# जापान में शैफाली वर्मा ने ठोका पहला टी20 शतक, रोहतक में दादा संतलाल की आंखों से छलके खुशी के आंसू

> एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ शैफाली वर्मा ने 49 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाए, जिसके बाद रोहतक में उनके दादा संतलाल भावुक हो उठे।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/japan-men-shafali-verma-ne-thoka-pahala-ti20-shataka-rohtak-men-dada-santlal-ki-ankhon-se-chhalake-khushi-ke-ansu-35647 · **Language:** Hindi
**Tags:** शैफाली वर्मा, एशियन गेम्स 2026, भारतीय महिला क्रिकेट, टी20 शतक, रोहतक, संतलाल वर्मा, स्मृति मंधाना

जापान की धरती पर आयोजित हो रहे एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने बांग्लादेश को धूल चटा दी। इस मैच में भारतीय सलामी बल्लेबाज शैफाली वर्मा ने विस्फोटक अंदाज में खेलते हुए अपने अंतरराष्ट्रीय टी20 करियर का पहला शतक जड़ा। शैफाली की इस ऐतिहासिक पारी के बाद हरियाणा के रोहतक स्थित उनके घर में जश्न और भावुकता का माहौल देखा गया। घर पर अकेले बैठकर मैच देख रहे उनके दादा संतलाल वर्मा अपनी पोती के इस मुकाम को देखकर भावुक हो गए और उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े।

## रोहतक में अकेले बैठकर दादा ने देखा पूरा मुकाबला
शैफाली के दादा संतलाल वर्मा ने बताया कि जब यह मुकाबला चल रहा था, तब वह घर पर बिल्कुल अकेले थे। परिवार के बाकी सदस्य, जिनमें शैफाली के माता-पिता भी शामिल हैं, गणेश विसर्जन के सिलसिले में हरिद्वार गए हुए थे। संतलाल ने टेलीविजन के सामने बैठकर शुरू से लेकर अंत तक पूरा मैच देखा। जैसे ही शैफाली ने अपना शतक पूरा किया, उनके दादा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि वह लंबे अरसे से इस पल का इंतजार कर रहे थे कि उनकी पोती अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में तीन अंकों का आंकड़ा छुए।

## नर्वस नाइंटीज की कसक हुई दूर
संतलाल वर्मा के अनुसार शैफाली इससे पहले कई मौकों पर शतक के बेहद करीब पहुंचकर चूक गई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने कोई गलती नहीं की और बेहद संयम व आक्रामकता के साथ शानदार शतकीय पारी खेली। उन्होंने अपनी पुरानी बातचीत को याद करते हुए बताया कि शैफाली जब भी खेल के बाद घर लौटती है, तो हमेशा कहती है कि दादाजी, वह देश के लिए बेहतरीन खेल दिखाएगी और भारत का गौरव बढ़ाएगी। शैफाली की कड़ी मेहनत पर गर्व जताते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि वह आने वाले समय में भी भारतीय टीम के लिए इसी तरह मैच जिताऊ प्रदर्शन जारी रखेगी।

## स्मृति मंधाना को पछाड़कर बनाया नया रिकॉर्ड
बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए इस सेमीफाइनल मुकाबले में शैफाली वर्मा ने सिर्फ 49 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 100 रनों की तूफानी पारी खेली। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने जोरदार छक्के भी लगाए। इन छक्कों के दम पर शैफाली अब भारतीय महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। उनके नाम अब टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कुल 104 छक्के दर्ज हो चुके हैं। इस शानदार मुकाम पर पहुंचते हुए उन्होंने अपनी साथी खिलाड़ी स्मृति मंधाना का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।

## खिताब जीतने की मजबूत उम्मीद
भारतीय महिला टीम के समग्र खेल पर बात करते हुए संतलाल वर्मा ने कहा कि टीम के खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों ही विभागों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। किसी भी बड़े टूर्नामेंट को जीतने के लिए तीनों क्षेत्रों में ऐसा ही संतुलन जरूरी होता है। टीम के इस शानदार खेल को देखते हुए उन्होंने पूरी उम्मीद जताई कि भारतीय महिला टीम इस बार एशियन गेम्स की ट्रॉफी जीतकर ही वतन लौटेगी।

## इसका आप पर असर
शैफाली वर्मा की यह ऐतिहासिक पारी और रिकॉर्ड भारतीय महिला क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं।

