# फरीदाबाद के शिव नगर में 40 साल पुराने आशियानों पर लटकी विध्वंस की तलवार, पुनर्वास की मांग को लेकर मंत्री के द्वार पहुंचे लोग

> फरीदाबाद के शिव नगर और मुजेसर इलाके में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए 26 जुलाई का नोटिस जारी किया है। दशकों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन बिता रहे सैकड़ों मजदूर और सफाई कर्मचारी अब बेघर होने के डर से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-07-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/faridabad-ke-shiv-nagar-men-40-sala-purane-ashiyanon-para-lataki-vidhvnsa-ki-talavara-punarvasa-ki-manga-ko-lekara-mntri-ke-dvara--9105 · **Language:** Hindi
**Tags:** फरीदाबाद न्यूज़, शिव नगर, बुलडोजर कार्रवाई, कृष्णपाल गुर्जर, झुग्गी झोपड़ी, हरियाणा सरकार

फरीदाबाद के सेक्टर-22 स्थित शिव नगर में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए हर दिन एक नई और खतरनाक चुनौती लेकर आता है। दशकों से इस इलाके में बसे ये लोग एक ऐसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं, जहां घर की दहलीज तक पहुंचना भी किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय निवासियों को अपने मकानों तक जाने के लिए एक गहरे और खुले नाले के ठीक ऊपर रखी हुई मात्र एक ईंट पर पैर रखकर रास्ता पार करना पड़ता है। इस संकरे रास्ते पर जरा सा भी संतुलन बिगड़ने का सीधा मतलब है गंदे पानी और खतरनाक गहराई वाले गड्ढे में गिर जाना। पूरे इलाके में हर तरफ बदबू का साम्राज्य है, कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हुए हैं और मच्छरों का भारी आतंक फैला हुआ है। जब बरसात का मौसम आता है, तो यहां के हालात पूरी तरह से बदतर हो जाते हैं। जलभराव और गंदगी के कारण छोटे बच्चों का घर के बाहर खेलना तो बहुत दूर की बात है, बड़ों के लिए भी काम पर जाने के लिए घर से कदम बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है।

## दशकों का संघर्ष और पाई-पाई जोड़कर बने मकान
इतनी भयानक और अमानवीय परिस्थितियों के बावजूद, यह इलाका पिछले कई दशकों से सैकड़ों गरीब परिवारों का एकमात्र आसरा बना हुआ है। लोग बताते हैं कि वे पिछले 30 से 40 सालों से इसी जगह पर अपना जीवन बिता रहे हैं। इतने सालों के संघर्ष में किसी ने प्लास्टिक और टीन से अपनी झोपड़ी तैयार की है, तो किसी ने पाई-पाई जोड़कर और भारी मेहनत करके ईंटों से अपना एक छोटा सा पक्का मकान खड़ा किया है। इस बस्ती में रहने वाले ज्यादातर लोग समाज के सबसे निचले और मेहनतकश तबके से आते हैं। इनमें से कई लोग दिहाड़ी मजदूरी करके अपना घर चलाते हैं, बहुत सी महिलाएं आसपास के इलाकों में लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा लगाने का काम करती हैं, जबकि कई अन्य लोग सफाई कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। दिन-रात कड़ी मेहनत करके किसी तरह अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने वाले इन बेबस लोगों के सिर पर अब बेघर होने का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

## 26 जुलाई का फरमान और बुलडोजर का खौफ
प्रशासन की तरफ से की गई एक हालिया कार्रवाई ने इस पूरी बस्ती की नींद उड़ा दी है। सरकारी अधिकारियों ने इलाके में एक नोटिस चस्पा कर दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से आदेश दिया गया है कि सभी निवासी 26 जुलाई तक इस जगह को पूरी तरह से खाली कर दें। इस फरमान के जारी होने के बाद से ही शिव नगर के घर-घर में खौफ और गहरे तनाव का माहौल छा गया है। प्रशासन की ओर से जारी किए गए इस नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर जगह को खाली नहीं किया गया, तो लोगों को भारी जुर्माना भी भरना पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से यहां बुनियादी सुविधाओं के बिना नरक जैसी जिंदगी काट रहे हैं, लेकिन अब अचानक से उनका यह इकलौता आशियाना भी उजड़ने वाला है। लोगों के मन में अब सिर्फ एक ही बड़ा सवाल गूंज रहा है कि वे अपने छोटे-छोटे बच्चों और पूरे परिवार को लेकर इस भारी बरसात में आखिर कहां जाएंगे।

