# रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में ब्रोशर के मुताबिक ही काम करने का सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश

> सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि रियल एस्टेट डेवलपर्स को प्रोजेक्ट ब्रोशर में दिए गए वादों के अनुसार ही निर्माण कार्य पूरा कर घर खरीदारों को सौंपना होगा।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/riyala-esteta-projekta-men-broshara-ke-mutabika-hi-kama-karane-ka-supreme-court-ka-sakhta-nirdesha-26853 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, रियल एस्टेट, घर खरीदार, डीएलएफ, गुरुग्राम, प्रोजेक्ट ब्रोशर

देशभर के रियल एस्टेट डेवलपर्स को एक सख्त संदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट के ब्रोशर में पेश किए गए वादों और सुविधाओं को केवल विपणन का एक पैंतरा समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में जोर देकर कहा कि डेवलपर्स को घर खरीदारों को सौंपे गए नक्शों और दावों के बिल्कुल अनुरूप ही निर्माण कार्य पूरा करके डिलीवरी देनी होगी। कोर्ट के अनुसार, खरीदारों को दिखाए गए प्लान से किसी भी तरह का मनमाना बदलाव कानूनन गलत है।

## गुरुग्राम के प्रोजेक्ट में गड़बड़ी पर कड़ा रुख
अदालत की यह तल्ख टिप्पणी गुरुग्राम में स्थित डीएलएफ होम डेवलपर्स के द प्राइमस नामक आवासीय प्रोजेक्ट में सामने आई गंभीर अनियमितताओं की सुनवाई के दौरान आई। इस मामले में मूल प्रोजेक्ट प्लान के तहत 24 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण करने का वादा किया गया था। हालांकि, जब धरातल पर स्थिति की जांच की गई, तो यह सड़क एक बड़े हिस्से से पूरी तरह नदारद पाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने नक्शों और सुविधाओं में बिल्डरों द्वारा किए जाने वाले ऐसे मनमाने फेरबदल पर गहरा ऐतराज जताया और इसे खरीदारों के विश्वास के साथ सीधा खिलवाड़ बताया।

## अगली सुनवाई तक सुधार का अल्टीमेटम
शीर्ष अदालत ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़क के गायब होने का यह बदलाव कोई मामूली बात नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा और गंभीर विचलन है। इसके साथ ही कोर्ट ने बिल्डर को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई की तारीख तक प्रोजेक्ट को स्वीकृत ब्रोशर और प्लान के अनुसार दुरुस्त नहीं किया गया, तो अदालत आवश्यक और सख्त आदेश जारी करने के कदम उठाएगी।

## इसका आप पर असर
यह फैसला घर खरीदारों को बिल्डरों की मनमानी से सुरक्षा प्रदान करता है और डेवलपर्स को ब्रोशर के वादे पूरा करने के लिए कानूनी रूप से जवाबदेह बनाता है।

- **भारत भर में घर खरीदारों के लिए:** यदि कोई बिल्डर प्रोजेक्ट के नक्शे या वादों से मुकरता है, तो खरीदार कानूनी राहत की मांग कर सकते हैं। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और खरीदारों के पैसों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- **गुरुग्राम में निवासियों के लिए:** द प्राइमस प्रोजेक्ट के आवंटियों को ब्रोशर के अनुसार 24 मीटर चौड़ी सड़क का अधिकार मिलेगा। इससे सोसाइटी के आसपास आवागमन की सुविधा बेहतर होगी।
- **प्रॉपर्टी निवेशकों के लिए:** बुकिंग के समय दिखाए गए लेआउट प्लान में बिल्डर बिना सहमति के बदलाव नहीं कर पाएंगे। निवेशक बिना किसी अनिश्चितता के अपनी संपत्तियों में निवेश कर सकेंगे।
- **रियल एस्टेट बिल्डरों के लिए:** डेवलपर्स को मार्केटिंग ब्रोशर तैयार करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी। झूठे वादे या बदलाव करने पर अदालती कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों को क्या चेतावनी दी है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रोजेक्ट ब्रोशर में किए गए वादों को केवल मार्केटिंग का पैंतरा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और डेवलपर्स को ब्रोशर के अनुसार ही निर्माण करके डिलीवरी देनी होगी।

### 2. यह मामला किस प्रोजेक्ट से संबंधित है?
यह मामला गुरुग्राम में स्थित डीएलएफ होम डेवलपर्स के 'द प्राइमस' आवासीय प्रोजेक्ट से जुड़ा है।

### 3. बिल्डर ने किस प्रमुख सुविधा में बदलाव किया था?
बिल्डर ने मूल प्रोजेक्ट प्लान में 24 मीटर चौड़ी सड़क का वादा किया था, जो जमीनी स्तर पर बड़े हिस्से से पूरी तरह गायब पाई गई।

### 4. अदालत ने अगली सुनवाई के लिए क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट को ब्रोशर के अनुसार दुरुस्त नहीं किया गया, तो वह सख्त और उचित आदेश जारी करेगी।

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