# पानीपत में खुले नाले में समाने से बाल-बाल बची मासूम, सतर्क राहगीरों ने तुरंत बाहर खींच बचाई जान

> पानीपत के वार्ड तीन में देवी मंदिर के पास खुले नाले में गिरी एक बच्ची को स्थानीय लोगों ने तुरंत बाहर निकाल लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस इलाके में पहले भी महिला और बाइक सवार गिर चुके हैं, जिसके बाद नगर निगम ने अधिकारियों पर कार्रवाई और निर्माण एजेंसी पर जुर्माना लगाया था।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/panipat-men-khule-nale-men-samane-se-bala-bala-bachi-masuma-satarka-rahagiron-ne-turnta-bahara-khincha-bachai-jana-48214 · **Language:** Hindi
**Tags:** पानीपत, खुला नाला, नगर निगम पानीपत, देवी मंदिर पानीपत, नागरिक सुरक्षा, हरियाणा समाचार

हरियाणा के पानीपत शहर में बुनियादी नागरिक सुरक्षा से जुड़ी भारी लापरवाही का एक और खौफनाक मामला सामने आया है। वार्ड नंबर तीन के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध देवी मंदिर के निकटवर्ती इलाके में एक मासूम बच्ची अचानक बिना ढके खुले नाले में जा गिरी और डूबने लगी। गनीमत रही कि जिस वक्त यह अनहोनी हुई, उस समय आसपास कई स्थानीय लोग और राहगीर मौजूद थे। उन्होंने बिना एक पल गंवाए फुर्ती दिखाई और बच्ची को तुरंत नाले से बाहर खींच लिया। यदि लोगों की नजर पड़ने में कुछ पलों की भी देरी हो जाती, तो इस लापरवाही की कीमत मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में दर्ज हो गई, जिसके सार्वजनिक होने के बाद से स्थानीय नागरिकों में नगर निगम की लचर कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

## सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर और स्थानीय लोगों का साहसिक प्रयास
घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे में दर्ज हुए फुटेज से साफ पता चलता है कि बच्ची सामान्य रूप से वहां से गुजर रही थी कि अचानक पैर फिसलने अथवा नाले की परिधि पर कोई सुरक्षा घेरा न होने के चलते वह गहरे गंदे पानी में समा गई। आसपास खड़े लोगों ने जैसे ही छपाक की आवाज सुनी और बच्ची को नाले में डूबते देखा, वे तुरंत उसकी जान बचाने के लिए नाले की तरफ दौड़ पड़े। नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए झुककर बच्ची को सुरक्षित खींच लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि नाले की गहराई और उसमें बह रहे गंदे पानी के तेज बहाव को देखते हुए यह बचाव कार्य बेहद नाजुक था। समय रहते लोगों द्वारा उठाए गए इस कदम ने बच्ची के परिवार को कभी न भूलने वाले सदमे से बचा लिया। हालांकि अभी तक बच्ची की सटीक उम्र, हादसे का पक्का समय अथवा घटना के बाद उसे चिकित्सीय सहायता के लिए किसी अस्पताल ले जाया गया या नहीं, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन इस वाकये ने इलाके में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर अभिभावक के मन में डर पैदा कर दिया है।

## अगस्त महीने में इसी नाले का शिकार बनी थी एक महिला
पानीपत के इसी क्षेत्र में खुले नालों के कारण जान जोखिम में पड़ने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व अगस्त के महीने में भी इसी नाले में एक महिला के गिर जाने की दर्दनाक घटना पेश आई थी। उस समय भी महिला सड़क किनारे चलते हुए अचानक खुले नाले के अंदर गिर गई थी, जिसका वीडियो भी निगरानी कैमरे में रिकॉर्ड हुआ था। उस दौरान आसपास मौजूद दुकानदारों और राहगीरों ने एकजुट होकर भारी मशक्कत के बाद महिला को नाले से बाहर निकाला था और उसकी जान बचाई थी। उस हादसे के तुरंत बाद स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने नगर निगम के प्रति तीखा रोष व्यक्त किया था। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि इलाके में सड़क और सीवर लाइन बिछाने का निर्माण कार्य काफी समय से अधूरा पड़ा है। नालों की गहराई अत्यधिक है और खुदाई वाले खुले गड्ढों के चारों ओर न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग की गई है और न ही रोशनी या चेतावनी के पर्याप्त बंदोबस्त किए गए हैं। लेकिन उस गंभीर चेतावनी के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं आया।

