# गंभीर प्रदूषण के बीच राजधानी क्षेत्र में उठे सवाल, अभिभावकों ने की पंद्रह नवंबर तक स्कूलों में स्मॉग ब्रेक की वकालत

> दिल्ली और आसपास के इलाकों में खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण को देखते हुए अभिभावक बच्चों की सेहत के लिए चिंतित हैं। एक विस्तृत सर्वे में अधिकांश माता-पिता ने पंद्रह नवंबर तक स्कूलों में नियमित कक्षाओं को बंद कर स्मॉग ब्रेक या ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-11-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/gnbhira-pradushana-ke-bicha-rajadhani-kshetra-men-uthe-savala-abhibhavakon-ne-ki-pndraha-navnbara-taka-skulon-men-smog-break-ki-va-56888 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली एनसीआर प्रदूषण, स्कूल स्मॉग ब्रेक, वायु गुणवत्ता सूचकांक, लोकलसर्कल्स सर्वे, बच्चों का स्वास्थ्य, सीएक्यूएम गाइडलाइंस

त्योहारी सीजन के आगमन के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की आबोहवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है। चारों तरफ फैली धुंध और जहरीले कणों ने बड़ों से लेकर मासूम बच्चों तक का जीवन संकट में डाल दिया है। हर रोज सुबह सवेरे बस स्टॉप पर खड़े होकर स्कूल वाहन का इंतजार करते या प्रार्थना सभाओं में शामिल होते बच्चे सुरक्षित सीमाओं से कई गुना अधिक जहरीले तत्वों को सांस के जरिए अपने शरीर में खींच रहे हैं। बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखकर अब बच्चों के परिजनों का धैर्य पूरी तरह जवाब दे चुका है।

खतरनाक श्रेणी में पहुंच चुके वायु प्रदूषण के बीच अब राजधानी और उपनगरों में स्कूलों के लिए स्मॉग ब्रेक देने की पुरजोर मांग उठ रही है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के 38 हजार से ज्यादा नागरिकों की राय के आधार पर सामने आए एक व्यापक सर्वे में बेहद चिंताजनक तस्वीर उभरी है। सर्वे में शामिल 53 प्रतिशत अभिभावकों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी है कि 10 से 15 नवंबर के बीच बच्चों को स्मॉग ब्रेक दिया जाए। इसके अलावा 47 प्रतिशत लोगों का दृढ़ मत है कि जब भी हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंचे, तब स्कूलों में अवकाश घोषित करना अनिवार्य नियम बनाया जाना चाहिए।

## सर्वे में नहीं मिला नियमित कक्षाएं चालू रखने का एक भी समर्थन
इस विस्तृत सर्वे का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह सामने आया कि एक भी अभिभावक ने इस विषम परिस्थिति में स्कूलों को सामान्य रूप से चालू रखने की बात नहीं कही। बच्चों के माता-पिता का कहना है कि जब हवा का संकट चरम पर पहुंच जाता है, तब देर रात हड़बड़ी में आदेश जारी करने की पुरानी परिपाटी बंद होनी चाहिए। इसके बदले शासन और प्रशासन को पहले से पूरी योजना बनाकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि बच्चों को समय रहते विषैली हवा से बचाया जा सके।

## पीएम एक का घातक स्तर और नौनिहालों के फेफड़ों पर गहराता संकट
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 4 नवंबर के दिन औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI का स्तर 555 तक दर्ज किया गया, जो अत्यंत गंभीर श्रेणी का पैमाना माना जाता है। वातावरण में PM 2.5 के साथ-साथ उससे भी बेहद बारीक PM 1 कणों की मौजूदगी सुरक्षित मानकों से दर्जनों गुना अधिक पाई जा रही है। जानकारों का कहना है कि इतने सूक्ष्म कण फेफड़ों की छलनी को पार कर सीधे रक्त प्रवाह में घुल जाते हैं। चूंकि बच्चों की सांस लेने की गति वयस्कों की तुलना में कहीं तेज होती है, इसलिए उनके विकसित हो रहे कोमल फेफड़ों पर इसका स्थायी और अत्यंत हानिकारक असर पड़ता है।

