विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए दिवाली पर अपनाएं ज्योतिषीय उपाय यदि उम्र बढ़ने के बाद भी रिश्ते तय नहीं हो पा रहे हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दिवाली और अमावस्या की पावन तिथि पर किए गए कुछ विशेष उपाय विवाह के योग प्रशस्त कर सकते हैं। संतान की आयु बढ़ने के बावजूद जब विवाह के रिश्ते पक्के नहीं हो पाते, तब परिजनों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। कई परिवारों में लगातार रिश्ते देखे जाते हैं, बातचीत आगे भी बढ़ती है, परंतु अंतिम चरण में आकर बात बिगड़ जाती है। इस प्रकार की अप्रत्याशित देरी और बाधाओं के निवारण हेतु ज्योतिष परंपरा में विशेष पर्वों पर अनुष्ठान और उपाय करने का विधान बताया गया है। विवाह में ग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव वैवाहिक जीवन और रिश्ते तय होने में जन्म कुंडली के ग्रहों की दशा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। फरीदाबाद के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, विवाह के लिए जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह तथा देवगुरु बृहस्पति का मजबूत और अनुकूल होना आवश्यक होता है। इसके साथ ही कुंडली का सातवां भाव वैवाहिक संबंधों का मुख्य केंद्र होता है। जब इन ग्रहों की स्थिति कमजोर अथवा प्रतिकूल होती है, तो युवक-युवतियों के विवाह में अनावश्यक विलंब और अड़चनें उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसे ग्रह दोषों के निवारण के लिए दिवाली जैसे महापर्व का अवसर बेहद फलदायी माना जाता है। दिवाली पूजन में महालक्ष्मी को अर्पित करें विशेष भोग दिवाली का पावन पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। अमावस्या की रात माता लक्ष्मी की विधिवत आराधना की जाती है। इस दिन पूजन के समय देवी लक्ष्मी को खीर अथवा किसी भी शुद्ध सफेद मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। खीर का प्रसाद तैयार करते समय उसमें दो छोटी हरी इलायची अवश्य डालनी चाहिए। भोग अर्पित करने के उपरांत श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें कि बेटे अथवा बेटी के विवाह में जो भी अड़चनें आ रही हैं, वे शीघ्र समाप्त हों और शुभ विवाह तय हो जाए। दिव्यांगजन की सेवा और सुगंधित वस्त्रों का दान विवाह के योग को सुदृढ़ करने के लिए दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। दिवाली के दिन अथवा शुक्रवार के पावन अवसर पर यदि कोई जरूरतमंद दिव्यांगजन मिल जाए, तो उसे आदरपूर्वक सफेद मिठाई खिलानी चाहिए। इसके अतिरिक्त उस व्यक्ति को नए वस्त्र अथवा उपयोगी वस्तुएं जैसे कंबल, कमीज, टी-शर्ट, पैंट या चप्पल खरीदकर दान करनी चाहिए। इस उपाय में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि दान देने से पूर्व वस्त्रों पर थोड़ा सा सुगंधित इत्र छिड़क देना चाहिए। तत्पश्चात अपने बच्चों के शीघ्र विवाह की मंगलकामना करनी चाहिए। गौ सेवा और देवगुरु बृहस्पति की आराधना गौ माता की सेवा को सनातन परंपरा में सभी दोषों को दूर करने वाला माना गया है। दिवाली के शुभ अवसर पर आटे में गुड़ अथवा चीनी मिलाकर मीठी रोटी तैयार करें और उसे गौ माता को खिलाएं। रोटी खिलाते समय हाथ जोड़कर अपनी संतान के शीघ्र वैवाहिक बंधन में बंधने की प्रार्थना करें। यह उपाय अत्यंत सरल और घर के सदस्यों द्वारा सहजता से किया जाने वाला है। इसके अलावा विवाह में देवगुरु बृहस्पति की भूमिका सर्वाधिक निर्णायक होती है। गुरु ग्रह की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए गुरुवार के दिन भगवान बृहस्पति की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन केले के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें, तने पर हल्दी का तिलक लगाएं और कलावा बांधकर विधिवत पूजा करें। