हरियाणा में तीस दिन से सफाई कर्मियों का आंदोलन जारी, बाजारों और रिहायशी इलाकों में लगे कचरे के पहाड़ हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे महीने में प्रवेश कर चुकी है, जिससे गुरुग्राम समेत कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं और व्यवस्था चरमरा गई है। गुरुग्राम समेत पूरे हरियाणा में सफाई कर्मचारियों का चल रहा आंदोलन अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। इस लंबी हड़ताल के चलते प्रदेश के कई प्रमुख रिहायशी इलाकों और व्यस्त बाजारों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं। स्थानीय रहवासियों को अब गंभीर गंदगी और लगातार उठती दुर्गंध के बीच अपना जीवन बिताने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस स्थिति ने राज्य की सफाई व्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है और प्रशासनिक अमला भी इससे निपटने में जूझ रहा है। सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के साथ लगातार दौर की बातचीत जारी है, लेकिन कर्मचारी अपनी पुरानी मांगों पर पूरी तरह अड़े हुए हैं, जिसके कारण गतिरोध बना हुआ है। हालांकि, कुछ अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी अब भी हालात संभालने के लिए अपनी बारी के अनुसार काम कर रहे हैं। अनुबंध कर्मियों की अपनी मुश्किलें और मजबूरी सेक्टर-54 की सनसिटी टाउनशिप में सत्ताइस साल का एक अनुबंध सफाई कर्मचारी अभी भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। वह उन चुनिंदा कर्मियों में शामिल है जो इस व्यापक हड़ताल के बीच भी हर दूसरे दिन नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर पहुंच रहे हैं। उनका यह कहना है कि कुछ ठेकेदार लगातार सफाई कर्मचारियों की आर्थिक और सामाजिक लाचारी का फायदा उठा रहे हैं। उनके अनुसार, इस हड़ताल की वजह से पैदा हुई कमी को पूरा करने के लिए जिन नए कामगारों को मैदान में उतारा गया है, उन्हें भी समय पर उनका मेहनताना या वेतन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सोसाइटियों और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयास सनसिटी टाउनशिप की आरडब्ल्यूए चेयरपर्सन कुसुम शर्मा ने इस संबंध में बताया कि परिसर के भीतर सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सोसाइटी प्रबंधन ने अपनी तरफ से अतिरिक्त मजदूरों को काम पर रखा है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि कई कर्मचारी नियमित रूप से काम पर नहीं लौट पा रहे हैं। स्थानीय निवासियों की यह शिकायत है कि आवासीय परिसरों के पार्कों के भीतर और उनके आस-पास के क्षेत्रों में कई दिनों से कचरा जमा है जिसे समय पर उठाया नहीं जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा भी पैदा हो गया है। बदले गए ठेकेदार और भुगतान में देरी का असर सेक्टर-56 में मुख्य सड़कों के किनारे और खाली पड़े प्लॉटों में घरों से निकलने वाला कचरा बड़ी मात्रा में इकट्ठा हो चुका है। इस इलाके के एमसीजी सुपरवाइजर राकेश कुमार ने सफाई व्यवस्था के इस तरह चरमराने के पीछे मुख्य वजह ठेकेदारों में बदलाव होना और कामगारों के वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी को बताया है। स्थानीय नागरिकों का यह अनुभव है कि पिछले एक महीने के भीतर हालात तेजी से बद से बदतर हुए हैं, और विशेष तौर पर बाजारों के आसपास कचरे के अंबार में लगातार इजाफा होता जा रहा है, जिससे खरीदार भी परेशान हैं। हड़ताल के तीस दिन पूरे होने पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन शुक्रवार को सफाई विभाग और फायर ब्रिगेड के सैकड़ों कर्मचारी अपनी इस हड़ताल के तीस दिन पूरे होने के मौके पर एक साथ सड़कों पर उतरे। नगरपालिका कर्मचारी संघ के बैनर तले सभी कर्मचारियों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनियन ने अगले दिन यानी शनिवार को कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक राव नरबीर सिंह के सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास तक एक विरोध मार्च निकालने का खुला ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने हरियाणा सरकार पर यह गंभीर आरोप लगाया कि वह कर्मचारियों की वास्तविक मांगों को लेकर आम जनता को लगातार गुमराह कर रही है। लिखित आदेशों के बिना आंदोलन समाप्त करने से इनकार प्रदर्शनकारियों का यह कहना है कि राज्य सरकार के अलग-अलग मंत्री उनकी बारह, तेरह और चौदह मांगों को सैद्धांतिक रूप से मानने की बात तो कह रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई भी आधिकारिक लिखित आदेश या नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। दूसरी ओर, कुछ फायर सर्विस कर्मचारियों को प्रशासन की तरफ से कारण बताओ नोटिस और निलंबन के आदेश थमाए जाने के बाद से कर्मचारियों और सरकार के बीच का यह तनाव और अधिक बढ़ गया है। नियमित रोजगार और उचित पारिश्रमिक की प्रमुख मांग कर्मचारियों का यह मुख्य सवाल है कि उन्हें बहुत कम मानदेय पर केवल अनुबंध के आधार पर क्यों काम कराया जा रहा है। मजदूर यूनियन लगातार यह मांग उठा रही है कि सफाई और सीवर से जुड़े सभी कर्मियों की पक्की यानी नियमित भर्ती की जाए और उन्हें बाजार के अनुरूप बेहतर वेतन दिया जाए। उनका तर्क है कि जब राज्य के अन्य सभी विभागों में नियमित नियुक्तियां की जाती हैं, तो फिर सफाई और सीवर जैसे सबसे कठिन कार्यों में लगे कर्मचारियों को वर्षों तक अस्थायी या ठेके पर क्यों रखा जाता है। यूनियन ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं लिया जाता, तब तक यह हड़ताल किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगी। इसका आप पर असर हड़ताल लंबी खींचने से आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे कचरा न उठने के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। • भारत में: राज्य स्तर पर इस प्रकार के लंबे नागरिक आंदोलनों से स्थानीय शहरी निकायों की कार्यप्रणाली पर गंभीर असर पड़ता है, जिससे स्वच्छता अभियान पिछड़ जाते हैं। • गुरुग्राम में: सेक्टर-54 और सेक्टर-56 जैसे इलाकों तथा स्थानीय बाजारों में कचरे के पहाड़ खड़े होने से लोगों का निकलना दूभर हो गया है और संक्रामक बीमारियों का अंदेशा बढ़ गया है। • वेतन और सेवाएं: अनुबंध पर काम करने वाले कर्मियों को समय पर भुगतान न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है, जबकि निवासियों को अतिरिक्त भुगतान करके निजी व्यवस्था करनी पड़ रही है। • प्रशासनिक चेतावनी: फायर सर्विस और अन्य विभागों द्वारा निलंबन और नोटिस की कार्रवाई से सरकारी कामकाज और आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। सवाल-जवाब 1. हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को कितने दिन हो चुके हैं? सफाई कर्मचारियों की यह हड़ताल अब तीस दिन यानी पूरे एक महीने से अधिक समय से जारी है और यह दूसरे महीने में प्रवेश कर चुकी है। 2. किन इलाकों में कचरे के सबसे ज्यादा ढेर लगे हैं? गुरुग्राम के सेक्टर-54, सेक्टर-56 और कई रिहायशी इलाकों तथा बाजारों के आसपास कचरे के बड़े ढेर लग गए हैं। 3. कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं? कर्मचारी सफाई और सीवर कर्मियों की नियमित भर्ती करने और उन्हें बेहतर वेतन देने की मांग कर रहे हैं। 4. नगरपालिका कर्मचारी संघ ने आगे क्या कदम उठाने की घोषणा की है? यूनियन ने कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक राव नरबीर सिंह के सिविल लाइंस स्थित आवास तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। 5. टाउनशिप में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या किया गया है? सनसिटी टाउनशिप की आरडब्ल्यूए चेयरपर्सन कुसुम शर्मा ने बताया कि सफाई बनाए रखने के लिए सोसाइटी ने अपनी तरफ से अतिरिक्त मजदूर रखे हैं। https://trendkia.com/haryana/haryana-me-tees-din-se-safai-karmiyo-ka-andolan-jari-27987 TrendKia — Har trend, sabse pehle.