## सितंबर में सचदेवा गार्डन के सामने गड्ढे में जा गिरे थे बाइक सवार
लापरवाही की यह श्रृंखला केवल नाले तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसी इलाके में अधूरे निर्माण कार्यों के चलते सड़क पर बने गहरे गड्ढे भी राहगीरों के लिए जानलेवा जाल साबित होते रहे हैं। सितंबर की शुरुआत में सचदेवा गार्डन के ठीक सामने एक ऐसा ही भीषण हादसा हुआ था, जहां सड़क के बीचों-बीच खुले पड़े गड्ढे में अनियंत्रित होकर बाइक सवार गिर पड़े थे। इस हादसे का भी सीसीटीवी वीडियो सामने आया था, जिसमें दोपहिया वाहन चालकों को अचानक बने गड्ढे के कारण दुर्घटनाग्रस्त होते देखा गया था। इसके कुछ ही समय बाद इसी क्षेत्र में एक अन्य युवक के भी खुले सीवर मैनहोल अथवा गहरे गड्ढे में गिर जाने की घटना सामने आई थी। लगातार अंतराल पर एक ही इलाके में महिलाओं, दोपहिया चालकों, युवाओं और अब एक अबोध बच्ची के साथ हुए इन हादसों ने साबित कर दिया है कि नगर निगम की देखरेख में चल रहे अधूरे विकास कार्य और असुरक्षित ढांचे आम नागरिकों की दैनिक आवाजाही के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।

## प्रशासनिक कार्रवाई: जेई निलंबित, वरिष्ठ अफसरों पर आरोपपत्र और निर्माण एजेंसी पर जुर्माना
अगस्त और सितंबर में महिला तथा बाइक सवारों के साथ हुई दुर्घटनाओं के बाद नगर निगम प्रशासन पर जनदबाव काफी बढ़ गया था, जिसके चलते कागजों पर कड़ी कार्रवाई भी की गई थी। निगम आयुक्त डॉ. पंकज राव ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए प्राथमिक जिम्मेदारी तय की थी और कनिष्ठ अभियंता (जेई) जतिन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही उच्च स्तर पर पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने के आरोप में उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) योगेश तोमर और कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) सुमित नांदल के खिलाफ बाकायदा आरोपपत्र जारी करते हुए विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी। केवल अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि स्थल पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाली संबंधित निर्माण एजेंसी पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए 10 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाने के आदेश पारित किए गए थे। इतना ही नहीं, एजेंसी को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डालने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। परंतु सबसे बड़ा और ज्वलंत प्रश्न यह है कि इतनी सख्त प्रशासनिक कार्रवाइयों, निलंबन और लाखों के जुर्माने के बावजूद धरातल पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं सुधरे, जिससे एक बच्ची दोबारा उसी खतरे की चपेट में आ गई।

## नागरिक सुरक्षा के स्थायी समाधान की दरकार
देवी मंदिर के पास हुए इस ताजा हादसे ने एक बार फिर यह कड़वी हकीकत उजागर कर दी है कि प्रशासनिक अमला अमूमन हादसा होने के बाद ही हरकत में आता है, जबकि हादसों को रोकने के लिए पूर्व में किए जाने वाले स्थायी सुरक्षा उपाय नदारद रहते हैं। क्या शहर के बाशिंदों की जिंदगी हमेशा केवल मौके पर मौजूद राहगीरों की सतर्कता और किस्मत के भरोसे ही रहेगी? केवल कागजों पर अधिकारियों को आरोपपत्र थमाना या ठेकेदार पर जुर्माना लगा देना तब तक निरर्थक साबित होगा, जब तक कि खतरनाक खुले नालों को ठोस ढक्कनों से पूरी तरह सुरक्षित न ढका जाए। शहरवासियों की यह पुरजोर मांग है कि सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं के चारों ओर मजबूत लोहे अथवा कंक्रीट की बैरिकेडिंग की जाए, रात के समय दृश्यता बढ़ाने के लिए रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तथा जो काम अधूरे पड़े हैं उन्हें बिना किसी हीलाहवाली के निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। नगर निगम को यह समझना होगा कि सुरक्षा इंतजामों में जरा सी चूक किसी भी परिवार का चिराग बुझा सकती है।

## इसका आप पर असर
खुले नालों और सड़कों पर खोदे गए बिना सुरक्षा घेरे वाले गड्ढों के कारण राहगीरों, खासकर छोटे बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ रही है।

