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  "type": "article",
  "title": "उम्र के साथ पेशाब में रुकावट और रात में बार-बार टूटने वाली नींद पर यूरोलॉजिस्ट की सलाह",
  "summary": "पुरुषों में 50 से 55 की उम्र के बाद पेशाब की कमजोर धार, बार-बार हाजत और रात में नींद टूटने को सामान्य समझकर टालना भारी पड़ सकता है, समय रहते जांच और सही उपचार जरूरी है.",
  "content": "अक्सर देखा जाता है कि ढलती उम्र में पुरुषों को रात के समय बार-बार लघुशंका के लिए बिस्तर छोड़ना पड़ता है या फिर पेशाब की धार बेहद कमजोर महसूस होने लगती है। अधिकांश लोग इसे केवल बुढ़ापे का कुदरती असर मानकर चुपचाप सहते रहते हैं, लेकिन यह लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। पुरुषों में 50 से 55 वर्ष की उम्र पार होते ही मूत्र तंत्र से जुड़ी तरह-तरह की दिक्कतें उभरने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इस तरह के लक्षणों के पीछे एक बड़ी वजह प्रोस्टेट ग्रंथि यानी गदूद का आकार बढ़ना भी हो सकती है। अगर सही समय पर इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो किसी भी गंभीर जटिलता से आसानी से बचा जा सकता है।\n\nउम्र के इस पड़ाव पर क्यों परेशान करने लगता है मूत्र तंत्र\nअंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में कार्यरत यूरोलॉजिस्ट डॉ. नवदीप गर्ग के अनुसार, पुरुषों की बढ़ती उम्र के साथ मूत्र विसर्जन से जुड़ी दिक्कतें धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं। कई मरीजों को थोड़ी-थोड़ी देर में बार-बार बाथरूम जाने की जरूरत महसूस होती है, जबकि कुछ लोगों को शुरुआत करने में काफी जोर लगाना पड़ता है या पेशाब की धार अत्यधिक कमजोर हो जाती है। जब बार-बार पेशाब की हाजत होने लगे और रात में बार-बार नींद टूटने लगे, तो यह व्यक्ति की दिनचर्या और सुकून दोनों को बुरी तरह बिगाड़ देता है। पुरुषों में इन सभी परेशानियों के पीछे कई अलग-अलग कारण छिपे हो सकते हैं, इसलिए बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के सही स्थिति को समझना संभव नहीं है।\n\nसिर्फ गदूद बढ़ना ही नहीं, ये बीमारियां भी हो सकती हैं वजह\nडॉ. नवदीप गर्ग ने स्पष्ट किया है कि पेशाब से जुड़ी इन सभी परेशानियों का एकमात्र कारण सिर्फ गदूद का बढ़ना ही नहीं होता। कई बार डायबिटीज, पेशाब की थैली की कार्यक्षमता में आने वाली गिरावट और दिल से जुड़ी परेशानियां भी इन लक्षणों के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। इसीलिए बिना किसी क्लिनिकल जांच के सीधे किसी एक बीमारी को दोषी ठहरा देना पूरी तरह गलत है। जब तक शरीर के भीतर मौजूद सही कारण का पता नहीं चलेगा, तब तक मरीज को उचित और सटीक उपचार नहीं दिया जा सकता।\n\nलक्षण दिखने पर कब जरूरी हो जाता है विशेषज्ञ परामर्श\nइस पूरे मामले में लोगों के बीच बुनियादी स्वास्थ्य जागरूकता होना सबसे आवश्यक पहलू है। यदि किसी भी पुरुष को बार-बार पेशाब आने, मूत्र त्याग करने में रुकावट या असहजता का सामना करना पड़ रहा है, तो उसे तुरंत किसी यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। क्लिनिकल जांच पूरी होने के बाद ही डॉक्टर यह सटीक रूप से तय कर पाते हैं कि मरीज की समस्या सिर्फ दवाइयों से ठीक हो जाएगी या फिर उसके लिए किसी ऑपरेशन की दरकार होगी।