# सुचिता साहू फरीदाबाद में फलों के छिलकों से बना रही हैं 13 अलग-अलग सफाई उत्पाद

> फरीदाबाद की 54 साल की सुचिता साहू घर और जूस की दुकानों से मिलने वाले फलों के छिलकों से बायो एंजाइम बनाकर टॉयलेट क्लीनर से लेकर लॉन्ड्री वॉश तक 13 तरह के उत्पाद तैयार कर रही हैं, और अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों को यह हुनर सिखा चुकी हैं.

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/suchita-sahu-faridabad-men-phalon-ke-chhilakon-se-bana-rahi-hain-13-alaga-alaga-saphai-utpada-28256 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुचिता साहू, फरीदाबाद न्यूज़, बायो एंजाइम, फलों के छिलके, घरेलू क्लीनर, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण

फरीदाबाद के घरों में रोज निकलने वाले संतरे, नींबू, मौसमी, केले और आम के छिलके आमतौर पर बाकी कचरे के साथ सीधे कूड़ेदान में चले जाते हैं, लेकिन शहर की 54 साल की सुचिता साहू ने इन्हीं फेंके जाने वाले छिलकों को काम की चीज बनाने का तरीका खोज निकाला है. वे इन छिलकों से बायो एंजाइम तैयार करती हैं और फिर उसी तरल से घर की सफाई में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के उत्पाद बनाती हैं. उनकी अपनी रसोई से शुरू हुई यह कोशिश अब सिर्फ उनके घर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कई और लोग भी उनसे यही हुनर सीखकर अपने लिए कमाई का जरिया बना चुके हैं.

## छिलकों से कैसे तैयार होता है बायो एंजाइम
सुचिता बताती हैं कि यह छिलके सिर्फ उनके अपने घर से ही नहीं आते. आसपास की जूस की दुकानों से मिलने वाले छिलके भी इकट्ठा किए जाते हैं, क्योंकि वहां भी यह बड़ी मात्रा में फेंके जाते हैं. बायो एंजाइम बनाने के लिए सामान्य तौर पर 300 ग्राम छिलके, एक लीटर पानी और 100 ग्राम गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है. जो लोग घर पर रोजमर्रा के बर्तनों से इसका अंदाजा लगाना चाहें, वे एक कटोरी गुड़, तीन कटोरी छिलके और 10 कटोरी पानी का अनुपात इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे जरूरत के हिसाब से मात्रा घटाई या बढ़ाई जा सकती है.

इन तीनों चीजों को अच्छी तरह मिलाकर प्लास्टिक के जार में भर दिया जाता है और जार को कसकर बंद करके सीधी धूप से बचाते हुए छांव वाली जगह पर रखा जाता है. शुरुआती 20 से 25 दिनों के दौरान मिश्रण के अंदर गैस बनने लगती है, इसलिए हर दिन ढक्कन को थोड़ा ढीला करके अंदर बनी गैस बाहर निकालनी पड़ती है, वरना जार के फटने का खतरा बना रहता है. करीब 90 दिन बीत जाने के बाद जार में तैयार हो चुके तरल को छानकर अलग कर लिया जाता है, और यही तैयार तरल आगे इस्तेमाल के लिए तैयार बायो एंजाइम बन जाता है.

## लाइब्रेरियन की नौकरी में मिली बायो एंजाइम की जानकारी
सुचिता का कहना है कि पर्यावरण से जुड़ा काम करने में उनकी दिलचस्पी बचपन से ही रही है. वे पहले भी घर में जैविक कचरे से खाद बनाया करती थीं, और आज भी रसोई से निकलने वाले छिलकों से खाद तैयार करती हैं. उन्होंने लाइब्रेरियन के तौर पर भी नौकरी की है, और इसी नौकरी के दौरान उन्हें पहली बार बायो एंजाइम के बारे में पता चला. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु की एक संस्था से ऑनलाइन प्रशिक्षण लेकर विधिवत तरीके से इसे बनाना सीखा.

## 12 से 13 तरह के प्रोडक्ट, कीमत 100 रुपये से शुरू
आज सुचिता इसी एक बायो एंजाइम से 12 से 13 तरह के अलग अलग सफाई उत्पाद तैयार कर रही हैं. इनमें टॉयलेट क्लीनर, सरफेस क्लीनर, ग्लास क्लीनर और लॉन्ड्री वॉश के साथ साथ चीटियों, छिपकलियों और कॉकरोच को घर से दूर रखने वाला सामान भी शामिल है. उन्होंने पालतू जानवरों के आसपास सुरक्षित तरीके से छिड़काव किए जाने वाला एक अलग लिक्विड भी तैयार किया है. इन सभी उत्पादों की कीमत 100 रुपये से शुरू होती है, जबकि लॉन्ड्री वॉश की एक लीटर बोतल अकेले 230 रुपये में मिलती है. फर्श, टॉयलेट, कांच और घर की दूसरी सतहों की सफाई के लिए बनाया गया यह सामान उन रासायनिक उत्पादों की जगह ले लेता है जिन पर ज्यादातर घर निर्भर रहते हैं, जिससे कचरे और रसायनों दोनों का इस्तेमाल एक साथ कम हो जाता है.

