# इसरो और डीएसपी के बाद यूपीएससी में परचम, जानें हरियाणा की आईपीएस जया शर्मा का प्रेरणादायी सफर

> हरियाणा के हिसार की जया शर्मा ने शुरुआती असफलताओं को पछाड़ते हुए यूपीएससी में 248वीं रैंक हासिल की। आईआईटी दिल्ली और इसरो से लेकर खाकी वर्दी तक की उनकी यात्रा युवाओं को नई दिशा देती है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/isro-aura-dsp-ke-bada-upsc-men-parachama-janen-haryana-ki-ips-jaya-sharma-ka-preranadayi-saphara-35612 · **Language:** Hindi
**Tags:** जया शर्मा, आईपीएस, यूपीएससी, हरियाणा पुलिस, आईआईटी दिल्ली, इसरो, हिसार

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान अक्सर लगातार असफलताएं युवाओं का मनोबल तोड़ देती हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प और सही रणनीति से किसी भी कठिन लक्ष्य को पाया जा सकता है। हरियाणा के एक सामान्य परिवेश से निकलकर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होने वाली जया शर्मा की कहानी इसी जज्बे को बयां करती है। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर इरादे स्पष्ट हों तो गांव की चौखट से शुरू हुआ सफर देश के शीर्ष प्रशासनिक पदों तक पहुंच सकता है।

## हिसार के बड़वा गांव से आईआईटी दिल्ली तक का सफर
जया शर्मा का जन्म 3 अप्रैल 1997 को हरियाणा के हिसार जिले के बड़वा गांव में हुआ था। उनका बचपन बेहद सादगी भरे पारिवारिक माहौल में गुजरा। उनके पिता प्रमोद शर्मा खाद्य और आपूर्ति विभाग में डीएफएससी के पद पर कार्यरत रहे हैं, जबकि उनकी मां नीतू शर्मा एक गृहिणी हैं। परिवार के संस्कार और सहयोग ने जया को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

उनकी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा हिसार के विद्या देवी जिंदल स्कूल से पूरी हुई। स्कूली पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया और फिर कठिन प्रवेश परीक्षा पास कर प्रतिष्ठित आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। अपनी उच्च शिक्षा के दौरान ही उन्हें देश की शीर्ष अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी इसरो के एक विशेष रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करने का महत्वपूर्ण अवसर मिला।

## शुरुआती असफलताओं से सीखा और खुद को तराशा
शैक्षणिक पृष्ठभूमि जितनी मजबूत थी, सिविल सेवा परीक्षा का सफर उतना ही चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक परीक्षा में शुरुआत में जया शर्मा को लगातार झटके लगे। वे अपने शुरुआती दो प्रयासों में यूपीएससी सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं। आमतौर पर प्रीलिम्स में बार-बार मिली विफलता अभ्यर्थियों को गहरा मानसिक तनाव देती है, जिससे कई लोग तैयारी छोड़ देते हैं।

जया ने मैदान छोड़ने के बजाय अपनी एक-एक गलती का बारीकी से विश्लेषण किया। उन्होंने परीक्षा के पैटर्न, समय प्रबंधन और अपने कमजोर विषयों की पहचान की। हर असफलता को सीखने का अवसर मानते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई की योजना को नए सिरे से तैयार किया और निरंतर अभ्यास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।

## हरियाणा में डीएसपी चयन और फिर आईपीएस बनने का सपना साकार
यूपीएससी की तैयारी के साथ ही जया ने राज्य स्तर की सिविल सेवा परीक्षा में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। हरियाणा लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया और पूरे राज्य में 8वीं रैंक प्राप्त की। इस शानदार रैंक के आधार पर उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक यानी डीएसपी के पद पर हुआ।

जब वे हरियाणा पुलिस में अंडर-ट्रेनी डीएसपी के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां संभाल रही थीं, तब भी उनके मन में अखिल भारतीय स्तर पर पुलिस सेवा में जाने का सपना जीवित था। ड्यूटी और ट्रेनिंग के कड़े अनुशासन के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसका सुखद परिणाम यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 के नतीजों में सामने आया, जहां उन्होंने ऑल इंडिया 248वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि के साथ वे वर्ष 2024 बैच की आईपीएस अधिकारी बन गईं।

## आज के युवाओं और प्रतिस्पर्धियों के लिए गहरा संदेश
डिजिटल युग में जहां युवा अक्सर जल्दी सफलता की उम्मीद करते हैं और किसी भी विफलता से घबरा जाते हैं, वहां जया शर्मा की यह यात्रा एक ठोस सीख पेश करती है। वैज्ञानिक अनुसंधान की लैब से लेकर खाकी वर्दी के शीर्ष स्तर तक का उनका यह सफर यह स्पष्ट करता है कि कामयाबी के लिए कोई गुप्त शॉर्टकट नहीं होता। लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, नियमित परिश्रम, अनुशासन और गलतियों से सीखने की प्रवृत्ति ही वास्तविक परिणाम देती है।

## इसका आप पर असर
यह सफलता वृत्तांत सिविल सेवा और सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को व्यावहारिक मार्गदर्शन और मानसिक संबल प्रदान करता है।

