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  "type": "article",
  "title": "फरीदाबाद के गांवों में मालगाड़ी ट्रैक पर नहीं हुई फेंसिंग, जान गंवा रहे बेजुबान मवेशी",
  "summary": "हरियाणा के फरीदाबाद जिले में दादरी-मुंबई रूट की मालगाड़ी लाइन पर घेराबंदी न होने से आवारा और पालतू मवेशी लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने अधूरा निर्माण कार्य पूरा कर ट्रैक के दोनों ओर मजबूत तारबंदी और चारदीवारी बनाने की मांग उठाई है।",
  "content": "हरियाणा के फरीदाबाद जिले में दयालपुर, लढ़ौली और फतेहपुर बिल्लौच समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाली डेडिकेटेड रेलवे लाइन ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी की वजह बन गई है। यह रेलवे ट्रैक मुख्य रूप से दादरी से मुंबई की दिशा में मालगाड़ियों के आवागमन के लिए संचालित होता है। ट्रैक पर लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से मालगाड़ियां दौड़ती हैं, लेकिन पूरी लाइन के आसपास पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था या मुकम्मल घेराबंदी न होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। खुले रेलवे ट्रैक पर बेसहारा गोवंश और चरने वाले पशु आसानी से पहुंच जाते हैं और तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में आकर दम तोड़ रहे हैं।\n\nखेतों की तारबंदी और ट्रैक की ढलान से बढ़ रही मुसीबत\nट्रैक के आसपास के हालात को लेकर स्थानीय निवासी बबलू हुड्डा बताते हैं कि रेलवे लाइन के दोनों तरफ किसानों के खेत मौजूद हैं। अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों ने अपने-अपने खेतों के किनारों पर कंटीले तारों की बाड़ लगा रखी है। जब आवारा पशु या गोवंश खेतों का रुख करते हैं तो किसान उन्हें अपनी फसलों से दूर खदेड़ देते हैं। खेतों से भगाए जाने के बाद इन बेजुबान पशुओं के पास जाने के लिए कोई सुरक्षित खुली जगह नहीं बचती। ऐसे में वे अक्सर रेलवे लाइन के किनारों पर बनी सीढ़ियों या ढलानों की ओर बढ़ जाते हैं। गायों और अन्य पशुओं के लिए लाइन की ऊंचाई पर चढ़ना तो आसान होता है, लेकिन नीचे उतरते समय वे संतुलन खो बैठते हैं या फंस जाते हैं। इसी हड़बड़ाहट में पशु सीधे पटरियों के बीच पहुंच जाते हैं और सामने से आने वाली तेज रफ्तार मालगाड़ी का शिकार बन जाते हैं। पिछले 15 से 20 दिनों की अवधि में भी ऐसी कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई मवेशियों के टुकड़े हो गए।\n\nप्रशासन का अधूरा काम और पिछले हादसों का खौफनाक मंजर\nलढ़ौली गांव के निवासी जगत सिंह के अनुसार, रेलवे ट्रैक पर यह संकट काफी समय से बना हुआ है। लगभग एक साल पहले भी इसी रेलवे लाइन पर महज दस दिनों के भीतर दो बड़े हादसे घटित हुए थे। उस दौरान पांच से छह गाय और दो सांड एक मालगाड़ी से टकरा गए थे। इस भीषण टक्कर में कई मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ग्रामीणों ने इंसानियत दिखाते हुए एक जख्मी सांड को अपनी निजी गाड़ी में लादकर सरकारी पशु चिकित्सालय पहुंचाया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसके बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में जेसीबी मशीन बुलवाकर बड़ा गड्ढा खुदवाया गया और मृत पशुओं को दफनाया गया। जगत सिंह ने जोर देकर कहा कि प्रशासन ने कुछ हिस्सों में चारदीवारी बनाने की शुरुआत तो की थी, मगर उस निर्माण कार्य को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया, जिसके कारण आज भी पटरियों तक खुला रास्ता बना हुआ है।\n\nट्रेन पलटने का गंभीर अंदेशा और इंसानी जान पर खतरा\nदयालपुर गांव के निवासी दीपक का कहना है कि यह व्यस्त रेलवे लाइन कई घनी आबादी वाले ग्रामीण इलाकों को चीरते हुए दादरी से मुंबई की तरफ जाती है। पशुओं के भीतर इतनी समझ नहीं होती कि वे रेलवे ट्रैक के खतरे को भांप सकें। ऊंचाई पर चढ़ने के बाद वे मालगाड़ी की चपेट में आ जाते हैं। दीपक ने आगाह किया कि यदि 100 की रफ्तार से दौड़ती मालगाड़ी से कोई भारी भरकम मवेशी टकराता है, तो इंजन या डिब्बों के पटरी से उतरने का बहुत बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है, जिससे रेलवे की संपत्ति को भारी क्षति पहुंचेगी। इसके अतिरिक्त केवल मवेशी ही नहीं, बल्कि इंसानी जीवन भी खतरे में है। हाल ही में एक अज्ञात व्यक्ति अनजाने में रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया था और अगले ही दिन ट्रेन से कटकर उसकी मौत हो जाने की सूचना सामने आई। