रोटी पैक करने वाले सिल्वर फॉयल से चंद्रभान पांडे ने उकेरी अद्भुत कलाकृतियां, सूरजकुंड मेले में उमड़ रही भीड़ फरीदाबाद के सूरजकुंड दिवाली मेले में प्रतापगढ़ के कारीगर चंद्रभान पांडे ने सामान्य सिल्वर फॉयल पेपर से देवी-देवताओं और आधुनिक कला की अद्भुत पेंटिंग तैयार कर सभी को हैरान कर दिया है। पिछले दो दशकों से इस अनोखी कला से जुड़े पांडे की इन कलाकृतियों को देखने और खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। फरीदाबाद के सूरजकुंड दिवाली मेले में इन दिनों एक बेहद अनोखी कला लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। घरों में रसोई घर के भीतर रोटियों को ताजा रखने और खाने को सुरक्षित पैक करने के लिए आमतौर पर जिस साधारण सिल्वर फॉयल पेपर का इस्तेमाल किया जाता है, उसी का उपयोग करके बेहद खूबसूरत और आकर्षक कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं। इस मेले में पहुंचने वाले दर्शक जब इन कलाकृतियों को अपनी आंखों से देखते हैं, तो वे एक पल के लिए हैरान रह जाते हैं क्योंकि पहली नजर में यह पहचान पाना बेहद कठिन होता है कि ये शानदार पेंटिंग्स किस सामग्री से बनाई गई हैं। इस अद्भुत कला के पीछे प्रतापगढ़ के रहने वाले चंद्रभान पांडे का हुनर है, जो पिछले 20 वर्षों से लगातार इस रचनात्मक क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। मेले में उनकी इन अनूठी पेंटिंग्स को निहारने के लिए राहगीर रुकते हैं और गहरी दिलचस्पी दिखाते हुए इन्हें खरीद भी रहे हैं। कला के प्रति उनका यह समर्पण और बारीक कारीगरी मेले में आने वाले हर शख्स को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, जिससे इस पारंपरिक और अनूठे शिल्प को एक नया मंच मिल रहा है. चंद्रभान पांडे ने अपने शुरुआती सफर के बारे में साझा करते हुए बताया कि वह पिछले दो दशकों से पेंटिंग के इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह इसी क्षेत्र से जुड़े अन्य कार्यों में हाथ आजमाते थे और वहीं से उन्होंने पेंटिंग बनाने की मूल कला को आत्मसात किया। इसके बाद उन्होंने एम्ब्रोजिंग का विशेष कार्य सीखा और पूरी तरह से अपने खुद के काम की शुरुआत कर दी। आज वह इसी हुनर को आगे बढ़ाते हुए अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं और इस कला को निरंतर नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं. उनकी कलाकारी के दायरे में केवल एक ही तरह की डिजाइन नहीं बल्कि कई प्रकार की विविधताएं शामिल हैं। वह सिल्वर फॉयल पेपर की मदद से भगवान की सुंदर तस्वीरों से लेकर विभिन्न प्रकार के जटिल डिजाइन बड़ी खूबसूरती से उकेरते हैं। इसके अलावा वह सूर्य भगवान के रथ की छोटी और बड़ी आकृतियां भी तैयार करते हैं। इतना ही नहीं, वह आयरन पेपर के ऊपर आधुनिक कला यानी मॉडर्न आर्ट की पेंटिंग्स भी बखूबी बनाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक ध्यान बेहद बारीक काम पर देना पड़ता है क्योंकि फॉयल जैसे नाजुक पेपर से सटीक डिजाइन तैयार करना कोई आसान काम नहीं होता है। उनकी बनाई गई पेंटिंग्स इस करीने से ढाली जाती हैं कि देखने वाले को वह किसी सामान्य कागज से बनी हुई प्रतीत ही नहीं होती हैं. इस हुनर के जरिए वह न केवल खुद आगे बढ़ रहे हैं बल्कि अन्य लोगों को भी आजीविका प्रदान कर रहे हैं। चंद्रभान पांडे ने जानकारी दी कि उनके साथ लगभग 30 से 33 लोग मिलकर काम करते हैं, जिससे उनके इस रचनात्मक कार्य के माध्यम से कई अन्य परिवारों को भी रोजगार का एक मजबूत साधन मिल रहा है। उनके इस उत्कृष्ट योगदान और कला साधना के लिए उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में कई प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। राष्ट्रीय खादी से जुड़े कार्यक्रमों में सम्मान प्राप्त करने के अलावा उन्हें गाजियाबाद के स्वर्ण जयंती पार्क के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रमुख मंचों पर भी सम्मानित किया जा चुका है। वह देश भर में लगने वाले विभिन्न सरकारी मेलों में अपनी इन अनूठी कलाकृतियों के साथ हिस्सा लेते हैं. इन कलाकृतियों की मूल्य सीमा के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके स्टॉल पर मिलने वाली पेंटिंग्स की शुरुआती कीमत 50 रुपये से होती है और यह बढ़कर 15 से 16 हजार रुपये तक जाती है। कलाकृतियों के आकार के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया कि उनके पास मौजूद सबसे छोटी पेंटिंग लगभग 4 इंच चौड़ी और 9 इंच लंबी होती है, जबकि उनकी सबसे बड़ी पेंटिंग का आकार 8 बाय 4 फीट तक का होता है। इन सभी कलाकृतियों की कीमतें पूरी तरह से उनके