# पंचकूला में क्लासरूम हमले में घायल 6 साल की बच्ची अस्पताल से लौटी घर, ढोल-नगाड़ों और फूलों से हुआ स्वागत

> हरियाणा के पंचकूला में स्कूल के अंदर सहपाठी के हमले में गंभीर रूप से घायल छह साल की बच्ची ठीक होकर अस्पताल से घर पहुंच गई है, जहां परिजनों और पड़ोसियों ने उसका जोरदार स्वागत किया.

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/panchkula-men-klasaruma-hamale-men-ghayala-6-sala-ki-bachchi-aspatala-se-lauti-ghara-dhola-nagaron-aura-phulon-se-hua-svagata-56500 · **Language:** Hindi
**Tags:** पंचकूला, हरियाणा, पीजीआईएमईआर, स्कूल हिंसा, अमरिंदर सिंह, बाल सुरक्षा

हरियाणा के पंचकूला में एक स्कूल की कक्षा के भीतर जानलेवा हमले का शिकार हुई छह वर्षीय बच्ची आखिरकार अस्पताल से स्वस्थ होकर अपने घर लौट आई है। जब बच्ची अपने मोहल्ले पहुंची तो वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया और स्थानीय लोगों व परिजनों ने फूल-मालाओं तथा बैंड-बाजे के साथ उसका भव्य स्वागत किया। बच्ची को अपने पैरों पर सही-सलामत खड़ा देखकर परिवार के साथ-साथ उपस्थित हर व्यक्ति के चेहरे पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी।

अपनी नन्हीं बेटी को सकुशल वापस पाकर पिता बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखें भर आईं। पिता ने कहा कि उनकी बेटी को नया जीवन मिला है और वे इसे किसी पुनर्जन्म से कम नहीं मानते। उन्होंने बच्ची के ठीक होने का श्रेय डॉक्टरों के समर्पण और अनगिनत लोगों की प्रार्थनाओं को दिया। पिता ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि पूरी दुनिया की दुआओं की बदौलत ही उनकी बेटी इस मुश्किल से बाहर आ पाई है और वे उम्मीद करते हैं कि बची हुई मामूली तकलीफें भी जल्द ठीक हो जाएंगी।

## कक्षा के भीतर हुआ था बर्बर हमला
यह खौफनाक वारदात पंचकूला स्थित एक निजी स्कूल में 28 अक्टूबर को सामने आई थी। कक्षा के अंदर एक आठ वर्षीय लड़के ने अपनी छह साल की सहपाठी बच्ची पर अचानक हमला कर दिया था। घटना से जुड़ा एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें लड़का बच्ची के बाल पकड़कर उसका सिर लगातार डेस्क पर पटकता नजर आया। इतना ही नहीं, जब घायल बच्ची बेसुध होकर फर्श पर गिर गई, तब भी लड़के ने कथित तौर पर उसे लातों से मारा और ईंट जैसी किसी ठोस वस्तु से उस पर वार किए।

हमले में बच्ची के सिर और शरीर पर बेहद गंभीर चोटें आई थीं। स्कूल परिसर में हुई इस हिंसक घटना के बाद गंभीर हालत को देखते हुए बच्ची को तुरंत चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान यानी पीजीआईएमईआर ले जाया गया। वहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने कई दिनों तक बच्ची का सघन इलाज किया, जिसके बाद उसकी हालत में लगातार सुधार दर्ज किया गया और अब उसे छुट्टी दे दी गई है।

## पुलिस जांच और लड़के का चिकित्सीय मूल्यांकन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हुआ। पुलिस उपायुक्त (अपराध) अमरिंदर सिंह ने पुष्टि की कि घटना में शामिल लड़के की उम्र आठ वर्ष और पीड़िता की उम्र छह वर्ष है। पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आरोपी बच्चे की चिकित्सकीय और मानसिक स्थिति का विशेषज्ञों के जरिए पूरा आकलन कराया जा रहा है।

पुलिस उपायुक्त ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि सात से बारह वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों से जुड़े किसी भी हिंसक मामले में चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन अनिवार्य होता है। इस विशेष मूल्यांकन रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही नियमानुसार आगे की कानूनी व सुधारात्मक प्रक्रिया तय की जाएगी। स्कूल परिसर के भीतर छोटे बच्चों के बीच हुई इस स्तर की हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

