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  "title": "गैंगस्टर मैनपाल ने कंबोडियाई प्रेमिका मेटाचान संग रचाई शादी, पैरोल पर जेल से बाहर आकर लिए सात फेरे",
  "summary": "हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टर मैनपाल ने उम्रकैद की सजा से भागकर कंबोडिया में नई जिंदगी शुरू की थी, लेकिन अब हिरासत के दौरान मिली 12 घंटे की पैरोल पर उसने अपनी विदेशी प्रेमिका से शादी कर ली है।",
  "content": "झज्जर जिले के बादली गांव के रहने वाले मैनपाल उर्फ ‘धीला’ ने अपराध की दुनिया से निकलकर एक अनोखा सफर तय किया। हत्या और लूट जैसे संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा यह अपराधी जेल की पैरोल मिलने के बाद फरार हो गया था और देश छोड़कर सीधे कंबोडिया जा पहुंचा था। विदेश में उसने अपनी पहचान बदलकर नया कारोबार शुरू किया और वहीं अपनी प्रेमिका के साथ रहने लगा। कानून के शिकंजे में दोबारा आने के बाद उसने अपनी विदेशी साथी से भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार शादी रचाई है।\n\nअपराध की दुनिया और सजा का सफर\nपुलिस दस्तावेजों के मुताबिक मैनपाल के खिलाफ हत्या के प्रयास, डकैती, जबरन वसूली और पुलिस पर हमलों से जुड़े दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से कई मामलों में अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उसे हिसार की सेंट्रल जेल में रखा गया था। कानून के कड़े पहरे के बीच उसने पैरोल का फायदा उठाया और तय समय पर जेल लौटने के बजाय भूमिगत हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में दबिश दी और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया था।\n\nफर्जी पासपोर्ट के सहारे विदेश यात्रा\nफरारी के दौरान उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची। उसने गुरुग्राम के एक फर्जी पते पर ‘सोनू कुमार’ के नाम से फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेज तैयार करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर उसने पासपोर्ट हासिल किया और कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विदेशी उड़ान पकड़कर बैंकॉक निकल गया। कुछ दिन थाईलैंड में बिताने के बाद वह सड़क मार्ग से कंबोडिया पहुंच गया और सिमरियप शहर में अपना नया ठिकाना बना लिया।\n\nकंबोडिया में कारोबार और परिवार\nसिमरियप में उसने स्थानीय महिला चैन मैटा यानी मेटाचान के साथ मिलकर जीवन की नई शुरुआत की। दोनों ने मिलकर बचत की राशि से एक मकान खरीदा और साथ रहने लगे। उसने वहां एक डिस्को और एक रेस्टोरेंट की शुरुआत की, जो सफलतापूर्वक चलने लगे। विदेशी धरती पर रहते हुए उनके तीन बच्चे हुए, जिनके नाम बाहुबली, भगत कुमार और आस्था रखे गए। भारत का सबसे वांछित अपराधी विदेश में एक सफल व्यवसायी के रूप में रह रहा था।\n\nवीजा नवीनीकरण के दौरान गिरफ्तारी\nभारतीय अधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। लंबे समय तक कानून से बचने के बाद आखिरकार उसका यह छलावा समाप्त हो गया। जब वह कंबोडिया के आव्रजन कार्यालय में अपने वीजा का नवीनीकरण कराने पहुंचा, तो अंतरराष्ट्रीय प्रणालियों में उसकी पहचान उजागर हो गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने उसे दबोच लिया और कानूनी औपचारिकताओं के बाद भारत वापस भेज दिया गया।\n\nभारी सुरक्षा के बीच 12 घंटे की पैरोल\nभारत लौटने के बाद उसे फिर से हिसार जेल में बंद कर दिया गया। अपनी कंबोडियाई साथी मेटाचान को कानूनी और सामाजिक मान्यता दिलाने के लिए उसने अदालत में याचिका दायर की, जिस पर विचार करते हुए अदालत ने उसे बारह घंटे की अभिरक्षा पैरोल प्रदान की। झज्जर के दुलीना क्षेत्र में एक निजी समारोह स्थल पर यह विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और समारोह स्थल को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था।\n\nपारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह\nदूल्हा बने मैनपाल ने ऑफ-व्हाइट रंग की शेरवानी पहनी थी, जबकि उसकी कंबोडियाई दुल्हन मेटाचान पारंपरिक लाल लहंगे में नजर आईं। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच दोनों ने सात फेरे लिए। इस अनूठे विवाह समारोह में लगभग पांच सौ मेहमान शामिल हुए, जिसमें कंबोडिया से आई दुल्हन के करीबी और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत कैदियों की पैरोल व्यवस्था को नए सिरे से चर्चा में लाती है।\n\n• हरियाणा में: स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और कुख्यात अपराधियों की गतिविधियों पर पुलिस की निगरानी तेज कर दी गई है। इस तरह के मामलों से जेल प्रशासन की पैरोल नीतियों की सख्त समीक्षा होती है।\n• आम नागरिकों के लिए: अदालती फैसलों और मानवीय आधार पर मिलने वाली पैरोल की कानूनी सीमाओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ती है। ऐसे मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को ट्रैक करने वाली प्रणालियां कितनी प्रभावी हो चुकी हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह मामला तब सुर्खियों में आया जब एक सजायाफ्ता अपराधी ने तय प्रक्रिया का उल्लंघन कर विदेश में शरण ली और बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लाया गया।\n\n• पैरोल का उल्लंघन: आरोपी को निर्धारित अवधि के लिए अस्थायी राहत दी गई थी, लेकिन उसने अदालत के आदेशों की अवहेलना करते हुए आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया था।\n• फर्जी दस्तावेजों का उपयोग: पुलिस की पकड़ से बचने के लिए उसने सोची-समझी रणनीति के तहत दूसरे नाम से पहचान पत्र बनवाए और देश छोड़कर फरार होने में कामयाब रहा।\n• अंतरराष्ट्रीय समन्वय: भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस और कंबोडियाई आव्रजन जांच के दौरान डेटा मिलान होने से उसकी पहचान उजागर हो गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मैनपाल किस गांव का रहने वाला है?\nमैनपाल हरियाणा के झज्जर जिले के बादली गांव का रहने वाला है।\n\n2. उसे कौन सी सजा सुनाई गई थी?\nएक चर्चित हत्या के मामले में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।\n\n3. वह देश छोड़कर कैसे भागा था?\nउसने फर्जी पहचान पत्र और पासपोर्ट बनवाकर कोलकाता से बैंकॉक की उड़ान ली थी।\n\n4. कंबोडिया में उसकी गिरफ्तारी कैसे हुई?\nकंबोडिया के आव्रजन कार्यालय में वीजा का नवीनीकरण कराते समय अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस से उसकी असली पहचान सामने आई।\n\n5. उसे शादी के लिए कितनी देर की पैरोल मिली थी?\nअदालत ने उसे मानवीय आधार पर 12 घंटे की कस्टडी पैरोल मंजूर की थी।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-09-25",
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    "झज्जर न्यूज",
    "कंबोडिया शादी",
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