# कुरुक्षेत्र में मानवता शर्मसार, भाई की मौत के बाद बहन बोली- समय नहीं है, आप ही कर दो अंतिम संस्कार

> हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां बीमारी से दम तोड़ने वाले 71 वर्षीय जुगल किशोर के शव को उनकी सगी बहन अस्पताल में ही छोड़कर चली गई। बहन ने कहा कि उसके पास अंतिम संस्कार के लिए समय नहीं है और यह काम आश्रम के लोग ही करें।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/kurukshetra-men-manavata-sharmasara-bhai-ki-mauta-ke-bada-bahana-boli-samaya-nahin-hai-apa-hi-kara-do-antima-snskara-30682 · **Language:** Hindi
**Tags:** कुरुक्षेत्र, अंतिम संस्कार, हरियाणा, एलएनजेपी अस्पताल, पिहोवा, अनाथ आश्रम, बड़ी खबर

कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में इंसानियत को झकझोर देने वाली एक घटना प्रकाश में आई है। हरियाणा के सोनीपत में पूर्व में भी बुजुर्गों के प्रति संवेदनहीनता के मामले देखने को मिले थे, और अब एक ऐसा ही हृदयविदारक वाकया कुरुक्षेत्र से सामने आया है। यहाँ एक बहन अपने इकलौते भाई के निधन के बाद उसका अंतिम संस्कार करने से साफ मुकर गई। अस्पताल परिसर में उसने अनाथ आश्रम के संचालक से यहाँ तक कह दिया कि आप ही अंतिम संस्कार कर दीजिए, आपकी बहुत मेहरबानी होगी क्योंकि मेरे पास रुकने का समय नहीं है।

यह पूरा मामला कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल का है, जहाँ 71 वर्षीय जुगल किशोर का गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया था। अस्पताल प्रशासन द्वारा परिजनों को सूचना दिए जाने पर उनकी छोटी बहन पुष्पा अस्पताल पहुँची। लेकिन भाई के अंतिम दर्शन करने के बाद उसने अनाथ आश्रम के संचालक से दो टूक कह दिया कि मैं रुक नहीं सकती और न ही मेरे पास समय है। उसने यह भी कहा कि अगर वह खुद स्वस्थ होती तो शायद रुक जाती, और यह कहकर वह अपने एक रिश्तेदार के साथ मृत भाई के शव को अस्पताल में ही छोड़कर चली गई।

मूल रूप से दिल्ली के उत्तम नगर के रहने वाले जुगल किशोर पिछले लगभग 10 साल से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ में रह रहे थे। उनके परिवार में केवल उनकी छोटी बहन पुष्पा ही बची थीं, जिनसे मिलने के लिए जुगल किशोर अक्सर जाया करते थे। जुगल किशोर अविवाहित थे और उनके परिवार में उनके अलावा किसी अन्य परिजन की कोई जानकारी नहीं थी। करीब दो सप्ताह पहले जब जुगल किशोर की तबीयत अचानक बिगड़ गई, तो अनाथ आश्रम के संचालक बाबा फरीद उन्हें अपने साथ आश्रम ले आए और उनका इलाज शुरू करवाया।

जुगल किशोर को पहले कई दिनों तक पिहोवा सरकारी अस्पताल में भर्ती रखा गया था। इस दौरान आश्रम के लोगों ने उनकी बहन से संपर्क साधने के काफी प्रयास किए, लेकिन सफलता न मिलने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहाँ उन्हें भर्ती कराया गया।

इलाज के दौरान 4 सितंबर को जुगल किशोर ने दम तोड़ दिया। भाई की मौत की खबर मिलने पर पुष्पा बड़ी मुश्किल से कुरुक्षेत्र अस्पताल पहुँची और बिस्तर पर पड़े अपने भाई के शव को अंतिम बार देखा। जब आश्रम के लोगों ने उनसे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर बात की, तो पुष्पा ने समय न होने का बहाना बनाते हुए मना कर दिया। बातचीत के दौरान जब आश्रम के संचालक ने कहा कि संस्कार भी हम ही करें और अस्थियाँ भी आप नहीं ले जा सकतीं, तो उसने जवाब दिया कि हाँ जी, आप ही कर दीजिए, आपकी बहुत मेहरबानी होगी, मेरे पास समय बिल्कुल नहीं है। इसके तुरंत बाद वह अपने रिश्तेदार के साथ वहाँ से रवाना हो गई।

इसके बाद बाबा निशान सिंह और अनाथ आश्रम की पूरी कमेटी ने आगे आकर जुगल किशोर का अंतिम संस्कार संपन्न किया। यही नहीं, आश्रम के लोगों द्वारा ही पवित्र सरस्वती नदी में उनकी अस्थियों का विसर्जन भी किया गया। इस पूरी घटना के बाद बाबा निशान का कहना था कि भाई और बहन के इस तरह के पवित्र रिश्ते को इस रूप में देखकर उन्हें बेहद दुख हुआ है।

## इसका आप पर असर
यह घटना समाज में लगातार कमजोर होते पारिवारिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं के पतन की ओर गंभीर इशारा करती है।

- **भारत में:** बुजुर्गों और अकेलेपन से जूझ रहे परिजनों की देखभाल और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत को यह मामला रेखांकित करता है।
- **कुरुक्षेत्र में:** स्थानीय प्रशासन और समाजसेवियों के सामने ऐसे असहाय और बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे आने की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है जिनका कोई सगा संबंधी संकट के समय साथ नहीं देता।

## ऐसा क्यों हुआ
जुगल किशोर के निधन के बाद उपजे इस हालात के पीछे पारिवारिक दूरियाँ और संवेदनहीनता मुख्य वजह रही।

- **पारिवारिक संबंध:** मृतक जुगल किशोर अविवाहित थे और लंबे समय से दिल्ली से दूर पिहोवा में अकेले रह रहे थे, जिसके कारण उनकी बहन के साथ उनके संपर्क और जुड़ाव में कमी आ गई थी।
- **असमर्थता का बहाना:** बहन पुष्पा ने समय न होने और खुद के व्यस्त होने का हवाला देकर भाई के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाने से साफ इंकार कर दिया।
- **संस्था का हस्तक्षेप:** जब परिवार का कोई भी सदस्य आगे नहीं आया, तो पिहोवा के अनाथ आश्रम के संचालकों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए खुद आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना किस अस्पताल की है?
यह घटना कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल की है।

### 2. मृतक का नाम क्या था और उनकी उम्र कितनी थी?
मृतक का नाम जुगल किशोर था और उनकी उम्र 71 वर्ष थी।

### 3. जुगल किशोर पिछले 10 साल से कहाँ रह रहे थे?
वे पिछले लगभग 10 साल से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ में रह रहे थे।

### 4. जुगल किशोर के परिवार में कौन बचा था?
परिवार में केवल उनकी छोटी बहन पुष्पा ही जीवित थीं।

### 5. जुगल किशोर की मृत्यु कब हुई?
इलाज के दौरान 4 सितंबर को उनकी मृत्यु हो गई थी।

### 6. अंतिम संस्कार किसने किया?
जुगल किशोर का अंतिम संस्कार बाबा निशान सिंह और अनाथ आश्रम की कमेटी ने किया।

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