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  "title": "फरीदाबाद के दयालपुर में बदहाल रास्ते और गंदे तालाब से लोग बेहाल, पलायन को मजबूर हुआ परिवार",
  "summary": "फरीदाबाद के दयालपुर गांव में आजादी के 80 साल बाद भी कच्चा रास्ता कीचड़ और जलभराव से जूझ रहा है, जहां ओवरफ्लो होते तालाब के पानी ने खेतों और घरों को संकट में डाल दिया है।",
  "content": "हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित दयालपुर गांव बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। देश की आजादी को 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस गांव के एक प्रमुख रास्ते की दशा नहीं सुधर सकी है। पक्की सड़क न होने के कारण यह पूरा मार्ग कीचड़, गड्ढों और गंदे पानी के भराव का शिकार बना हुआ है। सामान्य दिनों में भी यहां आवाजाही करना जोखिम भरा रहता है, जबकि बारिश के मौसम में पैदल चलना तक दूभर हो जाता है। दोपहिया वाहनों जैसे बाइक और स्कूटी का यहां से निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।\n\nजलभराव और ओवरफ्लो होते तालाब से बढ़ी परेशानी\nमार्ग के ठीक किनारे स्थित सवा दो बीघे का तालाब ग्रामीणों के लिए एक गंभीर संकट बन चुका है। तालाब की नियमित सफाई और उचित देखरेख न होने से उसका गंदा और दूषित पानी किनारों से बाहर बहने लगता है। यह ओवरफ्लो हुआ पानी सीधे आसपास के खेतों में भर जाता है, जिससे किसानों की खड़ी फसलें नष्ट हो रही हैं। गांव वालों का कहना है कि दयालपुर में कुल पांच जोहड़ यानी तालाब मौजूद हैं। प्रशासनिक स्तर पर तालाबों के सौंदर्यीकरण और कायाकल्प के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। ग्रामीणों में चर्चा है कि एक-दो जलाशयों के सुधार का काम केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित रहा है।\n\n1952 से मतदान कर रहे ग्रामीण, स्मार्ट सिटी में भी हालात जस के तस\nस्थानीय निवासी बबलू हुड्डा के अनुसार दयालपुर उनका पैतृक गांव है और यह चक का रास्ता लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। वर्ष 2014 में फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल किया गया था, लेकिन इस क्षेत्र की जमीनी तस्वीर नहीं बदल सकी। पंचायत स्तर से रास्ते के एक तरफ दीवार खड़ी की गई और उस पर केवल मिट्टी डलवा दी गई, मगर सड़क को पक्का करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय बुजुर्ग वर्ष 1952 से लगातार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते आ रहे हैं, इसके बावजूद यह इलाका आज तक एक पक्की सड़क की राह देख रहा है।\n\nरास्ते की बदहाली से घर में ताला लगाकर पलायन को मजबूर परिवार\nसड़क न बनने का असर अब गांव के रिहायशी जीवन पर भी दिखने लगा है। ग्रामीण सुरेंद्र ने साझा किया कि इसी रास्ते के अंतिम छोर पर एक पक्का मकान बना हुआ है। लगातार कीचड़ भरे रहने और आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो जाने की वजह से उस घर का परिवार अपने मकान पर ताला जड़कर कहीं और रहने चला गया। बारिश के दिनों में रास्ते के हालात इतने विकट हो जाते हैं कि रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए भी बाहर निकलना असंभव हो जाता है। स्थानीय लोगों की स्पष्ट मांग है कि पंचायत और संबंधित विभाग मिट्टी डालने का दिखावा बंद करके तत्काल इस मार्ग का पक्का निर्माण करवाएं।\n\nगंदगी से मच्छरों का प्रकोप और जहरीले जीवों का खतरा\nगांव के निवासी संजीव हुड्डा ने बताया कि रास्ते और तालाब की स्थिति को सुधारने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित मंचों पर शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। तालाब की निकासी अवरुद्ध होने से गंदा पानी सीधे घरों की दीवारों और आंगन तक पहुंच जाता है। ठहरे हुए गंदे पानी के चलते इलाके में मच्छरों का भारी जमावड़ा हो गया है, जिससे बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही तालाब के आसपास झाड़ियों और दलदल के कारण जहरीले सांप भी लगातार दिखाई देते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की जान पर संकट बना रहता है। