# हरियाणा में ऑनलाइन निवेश और क्रिप्टो के नाम पर करोड़ों की ठगी, रेहड़ी वाले से लग्जरी कारों के मालिक बने जालसाज समेत चार गिरफ्तार

> हरियाणा पुलिस ने भारी रिटर्न, दुबई में फ्लैट और क्रिप्टोकरेंसी का झांसा देकर 8 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें रेहड़ी चलाने से लग्जरी कारों तक पहुंचा मुख्य आरोपी भी शामिल है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/haryana-men-nalaina-nivesha-aura-kripto-ke-nama-para-karoron-ki-thagi-rehari-vale-se-lagjari-karon-ke-malika-bane-rajesh-kumar-sam-42775 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरियाणा साइबर क्राइम, निवेश धोखाधड़ी, क्रिप्टोकरेंसी स्कैम, पंचकूला पुलिस, राजेश कुमार नाना, फर्जी ऐप

हरियाणा में साइबर ठगी और फर्जी निवेश योजनाओं के एक बड़े अंतर-जिला नेटवर्क की परतें खुलने के बाद चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। कम अवधि में रकम कई गुना करने, आभासी डिजिटल संपत्तियों में रिकॉर्ड रिटर्न दिलाने और यहां तक कि विदेश में अचल संपत्ति दिलाने के झूठे वायदे करके सैकड़ों लोगों से गाढ़ी कमाई ऐंठ ली गई। पुलिस द्वारा की जा रही गहन पड़ताल में अब तक प्रारंभिक तौर पर आठ करोड़ रुपये या उससे भी अधिक के गबन का अनुमान लगाया गया है। इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज पहलू एक साधारण रेहड़ी संचालक का रातोंरात आलीशान फार्महाउस और महंगी गाड़ियों के मालिक में तब्दील हो जाना रहा है।

## सड़क किनारे रेहड़ी से लग्जरी कारों और फार्महाउस तक का सफर
इस पूरे प्रकरण के केंद्र में करनाल निवासी राजेश कुमार उर्फ 'नाना' की भूमिका सबसे प्रमुख बनकर उभरी है। कुछ समय पूर्व तक सड़क किनारे कढ़ी-छोले और चावल की रेहड़ी लगाकर अपनी आजीविका चलाने वाला यह शख्स बेहद कम वक्त में करोड़ों की चल-अचल संपत्ति का स्वामी बन बैठा। जांच अधिकारियों ने पड़ताल के दौरान राजेश के कब्जे से एक मर्सिडीज कार बरामद की है। केवल यही नहीं, नेटवर्क से जुड़े अन्य प्रमुख लोगों और बिचौलियों के पास से ऑडी Q5, ऑडी Q3 और बीएमडब्ल्यू जैसी कई अति-आधुनिक गाड़ियां भी जब्त की गई हैं। पुलिस महकमा अब इन सभी लग्जरी वाहनों को अपराध के जरिए जुटाई गई अवैध संपत्ति मानते हुए सक्षम न्यायालय से इनकी सार्वजनिक नीलामी कराने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। इसके साथ ही आरोपी के आलीशान फार्महाउस और अन्य अचल संपत्तियों की वैधता और वित्तीय स्रोतों की भी बारीक पड़ताल की जा रही है।

## कई जिलों में फैला जाल और शिक्षित वर्ग का फंसाव
पुलिस के अनुसार, राजेश और उसके गिरोह ने पूरे राज्य में अपना शिकंजा कस रखा था। निवेशकों को जाल में फंसाने के लिए हरियाणा के विभिन्न जिलों को निशाना बनाया गया, जहां से लगातार पीड़ितों की शिकायतें दर्ज हो रही हैं। वर्तमान में यमुनानगर, कैथल, करनाल, अंबाला और कुरुक्षेत्र जिलों से बड़ी संख्या में लोग अपनी डूबी हुई पूंजी को लेकर पुलिस के पास पहुंचे हैं। इस रैकेट की सबसे घातक रणनीति यह रही कि इसने सिर्फ ग्रामीण या कम पढ़े-लिखे नागरिकों को ही अपना शिकार नहीं बनाया, बल्कि समाज के उच्च शिक्षित, कारोबारी और पेशेवर तबके के लोग भी जल्दी अमीर बनने की लालसा में अपनी गाढ़ी कमाई इस फर्जीवाड़े में झोंकते चले गए।

