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  "type": "article",
  "title": "मानसून में 900 रुपये सैकड़ा बिक रही पालक, बल्लभगढ़ के किसान कुंवर दास से जानें बंपर कमाई और फसल सुरक्षा का फॉर्मूला",
  "summary": "मानसून के दौरान मंडी में पालक के भाव 800 से 900 रुपये सैकड़ा तक मिल रहे हैं। बल्लभगढ़ के 60 वर्षीय किसान कुंवर दास ने बारिश में फसल को फंगस, जलजमाव और खरपतवार से बचाने के कारगर उपाय साझा किए हैं।",
  "content": "मानसून के दस्तक देते ही हरी सब्जियों, विशेषकर पालक की खेती करने वाले किसानों के समक्ष चुनौतियों का पहाड़ खड़ा हो जाता है। लगातार बारिश और खेतों में जलभराव के कारण पालक की पत्तियां गलकर खराब होने लगती हैं, जिससे फंगल इन्फेक्शन और कीटों का प्रकोप तेजी से फैलता है। हालांकि, मौसम की इस मार के बीच किसानों के लिए एक बड़ी राहत मंडी में मिलने वाले बेहतर दाम हैं। वर्तमान में बाजार में पालक के भाव 800 रुपये से 900 रुपये प्रति सैकड़ा तक बने हुए हैं। यदि किसान सही तकनीक और निरंतर देखभाल के माध्यम से अपनी फसल को जलजमाव और बीमारियों से सुरक्षित रख पाते हैं, तो इस सीजन में वे बेहतरीन मुनाफा अर्जित कर सकते हैं।\n\nसुनपेड़ गांव के अनुभवी किसान की लगन और हाइब्रिड खेती\nहरियाणा के बल्लभगढ़ स्थित सुनपेड़ गांव के 60 वर्षीय किसान कुंवर दास लंबे समय से सब्जी उत्पादन से जुड़े हुए हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने अपने खेतों में पालक की हाइब्रिड किस्म की बुवाई की है। 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी कुंवर दास सुबह से शाम तक खेत में पसीना बहाते हैं। उनके अनुसार, बरसात का मौसम पालक उत्पादकों के लिए सबसे अधिक परीक्षा वाला होता है। इस मौसम में थोड़ी सी भी असावधानी पूरी फसल को नष्ट कर सकती है। इसलिए खेत की रोजाना सघन निगरानी करना बेहद जरूरी होता है। पानी का जमाव न होने देना और समय रहते खरपतवार नियंत्रण करना फसल को बचाने की प्राथमिक शर्त है।\n\nसर्दियों और मानसून के मंडी भाव में भारी अंतर का गणित\nसब्जी बाजार में मांग और आपूर्ति का सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ता है। कुंवर दास के मुताबिक, मानसून के दौरान पालक की पैदावार में कमी आने के कारण मंडी में इसके दाम काफी ऊंचे रहते हैं। इस समय 800 से 900 रुपये सैकड़ा का भाव मिल रहा है, जो किसानों की मेहनत का अच्छा फल देता है। इसके विपरीत, सर्दियों के मौसम में पालक का उत्पादन बहुत अधिक बढ़ जाता है। बहुतायत में आवक होने के कारण मंडी में रेट गिरकर 100 रुपये सैकड़ा तक नीचे आ जाते हैं। सर्दियों में स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि किसानों के लिए फसल की लागत और तुड़ाई का खर्च निकालना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यही कारण है कि बारिश के कठिन मौसम में फसल बचा लेने वाले किसान बेहतर कमाई करने में सफल रहते हैं।