# फरीदाबाद में करोड़ों की नई इमारत खड़ी, फिर भी छात्र टपकती छत के नीचे पढ़ने को मजबूर

> दिल्ली के पीजी हादसे के बाद भी फरीदाबाद की आईटीआई में सिस्टम की लापरवाही सामने आई है, जहां लगभग 9 करोड़ रुपये खर्च कर बनी नई इमारत खाली पड़ी है और छात्र अब भी 40 साल पुराने जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/faridabad-men-karoron-ki-nai-imarata-khari-phira-bhi-chhatra-tapakati-chhata-ke-niche-parhane-ko-majabura-29429 · **Language:** Hindi
**Tags:** फरीदाबाद आईटीआई, जर्जर बिल्डिंग, लोक निर्माण विभाग, छात्र सुरक्षा, हरियाणा, भवन हैंडओवर

फरीदाबाद की आईटीआई कैंपस में करीब 9 करोड़ रुपये खर्च करके बनाई गई नई इमारत तैयार खड़ी है, लेकिन छात्र अब भी उसी पुराने भवन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं जहां छत से प्लास्टर उखड़ रहा है और बारिश का पानी दरारों से रिसकर अंदर आ जाता है। दिल्ली में हाल ही में एक पीजी में हुए हादसे के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आया है, क्योंकि सवाल यही उठ रहा है कि प्रशासन और विभाग खतरे को पहले से भांपकर कार्रवाई करने के बजाय किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही क्यों हरकत में आते हैं।

## पुरानी बिल्डिंग की बदहाल तस्वीर
जिस पुरानी बिल्डिंग में छात्र फिलहाल बैठते हैं, उसे करीब 40 साल पुराना बताया जा रहा है। साल 2014 से यहां चौकीदार के तौर पर काम कर रहे जगत सिंह के मुताबिक बारिश के मौसम में इस पुराने भवन की हालत और बिगड़ जाती है, कई कमरों की छत से पानी टपकने लगता है और कई बार तो ऑफिस तक में पानी भर जाता है, जिससे छात्रों और स्टाफ दोनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। जगत सिंह के अनुसार नई बिल्डिंग असल में करीब 5 से 6 महीने पहले ही बनकर तैयार हो चुकी थी, लेकिन बिजली के कनेक्शन समेत कुछ काम अब भी अधूरे होने की वजह से उसे शुरू नहीं किया जा सका। यही वजह है कि फिलहाल छात्रों को पुरानी बिल्डिंग के उन्हीं कमरों में बैठाया जा रहा है जो अपेक्षाकृत ठीक हालत में हैं, जबकि बाकी हिस्सा इस्तेमाल के लायक ही नहीं बचा।

## 9 करोड़ खर्च फिर भी हैंडओवर नहीं
लोक निर्माण विभाग ने 2019 में नई आईटीआई बिल्डिंग बनाने का काम हाथ में लिया था, जिसके लिए शुरुआती तौर पर सात करोड़ रुपये के आसपास रकम तय की गई थी। कोरोना महामारी के दौरान निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया और पाबंदियां हटने के बाद ही दोबारा शुरू हो सका, जिसके चलते लागत बढ़ी और बजट भी पहले से ज्यादा रखना पड़ा। अब तक इस प्रोजेक्ट पर करीब नौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, यानी इतनी रकम में सालों पहले पूरी तरह चालू इमारत तैयार हो सकती थी। इतना खर्च होने के बावजूद यह भवन अभी तक औपचारिक रूप से आईटीआई प्रबंधन को सौंपा नहीं जा सका है और खाली पड़ा है, जबकि छात्र बगल के जर्जर पुराने भवन में गुजारा कर रहे हैं।

