# फरीदाबाद में बेमौसम बारिश से टूटे रावण बनाने वाले कारीगरों के सपने, हजारों का नुकसान

> फरीदाबाद में अचानक हुई बारिश ने सड़क किनारे रावण के पुतले तैयार कर रहे गरीब परिवारों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इससे कारीगरों को करीब 50 हजार से 60 हजार रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/unseasonal-rains-destroy-effigies-in-faridabad-leaving-artisans-in-distress-48627 · **Language:** Hindi
**Tags:** फरीदाबाद, दशहरा, रावण दहन, बेमौसम बारिश, कारीगर, हरियाणा समाचार

फरीदाबाद में मौसम के बदले मिजाज ने उन गरीब परिवारों की उम्मीदों को तोड़कर रख दिया है, जो महीनों की कड़ी मेहनत के बाद दशहरे के पावन पर्व पर अपनी आजीविका चलाने का सपना देख रहे थे। सड़क किनारे झुग्गी-झोपड़ियों में रहकर रावण और कुंभकरण के विशाल पुतले तैयार करने वाले इन कारीगरों के लिए अचानक हुई बेमौसम बारिश एक बड़ी आपदा बनकर आई है। दो महीने की लंबी मशक्कत और दिन-रात के कठिन परिश्रम के बाद तैयार किए गए कई पुतले इस बारिश की भेंट चढ़ गए, जिससे अब इन परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

## दो महीने पहले शुरू किया था निर्माण कार्य
दशहरे के त्योहारी सीजन में पुतलों की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए इन कारीगरों ने करीब दो महीने पहले ही अपना काम शुरू कर दिया था। इन कलाकृतियों को आकार देने के लिए बांस, रंग-बिरंगे कागज और अन्य जरूरी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। कारीगरों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उन्हें शारीरिक रूप से भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है और कई बार काम करते समय हाथ-पैर तक छिल जाते हैं। इसके बावजूद पूरा परिवार इस उम्मीद में जुटा रहता है कि त्योहार के दिनों में होने वाली अच्छी बिक्री से उनके घर का खर्च चलेगा।

## विभिन्न आकारों में बिकते हैं पुतले
इस कारोबार से जुड़े पिंटू ने जानकारी दी कि उनके यहां पांच फीट से लेकर 25 से 30 फीट तक के रावण के पुतले बनाए और बेचे जाते हैं। सामान्य तौर पर 10 फीट के एक पुतले की कीमत लगभग 10 हजार रुपये होती है, जबकि इससे बड़े और ऊंचे पुतले 13 हजार रुपये या उससे भी अधिक कीमत पर बिकते हैं। हालांकि पुतलों के आकार और डिजाइन के हिसाब से इनके दाम अलग-अलग तय होते हैं। लेकिन ताजा बारिश के कारण पानी लगने से कागज पूरी तरह भीग गए और गल गए, जिससे तैयार माल के नष्ट होने की नौबत आ गई है और उनकी लागत भी डूबने का खतरा पैदा हो गया है।

## हजारों रुपये के नुकसान का अनुमान
मौसम की मार से इन मेहनतकश लोगों को कम से कम 50 हजार से 60 हजार रुपये तक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। इस नुकसान में मुख्य रूप से खराब हुए पुतलों की लागत और उन पर की गई उनकी अथक मेहनत शामिल है। इसे केवल मुनाफा न समझकर उनकी मूल लागत का नुकसान माना जाना चाहिए, क्योंकि पुतलों की बिक्री से जो कुल राशि मिलती है, उसमें से कच्चा माल और अन्य जरूरी खर्च भी चुकाने होते हैं। अब जबकि दशहरे का त्योहार बेहद करीब आ चुका है, ऐसे में इन कारीगरों के पास क्षतिग्रस्त पुतलों को सुधारने या नए सिरे से निर्माण करने के लिए बहुत कम समय बचा है।