\n\nफफूंदनाशक का सही छिड़काव और जड़ सड़न से बचाव के उपाय\nबरसात के दिनों में अत्यधिक नमी के कारण पालक की फसल में फंगस और जड़ गलन की समस्या आम हो जाती है। इस बीमारी से बचाव के लिए कुंवर दास फफूंदनाशक दवा के व्यवस्थित इस्तेमाल की सलाह देते हैं। वे बताते हैं कि फंगस के लक्षण दिखाई देने पर साफ नाम के फफूंदनाशक पाउडर का छिड़काव किया जाता है। इसके लिए 1 लीटर स्वच्छ पानी में 2 ग्राम साफ पाउडर मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल को पालक की पत्तियों पर ऊपर और नीचे दोनों तरफ अच्छी तरह स्प्रे करना चाहिए। यदि पौधों की जड़ों में सड़न की शिकायत हो, तो इसी तैयार घोल को पौधों की जड़ों के पास की मिट्टी में डालना चाहिए। हालांकि, किसी भी रासायनिक दवा के प्रयोग से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है।\n\nबीज उपचार और मेड बनाकर बुवाई करने की कारगर तकनीक\nफसल को शुरुआत से ही निरोगी रखने के लिए बीज का सही उपचार करना अत्यंत आवश्यक है। कुंवर दास बताते हैं कि बुवाई से पहले प्रति 1 किलो पालक के बीज में 2.5 ग्राम साफ फफूंदनाशक पाउडर मिलाकर अच्छी तरह मिला लेना चाहिए। इससे शुरुआती अवस्था में लगने वाले रोगों से पौधे का बचाव होता है। खेत में बीज की मात्रा के संबंध में वे बताते हैं कि एक बीघे जमीन में लगभग 10 से 12 किलो बीज की आवश्यकता पड़ती है। बारिश के मौसम में खेत की बनावट पर विशेष ध्यान देना चाहिए। समतल खेत के बजाय मेड यानी उठी हुई क्यारियां बनाकर बुवाई करने से बारिश का अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाता है। जल निकासी की सही व्यवस्था रहने से फसल गलने से बच जाती है।\n\nखरपतवार नियंत्रण और नियमित देखभाल से लाखों की कमाई\nपालक के पौधों के साथ उगने वाले बड़े-बड़े घास और खरपतवार फसल के सबसे बड़े दुश्मन होते हैं। ये खरपतवार मिट्टी के पोषक तत्वों, नमी और धूप को सोख लेते हैं, जिससे पालक की पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। कुंवर दास स्वयं खेतों में उतरकर हाथों से खरपतवार उखाड़ते हैं। उनका मानना है कि यदि सही समय पर घास नहीं निकाली गई तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। खेती ही उनके परिवार के जीविकोपार्जन का मुख्य सहारा है। वे कहते हैं कि मौसम की अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद यदि किसान अनुशासित होकर फसल की देखभाल करे, तो अच्छी फसल और सही मंडी भाव मिलने पर लाखों रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nमानसून के मौसम में पालक की फसल सुरक्षा की यह जानकारी सब्जी उत्पादक किसानों की आय और उपभोक्ताओं की जेब दोनों को सीधे प्रभावित करती है।\n\n• भारत में किसानों के लिए: बारिश में फसल बचाकर किसान 800 से 900 रुपये सैकड़ा का ऊंचा मंडी भाव हासिल कर सकते हैं। सही तकनीक अपनाने से फसल खराब होने का नुकसान नहीं सहना पड़ेगा।\n• बल्लभगढ़ में: सुनपेड़ और आसपास के क्षेत्रों में सब्जी उगाने वाले किसान मेड बनाकर बुवाई और बीज उपचार की विधि तुरंत लागू कर सकते हैं। इससे जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी।\n• उपभोक्ताओं के लिए: मंडियों में पालक की आपूर्ति बनी रहने से खुदरा कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी नहीं होगी। ग्राहकों को बारिश के सीजन में भी ताजा पालक उपलब्ध हो सकेगी।\n• कृषि सलाहकारों के लिए: किसान रासायनिक फफूंदनाशक 'साफ' के सही अनुपात (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का पालन करके बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। छिड़काव से पहले विशेषज्ञ की अनुमति लेना जरूरी है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबरसात के मौसम में खेतों में जमा होने वाला पानी पालक की पत्तियों को गला देता है और मिट्टी में फंगस व जड़ सड़न का खतरा पैदा कर देता है।