दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में वायु प्रदूषण पर सख्त कदम, भूपेंद्र यादव ने 5 राज्यों के साथ बनाई रणनीति केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए समीक्षा बैठक की। इसमें नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के सख्त निर्देश दिए गए। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हवा की गुणवत्ता को सुधारने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में आगामी महीनों के लिए तैयार किए गए विशेष एक्शन प्लान की गहराई से समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सरकार इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी। प्रदूषण हॉटस्पॉट पर कड़ी निगरानी और नाम सार्वजनिक करने का फैसला दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य हॉटस्पॉट की पहचान करके उनके लिए व्यावहारिक तथा प्रभावी कार्ययोजना लागू करने पर विशेष बल दिया गया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया गया कि वह इन संवेदनशील इलाकों में जमीनी निगरानी को मजबूत करे। नियम तोड़ने वाले उद्योगों और व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, प्रदूषण फैलाने वाले उल्लंघनकर्ताओं के नाम सार्वजनिक करने पर भी जोर दिया गया है ताकि सामाजिक और कानूनी दबाव बनाया जा सके। केवल जागरूकता अभियानों के भरोसे रहने के बजाय वास्तविक धरातल पर कड़े नियम लागू करना बेहद जरूरी माना गया है। पड़ोसी राज्यों की जिम्मेदारी और स्थानीय स्रोतों पर प्रहार हरियाणा सरकार को निर्देश दिया गया कि वह NCR के अन्य पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम करे और स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के स्रोतों पर कड़ा नियंत्रण लगाए। जमीनी स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने वाले अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया। इसी तरह उत्तर प्रदेश के NCR से सटे इलाकों में औद्योगिक गतिविधियों की सख्त निगरानी करने और विभिन्न प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर तालमेल बैठाने के निर्देश दिए गए। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को गैर-अनुरूप और प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। कृषि प्रदूषण और पंजाब के लिए विशेष रणनीति पंजाब के साथ हुई चर्चा में कृषि क्षेत्र से पैदा होने वाले प्रदूषण, खासकर पराली जलाने से जुड़ी समस्याओं पर गहन मंथन किया गया। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि कृषि और पर्यावरण विभागों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। इसके लिए केंद्र और राज्यों के कृषि, पर्यावरण और शहरी विकास मंत्रियों के बीच संयुक्त बैठकों के आयोजन का प्रस्ताव पेश किया गया ताकि एक समन्वित और व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। राजस्थान को भी निर्देश दिया गया कि वह NCR के सामूहिक वायु गुणवत्ता प्रबंधन ढांचे के तहत अपनी योजनाओं को मुस्तैदी से लागू करे और सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करे। सख्त कार्रवाई और सितंबर में अगली समीक्षा समीक्षा बैठक का समापन करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सिर्फ सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) जैसी गतिविधियों से प्रदूषण पर काबू नहीं पाया जा सकता। इसके लिए कानून का सख्त अनुपालन और जमीनी स्तर पर कठोर प्रवर्तन अनिवार्य है। उन्होंने दोहराया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी संस्थान या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। राज्यों की प्रगति और उठाए गए कदमों का आकलन करने के लिए सितंबर महीने में केंद्रीय मंत्री स्तर की एक और समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। केंद्र सरकार ने सभी पांचों राज्यों को आश्वस्त किया कि वायु गुणवत्ता सुधारने के इस अभियान में हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। इसका आप पर असर दिल्ली-NCR और उत्तरी भारत में रहने वाले करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर इस योजनाबद्ध कार्रवाई का सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: केंद्र सरकार के इस बहु-राज्यीय समन्वय से उत्तरी भारत के प्रमुख राज्यों में वायु गुणवत्ता मानकों में सुधार की उम्मीद है। पराली जलाने पर नियंत्रण से सर्दियों के मौसम में धुआं और धुंध का असर कम हो सकता है। • दिल्ली-NCR में: दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के निवासियों को प्रदूषणकारी उद्योगों और हॉटस्पॉट पर सख्त कार्रवाई से थोड़ी स्वच्छ हवा मिलने की संभावना है। स्थानीय निकायों द्वारा पानी के छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल से सड़क की धूल में कमी आएगी। • उद्योगों के लिए: नियम न मानने वाली औद्योगिक इकाइयों को भारी जुर्माना, बंदी या सार्वजनिक रूप से नाम उजागर होने का जोखिम उठाना पड़ेगा। कंपनियों को पर्यावरणीय नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। • किसानों के लिए: पंजाब और हरियाणा के किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सरकार की ओर से नई रणनीतियों और संसाधनों का लाभ मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. समीक्षा बैठक की अध्यक्षता किसने की? केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। 2. इस बैठक में कौन-कौन से राज्य शामिल थे? बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। 3. प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ क्या नीति अपनाई जाएगी? सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाली और गैर-अनुरूप प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया है। 4. पंजाब सरकार के साथ किस मुख्य मुद्दे पर चर्चा हुई? पंजाब के साथ कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रदूषण स्रोतों, विशेष रूप से पराली जलाने की समस्या और कृषि-पर्यावरण विभागों के बीच समन्वित रणनीति बनाने पर चर्चा हुई। 5. अगली समीक्षा बैठक कब आयोजित की जाएगी? राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी प्रगति का आकलन करने के लिए सितंबर महीने में केंद्रीय मंत्री स्तर की अगली समीक्षा बैठक होगी। https://trendkia.com/haryana/delhi-aura-parosi-rajyon-men-vayu-pradushana-para-sakhta-kadama-bhupender-yadav-ne-5-rajyon-ke-satha-banai-rananiti-27174 TrendKia — Har trend, sabse pehle.