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  "title": "विदेश जाने के बजाय हरियाणा में रुके साहिल सपरा, लाखों का पैकेज छोड़कर शुरू की सस्ती दवा और मुफ्त किताबों की सेवा",
  "summary": "मल्टीनेशनल कंपनी में न्यूट्रीशन ऑफिसर रहे 34 वर्षीय साहिल सपरा ने कॉर्पोरेट करियर त्यागकर हरियाणा में जरूरतमंदों के लिए लागत मूल्य पर दवाइयां और छात्रों के लिए ओपन बुक बैंक शुरू किया है।",
  "content": "जहां आज अधिकांश युवा भारी वेतन और विदेश में बसने के सपने देखते हैं, वहीं हरियाणा के 34 वर्षीय साहिल सपरा ने एक बिल्कुल अलग राह चुनकर समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया है। किसान पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले साहिल के परिवार के कई सदस्य विदेशों में अच्छी नौकरियों पर पदस्थ हैं और एनआरआई हैं। उनके भाई कनाडा सहित अन्य देशों में कार्यरत हैं, जिसके चलते साहिल के सामने भी विदेश जाकर आकर्षक करियर बनाने का पूरा विकल्प मौजूद था। इसके बावजूद उन्होंने भारत में ही रहकर जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों की मदद करने का फैसला लिया।\n\nमल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ सेवा की राह\nमूल रूप से फतेहाबाद जिले के टोहाना निवासी साहिल सपरा ने फार्मेसी की पढ़ाई पूरी की थी। अपनी उच्च शिक्षा के दम पर उन्होंने नेस्टले जैसी नामी मल्टीनेशनल कंपनी में न्यूट्रीशन ऑफिसर के पद पर काम किया। इस नौकरी में उन्हें लाखों रुपये का वेतन और शानदार कॉर्पोरेट जीवन मिल रहा था। हालांकि, उनके मन में हमेशा से समाज के वंचित तबके के लिए कुछ सार्थक करने की तीव्र इच्छा बनी हुई थी। अंततः उन्होंने साल 2019 में अपनी लाखों रुपये की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह जनकल्याण के कार्यों में उतर गए। वह अपनी निजी कमाई और पारिवारिक संपत्ति से मिलने वाली आय को पूरी तरह इन सामाजिक पहलों के संचालन में लगा रहे हैं।\n\nतेरा तेरा फाउंडेशन से लागत मूल्य पर दवाइयां\nसाल 2019 में समाज सेवा की शुरुआत करते हुए साहिल ने 'तेरा तेरा फाउंडेशन' की नींव रखी। इस संस्था के जरिए उन्होंने विभिन्न शहरों में 'रेट टू रेट' मेडिकल सेवा शुरू की, जिसका मूल उद्देश्य मरीजों तक न्यूनतम मूल्य पर आवश्यक दवाइयां पहुंचाना है। इस पहल की खासियत यह है कि जो दवा बाजार में सामान्य तौर पर ढाई सौ रुपये की मिलती है, वह यहां जरूरतमंदों को महज 30 रुपये के आसपास उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में यह सस्ती मेडिकल सेवा अंबाला, करनाल, सिरसा और फतेहाबाद समेत हरियाणा के कई प्रमुख जिलों में संचालित हो रही है। इस सेवा का दायरा बढ़ाते हुए अब कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में भी नए केंद्र शुरू करने की तैयारी चल रही है। साहिल का स्पष्ट कहना है कि किसी भी व्यक्ति के लिए गंभीर बीमारी के समय दवाइयों की ऊंची कीमत इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए।