पराली जलाने में पोखरण का तरीका अपना रहे पंजाब के किसान, सैटेलाइट को दे रहे गच्चा पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में भारी कमी दिखने के पीछे एक हैरान करने वाला तरीका सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसान अमेरिकी सैटेलाइट्स को चकमा देने के लिए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के पोखरण परमाणु परीक्षण वाले फॉर्मूले का इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा पराली जलाने के आंकड़ों में इस सीजन भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे अधिकारियों और विशेषज्ञों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे थे। इस बीच सामने आई रिपोर्ट्स ने एक अनोखा सच उजागर किया है। पोखरण परमाणु परीक्षण से जुड़ा है मामला सामने आई जानकारियों के अनुसार, किसान ठीक उसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं जो पोखरण परमाणु परीक्षण के दौरान वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम ने अमेरिकी सैटेलाइट्स की नजरों से सीक्रेट मिशन को छिपाने के लिए अपनाई थी। इसी तरकीब की बदौलत सैटेलाइट्स खेत में जलने वाली पराली को ठीक से ट्रैक नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती किसान सैटेलाइट्स और प्रशासन की निगरानी से बचने के लिए नए और बेहद शातिर तरीके अपना रहे हैं। यही वजह है कि खेतों में पराली जलाने की घटनाएं तो हो रही हैं, लेकिन सरकारी कैमरों और अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे उपग्रहों की पकड़ में नहीं आ रही हैं। इस स्थिति के कारण दिल्ली और आसपास के इलाकों की हवा लगातार जहरीली बनी हुई है और प्रदूषण पर काबू पाना मुश्किल हो गया है। इसका आप पर असर यह स्थिति सीधे तौर पर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। • दिल्ली एनसीआर में: प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों में सांस की बीमारी, आंखों में जलन और अस्थमा जैसी समस्याओं को तेजी से बढ़ा रहा है। खराब हवा के कारण लोगों को सुबह की सैर छोड़ने और मास्क पहनने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। • पंजाब और हरियाणा में: किसानों द्वारा अपनाए जा रहे इन नए तरीकों से प्रशासनिक निगरानी तंत्र और पर्यावरण नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों को अब इन जमीनी और तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए नए उपाय तलाशने होंगे। ऐसा क्यों हुआ पराली जलाने के पारंपरिक आंकड़ों और दिल्ली के प्रदूषण के बीच के इस विरोधाभास के पीछे कई तकनीकी और व्यवहारिक कारण छिपे हैं। प्रशासन और किसानों के बीच की यह रस्साकशी लंबे समय से पर्यावरण संकट का कारण बनती रही है। • सैटेलाइट निगरानी से बचना: किसान शासन और प्रशासन की पैनी नजर से बचने के लिए ऐसे समय और तरीकों का उपयोग कर रहे हैं जब उपग्रह क्षेत्र को स्पष्ट रूप से कैप्चर न कर सकें। • ऐतिहासिक तरीकों का अनुकरण: रिपोर्ट्स बताती हैं कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा पोखरण परीक्षण के दौरान इस्तेमाल की गई गोपनीय तकनीक से प्रेरणा लेकर किसान इस तरह की युक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं। • प्रशासनिक दबाव: पराली जलाने पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माने के डर से किसानों ने निगरानी तंत्र को चकमा देने के लिए नए और छिपे हुए रास्ते ढूंढ निकाले हैं। सवाल-जवाब 1. पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामले कम क्यों दिख रहे हैं? रिपोर्ट्स के अनुसार किसान सैटेलाइट्स को चकमा देने के लिए पोखरण परमाणु परीक्षण के दौरान अपनाए गए तरीकों जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण क्यों बढ़ रहा है? खेतों में पराली जलाने की घटनाएं गुप्त रूप से जारी रहने और वाहनों के प्रदूषण के कारण दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा लगातार जहरीली हो रही है। 3. इस खुलासे का संबंध किससे जोड़ा जा रहा है? इस खुलासे का संबंध एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा पोखरण परमाणु परीक्षण के दौरान अमेरिकी सैटेलाइट्स को धोखा देने के लिए अपनाए गए तरीकों से जोड़ा जा रहा है। 4. क्या किसान शासन-प्रशासन से बचने में सफल हो रहे हैं? हाँ, किसान सैटेलाइट्स की निगरानी से बचने के लिए नए और शातिर तरीके अपनाकर शासन और प्रशासन को सफलतापूर्वक चकमा दे रहे हैं। https://trendkia.com/haryana/parali-jalane-men-pokhran-ka-tarika-apana-rahe-punjab-ke-kisana-satellite-ko-de-rahe-gachcha-57335 TrendKia — Har trend, sabse pehle.