न्यूजीलैंड राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में अंबाला के पवन दीप सिंह ने जीता गोल्ड मेडल अंबाला कैंट के लालकुर्ती निवासी पवन दीप सिंह ने ऑकलैंड में आयोजित न्यूजीलैंड राष्ट्रीय वुशू प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य और देश का मान बढ़ाया है। अंबाला छावनी के लालकुर्ती क्षेत्र के निवासी पवन दीप सिंह ने विदेशी जमीन पर अपने खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णिम सफलता हासिल की है। ऑकलैंड स्थित नैटबॉल स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता वुशू कुंग फू फेडरेशन ऑफ न्यूजीलैंड की ओर से आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान हासिल कर उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ अंबाला और पूरे हरियाणा का मान बढ़ाया है। उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद अंबाला स्थित उनके पैतृक आवास पर शुभकामनाएं देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। रजत पदक से स्वर्ण पदक तक का शानदार सफर पवन दीप सिंह के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मुकाबला नया नहीं था। इससे पिछले वर्ष भी उन्होंने इसी राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपनी चुनौती पेश की थी, जहां उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। उस समय मिली सीख और अनुभव को आधार बनाकर उन्होंने अपनी कमियों को दूर किया और इस बार सीधे स्वर्ण पदक पर सटीक निशाना साधा। खेल के प्रति उनका समर्पण बचपन के दिनों से ही काफी गहरा रहा है। महज छह वर्ष की छोटी सी उम्र में उनका रुझान विभिन्न खेलों की ओर बढ़ने लगा था। परिवार ने भी उनकी इस प्रतिभा को पहचाना और आगे बढ़ने के लिए लगातार हौसला बढ़ाया। उनके पिता बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं और वह स्वयं भी फुटबॉल के बेहतरीन खिलाड़ी रह चुके हैं, जिससे घर में शुरू से ही खेल का एक सकारात्मक माहौल बना रहा। कोचिंग और फिटनेस से युवाओं को जोड़ने की मुहिम भारत में रहते हुए पवन दीप सिंह ने वुशू को न सिर्फ अपनी साधना बनाया, बल्कि इसे औपचारिक करियर का रूप भी दिया। उन्होंने पटियाला स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान यानी एनआईएस से वुशू खेल में एक वर्ष का विशेष डिप्लोमा पूरा किया। इसके बाद अंबाला में रहते हुए उन्होंने अपनी खेल एकेडमी संचालित की और साथ ही एक स्कूल में कोच की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली। खेल मैदान पर अपनी सेवाएं देते हुए उनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें नशे जैसी घातक सामाजिक बुराइयों से दूर रखना था। उन्होंने जमीनी स्तर पर कई युवा खिलाड़ियों को तराशने में अहम योगदान दिया। विदेश में नौकरी की व्यस्तता और खेल का गहरा जुनून साल 2023 में पवन दीप सिंह वर्क वीजा पर रोजगार के सिलसिले में न्यूजीलैंड गए थे। वर्तमान समय में वह ऑकलैंड शहर में निवास कर रहे हैं और वहां एक सुरक्षा कंपनी में पेट्रोलिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। विदेश में एक सुरक्षा अधिकारी की नौकरी काफी कठिन और व्यस्त दिनचर्या वाली होती है, परंतु व्यस्त काम के बावजूद उन्होंने वुशू के प्रति अपने समर्पण को कभी कम नहीं होने दिया। वह ड्यूटी के घंटों के बाद नियमित अभ्यास करते हैं, शारीरिक फिटनेस का कड़ाई से ध्यान रखते हैं और समय-समय पर आयोजित होने वाली प्रमुख खेल प्रतियोगिताओं