\n\nरात के समय होने वाली परेशानी से बचने के जरूरी तौर-तरीके\nअपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ साधारण से बदलाव करके भी इस तरह की दिक्कतों से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। जिन लोगों को रात के समय बार-बार पेशाब जाने के लिए उठना पड़ता है, उन्हें सोने से कुछ घंटे पहले बहुत अधिक मात्रा में पानी पीने से परहेज करना चाहिए। हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि शरीर में पानी की कमी कर दी जाए, दिन के समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, यदि चिकित्सक ने किसी खास कारण से तरल पदार्थों की मात्रा सीमित करने की हिदायत दी है, तो उस निर्देश का सख्ती से पालन करें। सिगरेट और तंबाकू के सेवन से दूरी बनाना पूरे शरीर की तंदुरुस्ती के लिए मुफीद है, खासकर मूत्र संबंधी परेशानी झेल रहे मरीजों को धूम्रपान पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। साथ ही साथ, अगर मरीज को डायबिटीज या हाइपरटेंशन की समस्या है, तो उनका नियमित उपचार चालू रखें और डॉक्टरी परामर्श के अनुसार तय समय पर अपनी जांच करवाते रहें।\n\nकमजोर धार और पेशाब में खून आने जैसे गंभीर संकेतों की पहचान\nपेशाब में खून की बूंदें दिखाई देना, धार का बहुत धीमा हो जाना, बार-बार बाथरूम भागना या रात भर नींद का बाधित होना ऐसे लक्षण हैं जिन पर चिकित्सक से खुलकर बात करनी चाहिए। डॉ. नवदीप गर्ग का कहना है कि समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए डॉक्टर मरीज की मौजूदा तकलीफों और उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री का गहन विश्लेषण करते हैं। जरूरत के मुताबिक अल्ट्रासाउंड की मदद से गुर्दे, मूत्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथि की वास्तविक स्थिति की पड़ताल की जाती है। इसके साथ ही, खून की जांच करवाकर ब्लड शुगर और शरीर की अन्य गड़बड़ियों का आकलन किया जाता है।\n\nयूरोफ्लोमेट्री जांच से सामने आती है रुकावट की हकीकत\nमूत्र विसर्जन की प्रक्रिया को गहराई से समझने के लिए यूरोफ्लोमेट्री नामक जांच बेहद अहम मानी जाती है। इस विशेष टेस्ट में पेशाब की धार और उसके प्रवाह की सटीक गति नापी जाती है, जिससे यह साफ हो पाता है कि मूत्र मार्ग में कहीं कोई रुकावट तो पैदा नहीं हो रही है। यदि स्थिति जटिल दिखती है, तो चिकित्सक अन्य जरूरी मेडिकल जांचें भी करवा सकते हैं।\n\nझिझक छोड़कर सही समय पर करवाएं डॉक्टरी उपचार\nहमारे समाज में कई पुरुष झिझक और संकोच के चलते अपनी मूत्र संबंधी समस्याओं को परिवार या डॉक्टर से साझा नहीं करते। इस तरह की खामोशी बीमारी को और अधिक गंभीर बना देती है, जिससे व्यक्ति की रात की नींद और रोजमर्रा का कामकाज बुरी तरह प्रभावित होता है। डॉ. गर्ग का कहना है कि अगर पेशाब पूरी तरह बंद हो जाए या उसमें खून आने लगे, तो बिना एक पल भी गंवाए तुरंत अस्पताल जाकर आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि गदूद बढ़ने का अर्थ हर मामले में कैंसर कतई नहीं होता। आधुनिक चिकित्सा में सही परीक्षण के जरिए मूल कारण की पहचान कर उचित समाधान किया जा सकता है, इसलिए संकोच को दरकिनार कर यूरोलॉजिस्ट से समय पर परामर्श लें।\n\nइसका आप पर असर\n50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों के लिए मूत्र विसर्जन में किसी भी असामान्य बदलाव को समय रहते पहचानना और जांच कराना आवश्यक है।\n\n• भारत में: पचास की उम्र पार कर चुके पुरुषों को पेशाब की कमजोर धार या रात में बार-बार उठने को सामान्य बुढ़ापा मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। तुरंत किसी योग्य यूरोलॉजिस्ट से जांच कराने से गदूद, डायबिटीज या मूत्राशय की बीमारियों का शुरुआती दौर में ही बिना सर्जरी इलाज संभव हो पाता है।