फरीदाबाद में मंदिरों के फेंके फूलों से बन रहे हैं धूप और गुलाल, जर्मन अधिकारियों ने किया केंद्र का दौरा फरीदाबाद में धार्मिक स्थलों पर चढ़ाए जाने वाले बेकार फूलों से अगरबत्ती, हवन सामग्री और खाद बनाई जा रही है। इस अनूठी पहल को देखने हाल ही में जर्मनी से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचा। धार्मिक स्थलों पर भगवान को अर्पित किए जाने वाले पुष्प अमूमन पूजा समाप्त होने के बाद कचरे के रूप में बाहर फेंक दिए जाते हैं। इन बचे हुए फूलों के नालों या अन्य अनुचित स्थानों तक पहुंचने से शहर में गंदगी की समस्या बढ़ती है। इस पर्यावरणीय चुनौती से निपटने के लिए फरीदाबाद में एक अनूठी पहल शुरू की गई है, जिसके तहत अब इन व्यर्थ फूलों से सुगंधित धूपबत्ती, हवन सामग्री, प्राकृतिक गुलाल और पौधों के लिए खाद जैसी उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा रही हैं। इस योजना से जहां एक ओर फूलों के कचरे का सकारात्मक उपयोग सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। महाशिवरात्रि से हुई थी इस खास अभियान की शुरुआत इस पर्यावरण हितैषी परियोजना का सूत्रपात विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन और नगर निगम फरीदाबाद द्वारा संयुक्त रूप से महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर किया गया था। इस अभियान के तहत पिछले सात महीनों के भीतर महानगर के कुल 15 मंदिरों से 20 टन से अधिक मात्रा में फूलों और अन्य पूजन सामग्री का सफलतापूर्वक संग्रहण किया जा चुका है। इस व्यवस्था की सफलता और कार्यप्रणाली का अध्ययन करने के उद्देश्य से हाल ही में जीआईजेड इंडिया के बैनर तले 11 सदस्यीय जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने फरीदाबाद स्थित इस फूल पुनर्चक्रण केंद्र का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और पूरी निर्माण प्रक्रिया की बारीकियों को समझा। किस तरह तैयार किए जाते हैं ये उत्पाद विक्टोरा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के अध्यक्ष एसएस बांगा ने इस पूरी प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मंदिरों में देवता को चढ़ाए गए पुष्पों को जल स्रोतों या कूड़ेदान में प्रवाहित करने के बजाय उनसे कई प्रकार की उपयोगी वस्तुएं निर्मित की जा सकती हैं। इस प्रक्रिया की शुरुआत मंदिरों से पुष्पों के संग्रहण के साथ होती है। इसके पश्चात केंद्र पर इनकी उचित छंटाई की जाती है और इन्हें अच्छी तरह सुखाया जाता है। सूखने के बाद इन्हें पीसकर एक महीन पाउडर का रूप दिया जाता है, जिसका उपयोग धूपबत्ती, हवन सामग्री और हर्बल गुलाल के निर्माण में किया जाता है। इसके अतिरिक्त जो जैविक अवशेष शेष बच जाते हैं, उनका उपयोग पौधों के पोषण के लिए उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाने में किया जाता है. भविष्य में इस अभियान का दायरा बढ़ाने की योजना एसएस बांगा का कहना है कि वर्तमान में यह सराहनीय कार्य केवल शहर के 15 मंदिरों तक ही सीमित रखा गया है, जबकि फरीदाबाद में ऐसे धार्मिक स्थलों की संख्या काफी अधिक है। यदि नगर निगम के सहयोग से इस मुहिम को शहर के प्रत्येक मंदिर तक विस्तारित कर दिया जाए, तो व्यर्थ जाने वाले पुष्प कचरे का बहुत बड़े पैमाने पर सदुपयोग संभव हो सकेगा। इतना ही नहीं, मंदिरों के अतिरिक्त गुरुद्वारों तथा बड़े आयोजनों एवं विवाह समारोहों में उपयोग होने वाले पुष्पों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। इससे शहर में अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा में भारी कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार सृजन और हरित विकास को मिल रहा बढ़ावा पुष्प पुनर्चक्रण की इस पूरी श्रृंखला में कई स्तरों पर श्रम की आवश्यकता होती है, जिससे रोजगार के नए द्वार खुलते हैं। बांगा के अनुसार, मंदिरों से सामग्री को वाहन के माध्यम से केंद्र तक लाने के लिए चालकों और सहायकों