# फरीदाबाद के सरकारी स्कूल में डिजिटल आई कार्ड लागू, पंच करते ही अभिभावकों को मिलेगा तुरंत मैसेज

> हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सेक्टर 10 के सरकारी स्कूल ने पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल आई कार्ड सिस्टम शुरू किया है, जिससे उपस्थिति और छुट्टी का संदेश तुरंत अभिभावकों तक पहुंचता है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/faridabad-ke-sarakari-skula-men-dijitala-ai-karda-lagu-pncha-karate-hi-abhibhavakon-ko-milega-turnta-maiseja-36782 · **Language:** Hindi
**Tags:** फरीदाबाद, डिजिटल आई कार्ड, हरियाणा, सरकारी स्कूल, छात्र सुरक्षा, स्कूली शिक्षा

विद्यार्थियों की सुरक्षा और दैनिक उपस्थिति पर नजर रखने के उद्देश्य से हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सेक्टर 10 के राजकीय विद्यालय ने एक नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है। आम तौर पर जब बच्चे सुबह घर से विद्यालय के लिए रवाना होते हैं, तो परिजनों के मन में उनकी कुशलता और सुरक्षित पहुंचने को लेकर चिंता बनी रहती है। खासकर बेटियों के अभिभावक दिनभर उनके आने-जाने को लेकर चिंतित रहते हैं। इसी आशंका को खत्म करने के लिए विद्यालय प्रशासन ने स्मार्ट पहचान पत्र और डिजिटल पंचिंग प्रणाली का सहारा लिया है। अब जैसे ही कोई विद्यार्थी विद्यालय परिसर में प्रवेश कर मशीन पर अपना पहचान पत्र स्पर्श करता है, परिजनों के पंजीकृत मोबाइल फोन पर तत्काल सूचना पहुंच जाती है।

यह व्यवस्था पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों पर लागू की जा रही है। छुट्टी के वक्त भी जब बच्चे घर लौटने के लिए विद्यालय के मुख्य द्वार से बाहर निकलते हैं और अपना पहचान पत्र पंच करते हैं, तो परिजनों को तत्काल उनके प्रस्थान का अलर्ट प्राप्त हो जाता है। हरियाणा भर में यह पहला राजकीय विद्यालय बन गया है जिसने विद्यार्थियों की ट्रैकिंग और सुरक्षा के लिए इस तरह का तकनीकी ढांचा खड़ा किया है।

## स्वचालित उपस्थिति और त्वरित संदेश प्रणाली की कार्यप्रणाली
इस आधुनिक प्रणाली के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को एक चिपयुक्त डिजिटल पहचान पत्र दिया गया है। विद्यालय के प्रवेश द्वार पर विशेष पंचिंग मशीनें लगाई गई हैं। सुबह विद्यालय पहुंचते ही छात्र-छात्राएं अपना कार्ड मशीन के सामने रखते हैं, जिससे केंद्रीय सर्वर पर उनके आने का समय स्वतः दर्ज हो जाता है। इसके साथ ही एक स्वचालित टेक्स्ट मैसेज परिजनों के मोबाइल पर पहुंच जाता है, जिसमें विद्यार्थी के विद्यालय पहुंचने की पुष्टि होती है।

इसी प्रकार विद्यालय की घंटी बजने और छुट्टी होने पर विद्यार्थी बाहर निकलते समय पुनः कार्ड पंच करते हैं। इससे सिस्टम में उनके बाहर जाने का रिकॉर्ड दर्ज हो जाता है और परिजनों को दूसरा अलर्ट मिल जाता है। इस दोहरी व्यवस्था से अभिभावकों को न केवल बच्चे की उपस्थिति का पता चलता है, बल्कि यह भी स्पष्ट रहता है कि उनका बच्चा तय समय पर विद्यालय पहुंचा और समय पर ही घर के लिए निकला।

## प्रशासन की तैयारी और तकनीकी सहयोग
विद्यालय के प्रधानाचार्य रामवीर ने इस पहल को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक जरूरी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह शहरी क्षेत्र का एक बड़ा विद्यालय है, जहां प्राथमिक स्तर के नन्हे बच्चों से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक के किशोर पढ़ते हैं। सुबह बच्चों के घर से निकलने के बाद माता-पिता का परेशान होना स्वाभाविक है। नई प्रणाली से अभिभावकों को मानसिक शांति मिलती है और विद्यालय में अनुशासन भी बेहतर होता है।

रामवीर के अनुसार, खासकर छात्राओं की सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आने और जाने का सटीक समय लगातार दर्ज रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई निजी शिक्षण संस्थानों में भी ऐसी पुख्ता व्यवस्था देखने को नहीं मिलती। इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए काफी समय से योजना बनाई जा रही थी, जिसमें स्थानीय विधायक की टीम ने भी तकनीकी और प्रशासनिक सहायता प्रदान की। इसके तकनीकी क्रियान्वयन के लिए गुरुग्राम स्थित टेक्नो क्रश की सेवाएं ली गई हैं। वर्तमान में 50 फीसदी से अधिक विद्यार्थियों के डिजिटल पहचान पत्र तैयार कर वितरित किए जा चुके हैं, जबकि शेष छात्रों के कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज गति से जारी है।

