{
  "type": "article",
  "title": "फरीदाबाद अस्पताल में खड़ी एंबुलेंसों पर 50 लाख का ईंधन घोटाला, सीएम सैनी ने बैठाया जांच आयोग",
  "summary": "फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में महीनों से गैरेज और मोर्चरी के पास खड़ी चार एंबुलेंसों के फ्यूल कार्ड से करीब 50 लाख रुपये का डीजल निकालने का मामला उजागर हुआ है। विपक्ष के कड़े ऐतराज के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस पूरे खेल की जांच के आदेश जारी किए हैं।",
  "content": "हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बीके सिविल अस्पताल में सरकारी धन की कथित बंदरबांट का एक चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। अस्पताल परिसर और वर्कशॉप में महीनों से बंद पड़ी चार एंबुलेंसों के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये का डीजल फूंक दिया गया। इस वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया, जिसके बाद नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के महानिदेशक डॉ वीरेंदर यादव स्वयं फरीदाबाद पहुंचे और मामले की गहन पड़ताल के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया। इस समिति को 5 दिनों के भीतर पूरी पड़ताल कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि समिति की सिफारिशें मिलते ही दोषी पाए जाने वाले कर्मियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।\n\nफ्यूल कार्ड के ऑडिट में खुला फर्जीवाड़े का खेल\nइस पूरे प्रकरण की शुरुआत पंचकूला स्थित विभागीय मुख्यालय द्वारा एंबुलेंस के फ्यूल कार्ड लेनदेन की नियमित जांच के दौरान हुई। मुख्यालय के अधिकारियों ने जब खर्च और वास्तविक आवाजाही का मिलान किया, तो सामने आया कि कई वाहन बिना एक किलोमीटर चले ही लगातार पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में डीजल ले रहे थे। यह कोई भूल या एकाध बार का मामला नहीं था, बल्कि सुनियोजित तरीके से बार-बार डीजल खरीदे जाने की प्रविष्टियां दर्ज की जा रही थीं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, वाहनों के स्थिर खड़े रहने के बावजूद करीब 50 लाख रुपये का ईंधन कागजों में खरीद दिखाया गया। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि जिस समयावधि में यह ईंधन भरा गया, उस दौरान चारों वाहन अस्पताल परिसर और वर्कशॉप से बाहर तक नहीं निकले थे।\n\nमोर्चरी और वर्कशॉप में खड़ी गाड़ियों में भरता रहा तेल\nअस्पताल रिकॉर्ड की छानबीन में यह विवरण दर्ज मिला कि चार में से दो एंबुलेंस पिछले तीन से चार महीनों से अस्पताल की मोर्चरी के पास लावारिस हालत में खड़ी थीं। जमीन पर पहिए थमे रहने के बाद भी 11 अक्टूबर तक इनके फ्यूल कार्ड से लगातार पेट्रोल पंप पर डीजल खरीद की प्रविष्टियां चढ़ाई जा रही थीं। शेष दो एंबुलेंसों की स्थिति भी ऐसी ही पाई गई, जिनमें से एक जनवरी माह से और दूसरी अगस्त से अधिकृत एजेंसी की वर्कशॉप में मरम्मत के इंतजार में खड़ी थीं। इन निष्क्रिय वाहनों के कार्ड से भी क्रमशः 16 सितंबर और 11 अक्टूबर तक भारी मात्रा में डीजल उठाने का औपचारिक रिकॉर्ड मिला है। सरकारी एंबुलेंस सेवा के नाम पर जारी कार्ड्स के इस तरह दुरुपयोग ने समूचे स्वास्थ्य ढांचे की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल दाग दिए हैं।\n\nराजनीतिक तकरार और सरकार का जांच आदेश\nइस वित्तीय अनियमितता की खबर सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर सरकार के प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन में ऐसा तंत्र काम कर रहा है जहां खड़ी गाड़ियां लाखों रुपये का ईंधन निगल रही हैं। उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की कि प्रदेश स्तर पर इस किस्म की घटनाएं व्यापक स्तर पर हो सकती हैं और निचले स्तर के कर्मचारियों की आड़ में शीर्ष अफसरों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राजनीतिक दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद घटनाक्रम का संज्ञान लिया और उच्चस्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए।