# हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में भिवानी के अतुल कुमार चमके, 22 की उम्र में पहले ही प्रयास में हासिल की 13वीं रैंक

> भिवानी के बामला गांव निवासी 22 वर्षीय अतुल कुमार ने रोजाना 8 से 10 घंटे अध्ययन कर पहले ही प्रयास में हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक प्राप्त की है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/haryana-sivila-seva-pariksha-men-bhiwani-ke-atul-kumar-chamake-22-ki-umra-men-pahale-hi-prayasa-men-hasila-ki-13vin-rainka-45422 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरियाणा सिविल सेवा, अतुल कुमार, एचपीएससी रिजल्ट, भिवानी, सिविल सेवा परीक्षा, टीना डाबी

हरियाणा के भिवानी जिले के बामला गांव के 22 वर्षीय युवक अतुल कुमार ने राज्य स्तर पर आयोजित प्रशासनिक सेवा भर्ती में बड़ी कामयाबी दर्ज की है। अतुल कुमार ने हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) परीक्षा में पूरे प्रदेश में 13वीं रैंक प्राप्त की है। खास बात यह है कि उन्होंने यह मुकाम अपने पहले ही प्रयास में हासिल किया है। वर्ष 2015 में यूपीएससी टॉपर रहीं टीना डाबी के सफर से प्रभावित होकर अतुल ने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था और इसके लिए केवल यूपीएससी तथा एचपीएससी की परीक्षाओं पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखा।

## पहले ही प्रयास में मिली बड़ी कामयाबी
अतुल कुमार ने बताया कि जब रात के समय परीक्षा परिणाम घोषित हुआ और उन्होंने सूची में अपना नाम 13वें स्थान पर देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने तत्काल अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को इस परिणाम की जानकारी दी, जिससे पूरे घर में जश्न का माहौल बन गया। महज 22 वर्ष की आयु में पहले ही प्रयास में राज्य की प्रतिष्ठित सेवा में चयनित होना उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा है। अतुल ने इसके साथ ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा भी दी हुई है और उन्हें पूरा भरोसा है कि वहां भी उनका प्रदर्शन काफी बेहतर रहेगा।

## 8 से 10 घंटे की दैनिक पढ़ाई और सटीक रणनीति
अपनी तैयारी की दिनचर्या साझा करते हुए अतुल ने बताया कि वे हर रोज करीब 8 से 10 घंटे नियमित अध्ययन करते थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से मई 2025 में बीए ऑनर्स पॉलिटिकल साइंस की डिग्री 8.3 सीजीपीए के साथ पूरी करने के तुरंत बाद उन्होंने एचसीएस की तैयारी शुरू कर दी थी। लगभग एक वर्ष तक उन्होंने तय रणनीति के तहत अध्ययन किया, जिसमें पढ़ी गई सामग्री के निरंतर रिविजन और मुख्य विषयों पर गहरा ध्यान देना शामिल था। उनका मानना है कि सही रणनीति और निरंतरता के बल पर एक साल की तैयारी से पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की जा सकती है।

## मेधावी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक परिवेश
अतुल कुमार का शैक्षणिक रिकॉर्ड शुरुआत से ही उत्कृष्ट रहा है। उन्होंने अपनी 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं में 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। उनका परिवार भी शिक्षा और सेवा से जुड़ा हुआ है। उनके पिता जितेंद्र कुमार गांव हालुवास में बतौर जेबीटी शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुमन देवी एक कुशल गृहणी हैं। उनके बड़े भाई विनय कुमार बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत हैं। अतुल की इस उपलब्धि पर उनके ताऊ और शिक्षा विभाग में लिपिक नरेंद्र सिंह जांगड़ा ने कहा कि यह पद अतुल की सादगी और कठिन परिश्रम का फल है। उन्होंने कहा कि गांव के युवा अब शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि अतुल यूपीएससी परीक्षा में भी सफल होंगे।

## 93 हजार अभ्यर्थियों के बीच कड़ा मुकाबला
हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा यह परीक्षा कुल 102 पदों को भरने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इस भर्ती प्रक्रिया में राज्य भर से लगभग 93 हजार युवाओं ने हिस्सा लिया था। इतने बड़े स्तर की प्रतिस्पर्धी परीक्षा में 102 पदों की सीमित संख्या के बीच 13वां स्थान प्राप्त करना प्रशासनिक सेवा के अभ्यर्थियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

## इसका आप पर असर
यह परिणाम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए स्पष्ट रणनीति और अनुशासन के व्यावहारिक महत्व को दर्शाता है।