\n\n• जलभराव और फंगल संक्रमण: मानसून में लगातार पानी रुकने से पालक के कोमल पौधे सड़ने लगते हैं। अत्यधिक नमी फंगस और हानिकारक कीटों के पनपने का मुख्य कारण बनती है।\n• मांग और आपूर्ति का अंतर: बारिश में बड़े पैमाने पर फसल खराब होने से मंडी में पालक की आवक कम हो जाती है। कम आपूर्ति के कारण थोक भाव बढ़कर 800 से 900 रुपये सैकड़ा तक पहुंच जाते हैं।\n• सर्दियों में अत्यधिक आवक: सर्दियों के अनुकूल मौसम में पालक का उत्पादन बहुत ज्यादा होता है। बाजार में अधिक आवक के कारण दाम गिरकर 100 रुपये सैकड़ा रह जाते हैं।\n• खरपतवार की समस्या: बारिश के मौसम में मुख्य फसल के साथ अनावश्यक घास तेजी से बढ़ती है। समय पर निकासी न होने पर यह फसल के पोषण को कम कर देती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मानसून के दौरान मंडी में पालक का क्या भाव चल रहा है?\nबरसात के मौसम में मंडी में पालक का भाव लगभग 800 से 900 रुपये सैकड़ा तक चल रहा है।\n\n2. सर्दियों के मौसम में पालक के दाम क्यों गिर जाते हैं?\nसर्दियों में अनुकूल मौसम के कारण पालक की आवक मंडी में अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे भाव गिरकर 100 रुपये सैकड़ा तक आ जाता है।\n\n3. पालक में फंगस लगने पर किस दवा का छिड़काव किया जाता है?\nफंगस लगने पर 1 लीटर पानी में 2 ग्राम साफ पाउडर मिलाकर पालक की पत्तियों के ऊपर और नीचे छिड़काव किया जाता है।\n\n4. पालक के बीज का उपचार कैसे किया जाता है?\nबुवाई से पहले 1 किलो पालक के बीज में 2.5 ग्राम साफ फफूंदनाशक पाउडर मिलाकर बीज उपचारित किया जाता है।\n\n5. एक बीघे खेत में पालक के कितने बीज की आवश्यकता होती है?\nएक बीघे खेत में बुवाई के लिए लगभग 10 से 12 किलो पालक के बीज की आवश्यकता होती है।\n\n6. बारिश में जलजमाव से पालक की फसल को बचाने के लिए क्या करना चाहिए?\nखेत में समतल के बजाय मेड (उठी हुई क्यारियां) बनाकर बुवाई करनी चाहिए ताकि पानी की निकासी आसानी से हो सके।\n\nप्रेरणा और सबक\n60 वर्ष की उम्र में भी बल्लभगढ़ के कुंवर दास की कड़ी मेहनत और वैज्ञानिक खेती का तरीका हर किसान के लिए प्रेरणादायी है।\n\n• उम्र की सीमा से परे अनुशासन: 60 साल की उम्र में भी सुबह से शाम तक खेत में काम करना और स्वयं खरपतवार निकालना काम के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।\n• वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना: फसल बुवाई से पहले बीज उपचार (2.5 ग्राम साफ प्रति किलो बीज) करके बीमारी की रोकथाम का अग्रिम उपाय करना।\n• जल निकासी की समझ: समतल बुवाई के बजाय मेड (उठी क्यारियां) बनाकर खेती करना, जिससे बारिश का पानी फसल को नुकसान न पहुंचा सके।\n• बाजार चक्र का लाभ उठाना: मानसून के कठिन समय में बेहतर देखभाल के जरिए फसल बचाकर 800-900 रुपये सैकड़ा के ऊंचे भाव का लाभ उठाना।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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    "पालक की खेती",
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