# हरियाणा रोडवेज बस में महिला ने दिया बच्चे को जन्म, चालक की सूझबूझ और यात्रियों की मदद से टला संकट

> हरियाणा के नूंह में अलवर से लौट रही एक महिला ने चलती रोडवेज बस में बेटे को जन्म दिया। चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए 20 मिनट में बस को अस्पताल पहुंचाया।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/haryana-roadways-basa-men-mahila-ne-diya-bachche-ko-janma-chalaka-ki-sujhabujha-aura-yatriyon-ki-madada-se-tala-snkata-51408 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरियाणा रोडवेज, नूंह समाचार, फिरोजपुर झिरका, प्रसव समाचार, चलती बस में प्रसव, स्वास्थ्य सेवा

हरियाणा के नूंह में एक चलती बस में अचानक गूंजी किलकारी ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। फिरोजपुर झिरका इलाके में शुक्रवार देर शाम हरियाणा रोडवेज की एक बस में गर्भवती महिला ने अपने बेटे को जन्म दिया। राजस्थान के अलवर से लौट रहे एक परिवार के लिए यह सफर अनिश्चितता और घबराहट से भरा था, लेकिन बस चालक, कंडक्टर और सह-यात्रियों की तत्परता से संकट के समय एक नन्हीं जान सुरक्षित दुनिया में आ सकी।

## अस्पताल की जांच के बाद घर लौट रहा था परिवार
फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के वार्ड नंबर-7 में रहने वाले शोयब खान अपनी गर्भवती पत्नी सुमैय्या को लेकर शुक्रवार की सुबह राजस्थान स्थित अलवर के सानिया अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने वहां महिला की स्वास्थ्य जांच की और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखने के बाद बताया कि डिलीवरी होने में अभी लगभग 15 दिनों की देरी है। अस्पताल से आवश्यक दवाएं लेने के बाद डॉक्टर ने दंपती को वापस घर लौटने की सलाह दी। परिजनों को लगा कि अभी काफी समय शेष है, इसलिए वे निश्चिंत होकर हरियाणा रोडवेज की बस में सवार होकर अपने घर के लिए रवाना हो गए।

## रास्ते में अचानक शुरू हुई तेज प्रसव पीड़ा
सफर के दौरान जैसे ही बस रामगढ़ से आगे बढ़ी, सुमैय्या को पेट में असहनीय दर्द महसूस होने लगा। जब गाड़ी नौगांवा के करीब पहुंची, तो दर्द इतना बढ़ गया कि परिजनों के हाथ-पांव फूलने लगे। परिस्थिति की गंभीरता को भांपते हुए शोयब खान ने तुरंत बस परिचालक के पास जाकर अपनी पत्नी की नाजुक हालत के बारे में जानकारी दी। परिचालक ने बिना किसी देरी के चालक कासम को पूरे मामले से अवगत कराया। चालक कासम ने तुरंत निर्णय लिया और यात्रियों से खचाखच भरी बस को बिना समय गंवाए फिरोजपुर झिरका स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर मोड़ दिया।

## सह-यात्रियों की मदद से बस में गूंजी किलकारी
स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही बस के भीतर परिस्थितियां काफी बदल गईं। सफर के दौरान ही सुमैय्या की प्रसव पीड़ा बेहद तेज हो गई और उसने सामान्य प्रसव के माध्यम से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे दिया। संकट के इस दौर में बस में सवार अन्य महिला यात्रियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रसव की प्रक्रिया में हर संभव सहायता की। महिलाओं के सहयोग और सूझबूझ से यह जटिल प्रक्रिया सुरक्षित संपन्न हो सकी। इधर, चालक कासम ने मात्र 20 मिनट के भीतर पूरी बस को सीधे अस्पताल के परिसर में लाकर खड़ा कर दिया, जहां चिकित्सा टीम तुरंत हरकत में आ गई।

## प्राथमिक उपचार के बाद मांडीखेड़ा रेफर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फिरोजपुर झिरका के अतिरिक्त एसएमओ डॉ. आदित्य यादव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शुक्रवार देर शाम बस में प्रसव होने के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को तुरंत केंद्र में भर्ती कराया गया था। वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने दोनों का प्राथमिक उपचार शुरू किया और स्वास्थ्य स्थिति को स्थिर किया। बाद में, मां और नवजात शिशु को और बेहतर चिकित्सीय देखभाल प्रदान करने के उद्देश्य से देर रात लगभग एक बजे मांडीखेड़ा स्थित अल आफिया अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, जहां उन्हें आगे के इलाज के लिए स्थानांतरित किया गया।

