# गोहाना और आसपास के इलाकों में सड़कों के विस्तार से जमीन के भाव दस गुना तक चढ़े

> हरियाणा में हाईवे, बाईपास और नए शहरी सेक्टरों के विस्तार के चलते गोहाना के आसपास जमीन की कीमतें सात से दस करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गई हैं। बढ़ती मांग के बीच प्रशासन अवैध कॉलोनियों पर भी सख्त नजर बनाए हुए है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/gohana-aura-asapasa-ke-ilakon-men-sarakon-ke-vistara-se-jamina-ke-bhava-dasa-guna-taka-charhe-37602 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरियाणा रियल एस्टेट, गोहाना जमीन भाव, सोनीपत प्रॉपर्टी, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, डीटीपी बुलडोजर कार्रवाई, रोहतक पानीपत हाईवे

हरियाणा के ग्रामीण अंचल में आधुनिक एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क के विस्तार ने जमीन के बाजार की पूरी तस्वीर बदल दी है। सोनीपत जिले के अंतर्गत गोहाना और आसपास के देहाती इलाकों में बुनियादी ढांचे के तेजी से विकास के कारण अचल संपत्ति के बाजार में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया जा रहा है। जिन कृषि भूमियों के भाव छह से सात वर्ष पहले तक लगभग एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के आसपास सिमटे हुए थे, उनकी कीमत आज उछलकर सात करोड़ से लेकर दस करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक के स्तर को छूने लगी है।

## नए सेक्टर और दीनदयाल आवासीय योजना से बाजार में हलचल
इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य कारण रोहतक-पानीपत हाईवे के दोनों ओर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा दो नए सेक्टर विकसित किया जाना है। इस सरकारी योजना के धरातल पर उतरने के साथ ही आसपास के पूरे क्षेत्र में भूखंडों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। इसके साथ ही इस बेल्ट में दीनदयाल आवासीय क्षेत्र को भी विकसित किया जा रहा है, जिससे आम खरीदारों और रियल एस्टेट कारोबारियों का रुझान इस ओर काफी तेजी से आकर्षित हुआ है।

## ग्रामीण इलाकों में रियल एस्टेट कारोबारियों की सक्रियता
नवनिर्मित बाईपास और दो प्रमुख हाईवे के सीधे जुड़ाव के कारण नगर, बड़ौता, सिकंदरपुर माजरा तथा अन्य नजदीकी गांवों की कृषि भूमि अचानक प्राइम लोकेशन में तब्दील हो चुकी है। प्रॉपर्टी डीलरों की नजर अब इन गांवों के रकबे पर टिकी हुई है। पानीपत-रोहतक हाईवे के बाईपास और गोहाना-सोनीपत हाईवे के इर्द-गिर्द मौजूद खेती की जमीनें अब सुनहरे निवेश अवसर के रूप में देखी जा रही हैं। लोकेशन, मुख्य सड़क से पहुंच और प्रस्तावित शहरी विकास के आधार पर जमीनों के भाव तय हो रहे हैं, हालांकि हाईवे से दूर स्थित हिस्सों में कीमतें तुलनात्मक रूप से कुछ कम भी हैं।

## सौदा और रजिस्ट्री में अंतर, प्रशासन का अवैध प्लाटिंग पर शिकंजा
रियल एस्टेट के इस बेलगाम उभार के बीच यह चलन भी सामने आ रहा है कि आधिकारिक कागजों में रजिस्ट्री की राशि कम दर्ज कराई जाती है, जबकि बड़ा भुगतान नकद रूप में लिया जाता है। वहीं दूसरी तरफ, नगर और बड़ौता क्षेत्र में जमीन की बढ़ती कीमतों का अनुचित लाभ उठाने के लिए अनधिकृत प्लाटिंग शुरू कर दी गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग ने सख्त रुख अख्तियार किया है। विभाग की ओर से अवैध रास्तों और गैरकानूनी ढांचों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया है, ताकि भविष्य में ऊंचे मुनाफे के लालच में अवैध कॉलोनियां विकसित करने के मंसूबों को रोका जा सके।

## इसका आप पर असर
हाईवे और शहरी बुनियादी ढांचे के विस्तार से ग्रामीण संपत्ति मालिकों की पूंजीगत संपत्ति कई गुना बढ़ गई है, जिससे देहाती इलाकों का आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल रहा है।

