# फरीदाबाद के 50 साल पुराने सरकारी कॉलेज में 7 हजार छात्र खस्ताहाल इमारत में पढ़ने को मजबूर, दिल्ली हादसे के बाद उपजा गुस्सा

> दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद फरीदाबाद के पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। 2016 में लोक निर्माण विभाग द्वारा कंडम घोषित 50 साल पुरानी इमारत में अब भी पढ़ाई जारी है, जिससे आक्रोशित छात्रों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/faridabad-ke-50-sala-purane-sarakari-koleja-men-7-hajara-chhatra-khastahala-imarata-men-parhane-ko-majabura-delhi-hadase-ke-bada-u-30385 · **Language:** Hindi
**Tags:** फरीदाबाद, पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज, हरियाणा शिक्षा, कंडम बिल्डिंग, छात्र प्रदर्शन, MDU फरीदाबाद

दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में एक पीजी छात्रावास की इमारत ढहने और उसमें कई विद्यार्थियों की दुखद मृत्यु होने के बाद अब हरियाणा के फरीदाबाद स्थित पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हो गई हैं। सेक्टर-16 में बना यह प्रतिष्ठित सरकारी कॉलेज लगभग 50 वर्ष पुराना है और वर्ष 2016 में ही लोक निर्माण विभाग की ओर से इसे कंडम घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद जोखिम भरी इस पुरानी संरचना में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे विद्यार्थियों का जीवन लगातार संकट में बना हुआ है।

## कॉलेज के मुख्य द्वार पर विद्यार्थियों का जोरदार प्रदर्शन
खस्ताहाल भवन की अनदेखी से नाराज सैकड़ों विद्यार्थी सोमवार सुबह संस्थान के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU), जिला प्रशासन तथा कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। लगभग सात हजार विद्यार्थियों वाले इस प्रमुख राजकीय महाविद्यालय की गणना शहर के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों में की जाती है। इतिहास में इस कॉलेज से कई जाने-माने मंत्री, जनप्रतिनिधि और सफल उद्योगपति शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, लेकिन वर्तमान समय में प्रशासनिक उदासीनता के कारण यहाँ अध्ययनरत छात्रों को रोजमर्रा की बुनियादी समस्याओं और जानलेवा परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

## बजट की कमी और ठेकेदार के पीछे हटने से अटका नया निर्माण
जर्जर हो चुकी पुरानी इमारत के स्थान पर एक नई आधुनिक संरचना तैयार करने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2019 में छह मंजिला भवन के निर्माण की शुरुआत की थी। हालाँकि, वर्ष 2020 में फैली कोरोना महामारी के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया। महामारी के बाद परियोजना में बजट की भारी कमी आ गई जिसके चलते काम की गति अत्यंत धीमी पड़ गई। परियोजना की अनुमानित लागत में दो बार वृद्धि की गई, लेकिन निर्माण प्रक्रिया में अत्यधिक देरी होने के कारण पहली निर्माण कंपनी ने आगे काम करने से इनकार कर दिया। अनुबंध समाप्त होने से नई इमारत का निर्माण बीच में ही अटक गया और छात्र नई सुविधा से वंचित रह गए।

## पानी की किल्लत और बदहाल शौचालयों से जूझते विद्यार्थी
पुराने परिसर के भीतर मूलभूत सुविधाओं का अभाव विद्यार्थियों की परेशानी को कई गुना बढ़ा रहा है। प्रथम वर्ष के छात्र राहुल ने परिसर के आंतरिक हालातों पर चिंता जाहिर करते हुए बताया कि पुरानी बिल्डिंग में व्यवस्थाएं बेहद खराब हैं। पीने के पानी की उचित आपूर्ति न होने के कारण विद्यार्थियों को रोजाना बाहर से पैक्ड पानी की बोतलें खरीदनी पड़ती हैं। इसके अलावा शौचालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहाँ नियमित सफाई न होने से दुर्गंध और संक्रमण फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। राहुल के अनुसार कई कक्षाओं की खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं, जबकि पीछे नई इमारत लगभग तैयार होने के बावजूद वहां कक्षाएं स्थानांतरित नहीं की जा रही हैं।

## उखड़ता प्लास्टर, निकलते सरिये और बिजली बैकअप का अभाव
एक अन्य छात्र रवि, जो बीए प्रथम वर्ष में पढ़ाई करते हैं, ने परिसर के शैक्षणिक वातावरण और ढांचागत कमियों का ब्योरा दिया। रवि ने स्पष्ट किया कि उनकी कक्षा वाले कमरे में फिलहाल कोई बड़ी तात्कालिक समस्या नहीं है और अंदर बैठकर पढ़ाई हो रही है, लेकिन बाहर से देखने पर पूरी इमारत जर्जर दिखाई देती है। दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ चुका है और लोहे के सरिये बाहर निकल आए हैं। रवि ने बताया कि जलापूर्ति बाधित होने पर पानी बाहर से लाना पड़ता है। गर्मी के मौसम में बिजली कटने पर कोई पावर बैकअप उपलब्ध न होने से पंखे बंद हो जाते हैं, जिससे उमस भरी कक्षाओं में बैठना दुष्कर हो जाता है।