## चालक-परिचालक को सम्मानित करने की उठने लगी मांग
इस पूरी घटना के बाद स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों की जमकर सराहना की है। गांव माहोली के पूर्व सरपंच प्रत्याशी अरशद एडवोकेट ने चालक कासम और कंडक्टर की त्वरित कार्रवाई की तारीफ की। उन्होंने मांग रखी कि परिवहन विभाग को संकट के समय असाधारण सूझबूझ और मानवीय संवेदना दिखाने वाले इन दोनों कर्मचारियों को आधिकारिक रूप से सम्मानित करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि रोडवेज प्रशासन को बस में जन्म लेने वाले इस नवजात बालक की आगे की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने पर भी सकारात्मक रूप से विचार करना चाहिए।

## इसका आप पर असर
चलती बस में आपातकालीन प्रसव की यह घटना यात्रियों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें रेखांकित करती है।

- **भारत में:** सार्वजनिक परिवहन में आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों के दौरान चालकों और कर्मचारियों का त्वरित निर्णय लेना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में यात्रियों को घबराने के बजाय परस्पर सहयोग की भावना से सहायता करनी चाहिए।
- **नूंह में:** स्थानीय निवासियों के लिए फिरोजपुर झिरका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अल आफिया अस्पताल मांडीखेड़ा आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक व उच्च स्तर की स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करते हैं। संकट के समय निकटतम स्वास्थ्य केंद्र की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।
- **यात्रियों के लिए सुझाव:** गर्भावस्था के दौरान लंबी दूरी की यात्रा करते समय किसी भी अचानक होने वाले दर्द या असहजता पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। आपात स्थिति में निकटतम वाहन चालक या बस परिचालक को समय रहते सूचित करना श्रेयस्कर रहता है।
- **प्रशासनिक कदम:** इस घटना के बाद परिवहन विभाग द्वारा अपने कर्मचारियों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन स्थिति से निपटने का विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस घटना के पीछे चिकित्सीय पूर्वानुमान से पहले अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होना और समय पर अस्पताल न पहुंच पाना मुख्य कारण रहा।

- **समय से पूर्व प्रसव पीड़ा:** अल्ट्रासाउंड जांच में प्रसव के लिए 15 दिनों का समय बताया गया था, लेकिन यात्रा के दौरान अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
- **मार्ग में दूरी:** अलवर अस्पताल से लौटते समय रामगढ़ और नौगांवा के बीच महिला की तबीयत बिगड़ी, जहां से अस्पताल तत्काल पहुंच पाना संभव नहीं था।
- **त्वरित निर्णय:** बस चालक ने स्थिति को भांपते हुए बिना समय गंवाए बस को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर मोड़ दिया।
- **सामूहिक प्रयास:** बस में मौजूद महिला यात्रियों ने संकट के क्षणों में हिम्मत दिखाते हुए प्रसव संपन्न कराने में सहयोग दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. नूंह में बस के भीतर बच्चे का जन्म कहां और कब हुआ?
यह घटना शुक्रवार देर शाम फिरोजपुर झिरका इलाके में हरियाणा रोडवेज की बस में हुई, जब महिला अलवर से लौट रही थी।

### 2. अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रसव को लेकर क्या जानकारी दी थी?
अलवर के सानिया अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया था कि प्रसव में अभी लगभग 15 दिनों का समय है।

### 3. बस चालक ने आपात स्थिति में क्या कदम उठाया?
चालक कासम ने स्थिति की गंभीरता देखकर बस को सीधे फिरोजपुर झिरका स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर मोड़ा और लगभग 20 मिनट में अस्पताल पहुंचाया।

### 4. मां और बच्चे को प्राथमिक उपचार के बाद कहां स्थानांतरित किया गया?
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक इलाज देने के बाद मां और नवजात को देर रात लगभग 1:00 बजे अल आफिया अस्पताल, मांडीखेड़ा के लिए रेफर कर दिया गया।

### 5. स्थानीय लोगों ने रोडवेज प्रशासन से क्या मांग की है?
स्थानीय लोगों और अरशद एडवोकेट ने बस चालक व कंडक्टर को सम्मानित करने तथा नवजात की शिक्षा का खर्च रोडवेज विभाग द्वारा उठाने की मांग की है।

## प्रेरणा और सबक
संकट की घड़ी में सूझबूझ और इंसानियत का प्रदर्शन हर किसी के लिए प्रेरणादायक है।

- **त्वरित निर्णय क्षमता:** बस चालक और परिचालक ने बिना घबराए तुरंत अस्पताल की तरफ बस मोड़कर जिम्मेदारी का परिचय दिया।
- **सामूहिक सहयोग:** संकट के समय अजनबी यात्रियों ने आगे आकर महिला की मदद की और प्रसव को सुरक्षित बनाया।
- **मानवीय संवेदना:** यह घटना सिखाती है कि विभागीय नियमों से परे जाकर किसी की जान बचाना सबसे बड़ा धर्म है।

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