उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर मैनपाल ढिल्ला ने कंबोडिया की मेटा चान से रचाई शादी, 12 घंटे की पैरोल पर आया था बाहर आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे गैंगस्टर मैनपाल ढिल्ला ने झज्जर में कंबोडियाई निवासी मेटा चान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया। अदालत से 12 घंटे की अल्पकालिक राहत मिलने के बाद कड़ी पुलिस निगरानी में यह आयोजन संपन्न हुआ। हरियाणा के झज्जर जिले के अंतर्गत आने वाले गांव दुलीना में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गैंगस्टर मैनपाल ढिल्ला ने कंबोडियाई नागरिक मेटा चान के साथ विवाह रचाया। कारागार से महज 12 घंटे की पैरोल पर बाहर आए ढिल्ला ने वैदिक परंपरा और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सात फेरे लिए। वर्ष 2018 में पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद वह फरार होकर कंबोडिया चला गया था, जिसके बाद हरियाणा पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय समन्वय के जरिए सितंबर 2025 में उसे भारत वापस लाने में सफलता पाई थी। दुलीना के फार्म हाउस में भारी सुरक्षा पहरा विवाह समारोह झज्जर से गुरुग्राम जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित दुलीना फार्म हाउस में आयोजित किया गया था। किसी भी संभावित अप्रिय घटना अथवा सुरक्षा चूक की आशंका को टालने के लिए समूचे परिसर को सुरक्षा बलों ने अपनी निगरानी में ले रखा था। कार्यक्रम स्थल के प्रत्येक प्रवेश द्वार पर जवानों की तैनाती रही और अंदर आने वाले हर मेहमान की सख्त जांच की गई। इस पूरे पारिवारिक कार्यक्रम से मीडियाकर्मियों को पूरी तरह दूर रखा गया और परिसर के भीतर जाने पर रोक लगी रही। समय सीमा के भीतर पूरी हुईं सभी वैवाहिक रस्में न्यायालय की ओर से दी गई अनुमति के तहत मैनपाल ढिल्ला को सुबह करीब 8 बजे जेल की चारदीवारी से बाहर निकाला गया था। निर्धारित नियमों के अनुसार उसे उसी दिन शाम ठीक 8 बजे तक पुनः कारागार अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करना अनिवार्य था। केवल 12 घंटे की सीमित मोहलत होने के कारण परिजनों और पुरोहितों ने तय समय चक्र का पालन करते हुए विवाह से जुड़ी सभी रस्में दोपहर और शाम के बीच संपन्न कराईं, ताकि निर्धारित समय पर वापसी सुनिश्चित हो सके। कंबोडिया से तीन बच्चों संग पहुंचीं मेटा चान मैनपाल ढिल्ला जब भारत से भागकर करीब आठ साल तक कंबोडिया में रहा, उसी दौरान उसकी मुलाकात मेटा चान से हुई थी। दोनों के चार बच्चे हैं, जिनमें से एक बच्चा अभी भी कंबोडिया में ही मौजूद है। विवाह में सम्मिलित होने के लिए मेटा चान अपने तीन बच्चों और करीबी पारिवारिक सदस्यों के साथ यात्रा करके झज्जर पहुंची थीं। विवाह के उपलक्ष्य में फार्म हाउस में लगभग 500 से 600 रिश्तेदारों और आमंत्रितों के भोजन तथा सत्कार का व्यापक प्रबंध किया गया था। 2007 का आपराधिक मामला और लंबी कानूनी कार्रवाई मैनपाल ढिल्ला के खिलाफ वर्ष 2007 में बहादुरगढ़ सदर थाने में गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। जांच के उपरांत अदालत ने उसे हत्या, जानलेवा हमला, गैरकानूनी असलाह के प्रयोग और आपराधिक साजिश रचने के आरोपों में कसूरवार ठहराया था। इन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने वर्ष 2013 में उसे आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई थी। सजा काटने के दौरान वर्ष 2018 में उसे छह सप्ताह की पैरोल मंजूर हुई थी, लेकिन अवधि समाप्त होने पर उसने जेल में रिपोर्ट नहीं की और गुप्त रूप से विदेश भाग निकला। जांच एजेंसियों को जब उसके कंबोडिया में छिपे होने का सुराग मिला, तब हरियाणा पुलिस की पहल पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के