## दर्द बयां करते हुए बोले कारीगर
अपनी इस दयनीय स्थिति के बारे में बात करते हुए पिंटू ने दर्द बयां किया कि हालात जानने के लिए तो कई लोग आते हैं और पूछताछ करते हैं, लेकिन जब मदद करने का वक्त आता है तो कोई भी आगे नहीं बढ़ता। बारिश की वजह से कागज के बने पुतले पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं और अब उनके सामने अपने परिवार का पेट पालने की विकट समस्या पैदा हो गई है। एक अन्य कारीगर शिबा ने बताया कि इन पुतलों को बनाने में कितनी शारीरिक मेहनत लगती है और काम के दौरान हाथ-पैर तक जख्मी हो जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे हर साल त्योहार की तैयारी में पूरी शिद्दत से जुट जाते हैं क्योंकि यही उनकी आमदनी का एकमात्र मुख्य जरिया है।

## रोजी-रोटी पर मंडराया संकट
ये सभी कारीगर परिवार सड़क के किनारे अस्थायी झुग्गी-झोपड़ियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। घर के छोटे-छोटे बच्चे भी इस काम में अपने बड़ों का हाथ बंटाते हैं ताकि त्योहार के दौरान कुछ अतिरिक्त कमाई हो सके। मगर बारिश ने इन मासूम उम्मीदों पर बड़ा प्रहार किया है। अब इन लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि वे इस भारी नुकसान की भरपाई कैसे करेंगे और अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे चलाएंगे। त्योहार से ठीक पहले अब इन कारीगरों को बस यही आस है कि उनके जो पुतले सुरक्षित बचे हैं, वे बिक जाएं ताकि उनकी लागत का कुछ हिस्सा वापस मिल सके।

## इसका आप पर असर
बेमौसम बारिश के कारण फरीदाबाद के इन स्थानीय कारीगरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे उनके सामने परिवार का गुजर-बसर करने का संकट खड़ा हो गया है।

- **आर्थिक संकट:** कारीगरों को 50 हजार से 60 हजार रुपये तक का नुकसान हुआ है, जिससे उनकी मूल लागत भी फंस गई है।
- **दशहरा तैयारियां:** त्योहार में कुछ ही दिन शेष रहने के कारण अब नए पुतले तैयार करना या पुराने सुधारना बेहद मुश्किल हो गया है।
- **फरीदाबाद में असर:** सड़क किनारे झुग्गी में रहने वाले इन स्थानीय परिवारों की सालभर की कमाई का जरिया इस बारिश से छिन गया है।
- **मदद का अभाव:** केवल पूछताछ करने वालों से कोई राहत नहीं मिली है, जिससे इन परिवारों को अपने स्तर पर ही इस संकट से निपटना पड़ रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण हुई बेमौसम बारिश इन गरीब कारीगरों की बर्बादी का मुख्य कारण बनी। खुले आसमान के नीचे और सड़क किनारे अस्थायी झुग्गी-झोपड़ियों में काम होने के कारण पुतले बारिश से बचाव के अभाव में भीग गए।

- **अचानक बदलाव:** बेमौसम बारिश ने बिना किसी पूर्व तैयारी के खुले में रखे कागज और बांस के पुतलों को पूरी तरह भिगो दिया।
- **खुले में निर्माण:** झुग्गी-झोपड़ियों और सड़क किनारे काम करने के कारण पुतलों को बारिश से बचाने के लिए कोई पक्की छत या कवर्ड शेड उपलब्ध नहीं था।
- **कच्ची सामग्री:** पुतले मुख्य रूप से बांस और कागज से बनाए जाते हैं, जो पानी के संपर्क में आते ही तुरंत गल जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. फरीदाबाद में कारीगरों को कितना नुकसान हुआ है?
कारीगरों को बेमौसम बारिश के कारण लगभग 50 हजार से 60 हजार रुपये तक का नुकसान हुआ है।

### 2. रावण के पुतले तैयार करने में कितना समय लगता है?
कारीगरों ने दशहरे की मांग को देखते हुए करीब दो महीने पहले ही पुतले बनाने का काम शुरू कर दिया था।

### 3. 10 फीट के रावण के पुतले की कीमत कितनी होती है?
10 फीट के रावण के पुतले की कीमत लगभग 10 हजार रुपये होती है, जबकि बड़े पुतले 13 हजार रुपये या उससे अधिक में बिकते हैं।

### 4. पुतले मुख्य रूप से किन चीजों से बनाए जाते हैं?
पुतले बनाने के लिए बांस, कागज और अन्य जरूरी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।

### 5. कारीगर कहां रहते हैं?
ये कारीगर परिवार सड़क किनारे बनी झुग्गी-झोपड़ियों में निवास करते हैं।

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