रिंटिंग और ऑटोमेशन के आने से उत्पादन प्रणालियों का पूरा स्वरूप बदल रहा है। संस्थान ने अपने पाठ्यक्रमों को इन्हीं नई तकनीकों के अनुरूप ढालने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं का विकास किया है। सवाल-जवाब 1. भुवनेश्वर स्थित सीटीटीसी में किन मुख्य तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाता है? यहाँ थ्री-डी मेटल व प्लास्टिक प्रिंटिंग, सीएनसी मिलिंग व टर्निंग, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, पीएलसी और इंडस्ट्री फोर-पॉइंट-ओ जैसी तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलता है। 2. क्या सीटीटीसी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी उपकरण तैयार करता है? हाँ, संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार यहाँ इसरो की परियोजनाओं के लिए जरूरी उच्च-सटीकता वाले एयरोस्पेस कलपुर्जों का निर्माण किया जाता है। 3. संस्थान में कौन से प्रमुख डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं? यहाँ टूल एंड डाई मेकिंग, मेकाट्रॉनिक्स और तीन वर्षीय ऑटोमेशन एंड रोबोटिक्स जैसे डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हैं। 4. सीटीटीसी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसकी स्थापना युवाओं को उन्नत तकनीकी कौशल सिखाने, टूल डिजाइन व निर्माण करने और औद्योगिक उत्पादन की जरूरतों को पूरा करने के लिए की गई थी। https://trendkia.com/haryana/bhubaneswar-ke-tula-ruma-men-eyarospesa-injiniyaringa-ka-hunara-sikha-rahe-yuva-antariksha-mishana-ke-purjon-ke-nirmana-men-nibha--36994 TrendKia — Har trend, sabse pehle.