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  "title": "ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण पर फरीदाबाद के सोतई गांव में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना",
  "summary": "फरीदाबाद के सोतई गांव में जेवर एयरपोर्ट से जुड़ने वाले ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण हेतु अधिगृहीत की जा रही जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसान पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं।",
  "content": "हरियाणा के स्मार्ट सिटी फरीदाबाद के अंतर्गत आने वाले गांव सोतई में पिछले करीब 10 दिनों से कृषि भूमि के अधिग्रहण को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित किए जा रहे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के मार्ग में आने वाली जमीनों के एवज में किसान उचित और वर्तमान बाजार दर के अनुसार मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन में गांव के पुरुष, महिलाएं और 70 साल तक के बुजुर्ग किसान एक साथ धरना स्थल पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि वे सरकार के विकास कार्यों के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं, परंतु बिना उचित वित्तीय मुआवजा प्राप्त किए वे अपनी बहुमूल्य पुश्तैनी जमीन का भौतिक कब्जा प्रशासन या निर्माण एजेंसी को नहीं सौंपेंगे। विरोध प्रदर्शन की निरंतरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों ने इस बार रक्षाबंधन का पर्व भी अपने घरों के बजाय धरना स्थल पर ही एक साथ मिलकर मनाया।\n\nविकास कार्य का समर्थन, लेकिन हक की लड़ाई जारी\nसोतई गांव के निवासियों का स्पष्ट कहना है कि उनकी मंशा किसी भी सरकारी परियोजना या इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को रोकने की नहीं है। वे राज्य और केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विस्तार का स्वागत करते हैं। हालांकि, भूमि गवाने वाले परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासी कमलेश ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि कृषि भूमि ही उनके परिवारों के पोषण और दैनिक जीवन यापन का एकमात्र जरिया रही है।\n\nकमलेश के अनुसार, जब तक सरकार अधिगृहीत की जा रही जमीन का उचित मूल्य प्रदान नहीं करती, तब तक उनके सामने आजीविका चलाने का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। कमलेश ने कहा, \"बिना पैसे के जमीन चली गई तो हमारे सामने परिवार चलाने का कोई रास्ता नहीं बचेगा।\" उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रामीण केवल अपने जायज हक के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे हैं और सरकार को निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मुआवजा प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।\n\n70 वर्षीय हीरा अम्मा और बुजुर्गों की व्यथा\nइस आंदोलन की एक महत्वपूर्ण तस्वीर यह है कि इसमें गांव के बुजुर्ग भी पूरी सक्रियता के साथ भागीदारी कर रहे हैं। 70 वर्ष की आयु पार कर चुकी हीरा अम्मा पिछले कई दिनों से धरना स्थल पर बैठकर अपनी जमीन के अधिकार की मांग कर रही हैं। सोतई गांव की कृषि परंपरा काफी पुरानी है, जहां की उपजाऊ मिट्टी में सालों से धान, गेहूं, बाजरा और ज्वार जैसी प्रमुख फसलों की खेती की जाती रही है। इन्हीं फसलों की बिक्री और उपभोग से गांव के अनगिनत परिवारों का गुजारा चलता आया है।\n\nहीरा अम्मा का कहना है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी भूमि पर हल चलाकर और फसलें उगाकर बिताया है। इस उम्र में धरना स्थल पर बैठने की मजबूरी केवल अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। उन्होंने कहा, \"हम यहां किसी काम को रोकने के लिए नहीं बैठे हैं, हम अपने पैसे और अपने हक के लिए धरने पर बैठे हैं।\" बुजुर्गों का मानना है कि यदि बिना मुआवजे के जमीन हाथ से निकल गई, तो उनके बच्चों के सामने आर्थिक तंगी का गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।\n\n200 साल पुराना नाता और सामलात भूमि का गणित\nसोतई गांव में किसानों का अपनी भूमि के साथ केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक और ऐतिहासिक संबंध भी है। गांव की निवासी अनीता बताती हैं कि उनके पूर्वज लगभग 200 वर्षों से इस भूमि पर खेती-बाड़ी करते आ रहे हैं। दो शताब्दियों से जिस जमीन से परिवार का पालन-पोषण होता रहा हो, उसे बिना किसी न्यायसंगत वित्तीय मुआवजे के सौंपना ग्रामीणों के लिए संभव नहीं है। अनीता ने बताया, \"जिस जमीन से हमारे पूर्वजों का 200 साल से नाता रहा है, उसे हम बिना उचित मुआवजे के कैसे दे दें।