धातुओं के दाम नरम होते ही चमका अंबाला सराफा बाजार, खोखली मूर्तियों और खास कलाकृतियों पर उमड़े खरीदार सोने और चांदी के भाव में आई नरमी के बाद अंबाला के सराफा बाजार में त्योहारी और वैवाहिक खरीदारी तेज हो गई है। दक्षिण भारतीय शैली की प्रतिमाओं, खोखली डिजाइन वाली मूर्तियों और चांदी की नक्काशीदार कुर्सी जैसी कलाकृतियों की मांग तेजी से बढ़ी है। शादी-ब्याह और आगामी पर्वों के दौर में अंबाला का सराफा बाजार एक बार फिर खरीदारों की चहल-पहल से गुलजार होने लगा है। हाल के दिनों में सोने और चांदी के भाव में नरमी आने के कारण ग्राहकों ने आभूषणों और कलाकृतियों की खरीद में नई दिलचस्पी दिखाई है। इससे पहले जब कीमती धातुओं के दाम लगातार ऊंचाई पर बने हुए थे, तब अधिकांश लोग चांदी के उत्पादों की खरीदारी टालते दिखाई दे रहे थे। अब दरों में राहत मिलते ही उपभोक्ता अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से दुकानों का रुख कर रहे हैं, जहां पारंपरिक डिजाइनों के अलावा आधुनिक तकनीक से गढ़ी गई हल्की और भव्य वस्तुओं की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। दक्षिण भारतीय शैली की प्रतिमाओं में सोने का महीन वर्क अंबाला के आभूषण बाजारों में इस समय दक्षिण भारतीय शिल्प शैली में ढाली गई चांदी की लक्ष्मी-गणेश मूर्तियां लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। इन मूर्तियों पर कारीगरों ने सोने का बेहद बारीक और नक्काशीदार वर्क किया है, जो इनके रूप-रंग को विशिष्ट रूप प्रदान करता है। लगभग साढ़े तीन किलोग्राम वजन में तैयार की जा रही इन मूर्तियों को विशेष रूपांकनों और धार्मिक आस्था के प्रतीकों के साथ तराशा गया है। गृह प्रवेश, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और पूजा कक्षों के लिए श्रद्धालु इन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी क्रम में रामदरबार, खाटू श्याम, बजरंग बली, नंदी महाराज और राधा-कृष्ण की मनमोहक चांदी की प्रतिमाएं भी बाजार में व्यापक स्तर पर प्रदर्शित की गई हैं। खोखली बनावट से कम वजन में मिला भारी और भव्य रूप बाजार के मौजूदा रुझान को लेकर जौहरी विशाल वर्मा ने बताया कि इस बार खरीदारों के बीच खोखली यानी 'होल' मूर्तियों का क्रेज विशेष तौर पर देखा जा रहा है। ग्राहक ऐसी मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो दिखने में बेहद ठोस, भारी-भरकम और शाही अहसास कराती हैं, लेकिन तराशने की विशेष तकनीक के चलते उनका वास्तविक वजन काफी कम होता है। विशाल वर्मा के अनुसार, इन मूर्तियों की आंतरिक बनावट इस प्रकार नियोजित की जाती है कि कम धातु की खपत में भी बाहरी स्वरूप पूरी तरह भव्य और विस्तृत नजर आए। इस खूबी की वजह से मध्यम वर्गीय और बजट के प्रति सजग परिवारों को अपने तय खर्च के भीतर भव्य कलाकृतियां खरीदने का बेहतर अवसर मिल पा रहा है। भाव में नरमी आने के कारण लोग अब उत्पाद के वजन और उसके डिजाइन संतुलन को परखकर निर्णय ले रहे हैं। चांदी की हटरी, बोतल और दैनिक उपयोग की नई रेंज पूजा अनुष्ठानों के पारंपरिक सामान के अलावा घरेलू उपयोगिता और व्यक्तिगत साज-सज्जा के सामान की भी अच्छी बिक्री दर्ज की जा रही है। सराफा दुकानों पर चांदी से बनी हटरी, पारंपरिक लोटा, गिलास और चांदी की पानी की बोतलों की विस्तृत श्रृंखला पेश की गई है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए चांदी के तारों और पत्तरों से तैयार किए गए हैंड पर्स की नई किस्में भी पेश की गई हैं, जिन्हें खास पारिवारिक उत्सवों में इस्तेमाल के लिए पसंद किया जा रहा है। विवाह उपहारों में चांदी के डिनर सेट की मांग उपहार देने के चलन में भी चांदी के बर्तनों और सजावटी वस्तुओं का दबदबा बढ़ा है। जौहरी पंकज ने बताया कि वैवाहिक आयोजनों में परिजनों और मित्रों को भेंट देने के लिए लोग चांदी की वस्तुओं को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। शादियों और मांगलिक समारोहों में अपनी व्यक्तिगत पसंद और सामाजिक प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर तोहफे चुने जा रहे हैं। इसी क्रम में पूरे चांदी के डिनर सेट की पूछपरख में तेजी आई है। पंकज के अनुसार, खरीदार ऐसे उपहारों की तलाश में हैं जो न केवल दिखने में सुरुचिपूर्ण लगें बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक यादगार और मूल्यवान धरोहर भी बने रहें। 