गुरुग्राम की सरकारी कंपनी से गायब हुई 31 किलो से अधिक चांदी, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दो अधिकारियों पर दर्ज की प्राथमिकी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के गुरुग्राम प्लांट से 31 किलो से ज्यादा चांदी गायब होने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने प्राथमिकी दर्ज की है। इस गड़बड़ी में पांच अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। गुरुग्राम स्थित एक प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम के सोलर सेल प्लांट में बड़े पैमाने पर कीमती धातु के गायब होने का गंभीर मामला सामने आया है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के इस कारखाने में सौर ऊर्जा उपकरणों के निर्माण के दौरान चांदी का उपयोग किया जाता है, जिसके स्टॉक में भारी कमी का खुलासा हुआ है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस घटना के संबंध में दो प्रमुख अधिकारियों को नामजद करते हुए औपचारिक जांच शुरू कर दी है। स्टॉक रजिस्टर और भौतिक सत्यापन के आंकड़ों के बीच भारी अंतर ने संयंत्र की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2016 से 2020 के दौरान कारखाने के सुरक्षित कक्ष में लगभग 35.6 किलोग्राम चांदी मौजूद थी। यह सामग्री मुख्य रूप से रिसाइक्लिंग प्रक्रिया और निर्माण कार्यों के लिए रखी गई थी। हालांकि जब इस वर्ष छह फरवरी को भौतिक सत्यापन किया गया, तो भंडार कक्ष में केवल 6.23 किलोग्राम चांदी ही बची मिली। इस प्रकार कुल 31.65 किलोग्राम चांदी का कोईता पता नहीं चला, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 71 लाख रुपये आंकी गई है। जांच के दौरान यह भी बात सामने आई कि इस कीमती धातु की वार्षिक जांच एक समय पर नियमित रूप से की जाती थी। एजेंसी के अनुसार वर्ष 2019 के दौरान जब संयंत्र के प्रमुख के रूप में डॉ. भारत कुमार पंत ने कार्यभार संभाला, तब से नियमित भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया बंद कर दी गई। कागजों पर तो स्टॉक दर्ज होता रहा, लेकिन धरातल पर उसकी जांच नहीं हुई, जिसके चलते धीरे-धीरे सामग्री गायब होती चली गई और किसी को लंबे समय तक इसकी भनक नहीं लगी। एजेंसी की शुरुआती पड़ताल से यह भी पता चला है कि केवल सामग्री ही कम नहीं हुई, बल्कि इससे जुड़े कई जरूरी दस्तावेज और स्टॉक रजिस्टर भी गायब मिले। इन्वेंट्री के रखरखाव और उसके आने-जाने की सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता प्रणाली मौजूद नहीं थी। निगरानी तंत्र में आई इसी ढिलाई के कारण बिना किसी आधिकारिक अनुमति के सामग्री को वहां से हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम में 31 मार्च 2022 को हुई भौतिक जांच का बिंदु भी बेहद खास है। उस समय के दस्तावेजों के अनुसार गोदाम में पूरी मात्रा यानी करीब 35.6 किलोग्राम चांदी सुरक्षित पाई गई थी। इसके बाद यह पूरी सामग्री सामग्री प्रबंधन अनुभाग की सीधी निगरानी में सौंप दी गई थी। लेकिन जब फरवरी 2024 में दोबारा ताला खोला गया, तो वहां केवल 3.98 किलोग्राम सिल्वर टारगेट और 2.25 किलोग्राम स्क्रैप ही हाथ लगा। केंद्रीय एजेंसी ने इस मामले में प्लांट के तत्कालीन प्रबंधक तथा सामग्री प्रबंधन अनुभाग के प्रभारी आशीष कुमार और अतिरिक्त महाप्रबंधक डॉ. भारत कुमार पंत को प्राथमिकी में मुख्य रूप से नामजद किया है। इसके अलावा तीन अन्य कार्मिकों की भूमिका की भी गहन छानबीन की जा रही है, जिनमें वित्त और मानव संसाधन प्रबंधक अजय यादव, प्रबंधक विनयन भारद्वाज और इंजीनियर अजय कुमार शामिल हैं। पूछताछ के दौरान इन सभी के बयानों में कई तरह के विरोधाभास पाए गए हैं, विशेष तौर पर चाबियों के रख-रखाव और दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर। कानूनी कार्रवाई के तहत इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र रचने, सबूत मिटाने, लोक सेवक द्वारा विश्वासघात करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। वर्तमान में यह मामला शुरुआती जांच के दायरे में है और आरोपियों पर लगे आरोपों की पुष्टि अदालत में पूरी न्यायिक प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद ही हो सकेगी। इसका आप पर असर यह घटना सरकारी उपक्रमों में संपत्ति की सुरक्षा और आंतरिक लेखापरीक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिससे प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता महसूस होती है। • भारत में: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में परिसंपत्तियों के रख-रखाव और भौतिक सत्यापन के नियमों को और अधिक कड़ा किया जा सकता है। • गुरुग्राम में: स्थानीय औद्योगिक इकाइयों और सरकारी कारखानों में इन्वेंट्री प्रबंधन तथा सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जा सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह मामला स्टॉक के नियमित भौतिक सत्यापन में लापरवाही और निगरानी तंत्र की कमजोरी के कारण सामने आया है। स्टॉक रजिस्टर मेंटेन करने में अनियमिताएं और लंबे समय तक जांच न होना इसके मुख्य कारण रहे हैं। • भौतिक सत्यापन में कमी: वर्ष 2019 के बाद से नियमित रूप से स्टॉक की जांच बंद कर दी गई थी, जिससे चोरी या हेरफेर लंबे समय तक छिपा रहा। • कमजोर आंतरिक सुरक्षा: सामग्री के आने-जाने और उसके रखरखाव के लिए कोई उचित या पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं की गई थी। • दस्तावेजों का गायब होना: कई वर्षों के इन्वेंट्री वेरिफिकेशन रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर उपलब्ध नहीं मिलने से अनियमितताएं बढ़ती गईं। सवाल-जवाब 1. यह मामला किस कंपनी से जुड़ा है? यह मामला भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के गुरुग्राम स्थित सोलर सेल प्लांट से जुड़ा है। 2. कितनी मात्रा में चांदी गायब हुई है? रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 31.65 किलोग्राम चांदी गायब हुई है जिसकी कीमत करीब 71 लाख रुपये है। 3. यह गड़बड़ी पहली बार कब पकड़ में आई? यह गड़बड़ी 6 फरवरी 2024 को किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आई। 4. इस मामले में किन अधिकारियों के नाम शामिल हैं? जांच एजेंसी ने आशीष कुमार और डॉ. भारत कुमार पंत को प्राथमिकी में नामजद किया है। 5. किस संस्था ने इस मामले की जांच शुरू की है? केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। https://trendkia.com/haryana/gurugram-ki-sarkari-company-se-gayab-hui-31-kilo-se-adhik-chandi-kendriya-jaanch-bureau-ne-do-adhikariyon-par-darj-ki-prathmikhi-33119 TrendKia — Har trend, sabse pehle.