## इसका आप पर असर
स्कूल परिसर के भीतर छोटे बच्चों के बीच हिंसक घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षा को लेकर यह मामला अभिभावकों तथा शिक्षण संस्थानों के लिए बेहद संवेदनशील सबक प्रस्तुत करता है।

- **हरियाणा में:** पंचकूला सहित राज्यभर के स्कूलों में क्लासरूम निगरानी और शिक्षक उपस्थिति के नियमों को अधिक सख्त किया जा सकता है। इससे निजी व सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक स्कूल प्रशासन से बेहतर सुरक्षा ऑडिट की मांग कर रहे हैं।
- **भारत में:** देश भर के प्राथमिक विद्यालयों में 7 से 12 वर्ष के बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और आक्रामक व्यवहार की पहचान के लिए काउंसलिंग व्यवस्था पर बल दिया जा रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों में पनपने वाले तनाव या हिंसक प्रवृत्तियों पर शुरुआती चरण में ही ध्यान देने की जरूरत है।
- **अभिभावकों के लिए:** माता-पिता को स्कूल के अंदर सीसीटीवी कवरेज और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता की पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बच्चों के व्यवहार में आने वाले अचानक बदलावों पर पेशेवर मदद लेना आवश्यक है।
- **छात्र सुरक्षा नियम:** कक्षाओं में सहपाठियों के बीच होने वाले विवादों को तत्काल रोकने के लिए स्कूल स्टाफ की निरंतर मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए। इससे कक्षाओं में अकेले छूट जाने वाले छोटे बच्चों पर होने वाले हमलों को समय रहते रोका जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना एक प्राथमिक विद्यालय की कक्षा के भीतर बच्चों के बीच हुई अनियंत्रित शारीरिक हिंसा और निगरानी के अभाव की वजह से घटित हुई।

- **सीधा कारण:** स्कूल की कक्षा में आठ साल के लड़के ने अज्ञात कारणों से अपनी छह साल की सहपाठी बच्ची पर अचानक हमला कर दिया। उसने बच्ची के बाल पकड़कर उसका सिर डेस्क पर मारा, लातें मारीं और किसी ठोस वस्तु से वार किए।
- **अनुकूल परिस्थितियां:** घटना के समय कक्षा के अंदर शिक्षकों या स्कूल कर्मचारियों की प्रत्यक्ष निगरानी की कमी रही, जिससे हमला इतना गंभीर रूप ले सका। सुरक्षा या सहायक कर्मचारियों की गैर-मौजूदगी के चलते बच्ची को तत्काल बचाव नहीं मिल सका।
- **आरोपी बच्चे की स्थिति:** पुलिस के अनुसार आठ वर्षीय बच्चे की चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक स्थिति का मूल्यांकन कराया जा रहा है ताकि आक्रामकता के कारणों का पता चल सके। कानून के तहत 7 से 12 वर्ष के बच्चों के मामलों में मानसिक स्थिति की जांच अनिवार्य होती है।
- **आगे की कानूनी प्रक्रिया:** पुलिस और बाल कल्याण विशेषज्ञ मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक उपाय तय करेंगे। बाल सुधार नियमों के तहत औपचारिक कदम रिपोर्ट आने के बाद ही उठाए जाएंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. पीड़ित बच्ची की उम्र कितनी है और वह किस शहर की घटना है?
पीड़ित बच्ची की उम्र छह साल है और यह घटना हरियाणा के पंचकूला के एक स्कूल की है।

### 2. यह हमला किस तारीख को हुआ था?
यह हमला 28 अक्टूबर को स्कूल की कक्षा के भीतर हुआ था।

### 3. बच्ची को इलाज के लिए किस अस्पताल में भर्ती कराया गया था?
गंभीर चोटों के कारण बच्ची को चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया था।

### 4. हमला करने वाले लड़के की उम्र क्या है?
पुलिस उपायुक्त (अपराध) अमरिंदर सिंह के अनुसार हमला करने वाले लड़के की उम्र आठ साल है।

### 5. आरोपी लड़के पर पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है?
पुलिस नियमों के तहत आठ वर्षीय लड़के की चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक जांच करा रही है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।

### 6. घर लौटने पर बच्ची का स्वागत कैसे किया गया?
बच्ची के घर लौटने पर परिजनों और पड़ोसियों ने फूल-मालाओं और बैंड-बाजे के साथ उसका स्वागत किया।

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