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ तालाब की गहरी सफाई और गंदे पानी की समुचित निकासी की स्थाई व्यवस्था तुरंत की जाए।\n\nइसका आप पर असर\nफरीदाबाद के दयालपुर गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से स्थानीय लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और खेती पर सीधा असर पड़ रहा है।\n\n• फरीदाबाद और दयालपुर में: दयालपुर गांव के चक मार्ग पर आवाजाही करने वाले ग्रामीणों और किसानों को हर दिन कीचड़ व जलभराव से जूझना पड़ रहा है। सड़क संपर्क टूटने के चलते परिवारों को पलायन करना पड़ रहा है तथा जलभराव से फसलों को सीधा नुकसान हो रहा है।\n• किसानों और संपत्ति पर प्रभाव: सवा दो बीघे के तालाब से ओवरफ्लो होने वाला गंदा पानी सीधे फसलों में घुस रहा है। इससे किसानों की मेहनत और पूंजी नष्ट हो रही है और जमीन की उर्वरता पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।\n• स्वास्थ्य और जनसुरक्षा: तालाब की सफाई न होने से मच्छरों का भारी प्रकोप है और जहरीले सांप रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों को डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों और सर्पदंश के निरंतर खतरे के साए में जीना पड़ रहा है।\n• यातायात और आवागमन: बारिश के दिनों में रास्ते पर बाइक, स्कूटी और पैदल चलना तक असंभव हो जाता है। छात्र-छात्राओं और कामकाजी लोगों का समय पर गंतव्य तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदयालपुर गांव में इस गंभीर समस्या के पनपने के पीछे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक उपेक्षा और बुनियादी ढांचे के आधे-अधूरे कार्य जिम्मेदार हैं।\n\n• पक्की सड़क का निर्माण न होना: पंचायत द्वारा रास्ते पर केवल मिट्टी डलवाई गई और किनारे दीवार बनाई गई, लेकिन पक्का डामरीकरण नहीं किया गया। कच्ची मिट्टी पानी पड़ते ही गहरे कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाती है।\n• तालाबों के रखरखाव में लापरवाही: गांव के पांच जोहड़ों में से सवा दो बीघे के इस तालाब की नियमित सफाई और गाद निकासी नहीं की गई। कागजों में सौंदर्यीकरण दिखाए जाने के आरोपों के बीच जलनिकासी का कोई स्थाई तंत्र विकसित नहीं हुआ।\n• शिकायतों पर ठोस कार्रवाई का अभाव: स्थानीय निवासियों द्वारा कई बार शिकायतें देने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई स्थाई योजना अमल में नहीं लाई गई। स्मार्ट सिटी का हिस्सा होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी की गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फरीदाबाद के दयालपुर गांव में मुख्य समस्या क्या है?\nदयालपुर गांव का एक चक मार्ग कच्चा होने के कारण कीचड़ और जलभराव से ग्रस्त है, जिससे तालाब का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर खेतों और घरों तक पहुंच रहा है।\n\n2. गांव के एक परिवार को घर पर ताला क्यों लगाना पड़ा?\nरास्ते की अत्यधिक बदहाली और बारिश के समय आवागमन पूरी तरह ठप हो जाने के कारण एक परिवार मकान पर ताला लगाकर दूसरी जगह रहने चला गया।\n\n3. तालाब के ओवरफ्लो होने से किसानों को क्या नुकसान हो रहा है?\nसवा दो बीघे के तालाब का गंदा पानी खेतों में भरने से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं।\n\n4. स्थानीय निवासियों की मुख्य मांगें क्या हैं?\nग्रामीणों की मांग है कि कच्चे रास्ते का पक्का निर्माण कराया जाए, तालाब की सफाई हो और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए।\n\n5. पंचायत ने रास्ते को सुधारने के लिए अब तक क्या कदम उठाए थे?\nपंचायत ने रास्ते के किनारे दीवार बनवाई थी और उस पर मिट्टी डलवाई थी, लेकिन पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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