\n• अंबाला में: नागरिक अस्पताल अंबाला शहर में यूरोलॉजी परामर्श और जरूरी जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। स्थानीय मरीज झिझक छोड़कर अस्पताल पहुंचकर अल्ट्रासाउंड और यूरोफ्लोमेट्री जैसी जांचों के जरिए सही इलाज पा सकते हैं।\n• जीवनशैली पर: सोने से पहले अनावश्यक रूप से अत्यधिक पानी पीने से परहेज करने पर रात में बार-बार नींद टूटने की समस्या में कमी आती है। दिन के समय पर्याप्त पानी पीने और तंबाकू या सिगरेट छोड़ने से मूत्र तंत्र पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।\n• आपातकालीन स्थिति में: पेशाब में खून दिखाई देने या पेशाब का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाने पर फौरन आपातकालीन मेडिकल सेवा लेनी चाहिए। ऐसे गंभीर लक्षणों में देरी करने से मूत्राशय और गुर्दों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपुरुषों में 50 से 55 वर्ष की आयु के बाद मूत्र संबंधी परेशानियां बढ़ने के पीछे शारीरिक संरचना में होने वाले बदलाव और विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियां मुख्य रूप से जिम्मेदार होती हैं।\n\n• प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना: बढ़ती उम्र के साथ गदूद यानी प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगता है। यह बढ़ी हुई ग्रंथि मूत्र नली पर दबाव बनाती है, जिससे पेशाब की धार कमजोर हो जाती है और मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता।\n• पुरानी बीमारियों का असर: डायबिटीज, दिल से जुड़ी बीमारियां और मूत्राशय की मांसपेशियों की कार्यक्षमता में कमी भी इस समस्या को गंभीर बना देती है। शुगर का अनियंत्रित स्तर और रक्तचाप से जुड़े विकार शरीर के तरल संतुलन को बिगाड़कर पेशाब की आवृत्ति बढ़ा देते हैं।\n• जांच और निदान में देरी: सामाजिक झिझक के कारण कई पुरुष शुरुआती लक्षणों को छिपाते हैं, जिससे रोग अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है। समय पर यूरोफ्लोमेट्री और अल्ट्रासाउंड न कराने से साधारण रुकावट भी जटिल रूप धारण कर लेती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पुरुषों में 50 की उम्र के बाद पेशाब की समस्या के मुख्य लक्षण क्या हैं?\nबार-बार पेशाब आना, धार कमजोर होना, मूत्र विसर्जन शुरू करने में जोर लगाना और रात में बार-बार नींद खुलना इसके मुख्य लक्षण हैं.\n\n2. क्या पेशाब की धार कमजोर होने का कारण केवल गदूद बढ़ना ही है?\nनहीं, गदूद बढ़ने के अलावा डायबिटीज, मूत्राशय की कार्यक्षमता में कमी और दिल से जुड़ी बीमारियों से भी यह समस्या हो सकती है.\n\n3. यूरोफ्लोमेट्री जांच किस उद्देश्य के लिए की जाती है?\nयूरोफ्लोमेट्री जांच के जरिए पेशाब की धार और उसके बहाव की गति मापी जाती है, जिससे मूत्र मार्ग में रुकावट का पता चलता है.\n\n4. क्या प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना हमेशा कैंसर की निशानी होता है?\nबिल्कुल नहीं, गदूद बढ़ने का मतलब हर बार कैंसर नहीं होता और सही जांच के बाद इसका सामान्य इलाज संभव है.\n\n5. किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत आपातकालीन डॉक्टर के पास जाना चाहिए?\nयदि पेशाब आना पूरी तरह बंद हो जाए या पेशाब में खून आने लगे, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.",
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  "publishedAt": "2026-10-11",
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