\n\nअंबाला में ओपन बुक बैंक और मुफ्त स्टेशनरी\nसस्ती दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद साहिल ने शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया है। अंबाला के सेक्टर-10 स्थित गुरुद्वारा साहिब में चल रहे औषधि केंद्र के साथ उन्होंने जरूरतमंद बच्चों के लिए एक 'ओपन बुक बैंक' स्थापित किया है। इस बुक बैंक में दो अलग-अलग अलमारियां रखी गई हैं, जिनमें से एक में पाठ्यक्रम से जुड़ी स्कूली किताबें और दूसरी में धार्मिक पुस्तकें व्यवस्थित की गई हैं। यह व्यवस्था किसी भी तरह की औपचारिक सदस्यता या फीस से पूरी तरह मुक्त है। कोई भी बच्चा यहां आकर अपनी जरूरत की किताब ले जा सकता है और अपनी कक्षा पूरी होने के बाद उसे वापस रखकर अगली कक्षा की पुस्तकें प्राप्त कर सकता है। जिन परिवारों के पास हर साल नई किताबें खरीदने का बजट नहीं होता, उनके लिए यह व्यवस्था एक बड़ा संबल बन रही है। इसके साथ ही साहिल ने छात्रों के लिए मुफ्त कॉपियों और पेन की भी व्यवस्था की है ताकि धन की कमी किसी की पढ़ाई न रोक सके।\n\nयुवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का आह्वान\nसाहिल इस पूरे सेवा कार्य को गुरु नानक देव जी का आशीर्वाद और संगत का निरंतर सहयोग मानते हैं। उनका कहना है कि इस कठिन राह पर उन्हें अपने परिवार और स्थानीय संगत दोनों का पूरा समर्थन मिला है। वर्तमान सामाजिक परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए साहिल रेखांकित करते हैं कि आज समाज में आपसी विवाद और नशे जैसी गंभीर समस्याएं युवाओं को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में युवाओं को गलत रास्तों से हटाकर फिटनेस, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना बेहद जरूरी है। उनका युवाओं को स्पष्ट संदेश है कि वे खुद पहल करें और अपनी कमाई या कीमती समय में से जितना भी संभव हो सके, समाज के उत्थान के लिए अवश्य योगदान दें।\n\nइसका आप पर असर\nहरियाणा के जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले भारी खर्च से सीधी राहत मिल रही है और बच्चों की स्कूली पढ़ाई का वित्तीय बोझ भी घट रहा है।\n\n• हरियाणा में: आर्थिक तंगी झेल रहे मरीजों को गंभीर बीमारियों की जरूरी दवाइयां बाजार मूल्य की तुलना में 85 प्रतिशत से भी अधिक छूट पर मिल रही हैं। अंबाला, करनाल, सिरसा और फतेहाबाद के निवासी इन केंद्रों पर जाकर नियमित इलाज का खर्च कई गुना कम कर सकते हैं।\n• स्कूली छात्रों के लिए: गरीब परिवारों के बच्चों को बिना किसी सदस्यता शुल्क के हर साल कक्षा की किताबें और मुफ्त स्टेशनरी उपलब्ध हो रही है। अंबाला सेक्टर-10 स्थित केंद्र से छात्र अपनी कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद किताबें बदलकर अगली कक्षा की पुस्तकें ले सकते हैं।\n• आगामी विस्तार: कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जिलों में भी जल्द ही नए किफायती चिकित्सा केंद्र शुरू किए जाने की तैयारी है। इन दोनों जिलों के स्थानीय निवासियों को भी जल्द ही अपने ही शहर में लागत मूल्य पर दवाइयों की सुविधा मिलेगी।\n• नागरिक सहभागिता: यह पहल आम नागरिकों और युवाओं को अपने संसाधनों से स्थानीय स्तर पर जनसेवा करने का एक व्यावहारिक मॉडल प्रदान करती है। लोग अपनी पुरानी उपयोगी पुस्तकें दान करके या समय देकर इस ओपन बुक बैंक नेटवर्क को मजबूत बना सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकॉर्पोरेट सफलता और विदेश में बसने के अवसरों के बावजूद समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा की बुनियादी विषमताओं को दूर करने की व्यक्तिगत प्रेरणा ने इस जमीनी पहल को जन्म दिया।\n\n• व्यक्तिगत संकल्प: फार्मास्युटिकल पृष्ठभूमि होने के कारण साहिल ने दवाइयों के खुदरा मूल्य और वास्तविक लागत के भारी अंतर को करीब से देखा था। इसी समझ और समाज सेवा की भावना ने उन्हें 2019 में नेस्टले की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक सामाजिक कार्य में उतरने के लिए प्रेरित किया।