\n\nइसका आप पर असर\nसरकारी एंबुलेंस सेवाओं में इस तरह के फर्जीवाड़े से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और करदाताओं के पैसों की जवाबदेही पर सीधा असर पड़ता है।\n\n• भारत में: सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में ईंधन कार्ड्स और सरकारी वाहनों की डिजिटल निगरानी प्रणाली की कमजोरियों की समीक्षा की जा सकती है। इससे राज्यों में स्वास्थ्य बजट के ऑडिट और वाहन ट्रैकिंग नियमों को और अधिक कड़ा किए जाने की संभावना है।\n• फरीदाबाद में: बीके सिविल अस्पताल में निष्क्रिय खड़ी एंबुलेंसों की वजह से स्थानीय मरीजों को आपातकालीन परिवहन मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन द्वारा जांच के बाद अस्पताल की सभी चिकित्सा गाड़ियों के संचालन और मरम्मत प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकती है।\n• सरकारी व्यवस्था पर: स्वास्थ्य विभाग के निचले कर्मियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर वित्तीय जवाबदेही तय होगी। इसके चलते भविष्य में बिना जीपीएस ट्रैकिंग डाटा के किसी भी सरकारी वाहन का ईंधन बिल पास नहीं किया जाएगा।\n• करदाताओं के लिए: जनता के टैक्स से स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आवंटित धन की बर्बादी पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार पर सख्त नियम बनाने का दबाव बढ़ेगा। इससे आम नागरिक पारदर्शी प्रशासनिक जांच की उम्मीद कर सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह मामला पंचकूला मुख्यालय द्वारा सरकारी एंबुलेंसों के फ्यूल कार्ड ट्रांजैक्शन की ऑडिटिंग के दौरान सामने आया, जहां भौतिक रूप से खड़ी गाड़ियों के नाम पर कागजों में लगातार डीजल बिल पास किए जा रहे थे।\n\n• सीधा कारण: अस्पताल की चार एंबुलेंस महीनों से मोर्चरी और वर्कशॉप में निष्क्रिय खड़ी थीं, लेकिन उनके आवंटित फ्यूल कार्ड्स का उपयोग करके पेट्रोल पंपों से बार-बार डीजल की फर्जी खरीद दर्ज कराई गई।\n• लापरवाही की परिस्थितियां: अस्पताल और स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने लंबे समय तक ईंधन खर्च के बिलों का मिलान गाड़ियों के वास्तविक रनिंग लॉगबुक और जीपीएस रिकॉर्ड से नहीं किया, जिससे कर्मचारियों को धांधली का मौका मिला।\n• आगामी कदम: नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के महानिदेशक ने पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है जिसे 5 दिनों में रिपोर्ट देनी है, जिसके आधार पर दोषियों पर कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फरीदाबाद के किस अस्पताल में डीजल की गड़बड़ी का मामला सामने आया है?\nयह मामला फरीदाबाद जिले के बीके सिविल अस्पताल में सामने आया है।\n\n2. एंबुलेंसों के नाम पर कितने रुपये के डीजल की हेराफेरी का अनुमान है?\nप्रारंभिक जांच में चार एंबुलेंसों के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये का डीजल खरीदे जाने का अनुमान जताया गया है।\n\n3. जांच समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कितना समय दिया गया है?\nजांच समिति को पांच दिन के अंदर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपने का आदेश दिया गया है।\n\n4. क्या डीजल खरीद के दौरान ये एंबुलेंस सड़कों पर चल रही थीं?\nविभाग के अनुसार, दो एंबुलेंस अस्पताल मोर्चरी के पास और दो एंबुलेंस वर्कशॉप में महीनों से खड़ी थीं और उन्होंने कोई दूरी तय नहीं की थी।\n\n5. इस मामले पर मुख्यमंत्री स्तर पर क्या निर्देश जारी हुए हैं?\nमामला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संज्ञान लेते हुए मामले की पूरी जांच के आदेश दिए हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/haryana/faridabad-aspatala-men-khari-enbulenson-para-50-lakha-ka-indhana-ghotala-cm-saini-ne-baithaya-jancha-ayoga-55088",
  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-11-02",
  "tags": [
    "फरीदाबाद",
    "हरियाणा स्वास्थ्य विभाग",
    "बीके सिविल अस्पताल",
    "एंबुलेंस डीजल घोटाला",
