# दीवाली की रात अंबाला में चौराहों पर दिखें ये टोटके, तो बिल्कुल न करें ऐसी गलती

> दीपावली की रात चौराहों और तिराहों पर कई तरह की तांत्रिक सामग्रियां मिलने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य पंडित आरके शर्मा के अनुसार सड़क पर ऐसी चीजें मिलने पर घबराने के बजाय क्या सावधानियां रखनी चाहिए।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/divali-ki-rata-ambala-men-chaurahon-para-dikhen-ye-totake-to-bilkula-na-karen-aisi-galati-51385 · **Language:** Hindi
**Tags:** दीपावली टोटके, अंबाला ज्योतिष, पंडित आरके शर्मा, दीपावली मान्यता, अंधविश्वास उपाय

अंबाला में दीपावली का पावन पर्व उत्साह, दीपों की रोशनी और सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है। इस खास अवसर पर लोग अपने घरों को दीपों से रोशन करते हैं और विधि-विधान से मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। दीपावली की अमावस्या की रात को लेकर समाज में तमाम तरह की लोक-मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। इन्हीं पारंपरिक मान्यताओं के प्रभाव के कारण कई लोग इस रात तांत्रिक गतिविधियों और टोटकों को लेकर खासे सतर्क और सावधान नजर आते हैं। ऐसे में रात के समय सड़क पर आवाजाही करते वक्त किन विशेष बातों का ख्याल रखना चाहिए और यदि रास्ते में कोई संदिग्ध या अनजान वस्तु नजर आ जाए तो क्या कदम उठाने चाहिए, इन तमाम पहलुओं पर अंबाला के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित आरके शर्मा ने विस्तार से जानकारी दी है। पंडित आरके शर्मा का कहना है कि दीपावली यानी साल की सबसे बड़ी अमावस्या की इस खास रात को कुछ लोग पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर शहर के चौराहों और तिराहों पर विभिन्न प्रकार के टोटके करते हैं, जिसके प्रति आम जनमानस को जागरूक रहना चाहिए।

## सड़क पर चलते समय रखें विशेष सावधानी
दीपावली की रात सड़क पर आवाजाही करते समय लोगों को बहुत अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। रास्ते में चलते वक्त यदि किसी चौराहे या तिराहे पर कोई अनजान वस्तु या सामग्री पड़ी हुई दिखाई दे, तो उसे बिना किसी जरूरी काम के बिल्कुल नहीं छूना चाहिए। चौराहों और तीन रास्तों के मिलन यानी तिराहों के आसपास पड़ी इन संदिग्ध चीजों को लेकर हमेशा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। यदि कोई नासमझ व्यक्ति अनजाने में या गलती से ऐसी किसी वस्तु को छू लेता है या फिर उसका पैर उस पर पड़ जाता है, तो उसे किसी भी प्रकार के भय या घबराहट में आने के बजाय पूरी तरह से शांत और संयमित रहना चाहिए, क्योंकि घबराने से मानसिक तनाव ही बढ़ता है।

## पीली सरसों और कपूर से जुड़े पारंपरिक उपाय
ज्योतिषाचार्य पंडित आरके शर्मा आगे बताते हैं कि लोक-मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार पीली सरसों, कपूर की टिकिया और तीन लौंग का प्रयोग करके एक विशेष उपाय करने का विधान है। इस प्रक्रिया में इन सारी सामग्रियों को संबंधित व्यक्ति के ऊपर से सात बार घड़ी की दिशा या उल्टी दिशा में घुमाने के बाद जलाने की परंपरा है। इसके पश्चात जो राख बच जाती है, उसे या तो किसी नाली में प्रवाहित कर देने या फिर किसी पेड़ के नीचे रख देने की मान्यता है। हालांकि, इस दौरान यह बेहद जरूरी है कि कपूर और अन्य ज्वलनशील सामग्रियों को जलाते समय आग से जुड़ी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। इन चीजों को हमेशा खुले और सुरक्षित स्थानों पर ही जलाना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और बची हुई राख को नियमों के अनुसार नाली में डाल देना चाहिए।