## निरीक्षण में खुली कई खामियां
इसी बीच 19 मई को डॉ. सुमित सहारावत, जो कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में अतिरिक्त निदेशक हैं, नई बिल्डिंग का निरीक्षण करने पहुंचे और जांच में खामियों की लंबी फेहरिस्त सामने आई। जांच में सामने आया कि वर्कशॉप, शौचालय, सीढ़ियां, आंगन और लिफ्ट लॉबी जैसे कई हिस्सों में काम स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप नहीं हुआ है। सबसे बड़ी दिक्कत पानी और सीवर कनेक्शन को लेकर मिली, जिनके बिना भवन को इस्तेमाल में लाना मुमकिन नहीं है, वहीं बिजली का काम भी अधूरा पाया गया। कुल मिलाकर निरीक्षण में यह साफ हुआ कि इतने साल के निर्माण और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई बुनियादी काम अभी तक अधूरे ही छोड़ दिए गए हैं।

## बारिश ने बढ़ाई छात्रों की मुसीबत
पुरानी बिल्डिंग में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बारिश का मौसम मुश्किलों को और बढ़ा देता है। भवन के कुछ हिस्सों को तो पहले ही बंद कर दिया गया है क्योंकि वे इस्तेमाल के लायक ही नहीं रह गए थे। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है और दाखिले भी चल रहे हैं, ऐसे में आईटीआई प्रबंधन को डर है कि नई बिल्डिंग के हैंडओवर में अगर और देरी हुई तो कक्षाएं चलाना और मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ज्यादा छात्रों को कम बचे हुए कमरों में ही एडजस्ट करना पड़ेगा।

## एक हफ्ते में कनेक्शन का भरोसा
इस पूरे मसले पर लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रकाश लाल ने बताया कि नई बिल्डिंग में पानी और सीवर का कनेक्शन कराने के लिए एक सप्ताह का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना है कि निरीक्षण में सामने आई बाकी खामियों को भी दूर कराया जा रहा है और जरूरी काम पूरा होते ही भवन जल्द ही आईटीआई प्रबंधन को सौंप दिया जाएगा।

## नए सत्र से पहले भी सवाल बरकरार
आईटीआई के प्रधानाचार्य सह नोडल अधिकारी भगत सिंह के मुताबिक दाखिला प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में है और नया सत्र जल्द शुरू होने वाला है, इसलिए नई बिल्डिंग का हैंडओवर जल्द होना जरूरी है। लेकिन इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब भवन बनाने पर करोड़ों रुपये पहले ही खर्च हो चुके हैं, तो पानी, सीवर और बिजली जैसे जरूरी काम समय रहते पूरे क्यों नहीं कराए गए। जब तक यह अधूरापन दूर नहीं होता, तब तक यह साफ नहीं है कि छात्रों को जर्जर पुरानी बिल्डिंग से नई इमारत में आखिर कब शिफ्ट किया जाएगा, और क्या यह बदलाव अपने आप होगा या दिल्ली जैसे किसी हादसे के बाद ही मजबूरी में होगा।

## इसका आप पर असर
यह घटना बताती है कि किसी सरकारी भवन के कागज पर 'पूरा' हो जाने का मतलब यह नहीं कि वह इस्तेमाल के लिए भी सुरक्षित हो चुका है, ऐसे में किसी भी संस्थान से जुड़े छात्र और अभिभावकों को सिर्फ निर्माण पूरा होने की बात नहीं, बल्कि औपचारिक हैंडओवर की स्थिति भी जाननी चाहिए।

