गुरुग्राम के ट्रंप टावर में 36वीं मंजिल पर लिफ्ट रुकने से 45 मिनट तक फंसा रहा परिवार, बिल्डर पर गंभीर आरोप गुरुग्राम के सेक्टर 65 स्थित ट्रंप टावर में मेंटेनेंस विवाद के बाद 36वीं मंजिल की लिफ्ट बंद कर दी गई, जिसके चलते वरुण सुहाग का परिवार 45 मिनट तक फ्लैट में फंसा रहा और पुलिस हस्तक्षेप के बाद सेवा बहाल हुई। गुरुग्राम के सेक्टर 65 में एक रिहायशी सोसाइटी में मेंटेनेंस के मसले पर हुआ विवाद बेहद गंभीर रूप ले चुका है। आलीशान इमारत ट्रंप टावर में रहने वाले एक निवासी ने आरोप लगाया है कि बिल्डर ने उनके पूरे परिवार को एक तरह से बंधक बना दिया। 36वीं मंजिल पर स्थित उनके फ्लैट की लिफ्ट सेवा अचानक बंद कर दी गई, जिससे बुजुर्ग मां और एक साल के छोटे बच्चे समेत पूरा परिवार करीब 45 मिनट तक फ्लैट में ही कैद होकर रह गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और मौके पर पहुंचकर पुलिस ने लिफ्ट सेवा को दोबारा बहाल करवाया। करोड़ों के अपार्टमेंट में बुनियादी सुविधाओं पर तकरार इस पॉश आवासीय परियोजना में घरों की कीमतें काफी ऊंची हैं। यहां 3 BHK फ्लैट की कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये है, जबकि 4 BHK फ्लैट का मूल्य करीब 18 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इतने महंगे परिसर में रहने के बावजूद अपार्टमेंट के मालिक वरुण सुहाग को इस अजीबोगरीब परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि मेंटेनेंस शुल्क और एग्रीमेंट लेटर से जुड़े मतभेदों के चलते बिल्डर प्रबंधन ने बेहद अनुचित कदम उठाया। लिफ्ट की सुविधा रोके जाने के साथ ही फ्लैट तक जरूरी सामान और अन्य घरेलू सेवाओं की डिलीवरी भी पूरी तरह ठप कर दी गई। वरुण सुहाग का बयान और सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी अपार्टमेंट नंबर 36C के मालिक वरुण सुहाग ने M3M के डायरेक्टर पर सीधी जिम्मेदारी डालते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि उन्हें बिल्डर और प्रबंधन ने नजरबंद जैसी हालत में डाल दिया। वरुण ने पोस्ट में लिखा, "मुझे बिल्डर M3M और प्रबंधन द्वारा नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया है।" वरुण ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि उनके परिवार में उनकी वृद्ध माताजी और मात्र एक वर्ष का नन्हा शिशु भी साथ रहता है। ऐसे हालात में किसी भी समय मेडिकल इमरजेंसी खड़ी हो सकती है। अगर किसी को तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती, तो 36वीं मंजिल से बिना लिफ्ट के नीचे उतरना नामुमकिन साबित होता। इस गंभीर लापरवाही को उजागर करने के लिए उन्होंने संबंधित बातचीत के वॉट्सऐप संदेशों के स्क्रीनशॉट और वीडियो भी सार्वजनिक किए हैं, जो उन्होंने टावर के मैनेजर को भेजे थे। पुलिस हस्तक्षेप के बाद दोबारा शुरू हुई लिफ्ट जब परिवार फ्लैट के अंदर पूरी तरह लाचार हो गया, तब उन्होंने पुलिस से संपर्क साधा और मदद की गुहार लगाई। पुलिस टीम ने तुरंत सेक्टर 65 स्थित घटनास्थल पर पहुंचकर दखल दिया। पुलिस के दखल के बाद करीब 45 मिनट से ठप पड़ी लिफ्ट को चालू कराया जा सका, जिससे परिवार को राहत मिली। विवाद की मुख्य जड़ मेंटेनेंस और एग्रीमेंट लेटर से जुड़े कानूनी और वित्तीय बिंदु बताए जा रहे हैं। वरुण सुहाग ने पूरे मामले में प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है, जबकि दूसरी ओर बिल्डर प्रबंधन से इस घटनाक्रम पर पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनकी तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इसका आप पर असर हाई-राइज सोसायटियों में रहने वाले फ्लैट खरीदारों के लिए यह घटना बिल्डर की मनमानी और बुनियादी नागरिक