600 ग्राम चांदी के पत्तर से मढ़ी गई लकड़ी की अनोखी कुर्सी अंबाला सराफा बाजार में कुछ ऐसी दुर्लभ और हस्तनिर्मित कलाकृतियां भी उपलब्ध हैं, जिनकी अनूठी शिल्पकला सबको आकर्षित कर रही है। इनमें ठोस लकड़ी की नक्काशीदार कुर्सी पर लगभग 600 ग्राम चांदी का पत्तर चढ़ाकर तैयार की गई शाही कुर्सी मुख्य रूप से शामिल है। कारीगरों ने लकड़ी के ढांचे पर चांदी की परत को इस खूबसूरती से उभारा है कि यह प्राचीन दरबारी साज-सामान जैसा भव्य प्रभाव छोड़ती है। इस तरह के शिल्प को विशिष्ट कला प्रेमियों और पारिवारिक उत्सवों में विशेष उपयोग के लिए पसंद किया जा रहा है। आभूषण विक्रेताओं का मानना है कि धातुओं की कीमतों में स्थिरता और गिरावट ने त्योहारी बाजार की रौनक को नई गति प्रदान की है। इसका आप पर असर सोने-चांदी के दामों में गिरावट से शादी और त्योहारों के लिए खरीदारी करने वाले परिवारों को सीधा वित्तीय लाभ मिल रहा है। • भारत में: कीमती धातुओं की दरों में नरमी आने से पूरे देश के सराफा बाजारों में त्योहारी और वैवाहिक आभूषणों की मांग बढ़ रही है। इससे उन परिवारों को राहत मिल रही है जो लंबे समय से बढ़ती कीमतों के कारण खरीदारी टाल रहे थे। • अंबाला में: स्थानीय सराफा बाजार में नई किस्मों और हल्की खोखली मूर्तियों की उपलब्धता से खरीदारों को अपने तय बजट में भव्य सामान मिल रहा है। शादी-ब्याह के लिए उपहार और पूजा का सामान खरीदने वाले स्थानीय नागरिक अब कम लागत में बेहतर विकल्प चुन सकते हैं। • उपहार खरीदारों के लिए: चांदी के डिनर सेट और बर्तनों की विस्तृत रेंज मिलने से शादियों में देने के लिए यादगार तोहफे चुनना आसान हो गया है। बजट के अनुसार विभिन्न वजन और डिजाइनों में सामान उपलब्ध होने से उपहार चयन में सहूलियत हो रही है। • पूजा व अनुष्ठान के लिए: 3.5 किलो वजन वाली साउथ इंडियन स्टाइल मूर्तियों से लेकर रोजमर्रा के पूजा बर्तनों की खरीद आसान हो गई है। लोग अपनी धार्मिक जरूरतों के अनुसार विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं आसानी से खरीद पा रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ सराफा बाजार में आई इस अचानक तेजी के पीछे सोने और चांदी की कीमतों में हालिया नरमी तथा त्योहारी और वैवाहिक सीजन का एक साथ आना मुख्य कारण है। • मूल्यों में गिरावट: हाल के दिनों में सोने और चांदी के भाव में राहत मिली है। इसके चलते वे खरीदार बाजार में वापस लौटे हैं जो पिछली मूल्य वृद्धि के कारण अपनी खरीदारी टाल रहे थे। • त्योहारी और वैवाहिक सीजन: विवाह और त्योहारों के शुभ मुहूर्त शुरू होने से धार्मिक पूजा और उपहारों की पारंपरिक मांग एक साथ निकल आई है। परिवार शुभ कार्यों के लिए कीमती धातुओं की खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। • नवाचार और आधुनिक तकनीक: कारीगरों ने खोखली संरचना वाली मूर्तियों का निर्माण किया है, जिससे कम वजन में भी बड़ा और शानदार लुक मिल जाता है। इस तकनीकी समाधान ने ग्राहकों को कम खर्च में भव्य वस्तुएं खरीदने की सुविधा दी है। सवाल-जवाब 1. अंबाला सराफा बाजार में ग्राहकों की भीड़ अचानक क्यों बढ़ गई? सोने और चांदी के दामों में आई हालिया गिरावट और शादी-त्योहारों के सीजन के चलते बाजार में खरीदारी तेज हो गई है। 2. इस बार लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों में क्या खास देखा जा रहा है? साउथ इंडियन स्टाइल में बनी लगभग साढ़े तीन किलो की चांदी की मूर्तियों पर सोने का बारीक वर्क किया गया है, जो बहुत लोकप्रिय हो रही हैं। 3. खोखली या होल मूर्तियों की क्या विशेषता है? इन मूर्तियों की बनावट ऐसी होती है कि ये देखने में काफी भारी और भव्य लगती हैं, लेकिन इनका वास्तविक वजन और दाम कम होता है। 4. उपहार देने के लिए लोग किन चीजों को अधिक पसंद कर रहे हैं? विवाह और अन्य अवसरों पर उपहार देने के लिए चांदी के डिनर सेट और बर्तनों की मांग सबसे अधिक बनी हुई है। 5. चांदी की कौन सी अनूठी कलाकृति बाजार में आकर्षण का केंद्र बनी है? लकड़ी की एक नक्काशीदार कुर्सी पर लगभग 600 ग्राम चांदी का पत्तर चढ़ाकर तैयार की गई कलाकृति लोगों को खूब आकर्षित कर रही है। 6. लक्ष्मी-गणेश के अलावा बाजार में किन अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं? बाजार में रामदरबार, खाटू श्याम, बजरंग बली, नंदी महाराज और राधा-कृष्ण की चांदी की मूर्तियां भी उपलब्ध हैं। https://trendkia.com/haryana/dhatuon-ke-dama-narama-hote-hi-chamaka-ambala-sarapha-bajara-khokhali-murtiyon-aura-khasa-kalakritiyon-para-umare-kharidara-56836 TrendKia — Har trend, sabse pehle.