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि रेलवे की जमीन पर कहीं-कहीं तो तारबंदी दिखाई देती है, मगर पूरे कॉरिडोर पर निरंतर सुरक्षा घेरा नदारद है। जब तक पूरे रूट पर मजबूत चारदीवारी या लोहे की तारबंदी नहीं की जाएगी, तब तक मवेशियों और राहगीरों का पटरियों तक पहुंचना बंद नहीं होगा।\n\nइसका आप पर असर\nखुले रेलवे ट्रैक के कारण ग्रामीणों के दुधारू पशुओं के मारे जाने और पटरियों पर इंसानी मौतों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।\n\n• हरियाणा के फरीदाबाद में: दयालपुर, लढ़ौली और फतेहपुर बिल्लौच के किसानों को अपने मवेशियों को खेतों और रेलवे लाइन के नजदीक चराने से बचना होगा। ट्रैक पार करने वाले स्थानीय ग्रामीणों को सतर्कता बरतनी होगी क्योंकि इस रूट पर बिना हॉर्न दिए 100 की रफ्तार से मालगाड़ियां गुजरती हैं।\n• रेलवे यात्रियों और संपत्तियों के लिए: भारी गोवंश के टकराने से मालगाड़ी के बेपटरी होने का अंदेशा बना रहता है जिससे दादरी-मुंबई रूट पर माल ढुलाई बाधित हो सकती है। लाइन पर पुख्ता दीवार बनने से रेलवे को भी बड़े आर्थिक और परिचालन नुकसान से सुरक्षा मिलेगी।\n• स्थानीय पशुपालकों के लिए: ट्रैक पर सुरक्षा घेरा न होने से पशुपालकों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा पूरी बाउंड्री और फेंसिंग कराने की मांग से ही मवेशियों की अकाल मौत रोकी जा सकेगी।\n• सुरक्षा और आवागमन के लिए: आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को रात के समय ट्रैक पर जाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। बीते दिनों एक राहगीर की ट्रेन की चपेट में आने से हुई मौत यह दर्शाती है कि बिना तारबंदी वाले ट्रैक पर चलना जानलेवा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nफरीदाबाद के ग्रामीण इलाकों में रेलवे ट्रैक पर लगातार होने वाले हादसों का मुख्य कारण अधूरी फेंसिंग और दोनों ओर की भौगोलिक परिस्थितियां हैं।\n\n• सीधे तौर पर जिम्मेदार कारण: दादरी से मुंबई जाने वाली मालगाड़ी लाइन के दोनों ओर लगातार चारदीवारी या तारबंदी नहीं की गई है, जिससे बेसहारा और पालतू पशु सीधे पटरियों पर पहुंच जाते हैं।\n• खेतों की बाड़ और सीढ़ियों की बनावट: किसानों द्वारा खेतों में की गई तारबंदी के कारण खदेड़े गए मवेशी भागकर रेलवे लाइन के किनारे बनी सीढ़ियों से ऊपर चढ़ जाते हैं, लेकिन ढलान के चलते नीचे नहीं उतर पाते।\n• अधूरा निर्माण कार्य: स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन और रेलवे ने पूर्व में बाउंड्री वॉल बनाने का काम शुरू तो किया था, लेकिन उसे बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया।\n• तेज गति और भारी ट्रैफिक: इस मार्ग पर मालगाड़ियां 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरती हैं, जिससे पटरियों पर फंसे मवेशियों को भागने का संभलने का मौका नहीं मिलता।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फरीदाबाद के किन गांवों में रेलवे लाइन को लेकर समस्या है?\nहरियाणा के फरीदाबाद जिले में दयालपुर, लढ़ौली और फतेहपुर बिल्लौच समेत कई गांवों के बीच से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर यह समस्या बनी हुई है।\n\n2. इस रेलवे ट्रैक पर किस तरह की ट्रेनें और किस रफ्तार से चलती हैं?\nइस रेलवे लाइन पर दादरी से मुंबई रूट की मालगाड़ियां लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से दौड़ती हैं।\n\n3. पिछले 15 से 20 दिनों में ट्रैक पर क्या घटनाएं हुई हैं?\nपिछले 15 से 20 दिनों के भीतर कई बेसहारा और आवारा पशु रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर तेज रफ्तार मालगाड़ियों की चपेट में आकर कट चुके हैं।\n\n4. करीब एक साल पहले लढ़ौली में क्या बड़ा हादसा हुआ था?\nकरीब एक साल पहले दस दिनों के भीतर पांच से छह गाय और दो सांड मालगाड़ी की चपेट में आ गए थे, जिन्हें बाद में जेसीबी से दफनाया गया था।\n\n5. रेलवे ट्रैक के आसपास पशुओं के फंसने की मुख्य वजह क्या है?\nखेतों में किसानों की तारबंदी होने से पशु वहां से भागकर रेलवे लाइन की सीढ़ियों पर चढ़ जाते हैं और ढलान के कारण नीचे नहीं उतर पाते।\n\n6. ग्रामीणों की रेलवे प्रशासन से मुख्य मांग क्या है?\nग्रामीणों की मांग है कि पूरे रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ पक्की चारदीवारी और मजबूत तारबंदी का अधूरा काम तत्काल पूरा किया जाए।",
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  "publishedAt": "2026-11-02",
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    "फरीदाबाद रेलवे",
    "मालगाड़ी ट्रैक",
    "पशु सुरक्षा",
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    "दादरी मुंबई कॉरिडोर"
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