सहयोग से नवंबर 2024 में इंटरपोल का रेड नोटिस जारी कराया गया। इसके बाद स्थानीय सुरक्षा तंत्र की मदद से जुलाई 2025 में उसे कंबोडिया में पकड़ा गया और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर सितंबर 2025 में भारत लाया गया था, जिसके बाद से वह जेल में बंद था। इसका आप पर असर यह घटना दर्शाती है कि आजीवन कारावास के कैदियों को भी विशेष पारिवारिक परिस्थितियों में सीमित अवधि की कानूनी राहत मिल सकती है, बशर्ते सुरक्षा के कड़े इंतजाम हों। • भारत में: यह मामला न्यायिक प्रणाली में पैरोल नियमों और अंतर-देशीय भगोड़ों के प्रत्यर्पण के बाद कैदियों के कानूनी अधिकारों को रेखांकित करता है। इससे स्पष्ट होता है कि संगीन अपराधों के दोषी भी अदालत की कड़ी शर्तों के तहत सीमित मानवीय या पारिवारिक रियायत पा सकते हैं। • झज्जर में: झज्जर-गुरुग्राम मार्ग स्थित फार्म हाउस के आसपास सुरक्षा बलों की भारी तैनाती से इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। स्थानीय प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि सीमित अवधि के इस आयोजन के दौरान आम नागरिकों के आवागमन और कानून व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। ऐसा क्यों हुआ यह विवाह इसलिए संभव हुआ क्योंकि अदालत ने दोषी कैदी को पारिवारिक रस्म निभाने के लिए निर्धारित समय सीमा के साथ अस्थायी पैरोल प्रदान की थी। • विवाह के लिए पैरोल की मंजूरी: मैनपाल ढिल्ला को विवाह की औपचारिकता पूरी करने के लिए सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कुल 12 घंटे की सीमित मोहलत दी गई थी। इस अस्थायी राहत के तहत उसे उसी शाम निर्धारित समय पर जेल लौटना था। • कंबोडियाई प्रवास के दौरान संबंध: वर्ष 2018 में पैरोल तोड़कर भागने के बाद ढिल्ला आठ साल कंबोडिया में रहा, जहां उसका परिचय मेटा चान से हुआ। दोनों के चार बच्चे भी हुए, जिसके बाद इस रिश्ते को औपचारिक विवाह का रूप दिया गया। • प्रत्यर्पण के बाद जेल वापसी: नवंबर 2024 में इंटरपोल रेड नोटिस के जरिए जुलाई 2025 में कंबोडिया से गिरफ्तारी और सितंबर 2025 में भारत लाए जाने के बाद से वह लगातार जेल में अपनी सजा काट रहा था। इसी सजा के बीच उसने शादी के लिए कानूनी अनुमति हासिल की। सवाल-जवाब 1. मैनपाल ढिल्ला कौन है और उसे क्या सजा मिली है? मैनपाल ढिल्ला एक सजायाफ्ता गैंगस्टर है, जिसे वर्ष 2007 के एक मामले में हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध हथियार रखने और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाते हुए 2013 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 2. मैनपाल ढिल्ला को शादी के लिए कितने समय की पैरोल मिली? उसे शादी में शामिल होने के लिए सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कुल 12 घंटे की पैरोल दी गई थी। 3. शादी समारोह का आयोजन कहां किया गया था? विवाह समारोह हरियाणा के झज्जर जिले में झज्जर-गुरुग्राम मार्ग पर स्थित दुलीना फार्म हाउस में आयोजित किया गया था। 4. दुल्हन मेटा चान कहां की निवासी हैं और वह किसके साथ भारत आईं? मेटा चान कंबोडिया की रहने वाली हैं और वह अपने तीन बच्चों तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ विवाह के लिए झज्जर पहुंची थीं। 5. मैनपाल ढिल्ला को कंबोडिया से भारत कब और कैसे लाया गया? नवंबर 2024 में जारी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर जुलाई 2025 में उसे कंबोडिया से गिरफ्तार किया गया और सितंबर 2025 में हरियाणा पुलिस उसे भारत लेकर आई। https://trendkia.com/haryana/umrakaida-ki-saja-kata-rahe-gaingastara-manpal-dhilla-ne-cambodia-ki-meta-chan-se-rachai-shadi-12-ghnte-ki-pairola-para-aya-tha-ba-37803 TrendKia — Har trend, sabse pehle.