# फरीदाबाद में मौसम की मार से धान की फसल बर्बाद, किसानों के अरमानों पर फिरा पानी

> फरीदाबाद के दयालपुर गांव में अचानक आई आंधी और बारिश से पककर तैयार खड़ी धान की फसल खेतों में बिछ गई है। किसानों को भारी नुकसान की आशंका है और लागत निकलने की चिंता सता रही है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/pharidabada-men-mausama-ki-mara-se-dhana-ki-phasala-barbada-kisanon-ke-aramanon-para-pani-phera-39547 · **Language:** Hindi
**Tags:** फरीदाबाद धान नुकसान, दयालपुर गांव किसान, मौसम की मार, फसल बर्बादी, धान की खेती, हरियाणा किसान

हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले दयालपुर गांव में मौसम के अचानक बिगड़े मिजाज ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। रात के समय अचानक चली तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने खेतों में लहलहाती धान की खड़ी फसल को पूरी तरह से धराशायी कर दिया है। जिन खेतों में बालियां पककर सुनहरी हो चली थीं और कटाई का इंतजार था, वे अब कीचड़ और पानी में बिछ चुकी हैं। स्थानीय किसानों के अनुसार, फसल की कटाई में महज 10 से 15 दिन का वक्त शेष था, लेकिन ऐन वक्त पर कुदरत की इस मार ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ कर रख दी है। किसानों का कहना है कि चालू वर्ष की शुरुआत में जब गेहूं की कटाई का सीजन था, तब भी ठीक इसी तरह अंतिम चरण में खराब मौसम ने भारी चपत लगाई थी और अब धान के मौसम में भी वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है।

 

## पदम सिंह की चार एकड़ फसल तबाह
 दयालपुर गांव के एक अन्य किसान पदम सिंह ने अपने दर्द को साझा करते हुए बताया कि बीती रात चली तेज आंधी और बारिश ने उनके खेतों में तबाही मचा दी है। उन्होंने अपनी चार एकड़ उपजाऊ भूमि पर 1509 किस्म का धान उगाया था, जो अब पूरी तरह से तबाह हो चुका है। उनका अनुमान है कि इस प्राकृतिक आपदा की वजह से उनकी फसल को सीधे तौर पर लगभग 40 प्रतिशत तक का नुकसान उठाना पड़ा है। पदम सिंह के मुताबिक, धान की एक एकड़ खेती तैयार करने में औसतन 20 हजार रुपये की लागत आती है। फसल पूरी तरह से पक चुकी थी और यदि आने वाले 15 से 20 दिनों तक मौसम पूरी तरह साफ रहता, तो वे आसानी से अपनी उपज की कटाई करके उसे नजदीकी मंडी में बेचने के लिए ले जा सकते थे, लेकिन मौसम के इस यू-टर्न ने सारे समीकरण बिगाड़ दिए हैं।

 

## उत्पादन घटने के साथ मंडी में भाव गिरने की चिंता
 किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें सिर्फ फसल गिरने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक परिणाम भी उन्हें डरा रहे हैं। खेतों में पानी के बीच नीचे गिरे हुए धान के दाने पूरी तरह से परिपक्व नहीं हो पाएंगे और नमी के कारण उनके काले पड़ने की पूरी आशंका बनी हुई है। इससे न केवल कुल पैदावार में भारी गिरावट आएगी, बल्कि जब यह माल मंडी में पहुंचेगा तो इसकी गुणवत्ता खराब होने की वजह से उचित बाजार भाव भी नहीं मिल पाएगा। पदम सिंह का कहना है कि एक किसान साल के बारह महीने खून-पसीना बहाकर और भारी-भरकम पूंजी लगाकर फसल को सींचता है, लेकिन कटाई के मुहाने पर आकर मौसम की एक ही मार सारी कमाई को चौपट कर देती है। इस बार किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है, जहां उत्पादन और दाम दोनों मोर्चों पर भारी घाटा तय माना जा रहा है।

 

## कृत्रिम बारिश और केमिकल छोड़े जाने का दावा
 इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक अलग पहलू भी सामने आया है, जिसे लेकर किसान वर्ग में चर्चाओं का बाजार गर्म है। किसान नेता बबलू हुड्डा ने इस संबंध में दावा किया है कि धान की फसल को जिन हवाओं और बारिश से भारी क्षति पहुंची है, वह सामान्य प्राकृतिक बारिश नहीं थी, बल्कि यह कृत्रिम बारिश का नतीजा थी। बबलू हुड्डा का तर्क है कि इस बारिश के दौरान आसमान से कुछ विशेष प्रकार के केमिकल छोड़े गए थे, जिसका सीधा और घातक प्रभाव खेतों में खड़ी धान की नाजुक फसल पर पड़ा है। हालांकि, यह कृत्रिम बारिश और केमिकल छिड़काव से जुड़ा हुआ दावा पूरी तरह से किसान नेता बबलू हुड्डा का अपना व्यक्तिगत बयान है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