- **भारत में:** यूपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में शुरुआती विफलता झेल रहे लाखों अभ्यर्थियों को अपनी रणनीति की कमियां सुधारने का स्पष्ट दृष्टिकोण मिलता है। इससे छात्र बार-बार असफल होने पर हताश होने के बजाय अपनी कमजोरियों का निष्पक्ष विश्लेषण करने के लिए प्रेरित होते हैं।
- **हरियाणा में:** राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले युवाओं, विशेषकर युवतियों के लिए यह प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़ने का बड़ा प्रोत्साहन है। इसके प्रभाव से राज्य लोक सेवा आयोग और राष्ट्रीय परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्थानीय अभ्यर्थियों का आत्मविश्वास मजबूत होता है।
- **करियर संतुलन:** नौकरी या प्रशिक्षण के दौरान भी उच्च लक्ष्य के लिए अध्ययन जारी रखने की व्यावहारिक समय प्रबंधन पद्धति सीखने को मिलती है। जो अभ्यर्थी कार्य करते हुए परीक्षा दे रहे हैं, वे इस अनुशासन को अपनी दैनिक दिनचर्या में लागू कर सकते हैं।
- **मानसिक मजबूती:** तुरंत परिणाम चाहने की प्रवृत्ति को छोड़कर धैर्यपूर्वक दो-तीन साल तक निरंतर मेहनत करने का महत्व स्पष्ट होता है। इससे अभ्यर्थियों को परीक्षा के लंबे चक्र के दौरान अवसाद और भटकाव से बचने में मदद मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
जया शर्मा की इस बहुस्तरीय सफलता के पीछे ठोस शैक्षणिक आधार, प्रारंभिक गलतियों की समय पर पहचान और नौकरी के दौरान भी लक्ष्य के प्रति अटूट निष्ठा प्रमुख कारण रहे।

- **शैक्षणिक पृष्ठभूमि:** दिल्ली यूनिवर्सिटी और आईआईटी दिल्ली जैसे उच्च संस्थानों से अध्ययन ने उनके अंदर विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और अनुसंधान की आदत विकसित की। इस मजबूत आधार ने उन्हें जटिल पाठ्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से समझने में सक्षम बनाया।
- **कमजोरियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन:** दो बार प्रारंभिक परीक्षा में बाहर होने के बाद उन्होंने असफलता का दोष परीक्षा प्रणाली को देने के बजाय अपनी तैयारी की कमियों को परखा। प्रश्नों के चयन और परीक्षा कक्ष के दबाव से निपटने की नई तकनीक अपनाना उनके पक्ष में रहा।
- **लक्ष्य में स्पष्टता:** राज्य लोक सेवा में डीएसपी पद मिलने के बावजूद उन्होंने संतुष्ट होकर प्रयास बंद नहीं किए। अखिल भारतीय सेवा में शामिल होने के स्पष्ट ध्येय ने उन्हें कठिन पुलिस ट्रेनिंग के बीच भी अध्ययन जारी रखने के लिए ऊर्जा दी।

## सवाल-जवाब

### 1. आईपीएस जया शर्मा मूल रूप से कहां की रहने वाली हैं?
वे हरियाणा के हिसार जिले के बड़वा गांव की रहने वाली हैं और उनका जन्म 3 अप्रैल 1997 को हुआ था।

### 2. जया शर्मा ने अपनी उच्च शिक्षा कहां से पूरी की?
उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और फिर आईआईटी दिल्ली से अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया।

### 3. यूपीएससी परीक्षा में उन्हें किन शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
अपने शुरुआती दो प्रयासों में वे यूपीएससी सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा भी उत्तीर्ण नहीं कर पाई थीं।

### 4. आईपीएस बनने से पहले वे किस पद पर कार्यरत थीं?
वे हरियाणा लोक सेवा आयोग में 8वीं रैंक हासिल करने के बाद अंडर-ट्रेनी डीएसपी के पद पर अपनी सेवाएं दे रही थीं।

### 5. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में जया शर्मा की क्या रैंक रही?
उन्होंने ऑल इंडिया 248वीं रैंक प्राप्त की, जिसके बाद वे 2024 बैच की आईपीएस अधिकारी बनीं।

## प्रेरणा और सबक
जया शर्मा के संघर्ष और सफलता से प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को जीवन में अपनाने योग्य कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं।

- **असफलता को मार्गदर्शक बनाएं:** शुरुआती दो प्रयासों में प्रीलिम्स न निकाल पाने के बाद भी उन्होंने अपनी कमियों को दूर कर सफलता प्राप्त की।
- **सुरक्षित स्थिति में भी बड़े सपने देखें:** डीएसपी जैसी प्रतिष्ठित पदवी मिलने के बावजूद उन्होंने अपने अंतिम लक्ष्य यानी आईपीएस बनने की दिशा में प्रयास नहीं रोके।
- **विविध अनुभवों से मूल्य जोड़ें:** विज्ञान और इसरो रिसर्च प्रोजेक्ट से लेकर पुलिसिंग तक के विविध क्षेत्रों के अनुभव को उन्होंने अपनी क्षमता बढ़ाने का माध्यम बनाया।
- **धैर्य को रणनीति का हिस्सा बनाएं:** सफलता तत्काल मिलने वाली वस्तु नहीं है, बल्कि इसके लिए कई वर्षों का लगातार और मौन परिश्रम अनिवार्य होता है।

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