# सोलर पंप ने बदली फरीदाबाद के किसान की किस्मत, 75 फीसदी सब्सिडी के साथ दूर हुई सिंचाई की समस्या

> हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बिजली संकट और रात के समय सिंचाई के खतरों से परेशान किसान यश मोहन सैनी ने सोलर पैनल अपनाकर अपनी खेती को आसान बना लिया है। 75 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी की मदद से अब वे बिना किसी रुकावट के दिन में आसानी से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/solar-pump-ne-badali-faridabad-ke-kisana-ki-kismata-75-phisadi-sabsidi-ke-satha-dura-hui-sinchai-ki-pareshani-31199 · **Language:** Hindi
**Tags:** सौर ऊर्जा, सोलर सब्सिडी, फरीदाबाद कृषि, पीएम कुसुम योजना, सिंचाई प्रणाली, ड्रिप इरिगेशन, हरियाणा किसान

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में खेती-किसानी करने वाले लोग अक्सर बिजली कटौती की गंभीर समस्या से जूझते रहते हैं। कहने को तो सरकार किसानों को खेतों में सिंचाई के लिए आठ घंटे बिजली देने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में कई ग्रामीण इलाकों में बिजली आठ घंटे भी ठीक से नहीं मिल पाती। मानसून के सीजन में लगातार हो रही बारिश के कारण यह संकट और भी गहरा जाता है। बारिश शुरू होते ही बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाती है। ऐसे समय में जब खेतों में धान, सब्जियां या अन्य फसलें लगी हों, तो पानी न मिलने से किसानों की फसलें बर्बाद होने की नौबत आ जाती है। गेहूं के सीजन से लेकर धान की रोपाई तक, हर मौसम में सिंचाई का यह संकट बना रहता है।

## रात के समय सिंचाई के खतरे और बिजली की अनिश्चितता
सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी किसानों के लिए काफी परेशानी भरी होती है। सरकारी नियमों के मुताबिक पंद्रह दिन दिन में और पंद्रह दिन रात में बिजली देने का नियम बनाया गया है। जब रात की पाली में बिजली आती है, तो किसानों को मजबूरन अंधेरे में खेतों पर जाना पड़ता है। रात के समय खेतों में विषैले सांपों, बिच्छुओं और आवारा कुत्तों का भारी खतरा बना रहता है। ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में अगर अचानक बिजली कट जाए, तो खेत में मौजूद किसान भारी परेशानी में फंस जाते हैं। इस दोहरे संकट से परेशान होकर किसानों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ती है।

## प्रगतिशील किसान यश मोहन सैनी की नई सोच
फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान यश मोहन सैनी ने इस पुरानी समस्या का एक स्थाई समाधान खोज निकाला। यश मोहन सैनी कई एकड़ भूमि में सजावटी पौधों की खेती करते हैं। बिजली की अनिश्चितता से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने अपने फार्म पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने का फैसला किया। सौर ऊर्जा अपनाने के बाद से उनके खेत में सिंचाई का संकट पूरी तरह समाप्त हो गया है। अब उन्हें बारिश या ग्रिड बिजली की कटौती पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

## चार सालों से सौर ऊर्जा से हो रही निर्बाध सिंचाई
यश मोहन सैनी बताते हैं कि बिजली की बार-बार कटौती और रात में खेतों पर जाने के डर से वे बेहद परेशान हो चुके थे। बारिश के दिनों में कई-कई दिनों तक बिजली नहीं आती थी और रात में जहरीले जीवों का डर हमेशा बना रहता था। उन्होंने लगभग चार साल पहले अपने फार्म पर सौर ऊर्जा सिस्टम लगवाया था। इसके बाद से सिंचाई को लेकर उन्हें कभी किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। अब वे अपनी सुविधानुसार जब चाहें तब ट्यूबवेल चालू कर लेते हैं। इस सिस्टम में एक यूनिवर्सल कंट्रोलर लगा हुआ है, जिससे सिंचाई के साथ-साथ फार्म पर बुनियादी बिजली भी मिल जाती है। भीषण गर्मी के दिनों में इस ऊर्जा से पंखे और लाइटें आसानी से चला ली जाती हैं। सुबह से शाम तक सौर ऊर्जा से ट्यूबवेल चलता है। उन्होंने खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई हुई है, जिससे मात्र एक घंटे में पूरे फार्म की सिंचाई का काम आसानी से निपट जाता है।

## 75 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी का लाभ
बहुत से किसानों को यह जानकारी नहीं है कि कृषि कार्यों के लिए सोलर पैनल लगवाने पर सरकार की ओर से भारी सब्सिडी दी जाती है। यश मोहन सैनी ने इस योजना का पूरा फायदा उठाया। वे बताते हैं कि इस प्रणाली पर सरकार 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान करती है। चार साल पहले उन्होंने अपनी तरफ से एक लाख क्षेत्रह हजार रुपये जमा किए थे और अपने खर्चे पर बोरवेल करवाया था। इसके बाद का पूरा सोलर पैनल और कंट्रोलर सिस्टम सरकार के माध्यम से स्थापित किया गया। उनके फार्म पर ओजोन कंपनी का सिस्टम लगाया गया है, जिसकी सर्विस काफी त्वरित और बेहतर है। यदि कभी कोई छोटी-मोटा तकनीकी खराबी आती भी है, तो कंपनी के तकनीशियन एक से दो दिनों के भीतर आकर उसे ठीक कर देते हैं। आंधी-तूफान जैसी विपरीत मौसम परिस्थितियों में भी यह सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