## कक्षाओं के संचालन पर परिजनों की राय और विकल्पों की मांग
जब अभिभावकों से यह जानने का प्रयास किया गया कि स्मॉग ब्रेक की अवधि में शैक्षणिक गतिविधियों का क्या स्वरूप होना चाहिए, तो 49 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भौतिक रूप से स्कूल की इमारत बंद रखकर पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराई जानी चाहिए। वहीं 25 प्रतिशत अभिभावक पूरी तरह से अवकाश घोषित करने के पक्ष में दिखे। इन दोनों आंकड़ों को मिलाकर देखें तो 74 प्रतिशत अभिभावक इस बात पर पूरी तरह एकमत हैं कि मौजूदा हालात में बच्चों को किसी भी कीमत पर स्कूल परिसर तक नहीं भेजा जाना चाहिए, जिससे वे इस जानलेवा वातावरण के संपर्क में आने से बच सकें।

## कामकाजी वयस्कों को घर से काम की छूट, फिर बच्चों पर असमंजस क्यों
बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रशासन तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM ने दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए घर से काम करने का परामर्श जारी किया है। अभिभावक इस दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं कि जब वयस्कों को बचाने के लिए नीतियां लागू हो रही हैं, तो उसी विषैली हवा में सुबह-सुबह नन्हे बच्चों को स्कूल क्यों भेजा जा रहा है। विगत 8 वर्षों का संकलित डेटा भी साफ दर्शाता है कि नवंबर माह के दूसरे सप्ताह में प्रदूषण का ग्राफ अपने उच्चतम स्तर पर होता है, फिर भी स्कूलों के संबंध में अग्रिम निर्णय लेने में देरी की जा रही है।

## फेफड़ों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दूरगामी असर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB और चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के पूर्व अध्ययनों के संदर्भ से यह तथ्य उजागर हुआ है कि दिल्ली के 43.5 प्रतिशत बच्चों में फेफड़ों की कार्यक्षमता में गिरावट आ चुकी है। ग्रामीण परिवेश के बच्चों की तुलना में राजधानी के बच्चों में श्वास संबंधी विकार और ध्यान केंद्रित न कर पाने यानी ADHD जैसे लक्षण बहुत अधिक पाए गए हैं। बाल्यकाल में सांस तंत्र को पहुंचने वाला यह नुकसान उम्र बढ़ने के बाद भी कभी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता।

## एकीकृत नीति और अग्रिम कार्ययोजना का अभाव
वर्तमान व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे सटे हुए इलाकों में स्कूल बंद करने के फैसले अलग-अलग प्रशासनिक तंत्र द्वारा अलग-अलग समय पर लिए जाते हैं। इससे अभिभावकों और विद्यार्थियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। परिजनों की स्पष्ट मांग है कि CAQM और सभी संबंधित राज्य मिलकर एक समान गाइडलाइन तैयार करें। विशेष रूप से 10 से 15 नवंबर के उस नाजुक दौर में, जब पराली का धुआं और त्योहारी आतिशबाजी का स्मॉग चरम पर रहने की प्रबल आशंका रहती है, पहले से ही स्मॉग ब्रेक लागू कर दिया जाना चाहिए।

