सेना के जवान ने मरणोपरांत दिया जीवनदान, 16 मिनट में हिंडन एयरपोर्ट से फोर्टिस अस्पताल नोएडा पहुंचा दिल चंडीगढ़ में ब्रेन डेड घोषित एक सैन्य अधिकारी के परिजनों ने उनकी इच्छा के अनुसार अंगदान का फैसला लिया। हिंडन एयरपोर्ट से नोएडा के फोर्टिस अस्पताल तक 20 किलोमीटर की दूरी पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर महज 16 मिनट में तय कराई। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से एक गंभीर मरीज को नई जिंदगी मिली है। चंडीगढ़ में ब्रेन डेड घोषित किए गए एक भारतीय सेना के अधिकारी की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए उनके परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया। इसके बाद उनके दिल को एक जटिल ऑपरेशन के जरिए नोएडा लाया गया। गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल तक की दूरी तय करने के लिए एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया, जिससे एंबुलेंस ट्रैफिक में फंसे बिना महज 16 मिनट में अस्पताल पहुंच गई। अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने लिया अंगदान का फैसला सैन्य अधिकारी ने जीवित रहते हुए यह इच्छा व्यक्त की थी कि उनके निधन के बाद उनके अंगों का दान कर किसी जरूरतमंद को नया जीवन दिया जाए। जब डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया, तब उनके परिवार ने इस पवित्र सोच का सम्मान करते हुए अंगदान की प्रक्रिया को अपनी सहमति दी। इसके बाद तत्काल प्रभाव से उनके हृदय को नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती एक जरूरतमंद मरीज में ट्रांसप्लांट करने की योजना बनाई गई। अंगदान की इस पहल की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है। चंडीगढ़ से हिंडन और फिर 16 मिनट का चुनौतीपूर्ण सफर अंग प्रत्यारोपण में हर एक सेकंड बेहद कीमती होता है, क्योंकि शरीर से अलग होने के बाद दिल की कार्यक्षमता समय बीतने के साथ घटने लगती है। इस कारण से अधिकारी के दिल को चंडीगढ़ से विशेष विमान के जरिए गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट लाया गया। असली चुनौती हिंडन एयरपोर्ट से नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल तक सुरक्षित और तेज गति से एंबुलेंस को पहुंचाना था। इस लगभग 20 किलोमीटर लंबी दूरी में ट्रैफिक की वजह से अक्सर भारी देरी होती है, इसलिए गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की पुलिस ने आपसी तालमेल बनाकर एक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। 9 सितंबर की दोपहर का घटनाक्रम और पुलिस की त्वरित कार्रवाई 9 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:03 बजे हिंडन एयरपोर्ट से एंबुलेंस हृदय को लेकर रवाना हुई। इस दौरान दोनों जिलों की ट्रैफिक पुलिस ने पूरे मार्ग पर यातायात को नियंत्रित किया और एंबुलेंस के सामने किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने दी। पुलिस अधिकारियों और ट्रैफिक कर्मियों की सजगता के कारण एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ती चली गई। महज 16 मिनट के भीतर एंबुलेंस ने 20 किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया और दिल को सुरक्षित तरीके से अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को सौंप दिया गया। फोर्टिस अस्पताल और आम जनता ने सराहा ग्रीन कॉरिडोर का प्रयास गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट में पहली बार इस प्रकार का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर किसी मानव अंग को त्वरित गति से गंतव्य तक पहुंचाया गया। एंबुलेंस के समय पर पहुंचते ही फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों, मरीज के परिजनों और वहां मौजूद लोगों ने ट्रैफिक पुलिस के इस उत्कृष्ट कार्य की जमकर प्रशंसा की। पुलिस प्रशासन का कहना है कि अंगदान को महादान माना जाता है और किसी का जीवन बचाने वाले इस प्रकार के अभियानों में पुलिस भविष्य में भी पूरी निष्ठा और तत्परता के साथ सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार रहेगी। इसका आप पर असर यह मामला दिखाता है कि आपातकालीन स्थिति में अंगदान और ग्रीन कॉरिडोर किस प्रकार समय रहते कीमती जानें बचा सकते हैं। • भारत भर में: अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने से अंगों की कमी झेल रहे लाखों गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीदें जगी हैं। इससे नागरिक समाज में मरणोपरांत अंगदान के महत्व को बढ़ावा मिलता है। • नोएडा और एनसीआर में: ट्रैफिक पुलिस द्वारा पहली बार बनाए गए इस तरह के ग्रीन कॉरिडोर से साबित होता है कि घने शहरी इलाकों में भी पुलिस त्वरित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रास्ता साफ करा सकती है। इससे स्थानीय अस्पतालों में भर्ती आपातकालीन मरीजों का विश्वास मजबूत हुआ है। ऐसा क्यों हुआ यह त्वरित अभियान इसलिए संभव हुआ क्योंकि सेना अधिकारी ने पहले ही अंगदान की इच्छा जताई थी और कई प्रशासनिक एजेंसियों ने मिलकर काम किया। • अंगदान की सहमति: चंडीगढ़ में सेना अधिकारी को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए अंगदान की मंजूरी दी। • अंग की सीमित उपयोगिता: मानव हृदय को शरीर से अलग करने के बाद बहुत कम समय में ट्रांसप्लांट करना अनिवार्य होता है, इसलिए इसे हवाई मार्ग से हिंडन एयरपोर्ट लाया गया। • अंतर-जिला पुलिस तालमेल: गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर ट्रैफिक पुलिस ने तालमेल बनाकर 20 किमी लंबे मार्ग पर सिग्नल और ट्रैफिक खाली कराकर ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। सवाल-जवाब 1. सेना के अधिकारी का दिल नोएडा क्यों लाया गया? नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती एक मरीज को हार्ट ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी, जिसके लिए चंडीगढ़ से अधिकारी का दिल लाया गया। 2. हिंडन एयरपोर्ट से फोर्टिस अस्पताल की दूरी कितनी देर में तय की गई? लगभग 20 किलोमीटर की इस दूरी को पुलिस के ग्रीन कॉरिडोर की मदद से महज 16 मिनट में तय किया गया। 3. ग्रीन कॉरिडोर कब और किस समय शुरू हुआ? यह ग्रीन कॉरिडोर 9 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:03 बजे हिंडन एयरपोर्ट से एंबुलेंस के रवाना होने के साथ शुरू हुआ। 4. ग्रीन कॉरिडोर बनाने में किन पुलिस टीमों का सहयोग रहा? गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की ट्रैफिक पुलिस टीमों ने आपसी तालमेल बनाकर रास्ता साफ कराया। प्रेरणा और सबक इस घटना से हमें समाज सेवा, अंगदान और कर्तव्यनिष्ठा के कई महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं। • मरणोपरांत भी सेवा का संकल्प: जीवन के बाद भी दूसरों की मदद करने का संकल्प समाज को एक नई दिशा और प्रेरणा देता है। • परिजनों का साहस: दुख की घड़ी में भी किसी अन्य व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए सही निर्णय लेना सर्वोच्च मानवीय मूल्य है। • टीमवर्क और तत्परता: स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिस प्रशासन के बीच का त्वरित समन्वय असंभव दिखने वाले काम को भी आसान बना देता है। https://trendkia.com/haryana/sena-ke-javana-ne-maranoparanta-diya-jivanadana-16-minata-men-hindon-airport-se-fortis-hospital-noida-pahuncha-dila-30812 TrendKia — Har trend, sabse pehle.