फरीदाबाद के मंझावली गांव में बाढ़ से तबाह हुई सड़क बनी जानलेवा, प्रशासन से गुहार लगा रहे ग्रामीण साल 2023 और 2025 की भीषण बाढ़ में तबाह हुई मंझावली गांव की सड़क आज भी मरम्मत का इंतजार कर रही है। जलभराव, कीचड़ और घरों में घुसते सांपों ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है, लेकिन प्रशासन लगातार इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहा है। फरीदाबाद जिले के मंझावली गांव के निवासी इन दिनों एक गंभीर और जानलेवा समस्या से जूझ रहे हैं। मानसून की शुरुआत के साथ ही गांव की मुख्य सड़क ने एक खतरनाक नाले का रूप ले लिया है। इस इलाके के लोगों के लिए बारिश का मौसम किसी बुरे सपने से कम नहीं है। गांव की सड़कें पिछले कई सालों से पूरी तरह खस्ताहाल हैं और मानसून की बारिश ने हालात को बद से बदतर बना दिया है। ग्रामीणों का दैनिक जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है और वे हर दिन एक नई चुनौती का सामना करने को मजबूर हैं। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और उनमें भरा गंदा पानी हादसों को न्योता दे रहा है, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। लगातार दो बाढ़ की मार और प्रशासनिक अनदेखी इस बदहाली की शुरुआत कई साल पहले हो गई थी, लेकिन स्थिति तब सबसे ज्यादा बिगड़ी जब इस क्षेत्र को भयानक प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा। स्थानीय निवासियों के अनुसार साल 2023 में आई भीषण बाढ़ ने गांव के बुनियादी ढांचे की कमर तोड़ कर रख दी थी। उस दौरान पानी के तेज बहाव में सड़क की ऊपरी परत बह गई थी और गहरे गड्ढे बन गए थे। इसके बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि प्रशासन मरम्मत का काम कराएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सड़क के जो थोड़े बहुत हिस्से बचे हुए थे, वे साल 2025 में आई दूसरी बड़ी बाढ़ में पूरी तरह से नष्ट हो गए। आज स्थिति यह है कि सड़क का नामोनिशान मिट चुका है और उसकी जगह केवल कीचड़ और पत्थरों का मलबा बचा है। इतने लंबे समय तक सड़क की मरम्मत न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कई गांवों को जोड़ने वाला अहम रास्ता बना मुसीबत यह जर्जर रास्ता कोई आम पगडंडी नहीं है, बल्कि यह इस पूरे इलाके की जीवन रेखा है। यह सड़क केवल मंझावली गांव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आगे यमुना पुल की ओर जाती है और आसपास के कम से कम दो से तीन अन्य गांवों को भी मुख्य मार्ग से जोड़ती है। इस वजह से यहां हर दिन लोगों की भारी भीड़ रहती है। रोजाना बड़ी संख्या में किसान अपनी कृषि उपज और उपकरणों के साथ इसी रास्ते से खेतों की ओर जाते हैं। छोटे बच्चे भारी बस्ते लेकर स्कूल पहुंचने के लिए इसी कीचड़ भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। इसके अलावा लोग अपने रोजमर्रा के कामों, नौकरी और बाजार जाने के लिए भी इसी मार्ग पर निर्भर हैं। जगह जगह बने तालाब जैसे गहरे गड्ढों के कारण अक्सर बाइक सवार संतुलन खोकर गिर जाते हैं और गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। बुजुर्गों के लिए पैदल चलना भी नामुमकिन हो गया है और छोटे बच्चे अक्सर फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। अगर जल्द ही कदम नहीं उठाए गए, तो इस मानसून में पूरी तरह संपर्क टूटने का खतरा मंडरा रहा है। जलभराव से पैदा हुआ गंभीर स्वास्थ्य संकट सड़क टूटने के अलावा गांव में जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था न होना एक अलग ही त्रासदी बन चुका है। स्थानीय निवासी बुजुर्ग अम्मा सुमुरती ने गांव की भयावह तस्वीर पेश करते हुए अपनी परेशानी साझा की। गांव की नालियों का गंदा पानी बिना किसी रोक टोक के सीधे किसानों के खेतों में जमा हो रहा है। इसके कारण पशुओं के लिए बोया गया हरा चारा पूरी तरह सड़ चुका है और बारिश का पानी लंबे समय तक खेतों में खड़ा रहता है। जल निकासी का कोई वैज्ञानिक प्रबंध न होने के कारण यह गंदा पानी बस्तियों में फैलने लगा है। सुमुरती ने बताया कि पानी की निकासी का कोई रास्ता नहीं होने से घरों में सांप और मछलियां तक निकल रही हैं। गंदे पानी और कचरे के लगातार जमा रहने से इलाके में भयंकर बदबू फैली रहती है और यह जगह मच्छरों के पनपने का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। फसलों की बर्बादी और जंगली जीवों का खौफ इसी इलाके में रहने वाले स्थानीय निवासी विनीत सैनी ने भी अपनी रोजमर्रा की पीड़ा को विस्तार से बताया। यह मार्ग मंझावली यमुना पुल तक कई गांवों