# गुरुग्राम में 1970 में गुजरे बुजुर्ग की जमीन फर्जी नाम से बेची, अदालत के दखल पर दर्ज हुई प्राथमिकी

> हरियाणा के गुरुग्राम में दिसंबर 1970 में दिवंगत हुए चमन लाल की जमीन को चमन राम नाम के हमनाम व्यक्ति के जरिए 2025 में धोखे से बेच दिया गया, जिस पर अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/gurugram-men-1970-men-gujare-bujurga-ki-jamina-pharji-nama-se-bechi-adalata-ke-dakhala-para-darja-hui-prathamiki-38400 · **Language:** Hindi
**Tags:** गुरुग्राम, जमीन घोटाला, पटौदी, फर्जी रजिस्ट्री, हरियाणा पुलिस, चमन लाल, भूमाफिया

हरियाणा के गुरुग्राम में जमीन हथियाने की एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली साजिश का खुलासा हुआ है। लगभग 56 साल पहले दुनिया छोड़ चुके एक व्यक्ति के नाम में हेरफेर कर भूमाफियाओं ने साल 2025 में उनकी कीमती जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पंजीकृत करवा दी। इस फर्जीवाड़े की कलई खुलने के बाद जब मामला अदालत में पहुंचा, तो न्यायालय ने पूरे दस्तावेज और रजिस्ट्री को फर्जी करार देते हुए आरोपियों के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

## विभाजन के दौरान पटौदी में मिली थी पुनर्वास भूमि
इस पूरे मामले की जड़ें देश के बंटवारे के दौर से जुड़ी हुई हैं। विभाजन के वक्त चमन लाल का परिवार विस्थापित होकर गुरुग्राम के पटौदी इलाके में आकर बस गया था। उस समय सरकार की पुनर्वास योजना के तहत उनके परिवार को पटौदी में भूमि आवंटित की गई थी। सरकारी राजस्व दस्तावेजों के अनुसार, मूल भूस्वामी चमन लाल का निधन दिसंबर 1970 में ही हो चुका था। दशकों तक यह जमीन पारिवारिक विरासत का हिस्सा बनी रही, लेकिन हाल ही में जमीन हड़पने वाले गिरोह की नजर इस संपत्ति पर पड़ गई।

## हमनाम बनाकर रची गई फर्जीवाड़े की साजिश
दिसंबर 1970 में चमन लाल की मृत्यु के करीब 56 वर्षों बाद, 2025 में भूमाफियाओं ने एक नया षड्यंत्र रचा। उन्होंने मूल मालिक चमन लाल के नाम से मिलता-जुलता नाम तलाशकर चमन राम नामक व्यक्ति को कागजों में खड़ा कर दिया। फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर उस फर्जी व्यक्ति को जमीन का असली स्वामी दर्शाया गया और फिर पूरी जमीन किसी तीसरे शख्स को बेचकर उसकी रजिस्ट्री भी करा दी गई। पीड़ित पक्ष का सीधा आरोप है कि जब राजस्व अभिलेखों में संपत्ति स्पष्ट रूप से चमन लाल के नाम दर्ज थी, तब तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना चमन राम को मालिक दर्शाना संभव ही नहीं था।

## अदालती आदेश के बाद शुरू हुई पुलिस जांच
धोखाधड़ी का पता चलने पर पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई, लेकिन स्थानीय स्तर पर पुलिस चौकी में उनकी सुनवाई नहीं हुई। परिवार की सदस्य आरती मेहता ने बताया कि जब स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया, तब उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत ने परिजनों द्वारा पेश किए गए ठोस साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद इसे प्रथम दृष्टया फर्जी रजिस्ट्री माना और गुरुग्राम पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का स्पष्ट आदेश दिया।

## दोषियों की गिरफ्तारी और जमीन वापसी की मांग
अदालत के निर्देश पर मामला दर्ज होने के बाद अब गुरुग्राम पुलिस इस सिंडिकेट की विस्तृत जांच कर रही है। पीड़ित परिवार की मांग है कि फर्जी रजिस्ट्री में शामिल भूमाफियाओं, गवाहों और तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल की जाए। आरती मेहता का कहना है कि जालसाजों ने उनके दादा चमन लाल के अलावा परिवार के कई अन्य सदस्यों के नाम भी बदल दिए थे। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से मांग की है कि मामले के सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए और उनकी पुश्तैनी जमीन का मालिकाना हक उन्हें वापस दिलाया जाए।