- **तैयारी की दिशा:** स्नातक के तुरंत बाद केंद्रित अध्ययन से अभ्यर्थी कम उम्र में ही प्रशासनिक पदों पर चयनित हो सकते हैं। इससे सेवाकाल में आगे चलकर वरिष्ठ पदों पर पदोन्नति के बेहतर अवसर उपलब्ध होते हैं।
- **सीमित परीक्षाओं पर ध्यान:** केवल चुनिंदा आयोगों की परीक्षाओं पर केंद्रित रहने से तैयारी बिखराव से बचती है। समय और संसाधनों का सही उपयोग होने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
- **हरियाणा के अभ्यर्थियों के लिए:** 93 हजार उम्मीदवारों में 102 पदों पर चयन होना दिखाता है कि उच्च प्रतिस्पर्धा में निरंतरता ही निर्णायक है। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र रिविजन और समय प्रबंधन को अपनी प्राथमिकता बना सकते हैं।
- **ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए:** छोटे गांवों और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए यह परिणाम आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है। सरकारी स्कूल और साधारण परिवेश के बावजूद शीर्ष रैंक हासिल की जा सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
अतुल कुमार की सफलता उनकी पूर्व शैक्षणिक पृष्ठभूमि, निरंतर अध्ययन और टीना डाबी से मिली प्रारंभिक प्रेरणा का परिणाम है।

- **प्रेरणा और स्पष्ट लक्ष्य:** वर्ष 2015 की यूपीएससी टॉपर टीना डाबी से प्रेरित होकर अतुल ने सिविल सेवा को ही अपना एकमात्र लक्ष्य बनाया था। उन्होंने अन्य भटकावों से बचते हुए केवल यूपीएससी और एचपीएससी पर ही ध्यान दिया।
- **मजबूत शैक्षणिक नींव:** स्कूली शिक्षा में 10वीं और 12वीं में 99 प्रतिशत अंक और हिंदू कॉलेज से 8.3 सीजीपीए ने उनके बुनियादी ज्ञान को मजबूत रखा। इस मजबूत आधार ने एक साल के भीतर जटिल पाठ्यक्रम को पूरा करने में मदद की।
- **दैनिक अनुशासन और रिविजन:** स्नातक पूरा होते ही मई 2025 से उन्होंने रोजाना 8 से 10 घंटे नियमित पढ़ाई शुरू की। अध्ययन सामग्री के बार-बार रिविजन और सटीक रणनीति ने उन्हें पहले ही प्रयास में 13वां स्थान दिलाया।

## सवाल-जवाब

### 1. हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में अतुल कुमार ने कौन सी रैंक हासिल की?
अतुल कुमार ने हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में पूरे राज्य में 13वीं रैंक हासिल की है।

### 2. अतुल कुमार किस जिले और गांव के रहने वाले हैं?
अतुल कुमार हरियाणा के भिवानी जिले के बामला गांव के निवासी हैं।

### 3. अतुल कुमार ने किस उम्र में और कितने प्रयासों में यह परीक्षा पास की?
उन्होंने करीब 22 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में यह परीक्षा उत्तीर्ण की है।

### 4. अतुल कुमार को सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा किससे मिली?
उन्हें वर्ष 2015 में यूपीएससी परीक्षा में पहली रैंक पाने वाली टीना डाबी से प्रेरणा मिली थी।

### 5. तैयारी के दौरान अतुल कुमार हर रोज कितने घंटे पढ़ाई करते थे?
वे तैयारी के दौरान रोजाना करीब 8 से 10 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करते थे।

### 6. अतुल कुमार की शैक्षणिक योग्यता क्या है?
उन्होंने 10वीं और 12वीं में 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और मई 2025 में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से बीए ऑनर्स पॉलिटिकल साइंस 8.3 सीजीपीए के साथ पूरी की।

### 7. इस परीक्षा में कुल कितने पद थे और कितने अभ्यर्थियों ने भाग लिया था?
हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में कुल 102 पद थे और लगभग 93 हजार युवाओं ने इसमें हिस्सा लिया था।

## प्रेरणा और सबक
अतुल कुमार का सफर यह साबित करता है कि स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासित दिनचर्या से पहली बार में ही बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

- **स्पष्ट लक्ष्य का निर्धारण:** कई अलग-अलग परीक्षाओं में हाथ आजमाने के बजाय एक स्पष्ट दिशा चुनना तैयारी को धार देता है। अतुल ने केवल सिविल सेवा को चुनकर अपनी पूरी ऊर्जा उसी पर केंद्रित रखी।
- **निरंतरता की ताकत:** प्रतिदिन 8 से 10 घंटे की नियमित पढ़ाई और रिविजन किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की कुंजी है। निरंतर अभ्यास से ज्ञान स्थायी बनता है और परीक्षा का दबाव कम होता है।
- **साधारण पृष्ठभूमि कोई बाधा नहीं:** ग्रामीण परिवेश और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद दृढ़ संकल्प से राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान पाया जा सकता है। अपनी मेहनत और सादगी पर विश्वास रखना सबसे बड़ा संबल है।

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