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  "title": "चरखी दादरी के रजत फोगाट ने एचसीएस में हासिल की छठी रैंक, 384 अंक लेकर बने प्रशासनिक अधिकारी",
  "summary": "हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में ढाणी फोगाट के रजत फोगाट ने 384 अंक जुटाकर राज्य भर में छठा स्थान हासिल किया है। पिछली असफलताओं से सीख लेकर उन्होंने अपनी रणनीति बदली और सफलता पाई।",
  "content": "प्रशासनिक सेवाओं की चयन सूची में चरखी दादरी के एक युवा ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर शीर्ष पायदान पर जगह बनाई है। हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किए गए हरियाणा सिविल सेवा भर्ती परीक्षा के नतीजों में ढाणी फोगाट गांव के रहने वाले रजत फोगाट ने समूचे राज्य में छठा स्थान प्राप्त किया। आयोग की इस मेरिट सूची में उन्होंने कुल 384 अंक हासिल किए, जिसके बाद उनके गांव और पूरे जिले में जश्न मनाया जा रहा है। उनके घर पर रिश्तेदारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों का तांता लगा हुआ है।\n\nशैक्षणिक पृष्ठभूमि और पिछली चुनौतियों से ली सीख\nरजत का ताल्लुक ऐसे परिवार से है जहां पढ़ाई-लिखाई को हमेशा तरजीह दी जाती रही है। उनके पिता बलराज फोगाट एक प्राइवेट स्कूल का संचालन करते हैं, जबकि उनकी मां शिक्षा विभाग में डिप्टी डीईओ के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं। उनकी पत्नी डॉ. अस्मिता हैं। घर में पठन-पाठन का माहौल होने के बावजूद रजत के लिए इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। इससे पहले वे यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा तीन बार लिख चुके थे। इसके अलावा उन्होंने भारतीय वन सेवा और हरियाणा सिविल सेवा की मुख्य परीक्षाओं का भी पूर्व में सामना किया था। उन शुरुआती प्रयासों में चयन न हो पाने पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी तैयारी की कमजोरियों को चिन्हित करते हुए उन्होंने अध्ययन के तौर-तरीकों को नए सिरे से गढ़ा और दोगुने उत्साह के साथ किताबों में जुट गए।\n\nदादा का मार्गदर्शन और ग्रामीण विकास का दृष्टिकोण\nसिविल सेवा में प्रवेश की दिशा तय करने में उनके पारिवारिक परिवेश की अहम भूमिका रही। रजत बताते हैं कि बाल्यकाल के दौरान उनके दादाजी ने उन्हें जनसेवा के इस मार्ग पर चलने का हौसला दिया था। चूंकि कुनबे में पहले से भी कई प्रशासनिक पदों पर आसीन लोग रहे हैं, इसलिए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की ऊर्जा मिलती रही। सेवा में आने के पीछे उनका मूल लक्ष्य शासन की कल्याणकारी नीतियों को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। वे खुद देहाती अंचल से आते हैं, इसलिए प्राइमरी एजुकेशन, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और गांवों के बुनियादी ढांचे में सुधार उनकी सबसे अहम प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।\n\nअभिभावकों की अपील और परिश्रम का प्रतिफल\nबेटे की शानदार कामयाबी पर पिता बलराज फोगाट ने बताया कि रजत शुरुआती दिनों से ही पढ़ाई के प्रति निष्ठावान और अनुशासित रहा है। उन्होंने अभिभावकों को नसीहत दी कि यदि युवा किसी इम्तिहान में असफल रह जाएं तो उनका मनोबल तोड़े बिना उनका साथ दें। वहीं उनकी मां ने कहा कि बेटे ने उनकी कड़ी तपस्या और मेहनत को सार्थक कर दिखाया है। उनका मानना है कि माता-पिता को संतान की स्वाभाविक रुचि को पहचानकर हर कदम पर मजबूती से खड़े रहना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nयह सफलता प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए दृढ़ता का व्यावहारिक संदेश देती है।\n\n• हरियाणा में: राज्य सेवा आयोग की चयन सूची जारी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों को जल्द प्रशासनिक पदों पर तैनाती मिलेगी। इससे जिला स्तर और ग्रामीण अंचलों में प्रशासनिक मशीनरी मजबूत होगी।