 

## किसानों के सामने खड़ी हुई गंभीर रोजी-रोटी की समस्या
 बबलू हुड्डा का यह भी कहना है कि इस तरह अचानक फसल बर्बाद हो जाने की वजह से दयालपुर गांव और आसपास के अन्नदाताओं के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जब फसल कटने के बिल्कुल करीब होती है और तब जाकर वह खराब होती है, तो किसान की लागत और उसका परिश्रम दोनों पूरी तरह से व्यर्थ चले जाते हैं। फिलहाल दयालपुर गांव के किसान अपने-अपने खेतों में पहुंचकर गिरी हुई धान की फसल को निहार रहे हैं और हुए नुकसान का आकलन करने में जुटे हुए हैं। उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस भारी आर्थिक नुकसान की भरपाई आखिर कैसे होगी और वे अपने परिवार का गुजर-बसर किस प्रकार चलाएंगे।

## इसका आप पर असर
फरीदाबाद के किसानों को मौसम की इस बेरुखी से भारी आर्थिक संकट और उत्पादन में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।

- **भारत में:** देश के विभिन्न हिस्सों में अचानक आने वाले मौसम के बदलाव और बेमौसम बारिश से तैयार फसलों को अक्सर भारी नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।

- **फरीदाबाद में:** दयालपुर गांव और आसपास के इलाकों के किसानों की लागत डूबने के साथ-साथ मंडियों में उनकी उपज का कम दाम मिलने की आशंका बढ़ गई है।

- **लागत का संकट:** प्रति एकड़ लगभग 20 हजार रुपये की लागत लगाने वाले किसान अब अपनी मूल पूंजी निकालने को लेकर भी संघर्ष कर रहे हैं।

- **उत्पाद की गुणवत्ता:** खेतों में फसल गिरने से दाने काले पड़ सकते हैं, जिससे व्यापारियों द्वारा उपज की कम कीमत लगाई जाएगी।

- **वर्षभर की मेहनत:** गेहूं के बाद अब धान की फसल पर भी मौसम की मार पड़ने से अन्नदाताओं की सालाना आय पर सीधा असर पड़ा है।

## ऐसा क्यों हुआ
अचानक आए इस मौसम बदलाव के पीछे तेज आंधी और भारी बारिश का होना मुख्य कारण है, जिसने पक चुकी फसलों को जमीन पर गिरा दिया।

- **अचानक बदलाव:** रात के समय चली तेज हवाओं और मानसूनी गतिविधियों के चलते अचानक भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे खेतों में पानी भर गया।

- **फसल की स्थिति:** धान की फसल अपनी कटाई के बिल्कुल करीब यानी 10 से 15 दिन की दूरी पर थी, जिससे पौधे भारी और कमजोर हो चुके थे।

- **रासायनिक दावे:** किसान नेता बबलू हुड्डा ने इस मौसम को कृत्रिम बारिश और केमिकल छोड़े जाने से जोड़ा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

- **पूर्ववर्ती घटनाएं:** चालू वर्ष के शुरुआती महीनों में भी गेहूं की कटाई के वक्त इसी प्रकार के खराब मौसम ने किसानों को नुकसान पहुंचाया था।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना किस गांव में हुई है?
यह घटना फरीदाबाद जिले के दयालपुर गांव में हुई है।

### 2. किस फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है?
किसानों की तैयार खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है।

### 3. फसल कटाई में कितना समय बाकी था?
धान की कटाई में लगभग 10 से 15 दिन का समय बचा हुआ था।

### 4. पदम सिंह ने कितने क्षेत्रफल में धान लगाया था?
किसान पदम सिंह ने 4 एकड़ जमीन में 1509 किस्म का धान लगाया था।

### 5. धान की खेती में प्रति एकड़ कितना खर्च आता है?
धान की खेती में लगभग 20 हजार रुपये प्रति एकड़ लागत आती है।

### 6. किस किसान नेता ने कृत्रिम बारिश का दावा किया है?
किसान नेता बबलू हुड्डा ने कृत्रिम बारिश और केमिकल छोड़े जाने का दावा किया है।

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