## विद्यार्थियों ने साझा किए अपने अनुभव
इस नई तकनीकी शुरुआत को लेकर विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र और छात्राएं दोनों ही बेहद उत्साहित हैं। बारहवीं कक्षा के छात्र अभिषेक ने बताया कि इस कार्ड से उन्हें काफी सुविधा हुई है। सुबह विद्यालय आने पर पहचान पत्र पंच करते ही माता-पिता को उनके पहुंचने की तसल्ली हो जाती है और शाम को घर निकलते समय भी अलर्ट चला जाता है। उन्होंने इस आधुनिक व्यवस्था को विद्यालय में लागू कराने के लिए प्रधानाचार्य के प्रयास की सराहना की।

वहीं बारहवीं कक्षा की छात्रा कविता ने बताया कि सुरक्षा के नजरिए से यह पहचान पत्र बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि कार्ड पंच होते ही घर पर मैसेज पहुंच जाता है, जिससे परिजनों को उनकी सलामती की जानकारी बिना किसी देरी के मिल जाती है। एक अन्य छात्रा संगीता ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल पहचान पत्र हाथ में होने से वे अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं। दोनों समय घर पर सूचना जाना किसी भी विद्यार्थी और उसके परिवार के लिए एक बड़ा भरोसा है।

## इसका आप पर असर
फरीदाबाद के सरकारी स्कूल द्वारा शुरू की गई यह डिजिटल पहल बच्चों की दैनिक सुरक्षा और अभिभावकों की मानसिक संतुष्टि को सीधे मजबूत करती है।

- **हरियाणा में:** राज्य के अन्य सरकारी विद्यालयों के लिए यह एक अनुकरणीय मॉडल तैयार करता है, जिससे आने वाले समय में अन्य शिक्षण संस्थानों में भी ऐसी तकनीकी सुविधाएं शुरू होने की संभावना बढ़ेगी। यह कदम सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण की दिशा में अभिभावकों का विश्वास मजबूत करेगा।
- **फरीदाबाद में:** सेक्टर 10 स्थित स्कूल में पढ़ने वाले पहली से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के परिजनों को अपने बच्चों के स्कूल पहुंचने और निकलने का तुरंत मोबाइल संदेश मिलता रहेगा। इससे विशेषकर कामकाजी माता-पिता को दिनभर बच्चों के सफर को लेकर चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
- **छात्र सुरक्षा:** पहचान पत्र को अनिवार्य रूप से पंच करने से स्कूल परिसर में छात्रों की अनधिकृत आवाजाही पर प्रभावी रोक लगेगी। प्रत्येक बच्चे के आने और जाने का वास्तविक समय सर्वर में सुरक्षित रहेगा, जिससे जवाबदेही तय होगी।
- **अभिभावकों पर प्रभाव:** माता-पिता को बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के सीधे एसएमएस अलर्ट प्राप्त होंगे, जिससे उन्हें अलग से फोन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 50 फीसदी से अधिक बच्चों के कार्ड बन चुके हैं और शेष विद्यार्थियों को भी जल्द यह कार्ड मिल जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पहल विद्यार्थियों के आवागमन के दौरान अभिभावकों के मन में रहने वाली सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को दूर करने और उपस्थिति व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई है।

- **सुरक्षा को लेकर चिंता:** स्कूल के लिए घर से निकलने के बाद बच्चों, विशेषकर छात्राओं, की कुशलता को लेकर परिजनों में लगातार डर बना रहता था। रियल-टाइम ट्रैकिंग न होने के कारण अभिभावक पूरे समय संपर्क की कमी महसूस करते थे।
- **पारदर्शिता और अनुशासन:** पारंपरिक कागजी उपस्थिति में देरी या चूक की गुंजाइश रहती थी, जिससे सटीक समय दर्ज नहीं हो पाता था। डिजिटल पंचिंग मशीन के माध्यम से इन और आउट एंट्री दर्ज करने की व्यवस्था ने इसे पूरी तरह पारदर्शी बना दिया।
- **स्थानीय स्तर पर तकनीकी पहल:** विद्यालय नेतृत्व, स्थानीय विधायक की टीम के सहयोग और गुरुग्राम की निजी तकनीकी फर्म टेक्नो क्रश के समन्वय से इस सिस्टम को तैयार किया गया। योजनाबद्ध तरीके से काम करके हरियाणा के पहले सरकारी स्कूल में इसे सफलतापूर्वक चालू किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. हरियाणा के किस स्कूल में डिजिटल आई कार्ड की सुविधा शुरू हुई है?
यह सुविधा फरीदाबाद के सेक्टर 10 स्थित सरकारी स्कूल में शुरू की गई है।

### 2. यह डिजिटल आई कार्ड किस प्रकार काम करता है?
विद्यार्थी जब स्कूल में प्रवेश करते और छुट्टी के समय बाहर निकलते हुए कार्ड पंच करते हैं, तो परिजनों के मोबाइल पर तुरंत संदेश पहुंच जाता है।

### 3. किन कक्षाओं के छात्रों को यह डिजिटल कार्ड दिया जा रहा है?
यह सुविधा पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों के लिए लागू की गई है।

### 4. अब तक कितने प्रतिशत छात्रों के कार्ड बन चुके हैं?
वर्तमान में 50 फीसदी से अधिक बच्चों के डिजिटल आई कार्ड बन चुके हैं और बाकी बच्चों के कार्ड बनाने का काम चल रहा है।

### 5. इस तकनीकी परियोजना को किस कंपनी ने तैयार किया है?
इसके लिए गुरुग्राम स्थित टेक्नो क्रश कंपनी की सेवाएं ली गई हैं और स्थानीय विधायक की टीम ने भी इसमें सहयोग किया है।

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