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है और विवाह के शुभ संयोग बनने लगते हैं। इसका आप पर असर संतान के विवाह में लगातार आ रही रुकावटों से परेशान अभिभावकों के लिए यह जानकारी व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करती है। • मानसिक राहत: विवाह में हो रहे अनावश्यक विलंब से चिंतित परिजनों को धार्मिक और पारंपरिक उपायों के माध्यम से मानसिक संबल मिलता है। इससे अनिश्चितता के दौर में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने में सहायता प्राप्त होती है। • दिवाली पर विशेष अनुष्ठान: अमावस्या की रात्रि को देवी लक्ष्मी को इलायची युक्त खीर या सफेद मिष्ठान्न का भोग लगाना सरल है। इसे घर का कोई भी सदस्य बिना किसी जटिल कर्मकांड के अपने स्तर पर संपन्न कर सकता है। • दान की सामाजिक उपयोगिता: जरूरतमंद दिव्यांग व्यक्तियों को वस्त्र, जूते-चप्पल और मिष्ठान्न दान करने का विधान है। यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज के वंचित वर्ग की प्रत्यक्ष मदद सुनिश्चित करता है। • दैनिक दिनचर्या में सेवा: मीठी रोटी बनाकर गाय को खिलाना और गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करना सहज अभ्यास हैं। इन्हें परिवार की नियमित दिनचर्या में आसानी से शामिल किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विवाह में विलंब तब होता है जब संबंधित ग्रह कमजोर हों अथवा सातवां भाव पीड़ित हो, जिसके निवारण के लिए विशेष तिथियों पर अनुष्ठान किए जाते हैं। • ग्रहों की प्रतिकूल दशा: ज्योतिष शास्त्र में विवाह और वैवाहिक सुख के लिए देवगुरु बृहस्पति और शुक्र ग्रह को प्राथमिक कारक माना गया है। यदि जन्म कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति कमजोर अथवा प्रतिकूल हो, तो रिश्ते तय होने में लगातार बाधाएं उत्पन्न होती हैं। • सातवें भाव का प्रभाव: जन्म पत्रिका का सातवां स्थान सीधे तौर पर विवाह और जीवनसाथी से जुड़ा होता है। जब इस भाव पर नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, तो बातचीत अंतिम दौर में पहुंचकर भी टूट जाती है। • पर्व और तिथि का महत्व: दिवाली की रात्रि अमावस्या तिथि में आती है, जिसे तांत्रिक और सात्विक दोनों अनुष्ठानों में अत्यंत ऊर्जावान माना गया है। इस कालखंड में की गई देवी लक्ष्मी की उपासना और दान-पुण्य से ग्रह दोषों की तीव्रता कम होने की मान्यता है। सवाल-जवाब 1. विवाह के लिए जन्म कुंडली में कौन से ग्रह महत्वपूर्ण माने जाते हैं? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह के लिए शुक्र ग्रह और देवगुरु बृहस्पति की स्थिति मजबूत होना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 2. दिवाली पूजन के दौरान माता लक्ष्मी को क्या भोग लगाना चाहिए? दिवाली की रात माता लक्ष्मी को दो छोटी हरी इलायची डाली हुई खीर अथवा सफेद मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। 3. दिव्यांगजन को दान देते समय किस विशेष बात का ध्यान रखना चाहिए? नए वस्त्र दान करने से पूर्व उन पर थोड़ा सा इत्र छिड़कना चाहिए और साथ में सफेद मिठाई खिलानी चाहिए। 4. देवगुरु बृहस्पति को अनुकूल बनाने के लिए क्या उपाय बताया गया है? गुरुवार के दिन केले के पेड़ पर जल अर्पित करना चाहिए, हल्दी का तिलक लगाकर कलावा बांधना चाहिए और विधिवत पूजन करना चाहिए। 5. गौ माता को दिवाली के दिन क्या खिलाने का सुझाव दिया गया है? दिवाली के दिन आटे में गुड़ अथवा चीनी मिलाकर मीठी रोटी तैयार करनी चाहिए और उसे गौ माता को खिलाना चाहिए। https://trendkia.com/haryana/vivaha-men-a-rahi-arachanon-ko-dura-karane-ke-lie-diwali-para-apanaen-jyotishiya-upaya-54434 TrendKia — Har trend, sabse pehle.