की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा केंद्र पर फूलों की छंटाई, उन्हें धूप में सुखाने तथा निर्माण से जुड़े अन्य कार्यों के लिए भी कामगारों की आवश्यकता होती है, जिससे स्थानीय लोगों को आजीविका प्राप्त होती है। इस केंद्र का दौरा करने वाले जर्मन अधिकारियों ने भी संग्रहण से लेकर अंतिम उत्पाद बनने तक की इस संपूर्ण प्रक्रिया की सराहना की। नगर निगम आयुक्त यशेंद्र सिंह ने इस दिशा में सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य में महानगर के अन्य मंदिरों को भी इस मुहिम के साथ जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन केवल अपशिष्ट प्रबंधन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर के विभिन्न सेक्टरों जैसे सेक्टर-8 में पौधरोपण और पार्कों के विकास के माध्यम से हरित आवरण को बढ़ाने के कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। इसका आप पर असर यह पहल फरीदाबाद के स्थानीय निवासियों और धार्मिक संस्थाओं के लिए कचरा प्रबंधन के प्रति सोच बदलने का एक व्यावहारिक अवसर प्रदान करती है। • शहरवासियों के लिए: स्थानीय स्तर पर कचरे का वैज्ञानिक उपयोग होने से शहर में गंदगी कम होगी और वायु व जल प्रदूषण में सुधार देखने को मिलेगा। धार्मिक स्थलों के आसपास स्वच्छता का स्तर बेहतर होगा। • रोजगार के अवसर: पुष्प संग्रहण, छंटाई और प्रसंस्करण केंद्रों पर स्थानीय स्तर पर नए रोजगार सृजित होंगे, जिससे कामगारों को आर्थिक लाभ मिलेगा। • पर्यावरण संरक्षण: नालों में फूल जाने से रोकने से जल निकासी व्यवस्था सुधरेगी और जैविक खाद मिलने से स्थानीय पार्कों व पौधों को फायदा होगा। • व्यापक प्रभाव: यदि यह मॉडल अन्य शहरों में भी अपनाया जाता है, तो देश भर के धार्मिक कचरे की समस्या का एक स्थायी समाधान निकल सकता है। ऐसा क्यों हुआ मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले भारी मात्रा में फूलों के कचरे के निस्तारण का कोई उचित प्रबंध न होने के कारण यह समस्या लगातार विकराल हो रही थी। पारंपरिक रूप से इन फूलों को नदियों या नालों में फेंका जाता था, जिससे शहर में प्रदूषण बढ़ता था। • कचरे की समस्या: पर्वों और दैनिक पूजा के दौरान महानगर के सैकड़ों मंदिरों से टन के हिसाब से निकलने वाले पुष्प अपशिष्ट के वैज्ञानिक समाधान की आवश्यकता थी। • संस्थागत सहयोग: विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन और नगर निगम फरीदाबाद की साझेदारी ने इस दिशा में एक संगठित ढांचा तैयार किया, जिससे कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलना संभव हुआ। • अंतर्राष्ट्रीय रुचि: इस पर्यावरण-अनुकूल मॉडल की प्रभावशीलता का अध्ययन करने के लिए जीआईजेड इंडिया जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसमें गहरी रुचि दिखाई। सवाल-जवाब 1. फरीदाबाद में फूलों के कचरे से कौन से उत्पाद बनाए जा रहे हैं? इस केंद्र पर फूलों से धूपबत्ती, हवन सामग्री, प्राकृतिक गुलाल और जैविक खाद तैयार की जा रही है। 2. इस पहल की शुरुआत कब और किसने की थी? इसकी शुरुआत महाशिवरात्रि के मौके पर विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन और नगर निगम फरीदाबाद ने मिलकर की थी। 3. अब तक कितने मंदिरों से फूल इकट्ठा किए गए हैं? बीते सात महीनों में शहर के 15 मंदिरों से 20 टन से ज्यादा फूल और पूजन सामग्री इकट्ठा की गई है। 4. इस केंद्र का दौरा किस विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने किया? जीआईजेड इंडिया के 11 सदस्यीय जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने इस फूल पुनर्चक्रण केंद्र का दौरा किया था। 5. इस परियोजना के मुख्य पदाधिकारी कौन हैं? एसएस बांगा विक्टोरा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। https://trendkia.com/haryana/faridabad-men-mndiron-ke-phenke-phulon-se-bana-rahe-hain-dhupa-aura-gulala-german-adhikariyon-ne-kiya-kendra-ka-daura-48754 TrendKia — Har trend, sabse pehle.