## 8,500 रुपये के शुरुआती दांव से 60 लाख के नुकसान की दास्तान
इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ पंचकूला के एक सरकारी ठेकेदार अशोक कुमार की औपचारिक शिकायत के बाद हुआ। अशोक ने अपने बयान में स्वीकार किया कि पहले उन्हें इन चमकीले दावों और ऑनलाइन मंचों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था। हालांकि, आयोजकों ने बड़े होटलों में भव्य संगोष्ठियों का आयोजन किया, जिसमें कंपनी के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी का दावा किया गया और भारी मुनाफे के आकर्षक प्रस्तुतीकरण दिखाए गए। इन आयोजनों से प्रभावित होकर अशोक ने सबसे पहले करीब 8,500 रुपये की मामूली रकम लगाई। जब शुरुआती निवेश पर कथित लाभांश का भुगतान समय पर उनके खाते में आ गया, तो उनका संदेह पूरी तरह दूर हो गया।

शुरुआती भरोसे के बाद अशोक ने साल 2021 में विभिन्न स्रोतों से कर्ज उठाकर करीब 3.5 लाख रुपये इस योजना में लगा दिए। मुनाफा बढ़ता देख उन्होंने अपने सगे भाइयों और अन्य नजदीकी रिश्तेदारों को भी इसमें जोड़ लिया। समय बीतने के साथ अशोक की अपनी जमा-पूंजी और निवेश की रकम बढ़कर लगभग 60 लाख रुपये तक पहुंच गई। इतना ही नहीं, उनके कहने पर नेटवर्क से जुड़े 20 से 25 अन्य परिचित भी अपनी पूंजी वापस निकालने में पूरी तरह नाकाम रहे। अशोक का आकलन है कि केवल उनके प्रत्यक्ष संपर्क में आए लोगों का ही कुल वित्तीय नुकसान 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।

## मोबाइल ऐप का तकनीकी छलावा और निकासी पर पाबंदी
पंचकूला साइबर अपराध शाखा के अधिकारियों ने खुलासा किया है कि पीड़ितों को मानसिक रूप से बांधे रखने के लिए विशेष तकनीकी हेरफेर का सहारा लिया जाता था। निवेशकों को उनके स्मार्टफोन पर एक विशेष मोबाइल ऐप्लिकेशन में लगातार बढ़ता हुआ बैलेंस दिखाया जाता था। स्क्रीन पर दिन-प्रतिदिन तेजी से ऊपर जाती हुई रकम को देखकर भोले-भाले निवेशकों को यह पक्का यकीन हो जाता था कि उनकी पूंजी सचमुच अप्रत्याशित दर से बढ़ रही है।

असलियत में ये सभी आंकड़े और बैलेंस पूरी तरह मनगढ़ंत और नियंत्रित थे। जब कोई निवेशक अपने अर्जित लाभ या मूलधन को बैंक खाते में निकालने की कोशिश करता, तो निकासी प्रक्रिया को तकनीकी अड़चनों का हवाला देकर रोक दिया जाता था। जांच के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया जहां एक पीड़ित के 30 लाख रुपये के मूल निवेश को महज छह महीनों के भीतर ऐप स्क्रीन पर लगभग 68 लाख रुपये दर्शाया गया था। जब निवेशक ने यह रकम निकालने का दबाव बनाया, तो उसे बताया गया कि उसका पूरा पैसा किसी अन्य योजना या क्रिप्टोकरेंसी में दोबारा निवेश कर दिया गया है। इस तरह निवेशकों को एक आभासी प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर पूंजी स्थानांतरित करने के लिए लगातार बरगलाया जाता था।