## छह महीने में नई इमारत में शिफ्टिंग की उम्मीद और प्रशासन का रुख
बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र साहिल मौर्य ने आशा व्यक्त की है कि आगामी छह महीनों के भीतर सभी कक्षाओं को पीछे बन रही नई इमारत में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। साहिल ने माना कि जिस कमरे में वह बैठते हैं वह ज्यादा जर्जर नहीं है, फिर भी पूरी बिल्डिंग काफी पुरानी हो चुकी है। इस पूरे मामले पर कॉलेज प्रशासन की ओर से शैलेश्वर कौशिक ने फोन पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि नई इमारत का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत कार्य पूरा होते ही सभी विद्यार्थियों को नए और सुरक्षित परिसर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि वर्तमान में पठन-पाठन के लिए केवल पूर्णतः सुरक्षित कमरों का ही उपयोग किया जा रहा है।

## इसका आप पर असर
यह समाचार जर्जर सरकारी बुनियादी ढांचे में पढ़ रहे लाखों छात्रों की सुरक्षा और सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधे प्रभाव डालता है।

- **भारत में:** देश भर के सरकारी कॉलेजों में पुरानी इमारतों का सुरक्षा ऑडिट तेज होने की संभावना है। इससे विभिन्न राज्यों में पढ़ रहे छात्रों को सुरक्षित और आधुनिक शैक्षणिक माहौल मिलने में मदद मिलेगी।
- **फरीदाबाद में:** पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज के करीब 7,000 छात्रों को जल्द ही नए परिसर में शिफ्ट किया जाएगा। इससे छात्रों को टूटी खिड़कियों, पेयजल की किल्लत और अस्वास्थ्यकर शौचालयों से स्थायी मुक्ति मिलेगी।
- **अभिभावकों के लिए:** कॉलेज परिसर में सुरक्षा उपाय बेहतर होने से अभिभावकों की चिंताएं कम होंगी। उन्हें अपने बच्चों को जर्जर इमारतों में भेजने के खतरे से राहत मिलेगी।
- **स्थानीय प्रशासन के लिए:** लोक निर्माण विभाग पर निर्माण कार्यों को तय सीमा में पूरा करने का दबाव बढ़ेगा। इससे देरी से चल रही अन्य ढांचागत परियोजनाओं में भी तेजी आने के आसार हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति 50 साल पुरानी इमारत को समय पर न बदलने और नई इमारत का निर्माण कार्य बार-बार अटकने के कारण उत्पन्न हुई है। 2016 में इमारत के कंडम घोषित होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था की कमी के कारण कक्षाएं यहीं चलती रहीं।

- **इमारत का अत्यधिक पुराना होना:** कॉलेज की वर्तमान इमारत लगभग 50 वर्ष पुरानी हो चुकी है और जर्जर स्थिति में है। इसी कारण लोक निर्माण विभाग ने 2016 में ही इसे आधिकारिक रूप से कंडम घोषित कर दिया था।
- **कोरोना महामारी से काम बाधित होना:** PWD ने 2019 में छह मंजिला नई इमारत का निर्माण शुरू कराया था। वर्ष 2020 में आई कोरोना महामारी के कारण निर्माण कार्य लंबे समय तक रुका रहा।
- **बजट की कमी और ठेकेदार का हटना:** महामारी के बाद परियोजना में बजट की भारी कमी आ गई और दो बार धन बढ़ाने के बावजूद काम में देरी हुई। इस अत्यधिक विलंब के कारण पहली निर्माण कंपनी ने काम आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
- **दिल्ली हादसे के बाद बढ़ा आक्रोश:** दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत गिरने से छात्रों की मौत की घटना हाल ही में हुई। इस दुर्घटना ने फरीदाबाद के छात्रों में भी अपनी सुरक्षा को लेकर डर पैदा कर दिया और वे सड़क पर उतर आए।

## सवाल-जवाब

### 1. फरीदाबाद के पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज में छात्र विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
छात्र MDU, जिला प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ इसलिए प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि 2016 में कंडम घोषित 50 साल पुरानी इमारत में अब भी कक्षाएं चलाई जा रही हैं।

### 2. सोमवार को छात्रों के अचानक प्रदर्शन की मुख्य वजह क्या थी?
दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत गिरने से छात्रों की हुई मौत की घटना के बाद फरीदाबाद कॉलेज के छात्रों में भी अपनी जर्जर इमारत को लेकर सुरक्षा संबंधी डर पैदा हो गया।

### 3. नई छह मंजिला इमारत का निर्माण कार्य क्यों अटक गया?
2019 में शुरू हुआ निर्माण कार्य कोरोना महामारी, बजट की कमी और दो बार धन बढ़ाए जाने के बाद पहली निर्माण कंपनी के पीछे हटने के कारण लटक गया।

### 4. पुराने भवन में छात्रों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
छात्रों को पीने के पानी की किल्लत, टूटी खिड़कियों, गंदे शौचालयों, दीवारों से निकलते सरियों और गर्मी में बिजली बैकअप न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

### 5. नई इमारत में शिफ्टिंग को लेकर कॉलेज प्रशासन का क्या कहना है?
कॉलेज के शैलेश्वर कौशिक ने बताया कि नई बिल्डिंग का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और काम खत्म होते ही छात्रों को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।

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