आकार, जटिलता और डिजाइन के हिसाब से ही निर्धारित की जाती हैं ताकि हर वर्ग का खरीदार अपनी पसंद के अनुसार इन्हें चुन सके. मेले में मिल रहे अनुभव के बारे में उन्होंने बताया कि वह पहली बार सूरजकुंड दिवाली मेले में आए हैं। इससे पहले वह अमूमन बिहार के दरभंगा क्षेत्र की ओर आयोजित होने वाले मेलों में ही अपनी कला का प्रदर्शन करने जाते थे। फरीदाबाद के इस मेले में भी उन्हें स्थानीय लोगों और पर्यटकों की तरफ से बेहद शानदार और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। उनके परिवार में उनका एक बेटा भी है जो वर्तमान में सिविल सेवा की कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहा है। चंद्रभान पांडे अपनी इसी अनूठी कला के दम पर अपने काम को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं और सूरजकुंड दिवाली मेले की रौनक में चार चांद लगा रहे हैं. इसका आप पर असर सूरजकुंड मेले में प्रदर्शित इस अनूठी कला से जुड़े विकास का सीधा असर स्थानीय कारीगरों के रोजगार और पारंपरिक हस्तशिल्प के प्रोत्साहन पर पड़ता है। • भारत में: देश भर के पारंपरिक कारीगरों को अपने अनोखे हुनर का प्रदर्शन करने के लिए सरकारी मेलों के माध्यम से बेहतर बाजार और पहचान मिलती है। ऐसे आयोजनों से देश की स्वदेशी कला संस्कृतियों को बढ़ावा मिलता है और ग्रामीण स्तर के कलाकारों को प्रोत्साहन प्राप्त होता है। • फरीदाबाद में: सूरजकुंड दिवाली मेले में आने वाले स्थानीय आगंतुकों को इस तरह के अनूठे और किफायती हस्तशिल्प उत्पादों को देखने तथा सीधे कारीगरों से खरीदने का सीधा अवसर मिलता है। इससे शहर में सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ती है और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है। ऐसा क्यों हुआ सिल्वर फॉयल पेपर जैसी सामान्य सामग्री से इस प्रकार की जटिल और सुंदर पेंटिंग्स तैयार करने की यह परंपरा कारीगरों के लंबे अनुभव और उनके निरंतर परिश्रम का परिणाम है। इस तरह के अनोखे शिल्पों के पीछे दशकों का अभ्यास और विशेष एम्ब्रोजिंग तकनीक शामिल होती है। • कौशल विकास: चंद्रभान पांडे ने पिछले 20 वर्षों के दौरान पेंटिंग के क्षेत्र में विभिन्न विधाओं को सीखकर इस अनूठी तकनीक को विकसित किया है। • बारीक कारीगरी: फॉयल पेपर और आयरन पेपर पर देवताओं के चित्र और मॉडर्न आर्ट तैयार करने में अत्यधिक एकाग्रता और सटीकता की आवश्यकता होती है। • रोजगार का सृजन: इस व्यवसाय के विस्तार से लगभग 30 से 33 अन्य कारीगरों को भी नियमित रूप से काम और आजीविका प्राप्त हो रही है। सवाल-जवाब 1. सिल्वर फॉयल पेपर से पेंटिंग बनाने वाले कारीगर का क्या नाम है? सिल्वर फॉयल पेपर से पेंटिंग बनाने वाले कारीगर का नाम चंद्रभान पांडे है। 2. चंद्रभान पांडे मूल रूप से किस स्थान के रहने वाले हैं? चंद्रभान पांडे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं। 3. वे पिछले कितने वर्षों से इस कला से जुड़े हुए हैं? वे पिछले 20 साल से इस कला और पेंटिंग के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। 4. इन पेंटिंग्स की कीमत कहां से शुरू होकर कहां तक जाती है? इन पेंटिंग्स की कीमत 50 रुपये से शुरू होकर 15 से 16 हजार रुपये तक जाती है। 5. उनकी सबसे छोटी और सबसे बड़ी पेंटिंग का आकार क्या है? उनकी सबसे छोटी पेंटिंग करीब 4 इंच चौड़ी और 9 इंच लंबी होती है, जबकि सबसे बड़ी पेंटिंग 8 बाय 4 फीट तक की होती है। 6. उनके साथ कितने लोग काम करते हैं? उनके साथ लगभग 30 से 33 लोग काम करते हैं, जिन्हें इस काम से रोजगार मिल रहा है। 7. वे पहली बार किस मेले में अपनी कला लेकर आए हैं? वे पहली बार फरीदाबाद के सूरजकुंड दिवाली मेले में अपनी पेंटिंग लेकर आए हैं। प्रेरणा और सबक चंद्रभान पांडे का यह सफर किसी भी व्यक्ति के लिए कड़ी मेहनत और रचनात्मकता के जरिए आत्मनिर्भर बनने की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है। • कड़ी मेहनत: किसी भी साधारण सामग्री को अपनी रचनात्मकता के बल पर असाधारण कला में बदला जा सकता है, बशर्ते आपके पास निरंतर प्रयास करने की लगन हो। • हुनर का विस्तार: शुरुआत किसी भी स्तर से हो सकती है, लेकिन लगातार सीखने की इच्छा और नए प्रयोग करने का साहस आपको सफलता की ओर ले जाता है। • दूसरों को जोड़ना: एक सफल उद्यमी या कलाकार वह होता है जो खुद आगे बढ़ने के साथ-साथ अपने साथ जुड़े अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करता है। https://trendkia.com/haryana/roti-pack-karne-wale-silver-foil-se-chandrabhan-pandey-ne-ukeri-adbhut-kalakritiyan-51854 TrendKia — Har trend, sabse pehle.