- **भारत में:** हाईवे कनेक्टिविटी से सुदूर कृषि भूमियों का शहरीकरण की ओर बढ़ना पूरे देश में नए निवेश केंद्र तैयार कर रहा है। इससे विनिर्माण, वेयरहाउसिंग और आवासीय परियोजनाओं के लिए नए गलियारे तेजी से खुल रहे हैं।
- **हरियाणा में:** गोहाना और सोनीपत बेल्ट के जमीन मालिकों को छह-सात साल पुरानी कीमतों की तुलना में सात से दस गुना अधिक भाव मिल रहे हैं। हालांकि खरीदारों को अनधिकृत कॉलोनियों से बचना होगा, क्योंकि नगर योजना विभाग अवैध निर्माणों पर सीधे बुलडोजर चला रहा है।
- **सड़क पहुंच और मूल्यांकन:** मुख्य हाईवे और बाईपास से सटी जमीनों के भाव दस करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच चुके हैं। भीतरी और कम पहुंच वाले इलाकों में जमीन की दरें अब भी तुलनात्मक रूप से कम बनी हुई हैं।
- **सख्त प्रशासनिक निगरानी:** नगर और बड़ौता क्षेत्र में प्लाट या जमीन खरीदने वालों को पहले वैध अनुमति की जांच कर लेनी चाहिए। बिना मंजूरी विकसित हो रहे रास्तों और ढांचों पर प्रशासन निरंतर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
गोहाना क्षेत्र में जमीन की कीमतों में इस भारी उछाल का मुख्य कारण आधुनिक सड़क नेटवर्क और राज्य सरकार द्वारा सुनियोजित शहरी सेक्टरों का विकास है। पूर्व में केवल कृषि आधारित रहा यह क्षेत्र अब प्रमुख परिवहन गलियारे के तौर पर उभर चुका है।

- **शहरी सेक्टरों की मंजूरी:** रोहतक-पानीपत हाईवे के सहारे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा दो नए सेक्टर विकसित करने के फैसले ने संस्थागत मांग पैदा कर दी है। इसके अतिरिक्त दीनदयाल आवासीय योजना के क्रियान्वयन से आवासीय भूखंडों की मांग में भारी तेजी आई।
- **सड़क कनेक्टिविटी का संगम:** गोहाना-सोनीपत हाईवे और रोहतक-पानीपत हाईवे के बाईपास के परस्पर जुड़ने से देहाती गांवों को सीधी आवाजाही की सुविधा मिली है। नगर, बड़ौता और सिकंदरपुर माजरा जैसे गांव मुख्य आवागमन मार्ग पर आने से सीधे प्राइम लोकेशन बन गए।
- **मुनाफे की होड़ और अवैध प्लाटिंग:** बढ़ती मांग को देखते हुए कई डेवलपर्स ने कृषि भूमि पर बिना औपचारिक अनुमति लिए अवैध रास्ते और प्लाटिंग तैयार कर दी। इसका उद्देश्य भविष्य में कई गुना ऊंचे दामों पर जमीन बेचना था, जिस पर अब डीटीपी विभाग बुलडोजर चलाकर कार्रवाई कर रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. गोहाना और आसपास जमीन की कीमतें छह-सात साल पहले क्या थीं?
छह से सात वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में कृषि भूमि की दरें लगभग एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के आसपास थीं।

### 2. वर्तमान में इस इलाके में जमीन के क्या रेट चल रहे हैं?
प्राइम लोकेशन और हाईवे के पास की जमीनों के दाम अब सात से दस करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच चुके हैं।

### 3. जमीन की कीमतों में इस उछाल का मुख्य कारण क्या है?
रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ दो एचएसवीपी सेक्टर, दीनदयाल आवास योजना और हाईवे-बाईपास कनेक्टिविटी इसका प्रमुख कारण है।

### 4. किन गांवों की जमीनों की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है?
नगर, बड़ौता, सिकंदरपुर माजरा और बाईपास से जुड़े नजदीकी गांवों की जमीनों पर प्रॉपर्टी कारोबारियों की सबसे ज्यादा नजर है।

### 5. डीटीपी विभाग ने किन इलाकों में बुलडोजर से कार्रवाई की है?
नगर और बड़ौता के क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग और बिना अनुमति बनाए गए रास्तों पर डीटीपी विभाग ने बुलडोजर चलाया है।

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