पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कैप्टन स्मित मच्छार के लिए अशोक चक्र की सिफारिश, 174 यात्रियों की बचाई थी जान हरियाणा से राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर फ्लाईदुबई विमान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार को अशोक चक्र देने की अपील की है। दुबई से तेल अवीव की यात्रा पर निकली फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में 174 मुसाफिरों की जान बचाने वाले पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को शांतिकाल के सर्वोच्च वीरता सम्मान अशोक चक्र से नवाजे जाने की मांग उठी है। हरियाणा से निर्दलीय राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक पत्र भेजकर इस पर विचार करने का आग्रह किया है। सांसद ने अपने पत्र में कैप्टन मच्छार की सूझबूझ, अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि उनका यह साहसिक कदम देश के सर्वोच्च शांतिकालीन सम्मान के सर्वथा योग्य है। कॉकपिट में हिंसक हमले के बावजूद नहीं डिगे कैप्टन उड़ान के दौरान कॉकपिट के भीतर घटी यह घटना रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई विमान में सवार ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने अचानक कैप्टन स्मित मच्छार पर क्रैश एक्स से हिंसक हमला कर दिया था। सह-पायलट की मंशा विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की थी। इस अप्रत्याशित और जानलेवा हमले में कैप्टन मच्छार चाकू और कुल्हाड़ी के वार से गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सह-पायलट की विमान गिराने की खौफनाक साजिश को नाकाम कर दिया। कैप्टन की इस तत्परता और जांबाजी के चलते विमान में सवार सभी 174 यात्रियों की जिंदगी सुरक्षित बच सकी। सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पदक के लिए पात्रता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में सांसद कार्तिकेय शर्मा ने अशोक चक्र के ऐतिहासिक महत्व और गरिमा का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि अशोक चक्र भारत में शांतिकाल के दौरान प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है, जो युद्धक्षेत्र से इतर अद्वितीय बहादुरी, शौर्य और निस्वार्थ आत्म-बलिदान के लिए दिया जाता है। इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए आम नागरिक भी पूरी तरह पात्र होते हैं। सांसद ने रेखांकित किया कि हरियाणा की माटी ने सदैव देशसेवा में अपने बेटे-बेटियों के असाधारण पराक्रम और समर्पण पर गर्व किया है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर कैप्टन मच्छार के इस अद्भुत कारनामे को देखकर पूरे राष्ट्र को अपार गौरव की अनुभूति हुई है। युवा पीढ़ी के लिए साहस की मिसाल सांसद कार्तिकेय शर्मा ने अपने पत्र में यह भी जोर देकर कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार का यह साहसिक कदम निस्वार्थ सेवा, मानसिक दृढ़ता और संपूर्ण मानवता के प्रति अटूट समर्पण का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से कैप्टन को सम्मानित करना केवल एक राष्ट्रीय नायक का अभिनंदन भर नहीं होगा, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं को यह स्पष्ट संदेश भी देगा कि बहादुरी और साहस किसी वर्दी, भौगोलिक सीमा या निश्चित पेशे के दायरे में बंधे नहीं होते। हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर लहूलुहान होकर भी विमान सुरक्षित निकालने वाले कैप्टन मच्छार के इस अदम्य शौर्य की सराहना दुनिया भर के शीर्ष नेताओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा भी की जा रही है। इसका आप पर असर हवाई सुरक्षा और नागरिक वीरता पुरस्कारों के मानकों को लेकर इस घटना और पत्र से कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। • नागरिक वीरता का दायरा: शांतिकालीन नागरिक बहादुरी के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय पदक दिए जाने की मांग से व्यावसायिक पायलटों और कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा। संकट के समय निस्वार्थ कार्य करने वाले आम नागरिकों को भी रक्षा कर्मियों के समान मान-सम्मान मिलने की उम्मीद जगी है। • हवाई यात्रियों में सुरक्षा विश्वास: संकट की घड़ी में पायलटों के कठोर प्रशिक्षण