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  "type": "article",
  "title": "माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराकर आईएएस सोनल गोयल ने दी कैंसर जागरूकता की मिसाल, युवाओं को सौंपा नया संकल्प",
  "summary": "पिता को कैंसर से खोने के बाद 2008 बैच की आईएएस सोनल गोयल ने इस बीमारी के खिलाफ मुहिम शुरू की। उन्होंने मुश्किलों को पार कर किलिमंजारो के स्टेला पॉइंट पर तिरंगा फहराया।",
  "content": "पारिवारिक आघात और किसी करीबी को गंभीर बीमारी से खोने की पीड़ा किसी को भी विचलित कर सकती है, लेकिन मजबूत इरादों वाले लोग इस निजी दुख को समाज के भले के लिए एक नई शक्ति में तब्दील कर देते हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सोनल गोयल ने ऐसा ही उदाहरण सामने रखा है। अक्टूबर 2023 में अपने पिता को कैंसर के कारण खोने के बाद उन्होंने इस गंभीर बीमारी के खिलाफ लोगों को जागरूक करने को अपनी जिंदगी का अहम उद्देश्य बना लिया।\n\nएवरेस्ट बेस कैंप से किलिमंजारो तक जागरूकता का सफर\nहरियाणा के पानीपत से ताल्लुक रखने वाली 2008 बैच की आईएएस अधिकारी सोनल गोयल अपनी कार्यकुशलता और सामाजिक सरोकारों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कैंसर के प्रति लोगों को सचेत करने का अभियान मई 2026 में एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक के साथ शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई के दौरान भी इस मुहिम को जारी रखा। उनका स्पष्ट मानना है कि अगर शुरुआती दौर में ही कैंसर के लक्षणों की पहचान हो जाए और लोगों में इसे लेकर सही जानकारी हो, तो इस बीमारी से मुकाबला कहीं अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।\n\nजंगल की आग और प्राकृतिक बाधाओं के बीच नहीं रुकी चढ़ाई\nमाउंट किलिमंजारो की चढ़ाई सोनल गोयल और उनकी टीम के लिए आसान नहीं थी। उन्होंने लेमोशो रूट से अपने अभियान की शुरुआत की थी, लेकिन तीसरे दिन शिरा क्षेत्र के आसपास जंगल में अचानक भीषण आग भड़क गई। सुरक्षा कारणों से पूरी टीम को बीच रास्ते से ही वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस अप्रत्याशित संकट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपने तय लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने नए रूट से दोबारा चढ़ाई शुरू की। रास्ते में बरांको वॉल जैसी बेहद खड़ी और जोखिम भरी चट्टानी दीवारों का सामना करते हुए तथा हड्डियों को कंपा देने वाली ठंड के बीच वह निरंतर आगे बढ़ती रहीं। अंततः गांधी जयंती के अवसर पर वह 18,829 फीट की ऊंचाई पर स्थित स्टेला पॉइंट तक पहुंचने और वहां भारत का तिरंगा फहराने में पूरी तरह कामयाब रहीं।\n\nयुवा पीढ़ी को सशक्त संदेश: ड्रग्स नहीं, सपने चुनो\nपहाड़ों की दुर्गम ऊंचाइयों से सोनल गोयल ने देश के युवाओं को सकारात्मक राह पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर अपने सपनों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उनका कहना है कि युवा राष्ट्र का मुख्य आधार हैं, इसलिए उन्हें केवल रोजगार या करियर के मौके ही नहीं मिलने चाहिए, बल्कि सही और सेहतमंद विकल्प चुनने की मानसिक क्षमता भी विकसित करनी चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने शारीरिक फिटनेस, सकारात्मक नजरिए और मादक पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाने को अपनी इस मुहिम का मुख्य आधार बनाया है ताकि युवा अपनी पूरी ऊर्जा सपनों को साकार करने में लगा सकें।\n\nशिक्षा से यूपीएससी में 13वीं रैंक तक का प्रेरणादायक सफर\nसोनल गोयल का शैक्षणिक और पेशेवर सफर भी उल्लेखनीय रहा है। दिल्ली के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक करने के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स पूरा किया और कानून यानी एलएलबी की डिग्री भी हासिल की। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के अपने पहले प्रयास में वह इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाई थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कंपनी सेक्रेटरी के रूप में नौकरी करने और कानून की पढ़ाई जारी रखने के साथ ही उन्होंने तैयारी जारी रखी और अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 13 हासिल की। समाज और प्रशासन में उनके योगदान के लिए उन्हें नीति आयोग के 'Top 25 Women Transforming India' और एक्स के 'Web Wonder Woman' सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल गंभीर बीमारियों के प्रति जन जागरूकता और युवाओं में स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ाने पर जोर देती है।