## रात के डर से मुक्ति पाने के अचूक उपाय
पंडित आरके शर्मा के अनुसार जिन लोगों को अक्सर रात के समय किसी अज्ञात भय का सामना करना पड़ता है या डर सताता है, वे पारंपरिक मान्यताओं के तहत कुछ खास उपाय अपना सकते हैं। इसके लिए पीली सरसों, पांच दाने काली मिर्च, एक कपूर की टिकिया, एक सूखी लाल मिर्च और थोड़ा सा नमक लेकर उसे एक पीले या फिर काले रंग के कपड़े में अच्छी तरह बांध लिया जाता है। इस पोटली जैसी सामग्री को पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से उतारकर किसी बहते हुए पानी में प्रवाहित करने की पुरानी परंपरा हमारे समाज में प्रचलित है। इसके अलावा, यदि किसी इंसान को रात के वक्त अत्यधिक डर का अनुभव होता है, तो वह नजदीकी मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ कर सकता है। रात के समय डर लगने की स्थिति में हनुमान मंदिर जाकर भगवान के चरणों में अर्पित सिंदूर को अपने माथे पर लगा लेना भी बहुत असरकारक माना जाता है। ऐसा करने से किसी भी प्रकार की नकारात्मक या बुरी ऊर्जा उस व्यक्ति के आसपास भी नहीं भटकती है और मानसिक बल प्राप्त होता है।

## इसका आप पर असर
दीपावली की रात सड़क पर निकलने वाले आम नागरिकों और राहगीरों के लिए सतर्कता बरतना बहुत जरूरी है ताकि किसी अनहोनी या भ्रम से बचा जा सके।

- **अंबाला में:** स्थानीय नागरिकों को रात के समय चौराहों या तिराहों से गुजरते वक्त सड़क पर पड़ी अनजान चीजों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। यदि किसी का पैर ऐसी वस्तु पर पड़ जाए, तो घबराने के बजाय मानसिक संयम रखना चाहिए और शांत रहना चाहिए।
- **भारत में:** देश भर में लोग दीपावली की रात पारंपरिक मान्यताओं और अंधविश्वासों के चलते विशेष सावधानी बरतते हैं। इस दौरान सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए खुले में ज्वलनशील चीजें जलाने से बचना चाहिए ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

## ऐसा क्यों हुआ
दीपावली की अमावस्या की रात को लेकर समाज में प्राचीन काल से ही विभिन्न प्रकार की लोक-मान्यताएं और तांत्रिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। लोग मानते हैं कि इस खास रात्रि में नकारात्मक ऊर्जाएं अधिक सक्रिय होती हैं, जिसके निवारण के लिए विभिन्न उपाय किए जाते हैं।

- **पारंपरिक मान्यताएं:** समाज के एक वर्ग में चौराहों और तिराहों पर विशेष प्रकार के टोटके और अनुष्ठान करने की पुरानी परंपरा चली आ रही है।
- **मानसिक भय का निवारण:** रात के समय अकेले में होने वाले अज्ञात भय और मानसिक घबराहट को दूर करने के लिए पारंपरिक उपायों का सहारा लिया जाता है।
- **नकारात्मक ऊर्जा से बचाव:** धार्मिक और लोक मान्यताओं के अनुसार पीली सरसों, नमक और कपूर जैसी सामग्रियों के प्रयोग से बुरी ऊर्जाओं को दूर रखने का प्रयास किया जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. दीपावली की रात चौराहों पर किस तरह की वस्तुएं मिलने की मान्यता है?
दीपावली की रात चौराहों और तिराहों पर पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोगों द्वारा किए गए टोटके और तांत्रिक सामग्रियां मिलने की मान्यता है।

### 2. रास्ते में कोई अनजान वस्तु दिखने पर क्या करना चाहिए?
सड़क पर चलते समय रास्ते में पड़ी किसी भी अनजान वस्तु को बिना जरूरत के नहीं छूना चाहिए और सतर्क रहना चाहिए।

### 3. यदि गलती से पैर किसी ऐसी वस्तु पर पड़ जाए तो क्या करें?
यदि गलती से पैर किसी वस्तु पर पड़ जाए तो घबराने के बजाय पूरी तरह से शांत और संयमित रहना चाहिए।

### 4. पीली सरसों और कपूर का उपाय किस प्रकार किया जाता है?
इन सामग्रियों को व्यक्ति के ऊपर से सात बार घुमाने के बाद सुरक्षित स्थान पर जलाने और बची हुई राख को नाली में डालने की मान्यता है।

### 5. रात के समय डर लगने पर क्या उपाय बताए गए हैं?
रात में डर लगने पर पीली सरसों, काली मिर्च, कपूर, लाल मिर्च और नमक को कपड़े में बांधकर प्रवाहित करने या हनुमान मंदिर जाने का विधान है।

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