\n• पारिवारिक व आध्यात्मिक संबल: विदेश में बसे एनआरआई परिवार के सहयोग और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी निजी संपत्ति की आय को सेवा में लगाने का निर्णय लिया। इस कारण उन्हें किसी बाहरी व्यावसायिक निवेश के बिना स्ववित्तपोषित ढंग से 'तेरा तेरा फाउंडेशन' शुरू करने में मदद मिली।\n• शिक्षा में आर्थिक बाधाएं: दवा वितरण के दौरान गरीब परिवारों में बच्चों की पढ़ाई छूटने की समस्या सामने आने पर ओपन बुक बैंक की स्थापना की गई। हर साल नई किताबें और कॉपियां खरीदने में असमर्थ परिवारों के बच्चों को ड्रॉपआउट से बचाने के लिए अंबाला में यह मॉडल तैयार किया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. साहिल सपरा कौन हैं और उन्होंने कौन सी नौकरी छोड़ी थी?\nसाहिल सपरा हरियाणा के फतेहाबाद जिले के टोहाना के रहने वाले हैं, जिन्होंने साल 2019 में नेस्टले कंपनी में न्यूट्रीशन ऑफिसर की लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर समाज सेवा शुरू की।\n\n2. तेरा तेरा फाउंडेशन के मेडिकल केंद्रों पर दवाइयां किस दर पर मिलती हैं?\nइस संस्था के केंद्रों पर दवाइयां लागत मूल्य यानी रेट टू रेट दी जाती हैं, उदाहरण के तौर पर बाजार में 250 रुपये की मिलने वाली दवा यहां लगभग 30 रुपये में मिल जाती है।\n\n3. वर्तमान में यह सस्ती दवा सेवा हरियाणा के किन जिलों में चल रही है?\nयह सुविधा वर्तमान में अंबाला, करनाल, सिरसा और फतेहाबाद में संचालित हो रही है, जबकि कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में इसे जल्द शुरू करने की तैयारी है।\n\n4. अंबाला में ओपन बुक बैंक की क्या व्यवस्था है?\nअंबाला सेक्टर-10 गुरुद्वारा साहिब में संचालित इस बुक बैंक में बिना किसी शुल्क या सदस्यता के बच्चे स्कूली और धार्मिक किताबें ले सकते हैं तथा मुफ्त कॉपी-पेन भी प्राप्त कर सकते हैं।\n\n5. साहिल सपरा अपनी समाज सेवा का खर्च कैसे उठाते हैं?\nसाहिल अपनी खुद की कमाई और पारिवारिक संपत्ति से होने वाली नियमित आय का उपयोग इन सभी सामाजिक व जनकल्याणकारी सेवाओं को चलाने में करते हैं।\n\n6. साहिल सपरा ने युवाओं के लिए क्या संदेश दिया है?\nउन्होंने युवाओं से नशे और विवादों से दूर रहकर फिटनेस, शिक्षा और समाज सेवा से जुड़ने तथा अपनी कमाई व समय का कुछ हिस्सा समाज को देने का आग्रह किया है।\n\nप्रेरणा और सबक\nसाहिल सपरा की जीवन यात्रा दिखाती है कि व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं और धन-दौलत से परे हटकर समाज के लिए किया गया समर्पण ही जीवन को वास्तविक सार्थकता देता है।\n\n• पद और धन से बड़ा सेवा भाव: लाखों रुपये का कॉर्पोरेट वेतन और विदेश का सुरक्षित भविष्य छोड़कर अपने देश में जरूरतमंदों की मदद का चुनाव करना यह सिखाता है कि सच्ची संतुष्टि त्याग और समर्पण से मिलती है।\n• सहानुभूति को ठोस समाधान में बदलना: केवल समस्याओं की चर्चा करने के बजाय उन्होंने फार्मेसी के अपने ज्ञान का उपयोग कर ढाई सौ रुपये की दवा को 30 रुपये में उपलब्ध कराने की व्यावहारिक प्रणाली बनाई।\n• अधिकार नहीं, सहभागिता आधारित मॉडल: बिना किसी शुल्क या औपचारिकता के चलने वाला ओपन बुक बैंक यह संदेश देता है कि शिक्षा को जटिल नियमों से मुक्त रखकर ही हर बच्चे तक पहुंचाया जा सकता है।\n• युवाओं को सकारात्मक दिशा: नशे और विवादों से दूर रहकर अपनी ऊर्जा, समय और आय को समाज निर्माण में लगाना ही युवा पीढ़ी के लिए प्रगति का सही मार्ग है।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-10-06",
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