और अदम्य साहस की मिसाल ने हवाई यात्रा करने वालों को आश्वस्त किया है। इससे स्पष्ट होता है कि विषम परिस्थितियों में भी दक्ष पायलट यात्रियों की जान बचाने को सर्वोपरि रखते हैं। • विमानन क्षेत्र में कॉकपिट प्रोटोकॉल: उड़ान के दौरान साथी क्रू द्वारा किए गए हमले के बाद एयरलाइंस कॉकपिट सुरक्षा मानकों और सह-कर्मियों की निगरानी को और सख्त करेंगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरलाइनों में क्रू स्क्रीनिंग और उड़ान सुरक्षा दिशा-निर्देशों पर नए सिरे से समीक्षा हो सकती है। • हरियाणा और देश के युवाओं पर असर: कर्तव्य निभाते हुए जान की बाजी लगाने वाले भारतीय पायलट की वैश्विक स्तर पर सराहना से युवाओं में प्रेरणा का संचार होगा। यह स्थापित करता है कि अदम्य साहस केवल सैन्य वर्दी तक सीमित नहीं होता। ऐसा क्यों हुआ सांसद कार्तिकेय शर्मा द्वारा प्रधानमंत्री को यह पत्र दुबई से तेल अवीव की उड़ान के दौरान हुए जानलेवा हमले और कैप्टन की अद्वितीय जांबाजी के बाद लिखा गया है। • कॉकपिट में हिंसक हमला: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने क्रैश एक्स से कैप्टन पर अचानक जानलेवा हमला बोल दिया था। हमलावर विमान को जानबूझकर दुर्घटनाग्रस्त करना चाहता था। • गंभीर चोटों के बावजूद प्रतिरोध: चाकुओं और कुल्हाड़ी के हमलों से लहुलुहान होने के बाद भी कैप्टन स्मित मच्छार ने हार नहीं मानी और सह-पायलट को काबू में किया। उन्होंने विमान को सुरक्षित संभाला और उसमें सवार 174 यात्रियों को सकुशल बचा लिया। • अशोक चक्र की नागरिक पात्रता: सांसद शर्मा ने स्पष्ट किया कि युद्धक्षेत्र से परे शांतिकाल में अदम्य साहस और बलिदान के लिए दिया जाने वाला अशोक चक्र आम नागरिकों को भी प्रदान किया जा सकता है। इसी प्रावधान के तहत उन्होंने प्रधानमंत्री से कैप्टन मच्छार के नाम पर विचार करने का औपचारिक अनुरोध किया। सवाल-जवाब 1. सांसद कार्तिकेय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क्या मांग की है? उन्होंने फ्लाईदुबई विमान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को अशोक चक्र से सम्मानित करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। 2. फ्लाईदुबई उड़ान FZ1073 में वास्तव में क्या हुआ था? उड़ान के दौरान कॉकपिट में ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने क्रैश एक्स से कैप्टन मच्छार पर हमला कर विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने का प्रयास किया था। 3. विमान में कुल कितने यात्री सवार थे? दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में कुल 174 यात्री सवार थे, जिनकी जान कैप्टन की सूझबूझ से बची। 4. क्या आम नागरिक अशोक चक्र पाने के लिए पात्र होते हैं? हां, शांतिकाल में युद्धक्षेत्र से बाहर असाधारण बहादुरी और आत्म-बलिदान के लिए दिया जाने वाला अशोक चक्र आम नागरिकों को भी प्रदान किया जा सकता है। 5. हमले के समय कैप्टन स्मित मच्छार की स्थिति क्या थी? चाकू और कुल्हाड़ी के वार से गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन ने सह-पायलट की साजिश को नाकाम कर विमान को सुरक्षित बचा लिया। प्रेरणा और सबक कैप्टन स्मित मच्छार का यह अदम्य साहस हर व्यक्ति को जीवन के सबसे भीषण संकट में भी अडिग रहने की सीख देता है। • संकट में मानसिक संतुलन: जानलेवा शारीरिक हमले और भीषण चोटों के बावजूद कैप्टन ने संयम नहीं खोया। अत्यधिक दबाव और खौफ के पलों में शांत रहकर सही निर्णय लेना ही जीवन और मौत के बीच का फर्क तय करता है। • दायित्व के प्रति पूर्ण समर्पण: कैप्टन मच्छार ने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और जान के खतरे से पहले 174 यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखना ही एक सच्चे नायक की पहचान है। • साहस किसी वर्दी का मोहताज नहीं: सांसद के अनुसार कैप्टन की वीरता दर्शाती है कि शौर्य केवल सेना या वर्दी तक सीमित नहीं होता। किसी भी पेशे में काम करने वाला आम नागरिक निस्वार्थ भाव से समाज और मानवता के लिए असाधारण मिसाल कायम कर सकता है। https://trendkia.com/haryana/pm-narendra-modi-ko-patra-likhakara-captain-smit-machhar-ke-lie-ashok-chakra-ki-sipharisha-174-yatriyon-ki-bachai-thi-jana-44161 TrendKia — Har trend, sabse pehle.