\n\n• नागरिकों के लिए: कैंसर के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान और नियमित जांच को बढ़ावा मिलता है। इससे लोग गंभीर बीमारियों के प्रति लापरवाही छोड़ने और समय रहते चिकित्सीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित होते हैं।\n• युवा वर्ग के लिए: नशे से दूरी और शारीरिक फिटनेस को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश मिलता है। यह युवाओं को करियर और जीवन में सकारात्मक लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।\n• प्रतियोगी छात्रों के लिए: विफलता से निराश हुए बिना निरंतर मेहनत करने का व्यावहारिक उदाहरण सामने आता है। पहले प्रयास में असफल होने के बावजूद संतुलन बनाकर दूसरे प्रयास में शीर्ष रैंक हासिल करने की सीख मिलती है।\n• संकट प्रबंधन में: अचानक आने वाली बाधाओं के सामने योजना बदलने लेकिन लक्ष्य पर टिके रहने की सीख मिलती है। जंगल में आग जैसी स्थिति के बाद दोबारा शुरुआत कर सफलता पाना दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह अभियान एक पारिवारिक आघात के बाद समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और युवाओं को बेहतर दिशा दिखाने के उद्देश्य से शुरू किया गया।\n\n• पारिवारिक क्षति: अक्टूबर 2023 में आईएएस सोनल गोयल के पिता का कैंसर की वजह से निधन हो गया था। इस निजी क्षति के बाद उन्होंने कैंसर से बचाव और जागरूकता को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बनाया।\n• शुरुआती पहचान का महत्व: अधिकांश मामलों में कैंसर की पहचान देर से होने पर उपचार कठिन हो जाता है। इसी कारण उन्होंने लोगों को समय पर जांच और लक्षणों की पहचान के प्रति सचेत करने का बीड़ा उठाया।\n• अभियान की निरंतरता: मई 2026 में एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक के साथ शुरू हुआ यह जागरूकता सफर किलिमंजारो तक जारी रहा। इसके माध्यम से उन्होंने फिटनेस और नशामुक्ति का संदेश भी समाज तक पहुंचाया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईएएस सोनल गोयल ने माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई क्यों की?\nउन्होंने अक्टूबर 2023 में अपने पिता को कैंसर से खोने के बाद इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देने के लिए यह चढ़ाई की।\n\n2. माउंट किलिमंजारो पर उन्होंने किस ऊंचाई पर तिरंगा फहराया?\nउन्होंने गांधी जयंती के दिन 18,829 फीट की ऊंचाई पर स्थित स्टेला पॉइंट पर तिरंगा फहराया।\n\n3. चढ़ाई के दौरान टीम को रास्ते से वापस क्यों लौटना पड़ा था?\nलेमोशो रूट से चढ़ाई के तीसरे दिन शिरा क्षेत्र के पास जंगल में भीषण आग लग गई थी, जिसके कारण टीम को लौटना पड़ा और बाद में नए रूट से चढ़ाई करनी पड़ी।\n\n4. सोनल गोयल ने यूपीएससी परीक्षा में कौन सी रैंक हासिल की थी?\nउन्होंने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 13 हासिल की थी।\n\n5. सोनल गोयल की शैक्षणिक योग्यता क्या है?\nउन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक करने के अलावा कंपनी सेक्रेटरी और लॉ (एलएलबी) की डिग्री हासिल की है।\n\nप्रेरणा और सबक\nआईएएस सोनल गोयल की यात्रा यह सिखाती है कि जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों और आघात को भी समाज के कल्याण की ताकत बनाया जा सकता है।\n\n• दुख को ताकत बनाना: व्यक्तिगत क्षति पर टूटने के बजाय उसे एक बड़े सामाजिक उद्देश्य में बदलकर दूसरों की मदद करना।\n• लक्ष्य पर अडिग रहना: रास्ते में रुकावटें या खतरे आने पर रणनीति बदली जा सकती है, लेकिन मुख्य लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।\n• दृढ़ संकल्प से सफलता: पहले प्रयास की असफलता से घबराए बिना निरंतर प्रयास और सही संतुलन से बड़ा मुकाम हासिल करना संभव है।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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