\"\n\nइसके अलावा, गांव में मुआवजा वितरण को लेकर विषमता की शिकायतें भी सामने आई हैं। मीना कुमारी ने बताया कि सोतई उनका ससुराल है और जेवर एयरपोर्ट की ओर जाने वाले एक्सप्रेसवे के निर्माण में उनकी पारिवारिक जमीन आ रही है। उन्होंने खुलासा किया कि गांव के कुछ चुनिंदा किसानों को तो बैंक खातों में मुआवजा राशि मिल चुकी है, लेकिन एक बड़ी आबादी अभी भी अपने पैसों का इंतजार कर रही है। मीना कुमारी ने स्पष्ट किया, \"जब तक हमारी जमीन का मुआवजा हमें नहीं मिलेगा, तब तक हम अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।\"\n\nभूमि अधिग्रहण के इस दायरे में व्यक्तिगत खेतों के साथ-साथ गांव की साझी भूमि भी आ रही है। स्थानीय किसान प्रेम चंद्र ने जानकारी दी कि उनकी व्यक्तिगत भूमि के साथ-साथ सामलात (साझा) जमीन को मिलाकर कुल करीब 10 एकड़ जमीन इस एक्सप्रेसवे निर्माण की जद में आ रही है। प्रेम चंद्र ने सरकार और एनएचएआई प्रशासन से मांग की है कि सभी प्रभावित भू-स्वामियों को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार भुगतान जल्द से जल्द किया जाए। प्रेम चंद्र ने कहा, \"जब तक जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक हम कब्जा नहीं देंगे।\"\n\nग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे का रूट और एनएचएआई की योजना\nस्मार्ट सिटी फरीदाबाद को उत्तर प्रदेश के नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर) से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना पर काम किया जा रहा है। यह आधुनिक एक्सप्रेसवे फरीदाबाद के सेक्टर-65 से शुरू होकर सीधे जेवर एयरपोर्ट तक जाएगा। इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के मार्ग में फरीदाबाद का सोतई गांव भी पड़ता है, जिसके कारण गांव की उपजाऊ कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा अधिग्रहित किया जा रहा है।\n\nप्रशासनिक स्तर पर काम को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सोतई के किसान अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह अडिग हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अधिकारियों की हर हलचल पर नजर रख रहे हैं। जब तक हर एक प्रभावित किसान को उसकी जमीन का वर्तमान बाजार दर के अनुसार पूरा मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक धरना स्थल से हटने या निर्माण कार्य के लिए जमीन का भौतिक कब्जा देने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।\n\nइसका आप पर असर\nसोतई गांव में चल रहे इस किसान आंदोलन का सीधा असर क्षेत्र के बुनियादी ढांचा विकास और स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ रहा है।\n\n• हरियाणा और फरीदाबाद में: एक्सप्रेसवे निर्माण की गति धीमी होने से फरीदाबाद और नोएडा के बीच सीधी कनेक्टिविटी की समयसीमा बढ़ सकती है। स्थानीय ग्रामीणों के लिए समय पर उचित मुआवजा मिलना उनकी आजीविका और वित्तीय स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।\n• राष्ट्रीय स्तर पर: देश भर में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए पारदर्शी भूमि अधिग्रहण और समयानुसार मुआवजा वितरण की नीतिगत प्रक्रियाओं पर दबाव बढ़ेगा। इससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भूमि धारकों के अधिकारों और मुआवजे के दावों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फरीदाबाद के सोतई गांव में किसान क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?\nकिसान ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के लिए अधिगृहीत की जा रही अपनी कृषि भूमि का वर्तमान बाजार दर के हिसाब से उचित मुआवजा मांग रहे हैं।\n\n2. ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे किन दो प्रमुख स्थानों को जोड़ेगा?\nयह एक्सप्रेसवे फरीदाबाद के सेक्टर-65 से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोड़ेगा।\n\n3. सोतई गांव में किसान आंदोलन कितने दिनों से जारी है?\nसोतई गांव में किसान पिछले करीब 10 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।\n\n4. क्या सोतई गांव के किसान विकास कार्य का विरोध कर रहे हैं?\nनहीं, किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे विकास कार्य के विरोध में नहीं हैं, बल्कि केवल अपनी जमीन के उचित और पूर्ण मुआवजे की मांग कर रहे हैं।\n\n5. सोतई गांव की जमीनों में कौन सी प्रमुख फसलें उगाई जाती हैं?\nसोतई गांव की जमीनों पर धान, गेहूं, बाजरा और ज्वार जैसी प्रमुख फसलें उगाई जाती हैं।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-08-30",
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