\n• चरखी दादरी में: स्थानीय युवाओं के लिए यह परिणाम सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी को लेकर नया उत्साह जगाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र पिछले असफल प्रयासों के बावजूद बड़े लक्ष्यों की ओर अग्रसर हो सकेंगे।\n• प्रतियोगी छात्रों के लिए: तीन बार यूपीएससी मुख्य परीक्षा में रुकने के बाद एचसीएस में शीर्ष रैंक पाना रणनीति सुधारने की मिसाल है। अभ्यर्थी शुरुआती झटकों से निराश हुए बिना अपनी कमियों का विश्लेषण कर सकते हैं।\n• अभिभावकों के लिए: माता-पिता को यह प्रेरणा मिलती है कि असफलताओं के दौर में बच्चों पर दबाव बनाने के बजाय भावनात्मक संबल दें। सकारात्मक पारिवारिक सहयोग छात्रों के प्रदर्शन में निर्णायक भूमिका निभाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह परिणाम वर्षों के निरंतर अध्ययन, असफल प्रयासों के गहन विश्लेषण और अनुकूल पारिवारिक सहयोग का सीधा प्रतिफल है।\n\n• तैयारी की रणनीति में सुधार: पूर्व में यूपीएससी और अन्य मुख्य परीक्षाओं में अंतिम चयन से चूकने के बाद रजत ने अपनी कमजोरियों को परखा। उन्होंने पुरानी गलतियों को सुधारते हुए अध्ययन योजना में जरूरी बदलाव किए।\n• शैक्षणिक पारिवारिक वातावरण: पिता के स्कूल संचालक और माता के शिक्षा विभाग में कार्यरत होने से अध्ययन का अनुकूल परिवेश मिला। इससे उन्हें लंबे तैयारी काल के दौरान स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली।\n• बचपन की प्रेरणा और मार्गदर्शन: दादाजी द्वारा बचपन में दी गई प्रशासनिक सेवा की सीख और परिवार के पूर्व अधिकारियों के अनुभव ने उन्हें लगातार प्रेरित रखा। इसी उद्देश्य ने उन्हें असफलताओं के बाद भी लक्ष्य से भटकने नहीं दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रजत फोगाट ने हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में कौन सी रैंक हासिल की?\nरजत फोगाट ने हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में पूरे प्रदेश में छठा रैंक प्राप्त किया है।\n\n2. रजत फोगाट ने इस परीक्षा में कुल कितने अंक प्राप्त किए?\nउन्होंने इस परीक्षा में कुल 384 अंक हासिल किए हैं।\n\n3. रजत फोगाट हरियाणा के किस जिले और गांव के निवासी हैं?\nवे चरखी दादरी जिले के गांव ढाणी फोगाट के रहने वाले हैं।\n\n4. रजत फोगाट के माता-पिता क्या करते हैं?\nउनके पिता बलराज फोगाट निजी स्कूल संचालक हैं और उनकी मां शिक्षा विभाग में डिप्टी डीईओ के पद पर कार्यरत हैं।\n\n5. रजत ने इससे पहले कौन सी मुख्य परीक्षाएं दी थीं?\nवे पूर्व में तीन बार यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा, वन सेवा परीक्षा और एचसीएस मुख्य परीक्षा दे चुके थे।\n\n6. प्रशासनिक सेवा में रजत की मुख्य प्राथमिकताएं क्या हैं?\nग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के कारण बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और ग्रामीण आधारभूत ढांचे में सुधार उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nरजत फोगाट का सफर साबित करता है कि पूर्व की असफलताएं अंतिम परिणाम नहीं होतीं, बशर्ते छात्र अपनी गलतियों से सीखने को तैयार हों।\n\n• असफलताओं को दिशा बनाएं: पिछली परीक्षाओं में चयन न होना अंत नहीं बल्कि सुधार का अवसर होता है। अपनी कमियों को चिन्हित कर दोगुनी मेहनत से रणनीति बदलें।\n• पारिवारिक मूल्यों का सम्मान: बचपन में मिले संस्कारों और बड़ों की सीख को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाएं। पारिवारिक प्रोत्साहन कठिन सफर को आसान बनाता है।\n• जमीनी हकीकत से जुड़ाव: अपनी पृष्ठभूमि को न भूलें और सफलता के बाद समाज के बुनियादी मुद्दों पर काम करने का संकल्प रखें। जनहित को प्राथमिकता बनाना ही सच्ची उपलब्धि है।\n• धैर्य और अनुशासन: प्रतियोगी परीक्षाओं में वर्षों का समय लग सकता है, इसलिए निरंतरता बनाए रखना जरूरी है। नियमित प्रयास ही अंततः बड़ा परिणाम दिलाते हैं।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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    "रजत फोगाट",
    "हरियाणा सिविल सेवा",
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