## इसका आप पर असर
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों की सेहत और दैनिक दिनचर्या पर इस वायु संकट का सीधा असर पड़ रहा है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** उत्तर भारत के विस्तृत क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बिगड़ने से स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षणिक कैलेंडरों पर दबाव बढ़ रहा है। अन्य राज्यों के शिक्षा बोर्ड भी प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए आपातकालीन योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं।
- **दिल्ली-एनसीआर में:** राजधानी, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के परिवारों में बच्चों के फेफड़ों की सुरक्षा को लेकर चिंता चरम पर पहुंच गई है। स्कूलों में 10 से 15 नवंबर के बीच ऑनलाइन कक्षाएं शुरू होने या अवकाश घोषित होने की स्थिति में अभिभावकों को घर पर देखभाल और पढ़ाई के नए प्रबंध करने होंगे।
- **छात्रों की दिनचर्या पर:** सुबह के समय खेलकूद और आउटडोर असेंबली बंद होने से बच्चों का शारीरिक व्यायाम प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही घर के अंदर कैद रहने से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई की निरंतरता पर असर पड़ रहा है।
- **अभिभावकों के कामकाजी कार्यक्रम पर:** यदि स्कूलों में अचानक भौतिक कक्षाएं बंद होती हैं, तो कामकाजी माता-पिता को दफ्तर और बच्चों की निगरानी के बीच तालमेल बिठाना पड़ेगा। 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम का लाभ न पाने वाले कर्मचारियों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हर वर्ष नवंबर के पहले पखवाड़े में वायु गुणवत्ता के खतरनाक स्तर तक गिरने के पीछे मौसम और मौसमी गतिविधियां मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

- **मौसमी और मौसमी बदलाव:** तापमान में गिरावट आने और हवा की गति अत्यंत धीमी पड़ने से वायुमंडल में इनवर्जन लेयर बन जाती है। इसके चलते जमीन की सतह के पास मौजूद धूल, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक धुआं ऊपरी वायुमंडल में नहीं जा पाता और घना स्मॉग बनकर जम जाता है।
- **पराली और त्योहारी गतिविधियां:** पंजाब और हरियाणा के खेतों में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाएं इसी पखवाड़े में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचती हैं। साथ ही त्योहारी सीजन के दौरान पटाखों और अतिरिक्त गतिविधियों के कारण वातावरण में PM 2.5 और PM 1 जैसे अति सूक्ष्म जहरीले कणों की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
- **प्रशासनिक निर्णयों में समन्वय की कमी:** एनसीआर के विभिन्न शहरों के प्रशासन स्वतंत्र रूप से अलग-अलग तारीखों पर निर्णय लेते हैं, जिससे वायु संकट गहराने से पहले कोई अग्रिम सुरक्षात्मक कदम समय पर नहीं उठाया जा पाता। ऐतिहासिक रूप से हर वर्ष आठ साल के आंकड़ों में प्रदूषण का यही पैटर्न दिखने के बावजूद स्थाई नीति का अभाव बना हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. लोकलसर्कल्स के सर्वे में कितने लोगों ने अपनी राय दी?
इस सर्वे में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के 38 हजार से ज्यादा नागरिकों ने हिस्सा लिया।

### 2. कितने प्रतिशत अभिभावकों ने 10 से 15 नवंबर के बीच स्मॉग ब्रेक की मांग की है?
सर्वेक्षण में शामिल 53 प्रतिशत अभिभावकों ने 10 से 15 नवंबर के दौरान स्कूलों में स्मॉग ब्रेक घोषित करने का समर्थन किया है।

### 3. स्मॉग ब्रेक के दौरान पढ़ाई जारी रखने पर अभिभावकों का क्या रुख है?
कुल 49 प्रतिशत अभिभावक भौतिक कक्षाएं बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई कराने के पक्ष में हैं, जबकि 25 प्रतिशत ने पूर्ण अवकाश की मांग की है।

### 4. 4 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में औसत एक्यूआई कितना दर्ज किया गया था?
4 नवंबर को क्षेत्र का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 555 दर्ज किया गया, जो अत्यंत गंभीर श्रेणी में आता है।

### 5. अध्ययनों के अनुसार दिल्ली के कितने बच्चों के फेफड़ों पर असर पड़ा है?
सीपीसीबी और चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अध्ययन के मुताबिक दिल्ली के 43.5 प्रतिशत बच्चों के फेफड़ों की कार्यक्षमता घटी हुई पाई गई है।

### 6. अभिभावक प्रशासन की मौजूदा नीतियों पर क्या सवाल उठा रहे हैं?
अभिभावकों का सवाल है कि जब दफ्तरों में बड़ों के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम लागू किया जा सकता है, तो बच्चों को जहरीली हवा में स्कूल भेजने पर रोक लगाने में देरी क्यों की जा रही है।

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