- **भारत में:** स्कूल, हॉस्टल या आईटीआई जैसे सरकारी भवनों में अक्सर निर्माण लागत तो बताई जाती है, लेकिन पानी, सीवर और बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं की मंजूरी मिलने की तारीख नहीं बताई जाती। ऐसे मामलों में अभिभावक और स्थानीय संस्थाएं आरटीआई के जरिए यह जानकारी मांग सकती हैं कि क्या 'पूरी हो चुकी' इमारत वाकई इस्तेमाल के लिए तैयार है।
- **फरीदाबाद, हरियाणा में:** नया सत्र शुरू होने वाला है और दाखिले अंतिम चरण में हैं, ऐसे में आईटीआई के छात्रों और उनके परिजनों को फिलहाल पुराने और जर्जर भवन में ही पढ़ाई जारी रखनी पड़ सकती है, क्योंकि अधिकारियों ने सिर्फ पानी और सीवर कनेक्शन के लिए एक हफ्ते का लक्ष्य रखा है, जबकि बाकी काम अभी भी अधूरे हैं।
- **छात्रों और स्टाफ के लिए:** तेज बारिश के दौरान पुरानी बिल्डिंग के जिन कमरों की छत से पानी टपकता है या प्लास्टर उखड़ा है, उनमें बैठने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ हिस्से पहले ही असुरक्षित मानकर बंद किए जा चुके हैं, और प्रबंधन से हैंडओवर की लिखित समयसीमा मांगी जानी चाहिए।
- **बजट पर नजर:** इस भवन पर अब तक करीब नौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि शुरुआती बजट करीब सात करोड़ रुपये था, यानी देरी के चलते लागत में साफ इजाफा हुआ है। ऐसी ही लागत बढ़ोतरी अन्य सरकारी प्रोजेक्ट में भी तब देखी जा सकती है जब निर्माण की समयसीमा खिंचती जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
देरी की सबसे बड़ी वजह कोरोना के दौरान रुका निर्माण कार्य और भवन तैयार होने के बाद भी कुछ जरूरी काम अधूरे रह जाना है। यहां जानिए मौजूदा हालात के पीछे की असल वजहें।

- **कोरोना के दौरान रुका काम:** 2019 में शुरू हुआ निर्माण कोरोना महामारी के दौरान पूरी तरह रुक गया था और पाबंदियां हटने के बाद ही दोबारा शुरू हो सका, जिससे तय समयसीमा पिछड़ गई।
- **बढ़ती लागत:** कोरोना काल की देरी के साथ-साथ सामान्य लागत बढ़ोतरी के चलते शुरुआती करीब सात करोड़ रुपये का बजट बढ़कर करीब नौ करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
- **जरूरी काम अधूरा रहना:** भवन का ढांचा तैयार होने के बाद भी पानी, सीवर और बिजली जैसे कनेक्शन, जो किसी भी इमारत में रहने के लिए जरूरी हैं, समय पर पूरे नहीं किए गए।
- **निरीक्षण में सामने आई खामियां:** 19 मई को डॉ. सुमित सहारावत के औपचारिक निरीक्षण में लिफ्ट लॉबी, वर्कशॉप, शौचालय, सीढ़ियों और आंगन जैसे कई हिस्सों में तय डिजाइन से हटकर काम मिला, जिसके चलते अंतिम हैंडओवर अटका हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. फरीदाबाद आईटीआई की नई बिल्डिंग पर कितना खर्च हुआ है?
अब तक करीब नौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि शुरुआती बजट करीब सात करोड़ रुपये था।

### 2. नई बिल्डिंग अभी तक आईटीआई प्रबंधन को क्यों नहीं सौंपी गई?
निरीक्षण में पानी, सीवर कनेक्शन और बिजली के काम समेत कई खामियां मिलीं, जिनकी वजह से हैंडओवर अटका हुआ है।

### 3. पुरानी बिल्डिंग कितनी पुरानी है?
पुरानी बिल्डिंग को करीब 40 साल पुराना बताया जा रहा है।

### 4. निरीक्षण किसने और कब किया?
19 मई को कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुमित सहारावत ने नई बिल्डिंग का निरीक्षण किया।

### 5. पानी और सीवर कनेक्शन कब तक पूरा होने की उम्मीद है?
लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रकाश लाल के मुताबिक इसके लिए एक सप्ताह का लक्ष्य रखा गया है।

### 6. नई बिल्डिंग कब बनकर तैयार हुई थी?
चौकीदार जगत सिंह के मुताबिक नई बिल्डिंग करीब 5 से 6 महीने पहले ही बनकर तैयार हो चुकी थी।

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