## फर्जी प्लेटफॉर्म, दुबई में फ्लैट और क्रिप्टो संपत्तियों का लालच
जांच के दायरे में आए इस नेटवर्क द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कई ऑनलाइन मंचों और डिजिटल टोकनों के नाम अब उजागर हो चुके हैं। इनमें ब्लूम ड्राइव, LPNT क्रिप्टोकरेंसी, SOIL VERSE और मेचाई एफएक्स जैसे प्लेटफॉर्म प्रमुखता से शामिल हैं। गिरोह के संचालक केवल ऐप स्क्रीन पर धन लाभ का ही सब्जबाग नहीं दिखाते थे, बल्कि निवेशकों को यह झूठा आश्वासन भी देते थे कि उनके नाम पर संयुक्त अरब अमीरात के शहर दुबई में आलीशान फ्लैट और प्लॉट तक आरक्षित किए जा चुके हैं। जैसे ही कोई योजना बंद होने की कगार पर पहुंचती, वे निवेशकों को अधिक प्रतिफल का झांसा देकर दूसरे नए प्लेटफॉर्म में फंड ट्रांसफर करने पर मजबूर कर देते थे।

## नेटवर्क की सीढ़ियां और सीनियर प्रोजेक्ट हेड का पद
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि राजेश कुमार किस प्रकार एक सामान्य सदस्य से गिरोह के मुख्य रणनीतिकार के रूप में उभरा। एक परिचित के जरिए पहले उसे ब्लूम नाम के ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा गया था। मामूली रकम से शुरुआत करने के बाद उसने दूसरे प्लेटफॉर्म में करीब 2 लाख रुपये लगाए। इसके बाद वह खुद सक्रिय होकर नए लोगों को फंसाने के काम में जुट गया। वह चंडीगढ़, मोहाली और अन्य बड़े शहरों के सितारा होटलों में आयोजित होने वाले सेमिनारों में प्रमुख वक्ता और आयोजक बनकर शामिल होने लगा।

नए सदस्यों और उनकी पूंजी को सिस्टम में लाने के बदले राजेश को भारी कमीशन और इंसेंटिव मिलने लगा। गिरोह के भीतर उसे कथित तौर पर सीनियर प्रोजेक्ट हेड का ऊंचा ओहदा भी प्रदान कर दिया गया था। पूछताछ और जांच में यह बात भी सामने आई कि उसने खुद को एक मर्सिडीज सी-क्लास कार उपहार में मिलने और अल्पकाल में 2 करोड़ रुपये कमाने का दावा किया था। पुलिस अब इन दावों की वास्तविक मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसकी संपत्तियों का कितना हिस्सा आम जनता की लूटी गई कमाई से खड़ा किया गया है।

## चार मुख्य अभियुक्त गिरफ्तार और फोरेंसिक पड़ताल जारी
इस बहुचर्चित धोखाधड़ी मामले में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अब तक चार प्रमुख आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में करनाल के राजेश और उदम सिंह, यमुनानगर निवासी सुशील कुमार तथा कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा क्षेत्र के निवासी संजीव कुमार शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिन्हें विस्तृत डेटा विश्लेषण के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल रिकॉर्ड्स और बैंक लेन-देन की पड़ताल से इस नेटवर्क के अन्य संपर्कों और छिपाई गई संपत्तियों का पर्दाफाश होगा।

## इसका आप पर असर
यह मामला दिखाता है कि कैसे लुभावने रिटर्न और फर्जी मोबाइल ऐप्स के जरिए लोगों की जमा-पूंजी हड़पी जा रही है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की सख्त जरूरत है।

- **हरियाणा में:** अंबाला, करनाल, कैथल, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र के नागरिकों को किसी भी अपंजीकृत निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधानिकता जांचनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने इन संदिग्ध ऐप्स में रकम लगाई है, तो तुरंत निकटतम साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज करानी होगी।
- **भारत में:** देश भर के आम निवेशकों को यह समझना होगा कि कोई भी वैध वित्तीय संस्थान कुछ ही महीनों में पैसा दोगुना करने की गारंटी नहीं देता है। किसी भी मोबाइल ऐप पर दिख रहे फर्जी बैलेंस पर भरोसा करने के बजाय सेबी और आरबीआई से मान्यता प्राप्त विकल्पों में ही निवेश करना सुरक्षित है।
- **वित्तीय सुरक्षा:** होटल सेमिनारों और रिश्तेदारों के दबाव में आकर कर्ज लेकर निवेश करने से पूरी तरह बचना आवश्यक है। यदि कोई निकासी पर रोक लगाकर अन्य नई योजनाओं में पैसा ट्रांसफर करने का दबाव बनाए, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
- **डिजिटल सतर्कता:** अज्ञात क्रिप्टो टोकन और विदेश में फ्लैट का झांसा देने वाले गैर-पंजीकृत दलालों से दूर रहें। अपनी व्यक्तिगत बैंकिंग जानकारी या ओटीपी किसी भी अनधिकृत एजेंट के साथ साझा न करें।