## हजार से ज्यादा लोगों को सिखाया हुनर, बना रोजगार का जरिया
सुचिता अब तक हजारों किलो छिलकों का इस्तेमाल कर चुकी हैं और एक हजार से ज्यादा लोगों को अपने हाथों से बायो एंजाइम बनाने की यह पूरी प्रक्रिया सिखा चुकी हैं. उनका कहना है कि प्रशिक्षण लेने वाले कई लोग अब इसी काम से अपनी कमाई भी कर रहे हैं. सुचिता के मुताबिक, उन्होंने यह काम कभी पैसे कमाने की नीयत से शुरू नहीं किया था, बल्कि उनका मकसद घर से निकलने वाले कचरे का दोबारा इस्तेमाल करना और पर्यावरण को बचाना था. आज यही छोटी सी कोशिश चुपचाप दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार का जरिया बन चुकी है. सुचिता कहती हैं कि नई शुरुआत के लिए उम्र कभी आड़े नहीं आती, अगर सीखने की सच्ची इच्छा हो तो इंसान किसी भी उम्र में अपने काम से अपनी नई पहचान बना सकता है.

## इसका आप पर असर
सुचिता साहू का यह तरीका दिखाता है कि घर के कचरे को थोड़ी मेहनत से रोजगार और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद बनाया जा सकता है.

- **भारत में:** जो लोग घर में इस्तेमाल होने वाले महंगे रासायनिक क्लीनर की जगह सस्ता और सुरक्षित विकल्प चाहते हैं, वे सिर्फ 300 ग्राम छिलके, एक लीटर पानी और 100 ग्राम गुड़ से खुद बायो एंजाइम बनाकर टॉयलेट क्लीनर, ग्लास क्लीनर और लॉन्ड्री वॉश जैसी चीजें घर पर तैयार कर सकते हैं.
- **फरीदाबाद में:** शहर में जो लोग यह हुनर सीखना चाहते हैं, वे सुचिता साहू से सीधे प्रशिक्षण ले सकते हैं, क्योंकि वे अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों को यह तरीका सिखा चुकी हैं और कई लोग इससे अपनी कमाई भी कर रहे हैं.
- **कमाई का मौका:** जो लोग रोजगार तलाश रहे हैं, उनके लिए यह काम कम लागत में घर से शुरू किया जा सकने वाला विकल्प है, क्योंकि इसके उत्पाद 100 रुपये से 230 रुपये के बीच बिकते हैं.
- **कचरा कम करने में मदद:** जिन घरों से रोज फल और सब्जियों के छिलके फेंके जाते हैं, वे इन्हें जूस की दुकानों की तरह जमा करके बायो एंजाइम बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे कूड़ेदान तक पहुंचने वाला कचरा घटता है.
- **घर की सुरक्षा:** जिन घरों में पालतू जानवर हैं, वे रासायनिक स्प्रे की जगह सुचिता साहू के बनाए गए सुरक्षित लिक्विड जैसे विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. सुचिता साहू कौन हैं?
सुचिता साहू फरीदाबाद की रहने वाली 54 साल की महिला हैं, जो फलों के छिलकों से बायो एंजाइम बनाकर घर की सफाई के उत्पाद तैयार करती हैं.

### 2. बायो एंजाइम बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?
300 ग्राम छिलके, एक लीटर पानी और 100 ग्राम गुड़ चाहिए, या घर पर एक कटोरी गुड़, तीन कटोरी छिलके और 10 कटोरी पानी के अनुपात में भी बनाया जा सकता है.

### 3. बायो एंजाइम बनने में कितना समय लगता है?
मिश्रण को तैयार होने में करीब 90 दिन लगते हैं, इस दौरान शुरुआती 20-25 दिनों में रोज जार का ढक्कन ढीला कर गैस निकालनी पड़ती है.

### 4. सुचिता कौन-कौन से उत्पाद बनाती हैं?
वे टॉयलेट क्लीनर, सरफेस क्लीनर, ग्लास क्लीनर, लॉन्ड्री वॉश और चीटियों, छिपकलियों व कॉकरोच को दूर रखने वाला सामान समेत 12 से 13 तरह के उत्पाद बनाती हैं.

### 5. इन उत्पादों की कीमत क्या है?
उत्पादों की कीमत 100 रुपये से शुरू होती है, जबकि लॉन्ड्री वॉश की एक लीटर बोतल 230 रुपये में मिलती है.

### 6. सुचिता ने यह हुनर कहां से सीखा?
लाइब्रेरियन की नौकरी के दौरान उन्हें बायो एंजाइम के बारे में पता चला, जिसके बाद उन्होंने बेंगलुरु की एक संस्था से ऑनलाइन प्रशिक्षण लिया.

## प्रेरणा और सबक
सुचिता साहू की कहानी दिखाती है कि छोटी सी शुरुआत भी बड़ा बदलाव ला सकती है, बशर्ते इरादा साफ हो.

- **घर से शुरुआत करें:** सुचिता ने अपने ही घर के कचरे से यह काम शुरू किया, बड़े संसाधनों का इंतजार नहीं किया.
- **सीखने की इच्छा उम्र से बड़ी है:** 54 साल की उम्र में नई तकनीक सीखकर उन्होंने साबित किया कि नई शुरुआत के लिए उम्र आड़े नहीं आती.
- **मकसद पैसा नहीं, बदलाव था:** उन्होंने यह काम कमाई के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण बचाने के लिए शुरू किया, और कमाई अपने आप बाद में जुड़ गई.
- **हुनर बांटने से बढ़ता है असर:** खुद तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने एक हजार से ज्यादा लोगों को यह तरीका सिखाया, जिससे उनका असर कई गुना बढ़ गया.

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