    "नायब सिंह सैनी",
    "दुष्यंत चौटाला"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia",
  "whatItMeansForYou": "सरकारी एंबुलेंस सेवाओं में इस तरह के फर्जीवाड़े से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और करदाताओं के पैसों की जवाबदेही पर सीधा असर पड़ता है।\n\n• भारत में: सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में ईंधन कार्ड्स और सरकारी वाहनों की डिजिटल निगरानी प्रणाली की कमजोरियों की समीक्षा की जा सकती है। इससे राज्यों में स्वास्थ्य बजट के ऑडिट और वाहन ट्रैकिंग नियमों को और अधिक कड़ा किए जाने की संभावना है।\n• फरीदाबाद में: बीके सिविल अस्पताल में निष्क्रिय खड़ी एंबुलेंसों की वजह से स्थानीय मरीजों को आपातकालीन परिवहन मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन द्वारा जांच के बाद अस्पताल की सभी चिकित्सा गाड़ियों के संचालन और मरम्मत प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकती है।\n• सरकारी व्यवस्था पर: स्वास्थ्य विभाग के निचले कर्मियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर वित्तीय जवाबदेही तय होगी। इसके चलते भविष्य में बिना जीपीएस ट्रैकिंग डाटा के किसी भी सरकारी वाहन का ईंधन बिल पास नहीं किया जाएगा।\n• करदाताओं के लिए: जनता के टैक्स से स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आवंटित धन की बर्बादी पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार पर सख्त नियम बनाने का दबाव बढ़ेगा। इससे आम नागरिक पारदर्शी प्रशासनिक जांच की उम्मीद कर सकते हैं।",
  "whyItHappened": "यह मामला पंचकूला मुख्यालय द्वारा सरकारी एंबुलेंसों के फ्यूल कार्ड ट्रांजैक्शन की ऑडिटिंग के दौरान सामने आया, जहां भौतिक रूप से खड़ी गाड़ियों के नाम पर कागजों में लगातार डीजल बिल पास किए जा रहे थे।\n\n• सीधा कारण: अस्पताल की चार एंबुलेंस महीनों से मोर्चरी और वर्कशॉप में निष्क्रिय खड़ी थीं, लेकिन उनके आवंटित फ्यूल कार्ड्स का उपयोग करके पेट्रोल पंपों से बार-बार डीजल की फर्जी खरीद दर्ज कराई गई।\n• लापरवाही की परिस्थितियां: अस्पताल और स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने लंबे समय तक ईंधन खर्च के बिलों का मिलान गाड़ियों के वास्तविक रनिंग लॉगबुक और जीपीएस रिकॉर्ड से नहीं किया, जिससे कर्मचारियों को धांधली का मौका मिला।\n• आगामी कदम: नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के महानिदेशक ने पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है जिसे 5 दिनों में रिपोर्ट देनी है, जिसके आधार पर दोषियों पर कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।",
  "questionsAndAnswers": [
    {
      "question": "फरीदाबाद के किस अस्पताल में डीजल की गड़बड़ी का मामला सामने आया है?",
      "answer": "यह मामला फरीदाबाद जिले के बीके सिविल अस्पताल में सामने आया है।"
    },
    {
      "question": "एंबुलेंसों के नाम पर कितने रुपये के डीजल की हेराफेरी का अनुमान है?",
      "answer": "प्रारंभिक जांच में चार एंबुलेंसों के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये का डीजल खरीदे जाने का अनुमान जताया गया है।"
    },
    {
      "question": "जांच समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कितना समय दिया गया है?",
      "answer": "जांच समिति को पांच दिन के अंदर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपने का आदेश दिया गया है।"
    },
    {
      "question": "क्या डीजल खरीद के दौरान ये एंबुलेंस सड़कों पर चल रही थीं?",
      "answer": "विभाग के अनुसार, दो एंबुलेंस अस्पताल मोर्चरी के पास और दो एंबुलेंस वर्कशॉप में महीनों से खड़ी थीं और उन्होंने कोई दूरी तय नहीं की थी।"
    },
    {
      "question": "इस मामले पर मुख्यमंत्री स्तर पर क्या निर्देश जारी हुए हैं?",
      "answer": "मामला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संज्ञान लेते हुए मामले की पूरी जांच के आदेश दिए हैं।"
    }
  ]
}