- **पानीपत में:** वार्ड तीन, देवी मंदिर और सचदेवा गार्डन के आसपास आवाजाही करने वाले स्थानीय नागरिकों को खुले नालों व अधूरे निर्माण कार्यों के चलते अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी। अभिभावकों को बच्चों को अकेले सड़क पर भेजने से बचना चाहिए और रात के समय इन मार्गों पर वाहन धीमी गति से चलाने होंगे।
- **भारत में:** देश के विभिन्न शहरी क्षेत्रों में चल रहे सीवर व नाला निर्माण प्रोजेक्ट्स के पास गुजरते समय नागरिकों को खुले गड्ढों से सतर्क रहना चाहिए। स्थानीय नगर निगम या पालिका प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग न किए जाने पर नागरिकों को तुरंत जन-शिकायत पोर्टल पर असुरक्षित स्थलों की सूचना दर्ज करानी चाहिए।
- **जवाबदेही और नियम:** निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाए जाने पर ठेकेदारों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग की कानूनी कार्रवाई संभव है। क्षेत्र के निवासी अपने स्थानीय पार्षद या निगम कार्यालय में जाकर असुरक्षित खुले मैनहोल को ढकने का लिखित दबाव बना सकते हैं।
- **आपातकालीन बचाव:** किसी भी व्यक्ति के नाले या गड्ढे में गिरने की स्थिति में तुरंत स्थानीय मदद जुटाएं और फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस को सूचित करें। ऐसे खतरनाक स्थलों पर यदि नगर निगम सुरक्षा बोर्ड न लगाए, तो स्थानीय लोग अस्थायी रूप से चेतावनी चिन्ह लगाकर दूसरों को आगाह कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पानीपत के वार्ड तीन में खुले नाले में बच्ची के गिरने का मुख्य कारण लंबे समय से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य और सुरक्षा इंतजामों की घोर अनदेखी है। प्रशासन द्वारा पहले हुई दुर्घटनाओं के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई करने और ठेकेदार पर जुर्माना लगाने के बावजूद धरातल पर नाले को ढकने या बैरिकेडिंग करने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।

- **अधूरा निर्माण कार्य:** इलाके में सड़क और सीवर लाइन बिछाने का काम काफी समय से अधूरा पड़ा हुआ है। ठेकेदार और संबंधित एजेंसी द्वारा काम बीच में छोड़ दिए जाने या गति धीमी होने से गहरे गड्ढे और नाले खुले रह गए।
- **सुरक्षा बैरिकेडिंग का अभाव:** नाले की परिधि पर मजबूत जाली, कंक्रीट स्लैब या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए थे। इसके कारण राहगीरों, बच्चों और दोपहिया चालकों को जमीन और नाले के किनारे का सही अंदाजा नहीं लग पाता।
- **पूर्व चेतावनियों की अनदेखी:** इसी इलाके में अगस्त में एक महिला नाले में गिरी थी और सितंबर में सचदेवा गार्डन के पास बाइक सवार गड्ढे में समाए थे। इन हादसों के बाद भी निगम अमले ने घटनास्थल को तुरंत सील या कवर नहीं किया।
- **सख्त निगरानी में विफलता:** जेई के निलंबन और एसडीओ व एक्सईएन को आरोपपत्र देने के बावजूद साइट पर नियमित निरीक्षण नहीं किया गया। कागजी कार्रवाई के बाद फील्ड में वास्तविक सुधारात्मक कार्य न होने से खतरा जस का तस बना रहा।

## सवाल-जवाब

### 1. पानीपत में बच्ची के साथ क्या हादसा हुआ?
पानीपत के वार्ड नंबर तीन में देवी मंदिर के पास एक बच्ची खुले नाले में गिर गई थी, जिसे आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बाहर निकालकर सुरक्षित बचा लिया।

### 2. क्या इस इलाके में पहले भी ऐसी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं?
हां, इसी क्षेत्र में अगस्त में एक महिला खुले नाले में गिर गई थी और सितंबर में सचदेवा गार्डन के सामने खुले गड्ढे में बाइक सवार गिर गए थे।

### 3. पूर्व में हुए हादसों के बाद नगर निगम ने क्या कार्रवाई की थी?
नगर निगम आयुक्त ने जेई जतिन को निलंबित किया था, एसडीओ योगेश तोमर और एक्सईएन सुमित नांदल के खिलाफ आरोपपत्र जारी किया था तथा निर्माण एजेंसी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की थी।

### 4. क्या घटना में बच्ची की उम्र या स्वास्थ्य स्थिति की पुष्टि हुई है?
नहीं, अभी तक बच्ची की सटीक उम्र, घटना का समय अथवा उसे अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

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