## सीएससी सेंटर से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
सौर ऊर्जा प्रणाली लगवाने की आवेदन प्रक्रिया काफी सरल और पारदर्शी है। यश मोहन सैनी ने इसके लिए अपने नजदीकी सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) से ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के लिए कुछ बुनियादी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। मुख्य रूप से जिस व्यक्ति के नाम पर जमीन है, उसकी जमीन की जमाबंदी की फर्द और आधार कार्ड अनिवार्य होता है। ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन दर्ज होने के बाद भुगतान का विकल्प आता है। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार 3 किलोवाट से लेकर 10 किलोवाट तक के सिस्टम का चुनाव कर सकते हैं। इसमें एसी और डीसी दोनों तरह के मॉडल उपलब्ध हैं। इसके अलावा किसान अपनी पसंद की पंजीकृत कंपनी का चयन भी कर सकते हैं। बोरवेल तैयार होने और प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंद्रह दिनों से लेकर एक महीने के भीतर कंपनी के कर्मचारी आकर पूरा सिस्टम इंस्टॉल कर देते हैं।

## दिन की रोशनी में सुरक्षित और आधुनिक खेती
सोलर ऊर्जा के उपयोग से किसान अब दिन के उजाले में ही अपनी फसलों को सही मात्रा में पानी दे पाते हैं। सजावटी पौधों और सूक्ष्म ड्रिप सिंचाई के लिए दिन में सिंचाई करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। रात की सिंचाई में जहां पानी का हिसाब रखना मुश्किल होता था, वहीं दिन में ड्रिप सिस्टम से पौधों की सटीक सिंचाई हो जाती है। बिजली कटौती की चिंता खत्म होने से किसानों का समय और पैसा दोनों बच रहा है, साथ ही रात के खतरों से भी सुरक्षा मिल रही है।

## इसका आप पर असर
यह खबर कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाकर सिंचाई लागत घटाने का व्यावहारिक मार्ग दिखाती है।

- **भारत में:** देश भर के किसान कृषि सोलर पंप योजनाओं के तहत 75 प्रतिशत तक सब्सिडी प्राप्त करके अपने खेतों में सोलर पैनल स्थापित कर सकते हैं। इससे डीजल जनरेटर और अनिश्चित बिजली ग्रिड पर निर्भरता समाप्त होती है और खेती की लागत में बड़ी कमी आती है।
- **हरियाणा और फरीदाबाद में:** फरीदाबाद और आसपास के जिलों के किसान सीएससी सेंटर के जरिए अपनी जमीन की जमाबंदी फर्द और आधार कार्ड जमा करके आवेदन कर सकते हैं। इससे उन्हें रात के समय खेतों में जाने के खतरों से राहत मिलती है और दिन में ड्रिप सिंचाई की सुविधा मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
फरीदाबाद के ग्रामीण इलाकों में बिजली की अनिश्चित आपूर्ति, मानसूनी कटौती और रात की सिंचाई के खतरों के कारण किसानों को सोलर ऊर्जा की ओर रुख करना पड़ा है।

- **बिजली कटौती और रोस्टर प्रणाली:** सरकारी वादों के बावजूद ग्रामीण कृषि फीडरों पर आठ घंटे निर्बाध बिजली नहीं मिल पाती, और 15-दिवसीय रात्रि रोस्टर प्रणाली किसानों के लिए असविधाजनक होती है।
- **रात की सिंचाई के सुरक्षा खतरे:** रात के अंधेरे में जलभराव वाले खेतों में सांपों, बिच्छुओं और आवारा पशुओं के हमले का जोखिम बना रहता है।
- **सब्सिडी प्रोत्साहन:** सरकार द्वारा 75 प्रतिशत सब्सिडी दिए जाने से सोलर सिस्टम की शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है, जिससे यह किसानों के लिए किफायती विकल्प बन जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. खेती के लिए सोलर पंप लगवाने पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
सरकारी योजना के तहत कृषि कार्यों के लिए सोलर ऊर्जा सिस्टम लगवाने पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है।

### 2. सोलर पंप के लिए आवेदन करने हेतु कौन से दस्तावेज चाहिए?
आवेदन के लिए जमीन के मालिक के नाम की जमाबंदी की फर्द और आधार कार्ड आवश्यक दस्तावेज हैं।

### 3. सोलर पंप का आवेदन कहाँ और कैसे किया जा सकता है?
किसान अपने नजदीकी सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा करवा सकते हैं।

### 4. कितने किलोवाट तक के सोलर पंप उपलब्ध हैं?
योजना के तहत 3 किलोवाट से लेकर 10 किलोवाट तक के क्षमता वाले एसी और डीसी सोलर पंप उपलब्ध हैं।

### 5. आवेदन के कितने दिनों बाद सोलर पैनल लग जाता है?
बोरवेल तैयार होने और प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 दिनों से 1 महीने के भीतर कंपनी द्वारा सिस्टम स्थापित कर दिया जाता है।

## प्रेरणा और सबक
यश मोहन सैनी की यह पहल दिखाती है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी से खेती की पुरानी समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

- **समस्या का स्थाई समाधान खोजना:** ग्रिड बिजली की कमियों की शिकायत करने के बजाय सौर ऊर्जा जैसा आत्मनिर्भर विकल्प चुना।
- **सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना:** 75 प्रतिशत सब्सिडी की जानकारी जुटाकर सीएससी सेंटर से आवेदन किया और लागत घटाई।
- **आधुनिक तकनीक का संयोजन:** सौर ऊर्जा के साथ ड्रिप सिंचाई प्रणाली को जोड़कर पानी और बिजली दोनों की बचत की।

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