## ऐसा क्यों हुआ
यह धोखाधड़ी अत्यधिक लालच, फर्जी मोबाइल ऐप्लिकेशनों के जरिए दिखाए गए आभासी मुनाफे और संगठित प्रचार तंत्र के मेल से संभव हो सकी।

- **त्वरित मुनाफे का लालच:** सिंडिकेट ने लोगों को कम समय में धन कई गुना करने, क्रिप्टो टोकनों में भारी वृद्धि और दुबई में संपत्ति का भरोसा दिलाकर मानसिक रूप से प्रभावित किया। शुरुआती छोटे दांवों पर वास्तविक रिटर्न देकर निवेशकों का अटूट विश्वास हासिल कर लिया गया।
- **हेरफेर वाले डिजिटल ऐप्स:** गिरोह ने ब्लूम ड्राइव, LPNT और SOIL VERSE जैसे मंचों के जरिए मोबाइल स्क्रीन पर कृत्रिम मुनाफा दिखाया। निवेशकों को स्क्रीन पर तेजी से बढ़ती रकम देखकर अपनी सफलता का भ्रम होता रहा, जबकि असलियत में निकासी पूरी तरह बंद रखी गई थी।
- **होटल सेमिनार और कॉर्पोरेट दिखावा:** बड़े शहरों के प्रमुख होटलों में कॉर्पोरेट कार्यक्रमों का आयोजन करके कंपनी के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी का नाटक रचा गया। इस सामाजिक और कॉर्पोरेट दिखावे ने पेशेवर और शिक्षित लोगों के संदेह को भी पूरी तरह समाप्त कर दिया।
- **मल्टी-लेवल कमीशन ढांचा:** नए निवेशकों को जोड़ने के बदले सदस्यों को भारी कमीशन और लग्जरी कारें देने का लालच दिया गया, जिसके चलते पीड़ितों ने अनजाने में अपने ही सगे-संबंधियों को इस जाल में धकेल दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. हरियाणा साइबर पुलिस ने किस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने फर्जी निवेश योजनाओं, क्रिप्टो और दुबई में फ्लैट का लालच देकर 8 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

### 2. इस रैकेट का मुख्य आरोपी राजेश कुमार पहले क्या काम करता था?
राजेश कुमार उर्फ 'नाना' पहले सड़क किनारे कढ़ी-छोले और चावल की रेहड़ी लगाता था, जो बाद में गिरोह से जुड़कर महंगी कारों और फार्महाउस का मालिक बन गया।

### 3. पुलिस ने आरोपियों के पास से कौन-कौन से वाहन जब्त किए हैं?
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान एक मर्सिडीज कार के अलावा ऑडी Q5, ऑडी Q3 और बीएमडब्ल्यू जैसी लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं।

### 4. पीड़ित अशोक कुमार ने शुरुआत में कितनी रकम लगाई थी और उनका कुल नुकसान कितना हुआ?
अशोक कुमार ने पहले 8,500 रुपये लगाए थे, जिसके बाद बढ़ते भरोसे में उन्होंने खुद के करीब 60 लाख रुपये गंवा दिए और उनके नेटवर्क का नुकसान 7 से 8 करोड़ रुपये रहा।

### 5. इस मामले में कौन-कौन से प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के नाम सामने आए हैं?
जांच में ब्लूम ड्राइव, LPNT क्रिप्टोकरेंसी, SOIL VERSE और मेचाई एफएक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स के नाम सामने आए हैं।

### 6. गिरफ्तार किए गए चार आरोपी कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में करनाल के राजेश और उदम सिंह, यमुनानगर के सुशील कुमार और कुरुक्षेत्र के लाडवा निवासी संजीव कुमार शामिल हैं।

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