का एकमात्र सहारा है। साल 2023 और 2025 की विनाशकारी बाढ़ ने इस मार्ग को पूरी तरह खत्म कर दिया, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत के लिए एक ईंट भी नहीं रखी गई है। विनीत सैनी का कहना है कि सड़क किनारे बनी नाली की कभी सफाई नहीं होती, जिसके कारण जलभराव हो रहा है और हमारी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। गांव के तालाब का जलस्तर भी इस गंदे पानी के कारण खतरनाक रूप से बढ़ गया है। तालाब का गंदा पानी अब ओवरफ्लो होकर मुख्य रास्तों और घरों के आंगन तक पहुंच रहा है। इसी बढ़े हुए जलस्तर के कारण तालाब के जहरीले सांप और अन्य जलजीव रिहायशी इलाकों की ओर भाग रहे हैं, जिससे गांव के बच्चों और महिलाओं में दहशत का माहौल है। किसानों पर सबसे भारी मार और श्मशान तक पहुंचने में बाधा गांव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है और किसानों को इस खराब सड़क की सबसे भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। स्थानीय किसान धर्मेंद्र यादव ने बताया कि गांव के कृषक समुदाय के लिए हर एक दिन संघर्ष भरा है। यह मुख्य मार्ग केवल खेतों और स्कूलों तक ही नहीं, बल्कि गांव के श्मशान घाट तक भी जाता है। सड़क की इस दुर्दशा के कारण पशुओं के लिए चारा लाना, ट्रैक्टर ट्रॉली को खेतों तक पहुंचाना और बच्चों को सुरक्षित स्कूल भेजना लगभग असंभव हो गया है। धर्मेंद्र यादव ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि इस बार फिर बाढ़ आई तो सड़क पूरी तरह टूट सकती है और एक गांव से दूसरे गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाएगा। कीचड़ में गाड़ियां फंसने और लोगों के फिसलकर घायल होने की अनगिनत घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीण अब पूरी तरह हताश हैं और प्रशासन से इस समस्या के तत्काल समाधान की गुहार लगा रहे हैं। मरम्मत की तत्काल मांग इस पूरे मामले पर स्थानीय निवासी महेश कुमार कुशवाहा ने गांव के लोगों की सामूहिक निराशा को व्यक्त किया। हर दिन कई गांवों के सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस टूटे हुए रास्ते को पार करते हैं। मानसून के मौसम ने स्थिति को और भी खतरनाक बना दिया है क्योंकि गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। सड़क पर लगातार कई फुट पानी भरा रहता है, जिससे किसी भी तरह के वाहन की आवाजाही बेहद मुश्किल हो गई है। महेश कुमार कुशवाहा ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि हमें राहत देने के लिए जल्द से जल्द इस सड़क की मरम्मत कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों का साफ कहना है कि प्रशासन ने अगर अब भी इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो उन्हें गंभीर जल जनित बीमारियों और सड़क हादसों का सामना करना पड़ेगा। गांव वाले अब केवल वादे नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस काम देखना चाहते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: मानसून के दौरान ग्रामीण बुनियादी ढांचे का चरमराना और प्रशासन की लापरवाही एक राष्ट्रीय समस्या है, जिससे देश भर के किसानों और स्कूली बच्चों को भारी आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ता है। • फरीदाबाद में: मंझावली और आसपास के गांवों के निवासियों को जलभराव, टूटी सड़कों से होने वाले हादसों और घरों में घुसते जहरीले जीवों के कारण गंभीर जानलेवा खतरों का सामना करना पड़ रहा है। सवाल-जवाब 1. मंझावली गांव कहां स्थित है? मंझावली गांव हरियाणा के फरीदाबाद जिले में यमुना नदी के पुल के पास स्थित है। 2. गांव की मुख्य सड़क पहली बार कब टूटी थी? सड़क को पहली बार साल 2023 में आई भीषण बाढ़ के दौरान भारी नुकसान पहुंचा था। 3. साल 2025 की बाढ़ में सड़क का क्या हुआ? साल 2025 की बाढ़ में सड़क के बचे हुए हिस्से भी पूरी तरह से नष्ट हो गए, जिससे रास्ता पूरी तरह खस्ताहाल हो गया। 4. ग्रामीणों के घरों में सांप और मछलियां क्यों घुस रहे हैं? जल निकासी की व्यवस्था न होने, लगातार जलभराव और गांव के तालाब का गंदा पानी ओवरफ्लो होने के कारण सांप और अन्य जीव घरों में घुस रहे हैं। 5. इस खराब रास्ते से सबसे ज्यादा परेशानी किसे हो रही है? इस जर्जर सड़क के कारण सबसे ज्यादा परेशानी किसानों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। https://trendkia.com/haryana/faridabad-ke-manjhawali-men-barha-se-tabaha-hui-saraka-bani-janaleva-prashasana-se-guhara-laga-rahe-gramina-9705 TrendKia — Har trend, sabse pehle.