अधिकारों के हनन से जुड़े खतरे को दिखाती है। • हरियाणा में: यदि आप किसी बहुमंजिला सोसाइटी में रहते हैं, तो मेंटेनेंस विवाद में बिल्डर द्वारा लिफ्ट या बिजली-पानी जैसी जरूरी सेवाएं रोकना पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसी स्थिति में नागरिक तुरंत डायल 112 पर पुलिस शिकायत दर्ज करा सकते हैं और स्थानीय प्रशासन के पास शिकायत ले जा सकते हैं। • फ्लैट खरीदारों के लिए: एग्रीमेंट लेटर और मेंटेनेंस शर्तों पर हस्ताक्षर करते समय सभी विवाद निवारण क्लॉज ध्यान से जांच लें। आपातकालीन सेवाओं को रोके जाने पर उपभोक्ता फोरम या रेरा प्राधिकरण में कानूनी राहत के लिए याचिका दायर की जा सकती है। • इमरजेंसी प्रोटोकॉल: वरिष्ठ नागरिकों और छोटे बच्चों वाले परिवारों को सोसाइटी प्रबंधन के साथ किसी भी विवाद के दौरान अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों के नंबर तैयार रखने चाहिए। किसी भी अप्रिय रुकावट पर त्वरित पुलिस सहायता ही तत्काल सेवा बहाल करवा सकती है। • डिलीवरी और आवश्यक वस्तुएं: बिल्डर या गार्ड्स द्वारा फ्लैट तक डिलीवरी रोकने की स्थिति में स्थानीय थाने में तत्काल शिकायत की जा सकती है। आवश्यक सेवाओं में बाधा डालना कानूनी रूप से दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा क्यों हुआ यह घटना बिल्डर प्रबंधन और फ्लैट मालिक के बीच मेंटेनेंस भुगतान और अनुबंध की शर्तों को लेकर पैदा हुए आपसी मतभेद का नतीजा है। • विवाद का सीधा कारण: दोनों पक्षों के बीच फ्लैट के मेंटेनेंस शुल्क और एग्रीमेंट लेटर से जुड़ी शर्तों को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। सहमति न बन पाने पर प्रबंधन ने कथित तौर पर फ्लैट की लिफ्ट सेवा को काट दिया। • सहायक परिस्थितियां: निजी हाई-राइज सोसायटियों में लिफ्ट और सुरक्षा प्रणाली पर बिल्डर या मेंटेनेंस एजेंसी का तकनीकी नियंत्रण होता है। इसी केंद्रीय नियंत्रण का इस्तेमाल निवासी पर दबाव बनाने के लिए किया गया। • विवादों का पिछला स्वरूप: दिल्ली-एनसीआर की कई आवासीय सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्क के निर्धारण और सुविधाओं को लेकर खरीदारों तथा बिल्डरों के बीच अक्सर टकराव देखने को मिलता है। आमतौर पर इन मामलों में पुलिस और रेरा के दखल के बाद ही समाधान निकलता है। • प्रबंधन का मौन: घटना के बाद प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बचाव पेश नहीं किया गया है, जबकि पुलिस हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच चल रही है। सवाल-जवाब 1. गुरुग्राम के ट्रंप टावर में क्या घटना हुई? सेक्टर 65 स्थित ट्रंप टावर में मेंटेनेंस विवाद के चलते बिल्डर ने 36वीं मंजिल पर रहने वाले वरुण सुहाग के फ्लैट की लिफ्ट सेवा बंद कर दी, जिससे परिवार 45 मिनट तक फंसा रहा। 2. फ्लैट में उस समय कौन-कौन मौजूद था? वरुण सुहाग के साथ उनकी वृद्ध माताजी और एक साल का छोटा बच्चा फ्लैट के अंदर मौजूद थे। 3. ट्रंप टावर में फ्लैटों की अनुमानित कीमत कितनी है? इस सोसाइटी में 3 BHK फ्लैट की कीमत करीब 12 करोड़ रुपये और 4 BHK फ्लैट की कीमत लगभग 18 करोड़ रुपये है। 4. विवाद की मुख्य वजह क्या थी? यह पूरा विवाद मेंटेनेंस शुल्क और एग्रीमेंट लेटर के मसले पर बिल्डर और निवासी के बीच असहमति के कारण हुआ। 5. लिफ्ट सेवा दोबारा कैसे बहाल हुई? परेशान परिवार द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और करीब 45 मिनट बाद लिफ्ट को दोबारा चालू करवाया। https://trendkia.com/haryana/gurugram-ke-trump-tower-men-36vin-mnjila-para-liphta-rukane-se-45-minata-taka-phnsa-raha-parivara-bildara-para-gnbhira-aropa-55735 TrendKia — Har trend, sabse pehle.