## बस्ती की महिलाओं ने बयां किया अपना दर्द
नोटिस मिलने के बाद यहां रहने वाली महिलाओं और बुजुर्गों का दर्द छलक पड़ा है। करीब 30 सालों से इस बस्ती में रहने वाली 65 वर्षीय सरोज ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि उनके घर तक जाने का इकलौता रास्ता वही गहरा नाला है, जिसे सिर्फ एक ईंट के सहारे पार करना पड़ता है और इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है। पिछले 20 सालों से शिव नगर में रह रही शीला का कहना है कि उनकी जिंदगी पूरी तरह से नरक बन चुकी है। गंदगी की वजह से उनके बच्चे बार-बार गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं। वह बड़ी कोठियों में काम करके अपने परिवार का पेट पालती हैं और रात में मच्छरों के काटने की वजह से सो भी नहीं पाती हैं। वहीं, ममता ने बताया कि उनकी शादी इसी बस्ती में हुई थी और वह आज भी उसी झुग्गी में जीवन काट रही हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि जब चुनाव का समय आता है, तो तमाम नेता वोट मांगने के लिए हाथ जोड़कर उनके दरवाजे पर आ जाते हैं, लेकिन आज जब उनका घर टूट रहा है, तो कोई भी उनकी सुध लेने वाला नहीं है।

## प्रवासी मजदूरों की आजीविका पर संकट
इस बस्ती में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आए कई प्रवासी परिवार भी रहते हैं, जिनका सब कुछ इसी जगह पर टिका हुआ है। मूल रूप से बलिया की रहने वाली संगीता ने बताया कि वह अपनी शादी के बाद करीब 25 साल पहले फरीदाबाद की इस बस्ती में आई थीं। वह और उनके पति मजदूरी करके किसी तरह अपने दो छोटे बच्चों का लालन-पालन कर रहे हैं, लेकिन अब नोटिस मिलने के बाद उन्हें अपने भविष्य की सबसे बड़ी चिंता सता रही है। इसी तरह, उत्तर प्रदेश के रहने वाले तिलक ने बताया कि उनका परिवार लगभग 35 सालों से शिव नगर में ही निवास कर रहा है। तिलक पेशे से एक सफाई कर्मचारी हैं और उन्होंने अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई से करीब 4 लाख रुपये खर्च करके अपना यह मकान बनवाया था। उन्हें प्रशासन की इस अचानक की गई कार्रवाई की कोई भनक तक नहीं थी। उनका कहना है कि अगर उन्हें यहां से हटाया गया, तो उनके जैसे गरीब व्यक्ति के पास अपने परिवार को ले जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है।

## केंद्रीय मंत्री के दरबार में पहुंची पुनर्वास की गुहार
प्रशासन के इस सख्त रवैये और बुलडोजर चलने के डर के बीच, लोगों ने अपने स्तर पर मदद की गुहार लगानी शुरू कर दी है। सेक्टर-22 के शिव नगर के साथ-साथ मुजेसर इलाके के सैकड़ों प्रभावित लोग एकजुट होकर सीधे केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के कार्यालय पहुंच गए। इस भारी भीड़ ने मंत्री के सामने अपनी सबसे प्रमुख मांग रखी कि यदि स्थानीय प्रशासन उनके मकानों को तोड़कर इस जगह को खाली कराना ही चाहता है, तो सबसे पहले उन सभी परिवारों के लिए रहने की कोई दूसरी उचित जगह मुहैया कराई जाए। निवासियों ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के उनके घरों पर बुलडोजर चलाना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं होगा। लोगों की इस भारी परेशानी को देखते हुए, मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने उनकी सभी बातों को ध्यान से सुना। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को यह भरोसा दिलाया है कि वह इस गंभीर मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ जल्द ही बातचीत करेंगे और इसका कोई न कोई उचित समाधान जरूर निकाला जाएगा।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह घटना देश भर में शहरी गरीबों और प्रवासी मजदूरों के आवास संकट को दर्शाती है, जहां बिना उचित पुनर्वास नीति के बस्तियों को हटाने से हजारों लोग रातों-रात बेघर हो जाते हैं।
- **फरीदाबाद में:** सेक्टर-22 और मुजेसर के निवासियों के लिए इस बारिश के मौसम में अपना घर और जीवन भर की पूंजी खोने का सीधा खतरा पैदा हो गया है, जिससे उनके रोजगार और बच्चों की शिक्षा पर भी गहरा असर पड़ेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रशासन ने शिव नगर के लोगों को किस तारीख तक जगह खाली करने का नोटिस दिया है?
प्रशासन ने लोगों को 26 जुलाई तक जगह खाली करने का नोटिस दिया है।

### 2. फरीदाबाद के इस इलाके में लोग कितने सालों से रह रहे हैं?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई परिवार पिछले 30 से 40 सालों से इस बस्ती में अपना जीवन बिता रहे हैं।

### 3. नोटिस का पालन नहीं करने पर प्रशासन ने क्या चेतावनी दी है?
प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि यदि तय समय तक जगह खाली नहीं की गई, तो निवासियों को जुर्माना भरना पड़ेगा।

### 4. तिलक ने अपना मकान बनाने के लिए कितने रुपये खर्च किए थे?
सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करने वाले तिलक ने अपनी जीवन भर की कमाई से लगभग 4 लाख रुपये खर्च करके अपना मकान बनवाया था।

### 5. मकान तोड़े जाने के डर से लोगों ने किस मंत्री से गुहार लगाई है?
शिव नगर और मुजेसर के सैकड़ों प्रभावित लोगों ने केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के कार्यालय पहुंचकर पुनर्वास की गुहार लगाई है।

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