## इसका आप पर असर
पुश्तैनी और विरासत में मिली संपत्तियों के संबंध में नियमित राजस्व रिकॉर्ड जांचना हर नागरिक के लिए बेहद आवश्यक है।

- **भारत में:** कई राज्यों में जमीन के रिकॉर्ड में नाम की मामूली भिन्नता का फायदा उठाकर जालसाजी की जाती है। सभी भूस्वामियों को अपने पूर्वजों के नाम दर्ज संपत्तियों के नामांतरण और राजस्व प्रविष्टियों की नियमित समीक्षा करनी चाहिए।
- **गुरुग्राम में:** गुरुग्राम और पटौदी क्षेत्र में रियल एस्टेट संपत्तियों पर भूमाफियाओं की नजर रहती है। स्थानीय संपत्ति धारकों को अपनी पुरानी पारिवारिक जमीन के कागजात दुरुस्त रखने और किसी भी संदिग्ध हलचल पर सीधे कानूनी कदम उठाने की जरूरत है।
- **राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल:** बिना सतर्कता बरते खरीदी गई विवादित जमीन में खरीदार की जमा पूंजी भी फंस सकती है। किसी भी जमीन के सौदे से पहले 50 साल पुराने रिकॉर्ड और मृत्यु प्रमाण पत्रों का सत्यापन जरूर कराएं।
- **कानूनी उपचार:** पुलिस स्तर पर सुनवाई न होने पर न्यायिक हस्तक्षेप के जरिए फर्जी रजिस्ट्री रद्द कराई जा सकती है। पीड़ित पक्ष सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाकर एफआईआर और जांच के स्पष्ट आदेश प्राप्त कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह धोखाधड़ी दशकों पुरानी पुनर्वास भूमि के रिकॉर्ड में नाम की समानता का अनुचित लाभ उठाने और राजस्व निगरानी की कथित विफलता के कारण संभव हुई।

- **सीधा कारण:** साल 2025 में कुछ भूमाफियाओं ने 1970 में मृत मूल मालिक चमन लाल के स्थान पर चमन राम नाम के व्यक्ति को खड़ा करके फर्जी दस्तावेजों से जमीन बेच दी। इस जालसाजी का उद्देश्य दशकों पुरानी पुनर्वास संपत्ति को अवैध रूप से हड़पना था।
- **प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत:** पीड़ित परिवार का आरोप है कि तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार ने राजस्व अभिलेखों में चमन लाल दर्ज होने के बावजूद चमन राम के नाम पर रजिस्ट्री पारित कर दी। बिना अधिकारियों की कथित मिलीभगत के इस तरह की फर्जी रजिस्ट्री संभव नहीं थी।
- **अदालत का हस्तक्षेप:** स्थानीय पुलिस चौकी में शिकायत पर कार्रवाई न होने के कारण पीड़ित पक्ष को अदालत जाना पड़ा। अदालत ने पेश साक्ष्यों के आधार पर रजिस्ट्री को प्रथम दृष्टया फर्जी पाते हुए पुलिस को आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. यह जमीन विवाद किस जिले और क्षेत्र का है?
यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम जिले के अंतर्गत आने वाले पटौदी क्षेत्र का है।

### 2. जमीन के मूल मालिक कौन थे और उनका निधन कब हुआ था?
जमीन के मूल मालिक चमन लाल थे, जिनका निधन दिसंबर 1970 में हुआ था।

### 3. आरोपियों ने जमीन हथियाने के लिए क्या तरीका अपनाया?
आरोपियों ने 56 साल पहले मृत चमन लाल के मिलते-जुलते नाम वाले चमन राम नामक व्यक्ति को मालिक दिखाकर 2025 में फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्री कराई।

### 4. परिवार को यह जमीन कब और कैसे मिली थी?
विभाजन के समय जब परिवार पटौदी आया था, तब सरकार द्वारा उन्हें यह पुनर्वास भूमि आवंटित की गई थी।

### 5. पीड़ित परिवार की ओर से क्या आरोप लगाए गए हैं?
पीड़ित परिवार की आरती मेहता ने आरोप लगाया है कि इस फर्जीवाड़े में तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार सहित कई अधिकारियों की मिलीभगत रही है।

### 6. मामले में अदालत और पुलिस ने क्या कदम उठाया है?
अदालत ने रजिस्ट्री को फर्जी मानते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए, जिसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

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