- **क्रिकेट प्रशंसकों के लिए:** शैफाली वर्मा का 49 गेंदों में शतक टी20 प्रारूप में भारतीय महिला टीम की आक्रामक रणनीति को साबित करता है। प्रशंसक अब एशियन गेम्स के फाइनल में भारतीय टीम से स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद कर सकते हैं।
- **युवा खिलाड़ियों के लिए:** रोहतक की शैफाली की यह उपलब्धि छोटे शहरों की महिला एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित करती है। लगातार मेहनत से नर्वस नाइंटीज की बाधा पार कर शतक बनाना एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
- **टीम इंडिया के आंकड़ों में:** शैफाली के 104 छक्के पूरे होने से भारतीय बल्लेबाजी क्रम में उनका कद शीर्ष हिटर के रूप में और मजबूत हुआ है। उन्होंने स्मृति मंधाना को पीछे छोड़कर टीम के पावरप्ले दृष्टिकोण को नई दिशा दी है।
- **पारिवारिक समर्थन का महत्व:** दादा संतलाल के अकेले मैच देखने और भावुक होने की कहानी दिखाती है कि पारिवारिक भरोसा खिलाड़ियों की सफलता में कितनी बड़ी भूमिका निभाता है। खेल संस्कृति में परिवारों का यह भावनात्मक जुड़ाव युवाओं के मनोबल को ऊंचा करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह भावुक और ऐतिहासिक अवसर एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में शैफाली वर्मा के उत्कृष्ट खेल और उनके लंबे इंतजार के समाप्त होने से बना।

- **सीधा कारण:** एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में शैफाली वर्मा ने 49 गेंदों पर नाबाद 100 रन बनाए और भारत को बांग्लादेश पर जीत दिलाई। इस ऐतिहासिक पारी को टीवी पर देखकर रोहतक में उनके दादा संतलाल भावुक हो गए।
- **लंबे इंतजार का अंत:** शैफाली टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई बार शतक के करीब पहुंचकर आउट हो चुकी थीं। आखिरकार इस मुकाबले में तीन अंकों का आंकड़ा छूने से उनके परिवार की पुरानी प्रतीक्षा पूरी हुई।
- **घर पर अकेलेपन का माहौल:** परिवार के बाकी सदस्य गणेश विसर्जन के लिए हरिद्वार गए हुए थे। घर में अकेले होने के कारण शैफाली के दादा का पूरा ध्यान मैच पर केंद्रित था, जिससे उनकी भावनाएं और गहरी हो गईं।
- **नया रिकॉर्ड बनना:** इस शतकीय पारी के दौरान लगाए गए छक्कों की मदद से शैफाली ने टी20 अंतरराष्ट्रीय में 104 छक्के पूरे किए और स्मृति मंधाना को पछाड़कर भारत की शीर्ष छक्का लगाने वाली खिलाड़ी बनीं।

## सवाल-जवाब

### 1. शैफाली वर्मा ने एशियन गेम्स 2026 में किसके खिलाफ शतक बनाया?
शैफाली वर्मा ने जापान में चल रहे एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ शतक जड़ा।

### 2. शैफाली वर्मा ने शतक पूरा करने के लिए कितनी गेंदें खेलीं?
उन्होंने 49 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाकर अपने अंतरराष्ट्रीय टी20 करियर का पहला शतक पूरा किया।

### 3. रोहतक में मैच के समय शैफाली के दादा अकेले क्यों थे?
शैफाली के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य गणेश विसर्जन के लिए हरिद्वार गए हुए थे, इसलिए उनके दादा संतलाल घर पर अकेले थे।

### 4. टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत के लिए सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड अब किसके नाम है?
अब यह रिकॉर्ड शैफाली वर्मा के नाम है, जिन्होंने कुल 104 छक्के लगाकर स्मृति मंधाना को पीछे छोड़ दिया है।

### 5. शैफाली के शतक के बाद उनके दादा संतलाल वर्मा की क्या प्रतिक्रिया थी?
मैच पूरा देखने के बाद उनके दादा भावुक हो गए और खुशी के मारे उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

## प्रेरणा और सबक
शैफाली वर्मा की यह उपलब्धि दृढ़ संकल्प, धैर्य और परिवार के अटूट विश्वास की ताकत को दर्शाती है।

- **असफलता से सीखकर आगे बढ़ना:** कई बार शतक के करीब पहुंचकर चूकने के बाद भी शैफाली ने अपना स्वाभाविक आक्रामक अंदाज नहीं छोड़ा। उन्होंने लगातार प्रयास किया और आखिरकार सबसे बड़े मंच पर शतक बनाया।
- **परिवार और बुजुर्गों का आशीर्वाद:** खेल से लौटने पर दादाजी से देश का नाम रोशन करने का वादा करना दिखाता है कि मूल्यों और पारिवारिक मार्गदर्शन से प्रेरणा मिलती है।
- **लगातार अभ्यास और परिश्रम:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा 104 छक्के लगाने का रिकॉर्ड हासिल करना नियमित कड़ी मेहनत और कौशल विकास का नतीजा है।
- **दबाव में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन:** सेमीफाइनल जैसे नॉकआउट मुकाबले में टीम के लिए नाबाद शतकीय पारी खेलना बड़े अवसरों पर मानसिक मजबूती की मिसाल है।

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