में पूरे दम-खम के साथ उतरते हैं। परिवार और स्थानीय लोगों में अपार खुशी की लहर उनकी इस स्वर्णिम सफलता पर उनकी माता निर्मल कौर ने बताया कि उनका बेटा जब छठी कक्षा में पढ़ता था, तभी से वह खेलों के साथ पूरी निष्ठा से जुड़ गया था। जब वह वर्ष 2023 में रोजगार के लिए न्यूजीलैंड रवाना हुआ, तब भी उसने परिवार को भरोसा दिलाया था कि वह काम के साथ अपने खेल को हमेशा जारी रखेगा। अब गोल्ड मेडल जीतने के बाद से ही उनके घर पर रिश्तेदारों, पड़ोसियों और खेल प्रेमियों के बधाई संदेशों का तांता लगा हुआ है। उनके भाई परमजीत सिंह ने बताया कि पवन ने स्कूली दिनों से ही वुशू प्रतियोगिताओं में कई मेडल अपनी झोली में डाले हैं। वह जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत पहचान पहले ही स्थापित कर चुके हैं। परमजीत के अनुसार, उनका भाई आजीविका के लिए विदेश गया, लेकिन खेल के प्रति उसका जुनून आज भी उसी शिद्दत से बरकरार है। इलाके के युवाओं के लिए बनी बड़ी प्रेरणा क्षेत्र के पूर्व पार्षद नवीन यादव ने पवन दीप सिंह की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लालकुर्ती के प्रतिभावान युवाओं ने पहले भी भिन्न-भिन्न खेलों में अपनी मेहनत से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अब पवन दीप सिंह ने सुदूर न्यूजीलैंड में स्वर्ण पदक जीतकर इस पूरे क्षेत्र का गौरव सात समंदर पार पहुंचाया है। एक साधारण और छोटे से इलाके से निकलकर किसी युवा का अपनी निष्ठा और कठिन परिश्रम के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाना पूरे समाज के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। इसका आप पर असर यह उपलब्धि दिखाती है कि काम के कठिन घंटों के बीच भी खेल अनुशासन को बनाए रखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाई जा सकती है। • भारत में: यह जीत देश के उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो आजीविका के दबावों के बीच अपने खेल को जारी रखने का संघर्ष करते हैं। इससे साबित होता है कि सही समर्पण होने पर नौकरी और खेल दोनों को संतुलित किया जा सकता है। • अंबाला में: लालकुर्ती और अंबाला छावनी के स्थानीय खेल केंद्रों तथा अकादमियों में अभ्यास करने वाले युवाओं का मनोबल बढ़ेगा। जमीनी स्तर पर कोचिंग देने वाले प्रशिक्षकों और उभरते एथलीटों को अपनी प्रतिभा पर भरोसा मजबूत करने का अवसर मिलेगा। • प्रवासी भारतीयों के लिए: विदेशों में सुरक्षा या अन्य कठिन पेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों के लिए यह सकारात्मक मिसाल है। अपनी दिनचर्या में फिटनेस और खेल को शामिल करके वे भी विदेशी धरती पर अपनी पहचान बना सकते हैं। • वुशू खेल के लिए: गैर-पारंपरिक खेलों में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की यह सफलता अन्य अभिभावकों को अपने बच्चों को मार्शल आर्ट्स की ओर भेजने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे खेल के प्रति समाज में जागरूकता और रुचि में विस्तार होगा। ऐसा क्यों हुआ पवन दीप सिंह की यह जीत उनकी सतत मेहनत, मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि और पिछले साल के प्रदर्शन से मिली सीख का प्रत्यक्ष परिणाम है। • पिछले साल की सीख: उन्होंने पिछले संस्करण में इसी चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर रजत पदक हासिल किया था। उस मुकाबले के अनुभव और कमियों का गहन विश्लेषण कर उन्होंने अपनी तकनीक को निखारा, जिससे वह इस बार सीधे गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे। • मजबूत खेल पृष्ठभूमि: बचपन में छह साल की उम्र से ही उन्हें घर में खेल का वातावरण मिला, क्योंकि उनके पिता पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। इस पारिवारिक प्रोत्साहन ने उन्हें कम उम्र से ही खेल को प्राथमिकता देने के लिए तैयार किया। • पेशेवर कोचिंग और प्रशिक्षण: एनआईएस पटियाला से एक वर्षीय डिप्लोमा करने और भारत में कोचिंग देने के कारण उनके पास वुशू की गहरी तकनीकी समझ थी। इसी तकनीकी ज्ञान ने उन्हें विदेश में अकेले अभ्यास करते हुए भी अपनी धार बनाए रखने में मदद की। • अटूट अनुशासन: 2023 में न्यूजीलैंड जाकर सुरक्षा कंपनी में पेट्रोलिंग ऑफिसर की व्यस्त नौकरी करने के बावजूद उन्होंने अभ्यास का कोई सत्र नहीं छोड़ा। अपनी ड्यूटी के बाद नियमित शारीरिक अभ्यास जारी रखने के कारण ही वे मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार रहे। सवाल-जवाब 1. पवन दीप सिंह ने किस खेल और प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है? उन्होंने वुशू कुंग फू फेडरेशन ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा ऑकलैंड के नैटबॉल स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। 2. पवन दीप सिंह मूल रूप से कहां के निवासी हैं? वह हरियाणा के अंबाला कैंट स्थित लालकुर्ती क्षेत्र के रहने वाले हैं। 3. न्यूजीलैंड में पवन दीप सिंह क्या काम करते हैं? वह 2023 में वर्क वीजा पर न्यूजीलैंड गए थे और वर्तमान में ऑकलैंड की एक सुरक्षा कंपनी में पेट्रोलिंग अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। 4. क्या उन्होंने इससे पहले भी इस चैंपियनशिप में पदक जीता था? हां, उन्होंने पिछले वर्ष भी इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और तब उन्हें रजत पदक प्राप्त हुआ था। 5. पवन दीप सिंह के पास खेल से जुड़ी क्या शैक्षणिक योग्यता है? उन्होंने एनआईएस पटियाला से वुशू खेल में एक वर्ष का डिप्लोमा किया है और भारत में खेल कोच के रूप में भी कार्य किया है। प्रेरणा और सबक पवन दीप सिंह की यात्रा यह साबित करती है कि सीमित साधन और जीवन की नई जिम्मेदारियां भी खेल के प्रति जुनून को रोक नहीं सकती हैं। • काम और जुनून का संतुलन: विदेश में सुरक्षा गार्ड के रूप में कठिन ड्यूटी करते हुए भी उन्होंने खेल नहीं छोड़ा। यदि इरादे मजबूत हों, तो व्यस्त आजीविका के साथ भी अपने शौक और लक्ष्य को जिंदा रखा जा सकता है। • विफलता से आगे बढ़ना: पिछले साल सिल्वर मेडल मिलने पर उन्होंने संतोष नहीं किया, बल्कि गोल्ड जीतने के लिए अपनी मेहनत दोगुनी कर दी। अपनी पिछली गलतियों से सीखना ही अंतिम जीत का मार्ग प्रशस्त करता है। • समाज के प्रति जिम्मेदारी: भारत में रहते हुए उन्होंने केवल खुद नहीं खेला, बल्कि स्थानीय युवाओं को नशे से दूर रखने और खेल से जोड़ने के लिए कोचिंग दी। अपनी सफलता के साथ दूसरों के जीवन को बेहतर बनाना एक सच्चे खिलाड़ी की पहचान है। • पारिवारिक समर्थन की अहमियत: परिवार के निरंतर प्रोत्साहन ने उनके सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने माता-पिता और भाई के विश्वास को उन्होंने कठिन परिश्रम से अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि में तब्दील किया। https://trendkia.com/haryana/new-zealand-rashtriya-vushu-chainpiyanashipa-men-ambala-ke-pawan-deep-singh-ne-jita-golda-medala-34087 TrendKia — Har trend, sabse pehle.